अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*भोजपुरी फिल्म राजा बाबू के बाद मध्यप्रदेश के पुलिस अधिकारी राजा बाबू सिंह की चर्चा की धूम*

Share

-सुसंस्कृति परिहार 

एक दौर था शायद 1994 का जब भोजपुरी फिल्म राजा बाबू की धूम रही। इस वक्त मध्यप्रदेश के पुलिस अधिकारी राजा बाबू सिंहकी चर्चा की धूम मची हुई है।वे 1994 बैच के आईपीएस अफसर हैं। जहां  भी रहे चर्चाओं में रहे।मध्यप्रदेश के साथ-साथ दिल्ली बीएसएफ मुख्यालय, जम्मू-कश्मीर में बतौर आईजी बीएसएफ और आईटीबीपी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।एडीजी ग्वालियर जोन के पद पर रहते हुए इन्होंने हजारों भागवत गीता की प्रतियां बांटी थीं।इसके साथ ही बीएसएफ आईजी कश्मीर रहते हुए राजा बाबू सिंह की श्रीनगर शहर में 20 किमी की साइकिल तिरंगा रैली चर्चा का विषय रही थी।इतना ही नहीं राजा बाबू सिंह भी एक ईंट लेकर दिसंबर 1992 में अयोध्या गए। उस समय उन्होंने टेंट में विराजमान रामलला के दर्शन कर पूजित ईंट समर्पित कर राम मंदिर बनने की प्रार्थना की थी।वे जब बांदा में बीएसएफ के आईजी, ट्रेनिंग में थे।तब अपने पैतृक गांव की 25 बीघे जमीन को जंगल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। उन्होंने यहां हजारों की तादाद में पेड़ लगाए हैं।एक पेड़ मां के नाम की जगह पूरा जंगल खड़ा कर दिया।

 आजकल मध्यप्रदेश पुलिस कर्मियों के एडीजी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह ने पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों में कानून व्यवस्था, शस्त्र चलाने प्रशिक्षण के साथ ही रामचरित मानस के दोहे और चौपाईयों के वाचन करवाने का निर्देश दिया है। जो सुर्खियों में है। यह संदेश उन्होंने वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए दिया।वे 4000 ने पुलिस आरक्षकों के प्रशिक्षण की शुरुआत को लेकर पीटीएस के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों की बैठक में दिया।

बताया जा रहा है कि यह सीख उन्हें इस कारण देनी पड़ी क्योंकि बड़ी संख्या में नए आरक्षकों ने पुलिस मुख्यालय में आवेदन कर घर के पास के प्रशिक्षण केन्द्र में जाने की अनुमति चाही थी। उन्होंने नए रंगरुटों को संदेश दिया कि श्रीराम ने 14 वर्ष का वनवास काटा था। प्रशिक्षुओं को उनसे सीखना चाहिए। एक भेंट में उन्होंने ये बताया है जवानों को अभी 9 महीने ट्रेनिंग करनी है और उसके बाद उन्हें अपने जिले से बाहर ज्वाईन भी करना है, लेकिन वो अभी से होम सिकनेस का शिकार हो रहे हैं, इसलिए उन्हें भगवान राम से सीखने लेने की सलाह दी क्योंकि भगवान राम 14 साल वनवास में रहे, उसी दौरान उन्होंने जंगल में जीवित रहने की कला सीखी, प्रकृति प्रेम सीखा, निषाद और शबरी के साथ सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाया, एक अंजान और नए वातावरण में वह ढले और युद्ध की रणनीति बनाकर सीमित संसाधनों के साथ रावण को मारा इसलिए मैंने कहा कि आज के जमाने में भी जवानों को नए कानूनों और नए किस्म के अपराध से निपटना है तो उन्हें हर विधा में पारंगत होना होगा इसके लिए रामचरितमानस का पाठ करना चाहिए। 

राम उनके आदर्श हैं। पुलिस कर्मी रामचरित मानस नहीं पढ़ेंगे तो अपने आदर्शों के बारे में कहां से सीखेंगे।किसी तरह के विरोध के प्रश्न पर उन्होंने कहा-कोई क्यों विरोध करेगा। इसमें बुराई क्या है। प्रशिक्षण केन्द्रों में रामचरित मानस का सामूहिक पाठ होना चाहिए।हां, दूसरे मत के लोगों को इसमें सम्मिलित होने बाध्य ना किया जाए। प्रत्येक प्रशिक्षण केन्द्र में यह अभ्यास स्वैच्छिक रहेगा।

हालांकि उन्होंने जिस तरह से अपनी बात रखी है वह फ़िज़ूल है। यदि सिर्फ  रामचरित मानस का सामूहिक पाठ होगा तो आपत्तिजनक निश्चित होगा ही क्योंकि वहां  तो सभी धर्मों के सिपाही होंगे।अच्छा होता कि सर्व धर्म समभाव की बात होती जो पुलिस और सेना रिहायशी क्षेत्रों में देखी जाती है। जहां सभी धर्मों में आदर्श और इंसानियत की सीख दी जाती है। बहरहाल आज वक्त के अनुरूप उनका रवैया उचित कहा जा सकता है।

लेकिन राजाबाबू सिंह  लूप लाइन में पड़े हुए।भाजपा के कार्यक्रमों को जिस शिद्दत और समर्पण से वे कर रहे हैं उनकी उपेक्षा कर भाजपा सरकार अपने परम अनुयायी धर्मप्रवण पुलिस अधिकारी को नाराज़ कर रही है। उनकी निष्ठा और राम के प्रति इस हद तक बढ़ चुकी है कि वे रामचरित मानस के ज़रिए राम भक्त पुलिस  तैयार करने में लग गए। यह गुरु मंत्र प्रशिक्षुओं को बांटकर पुलिस में राम के आदर्श को प्रतिष्ठित करने में लगे हैं जो महानतम कर्म है ।इसे भाजपा को संज्ञान में लेते हुए, उन्हें  उनकी इच्छा के मुताबिक पद दे देना चाहिए।

 हालांकि अभी हिन्दू पुलिस कर्मी राम, हनुमान,शिव और कृष्ण भक्त तो होता ही है। परन्तु इनमें बहुतायत पुलिस कर्मी अधिकारी राम के कम बजरंगबली के ज्यादा भक्त होते हैं।इससे उन्हें बाहर निकालने का यह अद्भुत प्रयास है।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में वैसे भी राम के नाम की हलचल पिछले दिनों देखी गई जब भोपाल के अशोका गार्डन के नाम को राम के नाम करने का प्रस्ताव सामने आया है।आज राम के प्रति भक्ति भाव प्रदर्शित करने की होड़ लगी हुई।ऐसे में भला एक पुलिस अधिकारी का नंबर जल्दी कैसे लग सकता है। विश्वास है इस भक्ति भाव का प्रतिफल उन्हें देर सबेर ज़रूर  मिलेगा।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें