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*वैश्विक फलक पर भारत की वस्तु-स्थिति*

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 ~ कुमार चैतन्य

      भारत नॉमिनल GDP के हिसाब से विश्व का 5वां सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था है, जिसकी अर्थव्यवस्था लगभग ₹4.27 ट्रिलियन (लगभग $4 ट्रिलियन USD) है।

     “अटलांटिक काउंसिल” के अनुसार, भारत का वार्षिक विकास दर लगभग 7% है, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ है, और इसे 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर माना जा रहा है।

    भारत का MSCI Emerging Markets Index में पहला स्थान है, और यह ICT सेवा निर्यात में दुनिया में सबसे अग्रणी है।

*प्रमुख पहलें :*

“Make in India” कार्यक्रम (2014 से शुरू), जिसका उद्देश्य था विनिर्माण क्षेत्र को 25% GDP तक ले जाना, दसियों करोड़ डॉलर का FDI आकर्षित करना और रोजगार सृजन करना।

    सुनियोजित आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) पहल, जिससे भारत ने क्लीन टेक्नोलॉजी, रक्षा निर्माण, और ऊर्जा-क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अभियान शुरू किया है।

*वैश्विक कूटनीति और भू‑राजनीतिक भूमिका*

      भारत निर्वपक्षीय आंदोलन (Non-Aligned Movement) का संस्थापक सदस्य रहा है और हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश करता आया है।

    यूक्रेन संकट (2022) के बाद रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध बढ़े, पर भारत की रूस से ऊर्जा आयात जारी रहा; इससे भारत का अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष में अपनी भूमिका बनाए रखने में बढ़ावा मिला, और इसे एक प्रभावी मध्यस्थ माना जाने लगा।

    भारत अब Global South (वैश्विक दक्षिण) का महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ता बन चुका है, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ उठाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है  ।

*बहुपक्षीय मंचों में भूमिका :*

भारत BRICS में एक मौलिक सदस्य और रणनीतिक खिलाड़ी बना हुआ है।

    Quad (Quadrilateral Security Dialogue) में भी भारत प्रमुख सदस्य है, जहाँ भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया द्वारा समान रूप से हिंद‑महासागरीय क्षेत्र में “मुक्त और खुले” आदर्शन मूल्य साझा किए जाते हैं; जनवरी 2025 की बैठक में इस बात पर जोर मिला कि कोरियाई प्रायद्वीप सहित क्षेत्र में किसी भी बल प्रयोग द्वारा मौजूदा स्थिति को बदलने का विरोध करना चाहिए।

*क्षेत्रीय पहल :*

     Act East नीति के माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया राष्ट्रों के साथ भारत की आर्थिक और रणनीतिक हिस्सेदारी बढ़ी है; यह भारत की क्षेत्रीय दबदबे की दिशा में सक्रिय कदम है।

     मध्‍य- पूर्व और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका भी सुदृढ़ हो रही है—मालदीव में मोदी का दौरा, विकास ऋण और मुक्त व्यापार समझौतों के प्रस्ताव से क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ा है  ।

*सैन्य और रक्षात्मक क्षमताएं :*

    भारत की सशस्त्र सेनाएं अब एक ब्लू-वाटर नेवी बनने की ओर बढ़ रही हैं; जैसे INS Vikrant विमानवाहक पोत, INS Arihant परमाणु पनडुब्बी, Scorpène‑class सबमरीन, Talwar और Shivalik फ्रिगेट, और ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल से लैस युद्धपोत वाहन।

    रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भारत सक्रिय हुआ है—रक्षा निर्यात USD 3.5 बिलियन से बढ़ाकर 2029 तक USD 6 बिलियन तक पहुंचने की योजना है; इसमें ब्लॉबल दक्षिण में सस्ते ऋण सुविधा और हथियार बिक्री पर जोर है।

*तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और नवाचार*

    भारत वैश्विक अनुसंधान उत्पादन के शीर्ष 5 देशों में है; केंद्रीय वित्त पोषित संस्थान (Centrally Funded Institutions) अकेले पूरे भारत की अनुसंधान आउटपुट का लगभग 67% योगदान देते हैं (2001–2020)।

     विज्ञान-एंड-इंजीनियरिंग शोध में भारत को NSF द्वारा तीसरे स्थान पर, और Elsevier/Clarivate द्वारा पांचवें या नौवें स्थान पर रैंक किया गया है—आंकड़ों की गणना विधि पर निर्भर करता है।

    साइबर सुरक्षा क्षेत्र को लेकर चुनौतियाँ हैं—रियल-टाइम खतरा पहचान और जवाबदारी में कमी के बावजूद, सुधार के प्रयास चल रहे हैं।

     Brand Finance की Global Soft Power Index 2025 के अनुसार, भारत नरम शक्ति (Soft Power) में अपेक्षाकृत कमजोर तरीके से आगे नहीं बढ़ पाया; इसकी विश्वसनीयता और पहचान अभी भी विकसित हो रही है, विशेषकर भारत में जनसंख्या के प्रभावकारी जोड़ के बावजूद  ।

     भारत की फिल्म, संस्कृति, कला, योग, और सूचना तकनीक के माध्यम से वह वैश्विक स्तर पर अपनी सांस्कृतिक पहचान बना रहा है; हालांकि अभी भी यह ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका जैसे देशों से पीछे है।

     *आधारभूत चुनौतियाँ :*    

अभी भी भारत की Ease of Doing Business (63वां), Corruption Perception Index (85वां), Competitiveness (40वां) रैंकिंग गिरती कारक हैं, जो शासन, पारदर्शिता, और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हैं।

    भारत की आर्थिक असमानता, गरीब स्वास्थ्य संकेतक, मानव विकास सूचकांक में सुधार की आवश्यकता जैसी घरेलू चुनौतियाँ भी इसके क्षमता को सीमित करती हैं।

      भारत आज एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति की राह पर है। इसकी भूमिका सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि विश्व स्तर पर बढ़ रही है—चाहे वह आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा रणनीति, रक्षा उत्पादन, रुझानों या वैश्विक दक्षिण नेतृत्व में हो। हालांकि, आंतरिक सुधार, पड़ोसी संबंधों में सामंजस्य और सॉफ्ट पावर को अधिक असरदार बनाने की आवश्यकता है। वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की रणनीति स्वायत्तता, आत्मनिर्भरता, और संतुलित कूटनीति पर आधारित दिखाई देती है।

Ramswaroop Mantri

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