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 *सशक्त होते राहुल और सुरक्षा की चिंता में सरकार और भक्त*

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-सुसंस्कृति परिहार 

इस वक्त बहुत दयनीय स्थिति में भारत सरकार पहुंच चुकी है। जीएसटी के लाभ का घनघोर शोर चहुंओर व्याप्त है। उपभोक्ता बता रहे हैं कि 22सितंबर का भाषण भी लगता है झूठा है कहा गया कल सुबह से सभी वस्तुएं के टैक्स कम कर दिए जाएंगे। लेकिन दामों में परिवर्तन नहीं हुआ विक्रेता कह रहा है जब तक पुराना माल खत्म नहीं हो जाता।दाम यही रहेंगे।यानि उनके त्योहार फीके रहेंगे। मोदीजी के शब्दों में कहें तो मीठा विहीन रह जाएंगे। कहने का मतलब ये कि जनता को यह झूठ कहा गया कि कल से आपके अच्छे दिन आ जाएंगे। ज़रुरत इस बात की है कि सरकार विक्रेताओं की ख़बर ले उन्हें सख़्त आदेश दिलवाए। क्यों कि मोदी के सच को भी लोग झूठ मान रहे हैं।भक्त चिंतित ना हो मोदीजी ने प्रतिपक्ष नेता राहुल की बात मान ली है सचमुच उन्होंने वस्तु पर लगाकर 28 से18 फीसदी कर दिया है।

यह सब मोदी सरकार को मज़बूरी करना पड़ा है क्योंकि राहुल गांधी का कद इतना बढ़ चुका है कि उसके मुकाबले मोदीजी अब कुछ भी नहीं है। इसलिए जनता को खुश करने का एक मौका दे रहे हैं,शायद कयामत के दिन कट जाएं। लेकिन इनका वक्त बदलना आसान नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग जो इनके हाथ की कठपुतली है और जीत की गारंटी था उसकी सारी कलई खुलती जा रही है जो यह बता रही है कि पिछले वर्षों में हुए राज्यों के चुनाव और आमचुनाव दोनों भाजपा ने नहीं जीते हैं चुनाव आयोग ने जिताएं हैं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक के आलंद और महाराष्ट्र के राजूरा विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने और जोड़े जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह काम किसी “सेंट्रलाइज्ड सॉफ़्टवेयर” के ज़रिए हो रहा है।

 चुनाव आयोग ने इन आरोपों को ग़लत और बेबुनियाद कहकर सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन महज़ 24 घंटे बाद, दूसरे  दिन को जारी नोट में आयोग ने कुछ ऐसे तथ्य स्वीकार कर लिए जिनसे राहुल गांधी के आरोपों को मज़बूती मिलती दिखी। आयोग ने माना कि आलंद और राजूरा दोनों जगह एफआईआर दर्ज हुई है, क्योंकि यहाँ पर बड़ी संख्या में वोटरों की लिस्ट में गड़बड़ियों पर शक हुआ।

इधर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में ईवीएम हैकिंग को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. सीएम से राहुल गांधी की तरफ से लगाए जा रहे वोट चोरी और ईवीएम हैक को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा, 70 साल से वो ईवीएम हैक कर रहे थे तो कुछ नहीं हो रहा था। अब हमारी जीत पर वो सवाल उठा रहे हैं।रेखाजी को यह पता होना चाहिए कि साल 1982 में केरल राज्य के उत्तरी पारावुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में पहली बार EVM Machine का इस्तेमाल किया गया था इससे पहले मतदान ईवीएम से नहीं बैल्ट पेपर होता रहा है।

इन दोनों घटनाओं से यह साफ़ होता है कि ईवीएम और चुनाव आयोग की कारगुजारियों से भयंकर रूप से वोट चोरी हुई है।वहीं दंभ बिहार चुनाव में जीत का था जिसको राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा ने ना केवल बिहार में  छिन्न भिन्न किया बल्कि संपूर्ण देश के वोटर को जागरूक किया है जिसकी आग भाजपा के दिल में धधक रही है किंतु उसकी आंच अंधभक्तों को झुलसा रही है।

इसका असर भाजपा मंत्रीमंडल की साप्ताहिक बैठक पर भी पड़ा है वह नहीं हुई कहीं कोई मंत्री पोल खोल के बबाल पैदा ना कर दे।

इधर संविधान के रक्षक का कार्य करने वाले सुप्रीम कोर्ट ने भी भाजपा के चक्रव्यूह को तोड़ने में भी सक्रियता बरती है जिससे राष्ट्र पति और राज्यपाल भी घेरे में है। तमिलनाडु सरकार के पारित प्रस्तावों को राष्ट्रपति द्वारा  लंबी समयावधि तक रोके जाने में भाजपा की भूमिका का समर्थन महामहिम द्वारा करना अनुचित है।वे उसे रोककर उसे पुनः पास कर भेजने की प्रक्रिया में दखल दे रही है क्योंकि संविधान में यह उल्लेख है कि राष्ट्रपति यदि किसी विधेयक को वापस कर देता है तो उसे राज्य सरकार या केन्द्र सरकार जब दोबारा  पास कर भेजती है तो राष्ट्रपति हस्ताक्षर करने बाध्य हैं। इसलिए ये रास्ता अपनाया गया कि इसे सरकार  के दबाव में रोक कर रखे रहें।यह संविधान का घोर उल्लंघन तथा जनता के आदेश का अपमान है।

विदित हो कि जहां भाजपा सरकार नहीं है वहां कठपुतली राज्यपाल है वह भी राष्ट्रपति जैसा आचरण अपना रहे है जिससे जनहितकारी योजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं।

ये सब इस बात का संकेत है कि भाजपा सरकार ने अपने 12वर्षीय शासन में तमाम स्वतंत्र इकाईयों राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति चुनाव आयोग, राज्यपालों और तमाम जांच एजेंसियों को अपना गुलाम बना रखा है और जनहित की उपेक्षा की है।

इस मुश्किल दौर में आज सिर्फ़ एक निडर और साहसी आवाज़ प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी की गूंज रही है जिसने संविधान की रक्षार्थ लोकतांत्रिक शासन की समस्त इकाईयों का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रख दिया है।जिसे अवाम का भारी समर्थन मिल रहा है।

राहुल गांधी की दूरदर्शिता के कई उदाहरण देखने मिले हैं लेकिन उनका चौकीदार चोर का नारा आज अपनी सार्थकता बयान कर रहा। हर जगह चोरी और लूट,जुमलेबाजी और दहशत को लोगों ने समझा है इसीलिए  वोट चोर गद्दी छोड़ की आवाज़ बुलंद हुई है।चारों ओर मिल रहे अपार जनसमर्थन इस बात का सबूत है कि राहुल गांधी मज़बूत हुए हैं सरकार और अंधभक्ति में लीन लोग अपने लिए सुरक्षित जगह की तलाश में हैं।

Ramswaroop Mantri

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