*पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के पलटवार से पाकिस्तान में मची हाय तौबा*

*विजया पाठक,
भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को पाकिस्तान के संरक्षण में पले-बढ़े टीआरएफ के आतंकियों ने निर्दोष भारतीय पर्यटकों की निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटनाक्रम के बाद से ही पूरे देश में आक्रोश का माहौल था। यही कारण है कि देश का हर नागरिक इस निर्मम हत्या का बदला लेने के लिये उत्सुक था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मिलकर इस पूरे घटनाक्रम की बारीकियों को समझा और अंत में इस निर्णय पर पहुंचे कि यह घटना कहीं न कहीं भारत की तरफ से हुए सिक्योरिटी लैप्स के कारण हुआ है। हालांकि प्रधानमंत्री ने उन बहनों के सिंदूर और माताओं के बेटों की मौत का बदला लेने का निर्णय लिया जिसका परिणाम यह हुआ कि आज भारत पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने की कगार पर खड़ा हो गया है। भारतीय पर्यटकों के साथ हुई इस निर्मम और कायराना हत्या का न सिर्फ भारत ने कड़ा विरोध किया बल्कि विश्व के कई प्रमुख राष्ट्रों ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत के साथ खड़े होने पर सहमति दी।
*युद्ध के मुहाने पर भारत-पाकिस्तान*
पाकिस्तान सरकार और पाक सेना भारतीय सेना की जवाबी कार्यवाही से पूरी तरह से तिलमिला गई। यही कारण कि पाकिस्तान ने बगैर सोचे समझे भारतीय इलाकों में ऐसे क्षेत्रों को निशाना बनाने का प्रयास किया जहां आम नागरिक निवास करते हैं। जबकि देखा जाये तो भारत ने जवाबी कार्यवाही में 06-07 मई की दरमियानी रात को जो कार्रवाई की थी वह केवल उन आतंकी ठिकानों पर थी जहां यह आतंकियों को ट्रेनिंग मिलती है, इनके जीवन को भटकाव की तरफ लाया जाता है। लेकिन पाक ने एक बार फिर कायराना हरकत करते हुए भारत के सीमावर्ती इलाकों में गोलीबारी शुरू कर दी जिसके बाद देश में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
*सुरक्षा में चूक कैसे, इस पर विचार जरूरी*
आज पूरा विश्व इस बात से भलीभांति परिचित है कि पाकिस्तान जैसे कमजोर और गरीब देश के सामने भारत पहाड़ किसी चट्टान से कम नहीं है। भारत पाकिस्तान को उसके द्वारा की जा रही गोलीबारी का जवाब भी पूरी सटीकता के साथ दे रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर जम्मू कश्मीर के पहलगाम में सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। एक समय हुआ करता था जब वहां बड़ी संख्या में पुलिस और सैन्य बल तैनात हुआ करते थे। लेकिन अचानक से कैसे राज्य और केंद्र सरकार ने वहां से पुलिस और सैन्य बल को हटा दिया। आखिर सीमावर्ती इलाकों में भारत कैसे इतना बैफिक्र हो गया। इस बात पर हमको एक बार फिर विचार करना चाहिए। क्योंकि यह हमला भारत पर नहीं बल्कि भारत के मान, सम्मान और 140 करोड़ भारतीयों के स्वाभिमान पर हुआ था।
*370 के बाद बैफिक्र तो नहीं हुआ भारत*
गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के अनुसार भारत ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद इस बात को स्वीकार कर लिया था कि अब कोई आतंकी हमला होने की संभावना नहीं है। यही कारण है कि गृह मंत्रालय ने वहां से सीआईएसएफ और सेना के जवानों को वापस बुलाने का निर्णय लिया था। यही नहीं सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने यह फैसला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लिखे गये पत्र के जवाब में किया। अब्दुल्ला ने सरकार से कहा था कि यदि वह पहलगाम से सैन्य बल हटा लेगी तो यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा और लोगों को रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध होंगे। लेकिन किसको पता था कि अमित शाह द्वारा लिया गया यह निर्णय एक दिन शाह को ही भारी पड़ेगा और पहलगाम पर आतंकी हमला हो जायेगा।
*शाह की बड़ी बातें हुई निराधार साबित*
नाम न छापने की शर्त पर विपक्षी दल के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कई बार संसद में बड़े ही गुरूर के साथ इस बात को ताल ठोक-ठोक कर कह चुके थे कि मोदी सरकार में पुलवामा, उरी के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। जबकि यूपीए की सरकार में 26/11, संसद सहित पुणे ब्लास्ट जैसी कई आतंकी घटनाएं हुई हैं। ऐसे में पहलगाम हमला अमित शाह की बड़ी-बड़ी बातों को निराधार साबित कर चुका है। जाहिर है कि शाह को एक कठोर और गंभीर राजनेता के रूप में जाना जाता है।
*युद्ध किसी भी देश के लिये अच्छा नहीं*
विश्व में पिछले दो तीन सालों में लगातार अलग-अलग देशों के बीच आपसी खींचतान के चलते युद्ध जैसी स्थिति बनी है। हमने देखा है कि किस तरह से इजराइल और हमास के बीच में लगभग एक साल से अधिक समय तक युद्ध चला और इस युद्ध में न सिर्फ इजराइल बल्कि हमास को भी बड़ा नुकसान हुआ बड़ी जनहानि हुई है। यही नहीं रूस और यूक्रेन के बीच भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी थी। जहां लंबे समय तक युद्ध हुआ। इस तरह के युद्ध से किसी भी देश को फायदा नहीं होता है। युद्ध के कारण देश के विकास पर अवरोध उत्पन्न होता है और देश में विकास कार्य पूरी तरह ठप्प पड़ जाते है जिसके कारण आर्थिक के साथ जन सामान्य को भी बड़ा नुकसान होता है।
*ताकि फिर कोई ऐसी घटना न हो*
बतौर पत्रकार मैं यही भारत सरकार से निवेदन करती हूं कि यदि भारत के 140 करोड़ लोग बैफिक्र होकर अपने घरों में रह रहे हैं तो इसका सबसे बड़ा श्रेय भारत की सेना को जाता है। सीमा पर जब सेना के जवान तैनात होते हैं तो दुश्मन के होश उड़ जाते हैं। ऐसे में अब भारत सरकार को यह चाहिए कि वह अपने सीमावर्ती इलाकों को इस तरह से सुरक्षा से लैस करे कि दोबारा कोई 26/11, पुलवामा, संसद, उरी और पहलगाम जैसा आतंकी हमला न हो





