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13 डॉक्टर्स ने लगातार 27 घंटे में किए 36 पोस्टमार्टम,डॉक्टरों की भी रूह कांप गई

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इंदौर/भोपाल

इंदौर में बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में रामनवमी पर बावड़ी की छत धंसने से 36 लोगों की मौत हो गई। इतनी संख्या में एक साथ शवों के पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर भी सिहर गए। पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम को लीड कर रहे डॉ. पीएस ठाकुर ने बताया कि गुरुवार दोपहर 3 बजे से अगले दिन शुक्रवार सुबह के 9 बजे तक उनकी टीम बिना पलक झपकाए पोस्टमॉर्टम में लगी रही। टीम में 7 सीनियर डॉक्टर, 6 जूनियर डॉक्टर और 3 स्वीपर थे।

उन्होंने बताया कि वैसे तो हम रोजाना पोस्टमॉर्टम करते हैं, लेकिन रामनवमी का दिन और रात हमारी अब तक की जिंदगी का सबसे भयावह रही। जब लाशें आनी शुरू हुईं तो एक के बाद एक बढ़ती ही गईं। हर लाश के बाद हम सोच रहे थे कि ये उस हादसे में जान गंवाने वालों की आखिरी लाश होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिरी शव आज (शुक्रवार) दोपहर बाद पहुंचा। हमने अपनी जिंदगी में कभी एक साथ इतनी लाशों का पोस्टमॉर्टम नहीं किया है। एक साथ इतने शव देखकर हमारी रुह कांप गई है। डॉ. ठाकुर ने बताया कि जो लोग नीचे दबे थे उनमें से ज्यादातर की मौत पानी में डूबने से हुई है, जो बीच में फंसे थे, उनकी मौत दम घुटने से हुई।

हालांकि जब उनसे ऑफिशियल पीएम रिपोर्ट के बारे में कहा ताे डॉ ठाकुर का जवाब था कि वे पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पुलिस को दे देंगे। ये मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए मौत की वजह पर मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहूंगा।

7 सीनियर डॉक्टर, 6 जूनियर डॉक्टर और 3 स्वीपर डटे रहे

डॉक्टर ने बताया कि गुरुवार रात 8 बजे तक 15 लाशें थीं, हम अंदर पोस्टमॉर्टम में लगे थे, मॉरचूरी में लाशें बढ़ती जा रही थी। हम एक-दूसरे से बात नहीं कर पा रहे थे। पूरी टीम का फोकस सिर्फ अपने काम पर था। हमारे साथ स्वीपर भी रात भर डटे हुए थे।

हम भी अपने शहर में हुए इस भीषण हादसे से सहम गए थे, लेकिन हमारी ड्यूटी थी कि हम हर शव का पोस्टमॉर्टम करें। हमारी कोशिश यही थी कि सुबह होने तक सभी शवों का पोस्टमॉर्टम हो जाए, लेकिन आधी रात के बाद कुछ और लाशें आईं। हम सिर्फ अपने प्रोसिजर पर ध्यान दे रहे थे, बाद में तो हमने ये भी देखना छोड़ दिया था कि कितनी लाशें हैं। सुबह के 9 बजने तक हम अपने काम में लगे हुए थे और जब मैं आपसे बात कर रहा हूं। इस वक्त दस मिनट का ब्रेक लिया है। ब्रेक के दौरान ही आपसे बात कर रहा हूं। दस मिनट बाद मैं फिर से अपने काम में जुट जाऊंगा।

पूर्व मेडिको लीगल डायरेक्टर से समझिए ऐसे हादसों में कैसे होती है मौतें

पूर्व मेडिको लीगल डायरेक्टर डॉ डीएस बडकुर बताते हैं कि ऐसे हादसे में मौतों की सबसे बड़ी वजह ट्रामा होती है। यदि हम प्लेटिनम आवर्स यानी 5 मिनट के भीतर उन्हें बाहर निकाल पाते तो संभवत: कई जिंदगियां बचा सकते थे। गोल्डन ऑवर यानी आधे घंटे के भीतर भी हम लोगों को निकाल पाते तो जिन्हें कम चोटें थी, उन्हें बचा सकते थे।डॉ. बडकुर ने बताया कि ऐसे हादसों में मौत की अलग-अलग वजह होती है।

  • लोग ऊंचाई से नीचे गिरे, इससे रीढ़ की हड्‌डी सिर तक आ गई होगी बावड़ी की छत धंसने से लोग खड़े हालत में बावड़ी में समा गए, इससे रीढ़ की हड़डी सिर तक पहुंच गई होगी तो उनकी तो तुरंत मौत हो गई होगी।
  • इंटरनल आर्गन डैमेज जब इस तरह से कोई हादसा होता है तो उसमें इंटरनल आर्गन डैमेज हो जाते हैं, इससे भी मौत होती है। हालांकि ये बता पाना मुश्किल है कि वहां क्या हुआ होगा।
  • बावड़ी बंद थी, जहरीली गैस रही होगी डॉ. बड़कुर ने बताया कि बावड़ी कई सालों से बंद थी। उसमें सीवेज का पानी रिस रहा था और नीचे कीचड़ भी था। इस वजह से वहां मीथेन जैसी गैस बनने की आशंका है। इसमें ऑक्सीजन नहीं होती। संभवत: जहरीली गैस से लोगों का दम घुट गया।
  • मलबा गिरने से चोटिल हुए होंगे लोग जब बावड़ी धंसी तो लोग भीतर समा गए, इसके बाद भी छत का मलबा गिरता रहा। संभवत: इससे उन्हें गंभीर चोट लगी होगी। ये भी मौत की बड़ी वजह रही।
  • डूबने से और दम घुटने से मौत जो लोग नीचे थे, उन्हें सिर उठाने की जगह ही नहीं मिली होगी। इस कारण वे डूब गए होंगे। जो लोग बीच में दबे होंगे, वे सांस लेने के लिए सीना ही नहीं फुला पा रहे होंगे, ये भी मौत की वजह हो सकती है।
  • सांस नली में मिट्‌टी जाने से मौत ऐसे मामलों में कई बार सांस नली में मिट्‌टी फंसने से लोग सांस नहीं ले पाते। ये भी मौत की बड़ी वजह होती है

डिस्क्लेमर– ये मेडिकल लीगल एक्सपर्ट की राय है, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आना बाकी है। अलग-अलग व्यक्तियों की मौत की अलग-अलग वजह हो सकती है। ये सिर्फ संभावित वजहें बताई गई है।

Ramswaroop Mantri

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