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धुलड़ी पर बाड़मेर के सनावड़ा की 185 साल पुरानी गैर परंपरा,20 किलो की आंगी पहन घंटों थिरकते हैं गैरिए

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बाड़मेर के सनावड़ा में होली के दूसरे दिन धुलड़ी के अवसर पर 185 साल पुरानी गैर परंपरा का आयोजन होता है. सैकड़ों गैरिए 20 किलो वजनी लाल-सफेद “आंगी” पहनकर गोल घेरे में ढोल और थालियों की ताल पर घंटों थिरकते हैं. इस नृत्य में अनुशासन, जोश और लय का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है. भारी आंगी और रंगों की बरसात के साथ यह दृश्य होली का अनुभव और भी यादगार बना देता है.

होली के रंगों के बीच जब ढोल की थाप गूंजती है तो सनावड़ा की धुलड़ी कुछ खास बन जाती है. यहां सैकड़ों गैरिए करीब 20 किलो वजनी लाल-सफेद “आंगी” पहनकर घंटों तक गोल घेरे में थिरकते हैं. ढोल और थालियों की ताल पर एक साथ उठते कदम ऐसा नज़ारा पेश करते हैं कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाते हैं.

होली के रंग जहां एक ओर मस्ती और उमंग बिखेरते हैं. वहीं सरहदी बाड़मेर जिले के सनावड़ा में होली का दूसरा दिन यानी धुलड़ी एक अनोखी परंपरा का गवाह बनता है. यहां खेली जाने वाली सनावड़ा गैर नृत्य की पहचान करीब 185 साल पुरानी है. सबसे खास बात यह है कि इस गैर में भाग लेने वाले गैरिए करीब 20 किलो वजनी लाल-सफेद कपड़े की “आंगी” पहनकर घंटों नृत्य करते हैं.

गैर नृत्य के लिए ही तैयार की जाती है आंगी

गैर नृत्य के लिए विशेष वेशभूषा तैयार की जाती है, जिसे “आंगी” कहा जाता है. यह लाल और सफेद कपड़ों की कई परतों से बनी होती है, जिसका वजन लगभग 20 किलो तक पहुंच जाता है. इतनी भारी पोशाक पहनकर गोल घेरे में तालबद्ध घूमना आसान नहीं होता है. इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग देखने पहुंचते है.

ढोल-थाली की थाप पर थिरकता इतिहास

गैर खेलने आए मगाराम प्रजापत ने लोकल 18 को बताया कि जैसे ही ढोल की गूंज और थालियों की धमक शुरू होती है, सैकड़ों गैरिये एक साथ कदम मिलाते हैं. लय, अनुशासन और जोश का ऐसा संगम देखने वालों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है. भारी आंगी, सैकड़ों गैरिये, ढोल-नगाड़ों की गूंज और रंगों की बरसात का नजारा वाकई होली को यादगार बना देता है.

185 साल पुरानी है विरासत

यह परंपरा करीब 185 वर्ष पहले शुरू हुई थी और तब से हर साल धुलड़ी पर निभाई जा रही है. समय बदला, दौर बदले, लेकिन गैर की चमक और जोश आज भी पहले जैसा है. गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक हर पीढ़ी इसे अपनी शान मानती है. होली के दूसरे दिन यहां दूर दूर से लोग गैर देखने के लिए पहुंचते है.

Ramswaroop Mantri

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