आज के बड़े इवेंट
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने मंथली रेडिया कार्यक्रम ‘मन की बात’ को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम का प्रसारण सुबह 11 बजे से किया जाएगा।
- पीएम मोदी तमिलनाडु के दौरे पर आज अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होंगे। चेन्नई में प्रधानमंत्री राजेंद्र चोल की स्मृति में सिक्का भी जारी करेंगे।
- बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने तेज की तैयारी, राहुल गांधी आज बिहार के अधौरा में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों से मुलाकात करेंगे।
- इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज के चौथे टेस्ट में केएल राहुल और शुभमन गिल ने कमाल कर दिया। मैनचेस्टर टेस्ट के चौथे दिन दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए नाबाद 174 रन की साझेदारी की। ऐसा तीसरी बार है जब शुरू में ही दो विकेट गिरने के बाद सौ रनों से ज्यादा की साझेदारी बनी हो।
थाईलैंड-कंबोडिया के बीच जंग में कूदे ट्रंप, दो टूक कहा- युद्ध नहीं रोका तो व्यापार नहीं, भारत-पाकिस्तान का क्यों किया जिक्र
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी जंग में यूएस राष्ट्रपति ट्रंप की एंट्री हो गई। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर की अपील किया है। साथ ही चेतावनी भरे लहजे में कहा कि युद्ध नहीं रोका तो व्यापार नहीं होगा। इस दौरान ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया।

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच चल रहे संघर्ष के तेज होने के बीच अमेरिका ने इसे रोकने के लिए दखल दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कंबोडिया और थाईलैंड के नेताओं के बात करते हुए युद्धविराम की तरफ जाने के लिए कहा है। ट्रंप ने बताया है कि इस मुद्दे पर उन्होंने कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट से बात की है और थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई से भी बात कर रहे हैं। उन्होंने युद्ध करने वाले देश से व्यापार ना करने की बात कही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार शाम अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, ‘मैंने कंबोडिया के पीएम से थाईलैंड के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए कहा है। मैं थाईलैंड के कार्यवाहक पीएम फुमथम वेचायाचाई से भी सीजफायर पर सहमत होने का अनुरोध करूंगा।हम दोनों देशों के साथ व्यापार समझौतों पर वार्ता कर रहे हैं। मैं साफ कर दूं कि अगर कोई देश युद्ध कर रहा है तो हम उसके साथ समझौता नहीं करते हैं। मैंने उन्हें यह बात बता दी है।’
मुझे भारत-पाक की याद आई: ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कंबोडिया और थाईलैंड की लड़ाई रुकवाने की अपनी कोशिश पर कहा, ‘मैं एक जटिल स्थिति को सरल बनाने में लगा हूं। इस युद्ध में कई लोग मारे जा रहे हैं। यह मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष की याद दिलाता है, जो सफलतापूर्वक रुक गया था।’ ट्रंप बार-बार ये कहते रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान में मई में हुए संघर्ष को उन्होंने रुकवाया था। हालांकि भारत ने इसे ट्रंप के दावे को अहमियत नहीं दी है और उनके दावे को नकार दिया है।
चौथे दिन ही तय लग रही थी हार, फिर गिल-राहुल की जिद ने बढ़ाई उम्मीद, क्या बचेगा मैनचेस्टर टेस्ट?
भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में जोरदार पलटवार किया है। पहली पारी में 311 रनों से पिछड़ने के बाद भारत ने दूसरी पारी में बिना खाता खोले पहले ही ओवर में दो विकेट गंवा दिए। फिर शुभमन गिल और केएल राहुल ने कमाल कर दिया।

भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट में जोरदार पलटवार किया है। पहली पारी में 311 रनों से पिछड़ने के बाद भारत ने अपनी दूसरी पारी में पहले ही ओवर में दो विकेट खो दिए। यशस्वी जायसवाल और साई सुदर्शन खाता खोले बिना आउट हो गए। इसके बाद शुभमन गिल और केएल राहुल क्रीज पर टिक गए। चौथे दिन के दूसरे और तीसरे सेशन में इंग्लैंड की टीम एक भी विकेट नहीं ले पाई। स्टंप के समय भारत का स्कोर 2 विकेट पर 174 रन है। हालांकि इंग्लैंड के पास अभी भी 137 रनों की बढ़त है। पहली पारी में भारत ने 358 रन बनाए थे। चौथे दिन पहले सेशन में इंग्लैंड की पहली पारी 669 रनों पर सिमट गई थी। बेन स्टोक्स ने 141 जबकि जो रूट ने 150 रन बनाए।
गिल और राहुल शतक की तरफ
जीरो रन पर दो विकेट गिरने के बाद केएल राहुल और शुभमन गिल ने पारी को आगे बढ़ाया। दोनों ही बल्लेबाजों ने काफी सावधानी से बैटिंग की। दोनों के पास मैच के पांचवें दिन शतक लगाने का मौका होगा। गिल ने 72 गेंदों पर अपनी 8वीं टेस्ट फिफ्टी लगाई। हालांकि केएल राहुल ज्यादा संभलकर खेल रहे थे। उन्होंने अपने 50 रन 141 गेंदों पर पूरे किए। स्टंप के समय गिल 78 और राहुल 87 रन बनाकर खेल नाबाद थे।
इस सीरीज में केएल राहुल के 500 रन भी पूरे हो गए हैं। वहीं कप्तान शुभमन गिल भी 700 रनों के करीब हैं। वह इंग्लैंड में एक टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले एशियाई बल्लेबाज बन गए हैं।
विदेश में एक सीरीज में 500 से ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय ओपनर
774 – सुनील गावस्कर, वेस्टइंडीज, 1971
542 – सुनील गावस्कर, इंग्लैंड, 1979
508* – केएल राहुल, इंग्लैंड, 2025
मालदीव में पीएम मोदी ने कह दी ऐसी बात, जिससे चीन को जरूर लगेगी मिर्ची
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लिया और कहा कि भारत और मालदीव के बीच गहरी साझेदारी है, जो आपसी सम्मान और साझा मूल्यों पर आधारित है। जानिए पीएम मोदी ने क्या कहा जिससे चीन को मिर्ची लग जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कहा कि भारत और मालदीव के बीच गहरी साझेदारी है जो आपसी सम्मान, साझा मूल्यों और सांस्कृतिक एवं आर्थिक आदान-प्रदान के लंबे इतिहास पर आधारित है। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘हमारे संबंध लगातार आगे बढ़ रहे हैं, जो लोगों के बीच आपसी संपर्क और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग से आकार ले रहे हैं। भारत मालदीव के लोगों की आकांक्षाओं का समर्थन करने और हमारे ग्रह की बेहतरी के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।’\

‘मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हुए पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होना मेरे लिए सम्मान की बात थी। इस महत्वपूर्ण अवसर ने मालदीव के लोगों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जीवंत भावना को प्रदर्शित किया।’ उन्होंने कहा, ‘यह पिछले कुछ वर्षों में देश की परिवर्तन यात्रा का भी प्रतीक है। अपनी प्राचीन समुद्री परंपराओं से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व तक, मालदीव ने विश्व मंच पर अपने लिए एक विशिष्ट स्थान बनाया है।’ मोदी ने कहा, ‘मालदीव के महान लोगों को मेरी ओर से शुभकामनाएं।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मोदी का समारोह में शामिल होना दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार का एक और संकेत है। मालदीव की राजधानी के मध्य में स्थित समारोह स्थल, ‘रिपब्लिक स्क्वायर’ पर राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और उनके मंत्रिमंडल के शीर्ष मंत्रियों ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
भारत के आला अफसर भी कार्यक्रम में शामिल हुए
प्रधानमंत्री मोदी, मुइज्जू के बगल में बैठे और मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित 50 मिनट से अधिक समय के कार्यक्रम को देखा। इसमें मालदीव के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री शुक्रवार को दो दिवसीय यात्रा पर माले पहुंचे थे। उनका मुख्य उद्देश्य मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेना था।
भारत ने मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की मदद दी
मोदी की मालदीव यात्रा को तनाव के दौर के बाद द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। द्विपक्षीय संबंधों में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन के करीबी माने जाने वाले मुइज्जू नवंबर 2023 में ‘इंडिया आउट’ अभियान के बल पर द्वीपीय राष्ट्र की सत्ता में आए हैं। भारत ने शुक्रवार को मालदीव के लिए 4,850 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा देने की घोषणा की थी और जल्द ही एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की थी।
भारत, चीन, अमेरिका… कोई नहीं है टॉप 10 में, किन देशों में तेजी से बढ़ रही है अमीरों की आबादी?
भारत की इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है लेकिन हम उन टॉप 10 देशों में शामिल नहीं हैं जहां मिलिनेयर्स की संख्या सबसे तेजी से बढ़ रही है। इस लिस्ट में भारत के साथ-साथ चीन और अमेरिका भी नहीं हैं।

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है जबकि चीन दूसरे नंबर पर है। इसी तरह भारत की इकॉनमी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है। लेकिन दुनिया में जिन 10 देशों में अमीरों की संख्या सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, उनमें भारत, चीन और अमेरिका का नाम नहीं है। यूबीएस ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट, 2024 के मुताबिक इस लिस्ट में पहले नंबर पर ताइवान है। चीन से सटे इस देश में अमीरों की संख्या सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इस देश में 760,00 लोगों की वेल्थ 10 लाख डॉलर से अधिक है जबकि एवरेज वेल्थ पर एडल्ट $312,075 है। ताइवान की आबादी करीब 2.31 करोड़ है।
यूबीएस ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट, 2024 के मुताबिक जिन देशों में अमीरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, उनमें तुर्की दूसरे नंबर पर है। कभी यूरोप का बीमार कहे जाने वाले तुर्की ने हाल के वर्षों में गजब की प्रगति की है। एक अनुमान के मुताबिक तुर्की में पिछले एक साल के दौरान मिलिनेयर्स की आबादी में 7,000 यानी 8.4 फीसदी का इजाफा हुआ। देश में अब मिलिनेयर्स की संख्या 68,000 पहुंच चुकी है जिसके 2028 तक 87,077 पहुंचने की उम्मीद है।
कौन-कौन हैं टॉप पर
इस लिस्ट में तुर्की के बाद कजाकस्तान का नंबर है। इस मध्य एशियाई देश में मिलिनेयर्स की संख्या साल 2023 करीब 44,307 थी जिसके 2028 तक 60,874 पहुंचने की उम्मीद है। दुनिया के सबसे बड़े इस्लामी देश इंडोनेशिया में भी मिलिनेयर्स की आबादी तेजी से बढ़ रही है और वह इस मामले में जापान से आगे है। साउथ कोरिया, इजरायल, मेक्सिको, थाईलैंड और स्वीडन भी टॉप 10 देशों में शामिल है जहां मिलिनेयर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
तेज प्रताप ने हरी छोड़ पीली टोपी पहनी, निर्दलीय चुनाव लड़ने का कर दिया ऐलान
आरजेडी प्रमुख लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने अहम ऐलान किया है। उन्होंने वैशाली जिले की महुआ सीट से ही निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। यही नहीं तेज प्रताप ने आरजेडी की हरी टोपी छोड़कर पीली टोपी पहन ली है।

आरजेडी प्रमुख लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने बड़ा ऐलान किया है। वे वैशाली जिले की महुआ सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने राजद की हरी टोपी छोड़कर पीली टोपी पहन ली है। तेज प्रताप ने ‘टीम तेज प्रताप यादव’ बनाई है। यह एक मंच है जहां हर कोई जुड़ सकता है। उनका कहना है कि अगर कोई युवा, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करेगा तो वे साथ देंगे। तेज प्रताप ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार इस बार मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।
तेज प्रताप ने छोड़ दी हरी टोपी
तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘टीम तेज प्रताप यादव’ जनता तक पहुंचने का एक जरिया है। उन्होंने कहा कि जिसकी भी सरकार बने, अगर वे युवा, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करेंगे तो तेज प्रताप यादव पूरी ताकत से उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि महुआ से चुनाव लड़ेंगे और विरोधियों को खुजली हो रही है। तेज प्रताप ने शाहपुरा से मदन कुमार को ‘टीम तेज प्रताप’ की ओर से चुनाव लड़ाने की बात कही है।
महुआ से चुनाव लड़ने का ऐलान
तेज प्रताप पहले 2015 में महुआ से जीते थे। 2020 में वे समस्तीपुर जिले के हसनपुर से जीते। अभी महुआ से राजद के मुकेश रौशन विधायक हैं। तेज प्रताप ने अपने सरकारी आवास पर कहा कि वे ‘टीम तेज प्रताप’ के बैनर तले महुआ से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई को महुआ में उनका कार्यक्रम है और अभी नई पार्टी बनाने का कोई इरादा नहीं है।
अनुष्का यादव मामले के बाद बिगड़ी बात
अनुष्का यादव के साथ फोटो विवाद के बाद उन्हें आरजेडी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया है। उन्हें परिवार से भी बाहर कर दिया गया है। इससे पहले, तेज प्रताप ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से अपनी सभी बहनों और आरजेडी को अनफॉलो कर दिया था। अब वे सिर्फ लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और कुल 6 लोगों को फॉलो कर रहे हैं।
राहुल गांधी होंगे दूसरे अंबेडकर… कांग्रेस नेता के बयान पर मचा सियासी घमासान
कांग्रेस नेता उदित राज ने राहुल गांधी की तुलना डॉक्टर भीमराव अंबेडकर से की, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर असली अंबेडकर का सम्मान न करने का आरोप लगाया। सपा विधायक अबू आजमी ने कहा कि राहुल गांधी की टीम उन्हें पीछे खींच रही है।

कांग्रेस नेता उदित राज द्वारा राहुल गांधी की तुलना डॉ. भीमराव अंबेडकर से करने पर सियासी हलचल तेज हो गई है। अब इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, कांग्रेस दूसरे बीआर अंबेडकर की बात कर रही है, जबकि उसने असली अंबेडकर का सम्मान नहीं किया। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अंबेडकर के संविधान को जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होने दिया।
अंबेडकर का अपमान करना कांग्रेस की पहचान: बीजेपी
कांग्रेस नेता द्वारा राहुल गांधी की तुलना डॉ. भीमराव अंबेडकर से करने पर शहजाद पूनावाला ने कहा, दलितों और बीआर अंबेडकर का अपमान करना कांग्रेस की पहचान बन गई है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा, असली अंबेडकर का अपमान किसने किया? उन्हें भारत रत्न किसने नहीं दिया? उनके संविधान को जम्मू-कश्मीर में किसने लागू नहीं होने दिया? मुस्लिम आरक्षण की बात किसने की?
बीजेपी नेता ने कहा, अब राहुल गांधी नेहरू या इंदिरा गांधी नहीं, बल्कि दूसरे अंबेडकर बनना चाहते हैं। इसका मतलब साफ है कि गांधी परिवार मान रहा है कि नेहरू और इंदिरा गांधी गलत रास्ते पर थे।
अबू आजमी ने भी दिया रिएक्शन
वहीं इस मामले में सपा विधायक अबू आसिम आजमी ने कहा कि राहुल गांधी की अपनी टीम ही उन्हें पीछे खींच रही है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर एक महान विद्वान और हमारे संविधान के मुख्य निर्माता थे। मेरा मानना है कि वह सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के नेता थे। वह एक बार सांसद भी रहे, लेकिन उनका कद इससे कहीं ज्यादा है। जिस तरह से उन्होंने गरीबों और शोषितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, हाशिए पर खड़े समुदायों को न्याय दिलाने के लिए जो संघर्ष किया, आज भारत में उनके जैसा कोई नहीं है। राहुल गांधी जरूर संविधान की बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी टीम ही उन्हें पीछे खींच रही है।
क्या है उदित राज का बयान?
कांग्रेस नेता उदित राज का कहना है कि ‘अगर ओबीसी ‘भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में राहुल गांधी की बातों को सुनते हैं, तो वे उनके लिए ‘दूसरे अंबेडकर’ साबित होंगे।’
उदित राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘अगर OBC समझते हैं कि राहुल गांधी ने क्या कहा, तो वे उनके लिए दूसरे अंबेडकर साबित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि OBC को यह सोचना होगा कि इतिहास बार-बार प्रगति के अवसर नहीं देता है।’
‘जाति जनगणना नहीं कराना एक भूल थी’: राहुल गांधी
नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘भागीदारी न्याय सम्मेलन’ के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, यूपीए सरकार दौरान जाति जनगणना नहीं कराना एक भूल थी, जिसे वे अब सुधारना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि पहले वे OBC समुदाय के मुद्दों को उतनी गहराई से नहीं समझ पाए थे, जितनी गहराई से वे दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के मुद्दों को समझते थे।
चीन, रूस और उत्तर कोरिया को काउंटर करने के लिए जापान ने अपने रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
चीन, रूस और उत्तर कोरिया को काउंटर करने के लिए जापान ने अपने रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। जापान के 2025 के रक्षा बजट को बढ़ाकर 55.1 अरब डॉलर कर दिया गया है। जिसमें जापान ने अपनी सैटेलाइट क्षमता को बढ़ाने से लेकर मिसाइल डिफेंस कवच तैयार करने और समु्द्री सर्विलांस को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का फैसला किया है।
दूसरे विश्वयुद्ध के समय चीन में भयानक क्रूरता मचाने वाला समुराई जाग उठा है। आक्रामक चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए जापान के रक्षा मंत्रालय ने वार्षिक दस्तावेज जारी किया है। ” डिफेंस ऑफ जापान-2025 ” नाम के नये श्वेत पत्र में बताया गया है कि प्रशांत क्षेत्र में सैन्य संतुलन चीन के पक्ष में झुक रहा है। टोक्यो ने जुलाई की शुरुआत में यह पत्र जारी किया था जिसमें निष्कर्ष निकाला गया कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से संघर्ष के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है। इसमें बताया गया है कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया जापान के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुके हैं। इस श्वेत पत्र में चीन को जापान के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया गया है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि पिछले तीन सालों में चीन के युद्धपोत जापान के पास दक्षिण-पश्चिमी जल क्षेत्र में तीन गुना से ज्यादा आवाजाही बढ़ा चुके हैं। इसके अलावा चेतावनी देते हुए कहा है कि उत्तर कोरिया और चीन जिस रफ्तार से अपनी मिसाइल क्षमता बढ़ा रहे हैं, वो जापान के लिए खतरनाक है और जापान को अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए फिर से विचार करने की जरूरत है।
श्वेतपत्र के मुताबिक पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में, खासतौर से ताइवान के आसपास, चीन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ताइवान पर हमला करने की नीयत से चीन अपनी सैन्य शक्ति, खासकर एयरफोर्स, समुद्री और जल-थल क्षमताओं का निर्माण कर रहा है। इसका मतलब ताइवान की नाकाबंदी करने की कोशिश है। जापान के मुख्य अखबारों में कहा गया है चीन और रूस की संयुक्त गतिविधियां जापान के खिलाफ एक शक्ति प्रदर्शन की तरह है और चेतावनी देते हुए कहा गया है कि जो हालात अभी यूक्रेन में हैं, वैसे हालात पूर्वी एशिया में भी बन सकते हैं।
चीन को काउंटर करने की जापान की तैयारी तेज
चीन, रूस और उत्तर कोरिया को काउंटर करने के लिए जापान ने अपने रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। जापान के 2025 के रक्षा बजट को बढ़ाकर 55.1 अरब डॉलर कर दिया गया है। जिसमें जापान ने अपनी सैटेलाइट क्षमता को बढ़ाने से लेकर मिसाइल डिफेंस कवच तैयार करने और समु्द्री सर्विलांस को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का फैसला किया है। इसके अलावा जापान, अमेरिका से टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, JASSM-ER और F-35A/B लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करेगा। इसके अलावा जापान ने अपने Izumo-class हेलिकॉप्टर डिस्ट्रॉयर को F-35B ऑपरेट करने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात करने लगा है। इसका मकसद जापान की नौसैनिक क्षमताओं को दूसरे विश्वयुद्ध के बाद काफी ज्यादा मजबूत करना है। जापान ने अपनी नौसेना में अमेरिकी MQ-9B ड्रोन और V-BAT ड्रोन को भी जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। जापान की कोशिश चीन की PLA वायु सेना और H-6K बॉम्बर्स जैसी चुनौतियों का मुकाबला करना है।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच तेज हुई संस्कृति बनाम प्रभुत्व की लड़ाई
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर तनाव तीसरे दिन भी जारी रहा। इस लड़ाई में अब तक दोनों पक्षों से 33 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, करीब 1,68,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। अब इस तनाव के केंद्र में है प्रीह विहिअर मंदिर। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच टकराव का ये मंदिर क्यों मुद्दा बना हुआ है? आइये जानते हैं…

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर सतह पर आ गया है और इसका केंद्रबिंदु बना है प्रीह विहिअर मंदिर। एक प्राचीन हिंदू तीर्थ जो कभी खमेर साम्राज्य के वैदिक वैभव का प्रतीक था।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच तनाव क्यों?
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पूरा विवाद एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर) से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार कंबोडिया के उत्तरी पठार पर खड़ी चट्टानों पर स्थित प्रीह विहिअर मंदिर को 9वीं से 12वीं सदी के बीच खमेर शासकों ने भगवान शिव को समर्पित कर बनवाया था। मंदिर वैदिक और शैव परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। 1954 में जब फ्रांस ने कंबोडिया को स्वतंत्र किया तब यह मंदिर विवाद में आ गया, क्योंकि यह थाईलैंड सीमा से सटा हुआ है और दोनों देश इस पर दावा करने लगे। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया, लेकिन उसके चारों ओर की भूमि पर थाईलैंड ने अब तक अधिकार जताया हुआ है।
2008 में भी भड़का था तनाव
यह पूरा संघर्ष 2008 में फिर भड़क उठा, जब कंबोडिया ने प्रिया विहार ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को की वैश्विक धरोहरों में शामिल कराने की कोशिश की। थाईलैंड ने इसका भरसक विरोध किया और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अचानक ही संघर्ष में बदल गई। इसमें 20 लोगों की मौत हुई, जबकि सीमा के आसपास रहने वाले हजारों लोग बेघर हो गए।
कुछ समय बाद जब यह तनाव बना रहा तो कंबोडिया फिर आईसीजे की शरण में पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फिर से कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, इस बार भी कोर्ट ने विवादित क्षेत्रों को लेकर कोई निर्णय नहीं दिया। दूसरी तरफ थाईलैंड ने आईसीजे के क्षेत्राधिकार को मानने से ही इनकार कर दिया। हालांकि, 2013 के बाद से दोनों ही देशों के बीच तनाव कुछ हद तक कम हो गया।

अब तक हो चुकी है 33 लोगों की मौत
थाईलैंड और कंबोडिया में सीमा पर झड़प जारी है। साथ ही युद्धविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच दोनों देश एक-दूसरे पर हमले शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं। अब तक इस लड़ाई में कम से कम 33 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1,68,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
कंबोडिया से 37635 और थाईलैंड से 131000 लोग विस्थापित
कंबोडिया के सूचना मंत्री नेथ फेकट्रा ने शनिवार को कहा कि झड़पों के कारण तीन सीमावर्ती प्रांतों में 10,865 परिवारों यानी करीब 37,635 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। वहीं, थाई अधिकारियों ने कहा कि 131,000 से ज्यादा लोग सीमावर्ती गांव से भाग चुके हैं।

थाईलैंड और कंबोडिया के झंडे
आरोप-प्रत्यारोप में लगे दोनों देश
कंबोडियाई सेना प्रीह विहिअर मंदिर के पास निगरानी चौकियों को उन्नत कर रही है तो थाई सैनिक क्षेत्र में गश्त तेज कर रहे हैं। थाईलैंड का आरोप है कि कंबोडिया सैन्य निर्माण कर रहा है, वहीं कंबोडिया ने कहा कि वह अपने संप्रभु क्षेत्र की सुरक्षा कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन खतरे की सीमा के पार, बढ़ी चुनौती; कार्बन बजट तीन साल से भी कम समय में हो जाएगा खत्म
दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ एक भविष्य का खतरा नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी सच्चाई बन चुका है।अर्थ सिस्टम साइंस डाटा नामक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित ताजा विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2024 में मानवजनित वैश्विक तापमान वृद्धि 1.36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई है, जिससे औसत वैश्विक तापमान 1.52 डिग्री सेल्सियस हो गया। यानी पृथ्वी पहले ही उस खतरनाक तापमान सीमा को पार कर चुकी है जिसे पार नहीं करने की चेतावनी वैज्ञानिक समुदाय वर्षों से देता आ रहा है
अर्थ सिस्टम साइंस डाटा नामक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित ताजा विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2024 में मानवजनित वैश्विक तापमान वृद्धि 1.36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गई है, जिससे औसत वैश्विक तापमान 1.52 डिग्री सेल्सियस हो गया। यानी पृथ्वी पहले ही उस खतरनाक तापमान सीमा को पार कर चुकी है जिसे पार नहीं करने की चेतावनी वैज्ञानिक समुदाय वर्षों से देता आ रहा है। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के सबसे गंभीर प्रभावों से पूरी तरह बचना अब असंभव हो गया है। चाहे अत्यधिक तापमान हो, बाढ़ हो या समुद्र का बढ़ता स्तर। पृथ्वी के हर हिस्से पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। दुनिया का कार्बन बजट यानी वह अधिकतम मात्रा जो हम बिना तापमान वृद्धि को नियंत्रित किए उत्सर्जित कर सकते हैं मौजूदा उत्सर्जन दर पर तीन साल से भी कम समय में खत्म हो जाएगा।
197 में सिर्फ 25 देशों ने दिखाई गंभीरता
रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के 197 सदस्य देशों में से अभी तक केवल 25 देशों ने अपनी नई राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान योजनाएं(एनडीसीज) जमा की हैं। ये योजनाएं बताती हैं कि कोई देश ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को किस तरह कम करेगा और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कैसे ढलेगा। ये 25 देश विश्व उत्सर्जन का केवल 20% प्रतिनिधित्व करते हैं। इसका मतलब यह है कि अब भी 172 देशों को अपनी जलवायु योजनाएं पेश करनी बाकी हैं। अफ्रीकी देशों में सिर्फ सोमालिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे ने अब तक अपनी योजनाएं प्रस्तुत की हैं।
दुनिया के सामने तीन प्रमुख संकट
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया तीन प्रमुख संकटों से जूझ रही है। पहला संकट है, तेजी से घटता कार्बन बजट। पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को बचाने के लिए जितनी कार्बन उत्सर्जित की जा सकती है, वह समय सीमा खत्म होने के करीब है। दूसरा,चरम मौसमी घटनाओं जैसे बाढ़, लू, जंगलों की आग और बेमौसम बारिश में भारी वृद्धि हो रही है।
- वर्षा का वितरण भी पूरी तरह असामान्य हो चुका है। तीसरा संकट यह है कि विकासशील देश जलवायु परिवर्तन के भारी जोखिम में हैं। इनके पास जलवायु संकट से निपटने की क्षमता सीमित है।
देश के इन राज्यों में होगी भीषण बारिश, IMD ने जारी किया रेड- ऑरेंज अलर्ट!
मौसम विभाग ने पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी में बना दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन बन चुका है और यह पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तट पार कर चुका है। अगले 24 घंटों में यह पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड की तरफ बढ़ेगा। इसके असर से ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में तेज बारिश देखने को मिलेगी। मध्य प्रदेश में 27-28 जुलाई को भारी से अति भारी बारिश के आसार है। इधर छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 30 जुलाई तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। दक्षिण भारत में भी मौसम विभाग ने अगले एक हफ्ते तक बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है।
कर्नाटक और केरल के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में भी अलग-अलग जगह पर भारी बारिश का अनुमान है। दिल्ली में शुक्रवार को तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। IMD ने शहर के कई इलाकों जैसे रोहिणी, नरेला, पीतमपुरा, बादली, मुंडका, पश्चिम विहार और पंजाबी बाग में बारिश की संभावना जताई है। शनिवार को गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है और तापमान 28 से 35 डिग्री के बीच रह सकता है। राजस्थान में एक बार फिर भारी बारिश की शुरुआत होने वाली है।
मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव अब तेज हो चुका है और यह पश्चिम बंगाल, उत्तर ओडिशा और झारखंड की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में आज से ही तेज बारिश शुरू हो सकती है। 27 जुलाई से पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बारिश और बढ़ेगी। 27 जुलाई को कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है। 28 से 31 जुलाई तक पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। वहीं पश्चिमी राजस्थान में भी कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। मुंबई में शुक्रवार को जोरदार बारिश हुई, जिससे ट्रैफिक पर असर पड़ा और लोकल ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जरूरी न हो तो घरों से बाहर न निकलें। मुंबई और आसपास के सभी जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भर गया है और वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है।
ओडिशा में बंगाल की खाड़ी से आए सिस्टम के असर से 28 जुलाई तक अच्छी बारिश होने की संभावना है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी, वहीं कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। 27 से 28 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने मयूरभंज और क्योंझर जिलों के लिए रेड अलर्ट और 10 अन्य जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में झमाझम बारिश का दौर जारी है। जिससे मौसम सुहाना हो गया है और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है।

चांगलांग पहुंची कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन टीम, द्वितीय विश्व युद्ध स्थलों का दौरा किया
सीडब्ल्यूजीसी की टीम, जिसमें अमित बंसल (क्षेत्रीय प्रमुख, भारतीय उपमहाद्वीप) और सालेव फॉटे (गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ के प्रबंधक) शामिल थे, ने लाल पूल, हेमिल्टन ब्रिज, हेल गेट, और पुरानी स्टिलवेल रोड के पंगसौ पास पहुंचने वाले हिस्से का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इन स्थलों की स्थिति का अवलोकन करसुधार के लिए आवश्यक कार्यों को चिह्नित किया।
कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन (सीडब्ल्यूजीसी), दिल्ली के प्रतिनिधियों ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के जयरामपुर स्थित द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक स्मारकों का दौरा किया। इस दौरान टीम ने इन स्थलों का प्रारंभिक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य इन ऐतिहासिक स्थलों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुधारों की रूपरेखा तय करना है।
उल्लेखनीय है कि द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक स्मारकों को विश्व स्तरीय स्मारकों में बदलने की दिशा में अहम कदम उठाए जा रहे हैं। सीडब्ल्यूजीसी की टीम, जिसमें अमित बंसल (क्षेत्रीय प्रमुख, भारतीय उपमहाद्वीप) और सालेव फॉटे (गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ के प्रबंधक) शामिल थे, ने लाल पूल, हेमिल्टन ब्रिज, हेल गेट, और पुरानी स्टिलवेल रोड के पंगसौ पास पहुंचने वाले हिस्से का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इन स्थलों की स्थिति का अवलोकन कर सुधार के लिए आवश्यक कार्यों को चिह्नित किया।
इस दौरे का नेतृत्व विधायक लैसाम सिमाई (51वीं नामपोंग निर्वाचन क्षेत्र) ने किया, जो इस पहल के प्रति स्थानीय सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है। साथ ही, कर्नल जितेंद्र मेहता, लेफ्टिनेंट कर्नल टीसी टायम, ओएसडी, एडीसी जयरामपुर, डीएफओ जयरामपुर, एसडीओ नामपोंग और अन्य जिला अधिकारी भी इस दौरान साथ रहे।
सीडब्ल्यूजीसी के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया है कि ब्रिटेन स्थित मुख्यालय से इन स्मारकों का विस्तृत सर्वेक्षण और आंकड़े प्राप्त कर उन्हें बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस संदर्भ में, विधायक ने स्मारकों और संबंधित संसाधनों के उन्नयन का संकल्प व्यक्त किया है, ताकि इसे क्षेत्र का “सबसे बेहतरीन” स्मारक बनाया जा सके। यह निरीक्षण और पहल द्वितीय विश्व युद्ध के शहीदों की याद में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो इन ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षण और सम्मान प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के पीछे की क्या है असली कहानी
जगदीप धनखड़ के इस हफ्ते की शुरुआत में देश के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने को लेकर राजनीति जारी है। विपक्ष ने इसे लेकर कई तरह के अनुमान लगाए हैं। दूसरी तरफ मामले पर सरकार की चुप्पी ने आम लोगों के बीच कौतूहल बढ़ा दिया है।
इस हफ्ते संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ। चलते सत्र के बीच राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। आखिर ये इस्तीफा क्यों हुआ? सुबह सत्र का संचालन करने वाले धनखड़ ने आखिर रात होते-होते इस्तीफा क्यों दिया? आखिर अचानक स्वास्थ्य में कोई बड़ी गड़बड़ हुई या फिर सियासी समीकरणों में कोई उठापटक हुई? कुछ इसी तरह के सवालों पर इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, राजकिशोर और पीयूष पंत मौजूद रहे।
पूर्णिमा त्रिपाठी: बंगाल में जगदीप धनखड़ ने अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई थी। जो केंद्र सरकार की मंशा थी उसे उन्होंने पूरी तरह से करके दिया। इसका इनाम उन्हें उपराष्ट्रपति के पद के तौर पर मिला। तीन साल तक विपक्ष उनकी आलोचना करता रहा। उनकी खिल्ली उड़ाता रहा, लेकिन पिछले आठ-दस महीनों से इस तरह की खबरें आ रही थीं कि धनखड़ जी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच कुछ मुद्दों पर मनमुटाव है। मानसून सत्र की शुरुआत में विपक्ष ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ एक नोटिस दिया और उसे उन्होंने सरकार की सलाह लिए बगैर मंजूर कर लिया। जबकि, माना यह जा रहा था कि सरकार भी इस पर नोटिस लाने वाली थी। यही बात सरकार पचा नहीं पाई।
राकेश शुक्ल: किसी भी दल की सरकार हो हर सरकार में उसे चलाने की एक लक्ष्मण रेखा होती है। जब ये लक्ष्मण रेखा लांघी जाती है तब इस तरह की स्थितियां पैदा होती हैं। सरकार की कोशिश थी कि उपराष्ट्रपति के साथ किसी भी तरह का टकराव पैदा नहीं हो। जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग मामले में सरकार धीरे-धीरे कदम बढ़ा रही थी। धनखड़ जी के जल्दबाजी दिखाने की वजह से इस तरह की स्थितियां बनीं।
राजकिशोर: जस्टिस वर्मा का महाभियोग का प्रस्ताव और जस्टिस शेखऱ यादव का प्रस्ताव दोनों अलग-अलग ही लाए जा सकते हैं। इन्हें क्लब नहीं किया जा सकता है। धनखड़ जी की जहां तक बात है तो वो देवीलाल के दौर से भौकाल वाले नेता रहे है। 1992 में उनके जन्मदिन पर 75 गाड़ियों का काफिला लेकर आए थे और देवीलाल की नजर में चढ़ गए। चंद्रशेखर सरकार में भी कुछ समय के लिए मंत्री रहे थे। पिछले कुछ समय से इस बात की चर्चा थी कि वो इस्तीफा दे सकते हैं। आगे कौन उपराष्ट्रपति कौन बनेगा ये पता नहीं है।
पीयूष पंत: राज्यसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले उपराष्ट्रपति ने यह पूछा था कि क्या लोकसभा में यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। जब उन्हें बताया गया कि हां, तब उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार किया। मुझे लगता है कि सरकार और उपराष्ट्रपति के बीच मतभेद पैदा हो रहे थे। जब उन्होंने संवैधानिक अधिकारी का इस्तेमाल शुरू कर दिया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस तरह की घटनाओं से जो सवैधानिक संस्थान की गरिमा पर बहुत चोट पड़ती है।
अवधेश कुमार: देश दूसरे सर्वोच्च स्थान पर बैठे शख्स का इतनी शांति से इस्तीफा हो गया, कहीं कोई उथल-पुथल नहीं है, इसे आप क्या कहेंगे। यह एक स्वाभाविक स्थिति है। अगर जगदीप धनखड़ का इस्तीफा नहीं होता तो मुझे अस्वाभाविक लगता। क्या सत्तापक्ष के किसी व्यक्ति ने कोई अपमानजनक टिप्पणी की है? हामिद अंसारी को हटाने की कभी सत्ता पक्ष ने कोशिश नहीं की। इससे पता चलता है कि सत्ता पक्ष का क्या रुख रहा है।




