देश में सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला सामने आया है। इसने विजय माल्या और नीरव मोदी के बैंक घोटाले को भी पीछे छोड़ दिया है। गुजरात की ABG शिपयार्ड कंपनी और उसके पूर्व चेयरमैन ऋषि कमलेश अग्रवाल और अन्य पर 28 बैंकों के साथ 22,842 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। CBI ने इस मामले में ABG शिपयार्ड कंपनी और ऋषि कमलेश के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज की है।
आइए 12 सवालों के जवाबों में जानते हैं क्यों यह देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला बताया जा रहा है? किस कंपनी ने और कैसे इस घोटाले को अंजाम दिया है?
1. ABG शिपयार्ड लिमिटेड क्या है
- 15 मार्च 1985 में गुजरात के सूरत के मगदल्ला में ABG शिपयार्ड कंपनी की शुरुआत की गई।
- ABG शिपयार्ड जहाज बनाने और इसकी मरम्मत करने का काम करती है।
- 1991 तक ABG शिपयार्ड मुनाफे वाली कंपनी रही और देश-विदेश से ऑर्डर मिलते रहे।
- 2001 से कंपनी ने 28 बैंकों के कन्सोर्टियम से 22,842 करोड़ रुपए का लोन लिया था।
- इसके बाद 10 वर्षों तक कंपनी ने 160 से अधिक जहाजों का निर्माण और मरम्मत की।
- 2013 में इस लोन एकाउंट को NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया गया।

2. इसे देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला क्यों बताया जा रहा है?
- देश में अभी तक सबसे बड़ा बैंक घोटाला नीरव मोदी और विजय माल्या की ओर से किया गया था।
- नीरव मोदी ने PNB के साथ करीब 14 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी।
- विजय माल्या ने बैंकों के साथ करीब 9 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी।
- नीरव मोदी और विजय माल्या के बैंक घोटाले को मिलाने पर यह रकम 23 हजार करोड़ रुपए होती है।
- ABG शिपयार्ड ने 28 बैंकों के साथ 22,842 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है, इसलिए इसे देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला बताया जा रहा है।
3. सवाल: बैंक कन्सोर्टियम क्या होता है?
- कन्सोर्टियम फाइनेंस लोन लेने का वह तरीका है जिसमें कोई शख्स या कंपनी दो या उससे ज्यादा बैंकों से एक ही एप्लीकेशन के जरिए बहुत मोटी रकम का कर्ज लेता या लेती है।
- इस व्यवस्था में ब्याज दर और सर्विस चार्ज को छोड़कर बाकी सभी शर्तें सभी बैंकों के लिए एक जैसी होती हैं। इस व्यवस्था में बैंकों और लोन लेने वाली कंपनी या शख्स के बीच साझा लोन एग्रीमेंट होता है।
4. सवाल: बैंक कन्सोर्टियम से किसे लोन मिलना चाहिए और किसे नहीं, क्या इसकी कोई नीति है?
- वैसे तो RBI ने कन्सोर्टियम फाइनेंस की नीति 30 साल पहले बनाई थी, लेकिन आर्थिक उदारीकरण के बाद 1996 में इसे खत्म कर दिया गया, ताकि बैंकों को ज्यादा छूट मिल सके।
- मतलब यह कि फिलहाल कन्सोर्टियम फाइनेंस के लिए कोई गाइडलाइन नहीं है, इसलिए इन दिनों कन्सोर्टियम फाइनेंस की नीति या शर्तें इसमें शामिल बैंक ही तय करते हैं।
5. सवाल: कन्सोर्टियम फाइनेंस पर कोई नीति नहीं तो जिम्मेदारी तय कैसे होती है?
कन्सोर्टियम फाइनेंस पर कोई नीति न होने के बावजूद केंद्रीय सतर्कता आयुक्त यानी CVC और भारत सरकार ने कई सलाह दी हैं। RBI इन सलाहों को सर्कुलर के रूप में जारी करता रहता है। इनके मुताबिक बैंकों को ये नियम मानने चाहिए…
- किसी भी कंपनी या शख्स को कन्सोर्टियम फाइनेंस की सुविधा देने से पहले बैंकों को उनसे एक डिक्लेरेशन लेना चाहिए, जिसमें कंपनी को बताना होगा कि इससे पहले उसने किस बैंक या नॉन बैंकिंग इंस्टीट्यूट से कितना लोन लिया है।
- बैंकों को हर तीन महीनों में लोन वाले के एकाउंट की जानकारी दूसरे बैंकों से साझा करनी चाहिए।
- बैंकों को किसी CA जैसे किसी प्रोफेशनल से इस बात का सर्टिफिकेट लेना चाहिए कि सभी लोन शर्तों का पालन हो रहा है। इसे Due Diligence Certificate कहा जाता है।
- बैंकों को CIBIL और Experian जैसी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी (CIC’s) की क्रेडिट रिपोर्ट का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए।

6. इस कन्सोर्टियम की अगुआई कौन सा बैंक कर रहा था, हर बैंक ने कितना-कितना लोन दिया है?
- गुजरात की कंपनी ABG शिपयार्ड को 28 बैंकों के कन्सोर्टियम ने 22,842 करोड़ रुपए का लोन दिया था।
- आईसीआईसीआई ने सबसे ज्यादा 7,089 करोड़ रुपए दिए थे। इसलिए इस कन्सोर्टियम की अगुआई आईसीआईसीआई ही कर रहा था।
- आईसीआईसीआई के बाद सबसे ज्यादा लोन 3,634 करोड़ रुपए आईडीबीआई बैंक ने दिए थे। इसके अलावा SBI ने 2,925 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1,614 करोड़ रुपए, पंजाब नेशनल बैंक ने 1,244 करोड़ रुपए और इंडियन ओवरसीज बैंक ने 1,228 करोड़ रुपए दिए थे।
- बैंकों के साथ ही साथ एलआईसी ने भी 136 करोड़ रुपए दिए थे। इनके अलावा कई अन्य वित्तीय संस्थाओं ने भी लोन दिया था।
7. इसे घोटाला क्यों कहा जा रहा है और ये पकड़ा कैसे गया?
- ABG शिपयार्ड कंपनी को 28 बैंकों के कन्सोर्टियम ने 2001 से लोन देना शुरू किया। इसके बाद 2013 से कंपनी घाटे में जाने लगी। इसने लोन चुकाना बंद कर दिया। नवंबर 2013 में इस लोन एकाउंट को NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया गया।
- NPA एकाउंट उसे कहा जाता है जब बैंक की कमाई बंद हो जाती है। यानी बैंक को मूलधन और ब्याज नहीं मिलता।
- 2014 तक कंपनी को उबारने की कई कोशिशें की गईं। SBI का कहना है कि इस दौरान ABG शिपयार्ड को उबारने और बेचने की काफी कोशिश हुई, लेकिन शिपिंग सेक्टर बहुत बुरे हालात से गुजर रहा था, इसलिए यह कोशिश भी कंपनी को उबारने में मददगार नहीं हो सकी।
- इसके बाद 2016 में फिर से इसे नवंबर 2013 से ही लोन को NPA माना गया।
- इसके बाद अप्रैल 2018 में लोन देने वाले बैंकों ने अर्नस्ट एंड यंग यानी EY को इसकी फॉरेंसिक ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी। EY दुनिया की चार सबसे बड़ी ऑडिट कंपनियों में से एक है।
- EY ने ABG शिपयार्ड लिमिटेड की ओर से अप्रैल 2012 और जुलाई 2017 के बीच किए ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक ऑडिट की थी। इसके बाद बैंक देने वाले बैंकों के कन्सोर्टियम को यह रिपोर्ट 2019 में सौंपी गई।
- इसमें पाया गया कि ABG शिपयार्ड ने लोन के पैसों से फ्रॉड किया है। कंपनी और इससे जुड़े लोगों ने मिलिभगत कर लोन में मिले पैसे का दूसरी जगह इस्तेमाल किया। यानी कर्ज किसी दूसरे मकसद से लिया गया और पैसों का उपयोग किसी दूसरे काम में किया गया।
- इसके बाद बैंकों के कन्सोर्टियम की ओर से SBI ने नवंबर 2019 में ABG शिपयार्ड के खिलाफ CBI में पहली शिकायत दर्ज कराई। इस पर सीबीआई ने 12 मार्च 2020 को कुछ स्पष्टीकरण मांगा था। अगस्त 2020 नई शिकायत दर्ज कराई गई। डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच करने के बाद CBI ने शनिवार को मामले में FIR दर्ज की।

8. बैंकों से मिले पैसे का हुआ क्या?
- फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2016 में वन ओशन शिपिंग और ABG इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने 1,415 करोड़ रुपए पीएफएस शिपिंग (इंडिया) लिमिटेड को दिए।
- इसके अलावा ABG शिपयार्ड को मिले लोन से AGB सिंगापुर के लिए 328 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे गए। यानी विदेश में निवेश किया गया।
- ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ABG शिपयार्ड ने इस दौरान ABG सिंगापुर को लोन के रूप में भी पैसे दिए। साथ ही विदेश में प्रॉपर्टी भी खरीदी।
9. कौन लोग इस घोटाले में आरोपी बनाए गए हैं?
- ABG शिपयार्ड लिमिटेड के पूर्व सीएमडी ऋषि कमलेश अग्रवाल और तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथुस्वामी और तीन अन्य निदेशकों अश्विनी कुमार सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवतिया को आरोपी बनाया गया है।
- CBI की FIR के मुताबिक, फ्रॉड करने वाली दो कंपनियां मुख्य हैं। इनमें ABG शिपयार्ड के अलावा ABG प्राइवेट लिमिटेड शामिल है। ये दोनों कंपनियां एक ही ग्रुप की हैं।
- CBI ने शनिवार को इस कंपनी के साथ ही डायरेक्टरों के सूरत, भरूच, मुंबई और पुणे स्थित ठिकानों पर छापे मारे थे। इस दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
10. CBI ने किन धाराओं में FIR दर्ज की है और उनके मायने क्या हैं?
CBI की FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और सरकारी संपत्ति को धोखाधड़ी से हड़पने जैसे गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोप साबित होने पर इस मामले में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
11. ABG शिपयार्ड लिमिटेड के मालिक ऋषि कमलेश अग्रवाल अभी कहां हैं?
ऋषि कमलेश अग्रवाल कहां हैं इसकी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, कांग्रेस ने दावा किया है कि ऋषि कमलेश अग्रवाल देश छोड़कर जा चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। ABG शिपयार्ड की वेबसाइट भी अब बंद है।
12. इस कन्सोर्टियम को आईसीआईसीआई लीड कर रहा था, लेकिन शिकायत एसबीआई ने क्यों दर्ज कराई?
यही वो सवाल है जो सबसे ज्यादा अखर रहा है। साथ ही इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक की चुप्पी से भी सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि आईसीआईसीआई बैंक ने ही वीडियोकॉन समूह को भी 1,875 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। इस लोन को भी मंजूरी देने में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगा था।





