10 सदस्यीय अध्यक्ष मंडल बनाया गया
रीवा। नारी चेतना मंच का 29 वां स्थापना दिवस एवं 28 वां वार्षिक सम्मेलन पूनम जनवासा, रिलायंस पेट्रोल पंप के पास नेहरू नगर में सारगर्भित चर्चा और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने के साथ संपन्न हुआ है। कार्यक्रम की अध्यक्षता नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा (भोपाल) ने की। सम्मेलन में बढ़ते उपभोक्तावाद के खिलाफ प्रस्ताव में कहा गया कि उपभोक्तावादी अपसंस्कृति के चलते जीवन के हर क्षेत्र में गिरावट देखने को मिल रही है । पारित प्रस्ताव में कहा गया कि बढ़ती उपभोक्तावादी अपसंस्कृति महिलाओं की अस्मिता पर सीधा हमला है। इसके चलते नारी सम्मान भी बुरी तरह आहत हुआ है । लूट खसोट बढ़ी है। नारी को बाजार की वस्तु समझा जा रहा है । कमजोर वर्ग के लोगों एवं महिलाओं की आजादी प्रभावित हुई है । देखने को मिल रहा है कि हर चुनाव में महिलाओं का वोट तो ले लिया जाता है लेकिन जीवन के हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पा रही है । 21वीं सदी में भी महिलाएं अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही हैं । कड़े कानून बनने के बाद भी महिलाओं के प्रति हिंसा और क्रूरता की घटनाएं थमी नहीं है। आज अघोषित आपातकाल की स्थिति नागरिक आजादी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सम्मेलन में जीवन के हर क्षेत्र में समतामूलक भागीदारी के लिए बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया। बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार , बेरोजगारी, जातिवाद , धर्मांधता , सांप्रदायिकता, धार्मिक आडंबर , पाखंड, अश्लीलता, सामाजिक और आर्थिक गैर बराबरी , दहेज कुप्रथा , बलात्कार, परित्यक्तता जीवन , वैधव्य जीवन, बाल विवाह , लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र में वृद्धि का सरकारी प्रस्ताव आदि को लेकर सम्मेलन में चर्चा की गई। नारी चेतना मंच ने कहा कि बाल विवाह पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाना चाहिए लेकिन लड़कियों की निर्धारित शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष को बढ़ाना किसी भी दृष्टि से सही नहीं होगा। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उन्हें रोजगार की जरूरत है न कि उनके खाते में सरकार के द्वारा कुछ पैसे डाल कर वोट बैंक बनाने का लोकलुभावन काम नहीं होना चाहिए । लड़कियों की शादी कराना भी सरकार का काम नहीं है उसे लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। प्रदेश में शराबबंदी की जगह शिवराज सरकार के द्वारा अहाता बंदी की जा रही है जिससे शराब जैसी सामाजिक बुराई का कारोबार रुकने वाला नहीं है। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि मादा भ्रूण हत्या पुरुष प्रधान समाज के चलते होती है जिसे खासतौर से पढ़े लिखे समाज के द्वारा बढ़ावा दिया जाता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों की तुलना में भ्रूण हत्या के मामले काफी कम है। नारी की भागीदारी बिना हर बदलाव अधूरा है। सम्मेलन की शुरुआत में संयोजक अजय खरे के द्वारा रिपोर्ट रखी गई जिसमें साल भर की गतिविधियों का जिक्र किया गया। पेश की गई रिपोर्ट में जय स्तंभ बचाने के अभियान में उन सभी संगठनों एवं व्यक्तियों को सराहा गया जिन्होंने दीप प्रज्वलन सत्याग्रह में अपना कीमती समय दिया। नारी चेतना मंच ने अगले 1 वर्ष के लिए अपना दस सदस्यीय अध्यक्ष मंडल का गठन किया है जिसमें ममता शर्मा, मीरा पटेल , नजमुन्निसा , कलावती रजक, सुधा सिंह, गीता महंत , माया सोनी, शारदा श्रीवास्तव, डॉ श्रद्धा सिंह, श्वेता पांडे को रखा गया है। सम्मेलन में इन सभी की सक्रिय भागीदारी रही। नारी चेतना मंच ने कहा है कि आवश्यकतानुसार अध्यक्ष मंडल में विस्तार भी किया जा सकता है। संपन्न कार्यक्रम में डॉ इंदु निशा खान , शकुंतला वर्मा आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।





