कोच्चि
केरल में 6 अप्रैल को मतदान होना है, लेकिन चुनाव की तारीख आने के ठीक पहले पिछले 4 दिनों में पी. विजयन सरकार ने खुद के तीन फैसले बदल डाले। इसके बाद माना जा रहा है कि केरल में हाल ही में हुए लोकल बॉडी चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने वाली LDF सरकार फिलहाल बैकफुट पर आ गई है। चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से सिर्फ एक दिन पहले वाम सरकार ने सबरीमाला और CAA आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस वापस ले लिए हैं। इन पर हिंसा भड़काने जैसे गंभीर किस्म के आरोप थे।
नायर समुदाय के 14.5% वोटर्स को लुभाने के लिए केस वापस लिए
नायर सर्विस राज्य की एक बड़ी धार्मिक सोसाइटी है। इस समुदाय के लोग सबरीमाला आंदोलन में सबसे आगे थे। इस समुदाय के राज्य में 14.5% वोटर्स भी हैं। सरकार के सबरीमाला मामले में दर्ज केस वापस लेने के फैसले के तुरंत बाद ही पुलिस ने इस फैसले को लागू भी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के फैसले के विरोध में आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में पूरे राज्य 87600 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। 16700 लोग हिरासत में भी लिए गए थे। इन पर हिंसा के लिए उकसाने जैसी गंभीर धारायें भी थीं। इसके बाद CAA प्रोटेस्ट में 490 के खिलाफ केस दर्ज हुए थे।

केरल में 6 अप्रैल से विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं जिसके परिणाम 2 मई को आएंगे। इसको लेकर राजनीतिक दलों ने प्रचार करना शुरू कर दिया है। दीवारों पर पेंटिग्स की जा रही है।
पीएससी रैंक होल्डर्स के प्रदर्शन के बाद 361 नई पोस्ट क्रिएट की
विजयन सरकार के खिलाफ पीएससी रैंक होल्डर्स एक महीने से तिरुवनंतपुरम् में विधानसभा के आगे धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों से मिलने दो दिन पहले राहुल गांधी भी पहुंचे थे। इस प्रदर्शन में लास्ट ग्रेड सर्वेंट और सिविल पुलिस ऑफिसर शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हाल में सरकार ने चुपके से एक लाख से ज्यादा ऐसे संविदा कर्मचारियों को नियमित किया है, जो सीपीएम के कैडर से जुड़े हुए हैं। इन आरोपों और प्रदर्शनों के चलते ही बुधवार को विजयन सरकार ने अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में 361 नई पोस्ट क्रिएट करने का निर्णय लिया। जिसमें 82 पोस्ट 2015 के नेशनल गेम्स में पदक जीतने वालों के लिए हैं।
अमेरिकी कंपनी के साथ 2950 करोड़ रुपए की फिशिंग डील रद्द
विजयन सरकार ने गुपचुप तरीके से कुछ दिन पहले एक फिशिंग डील की थी। इसको लेकर केरल के लोगों में काफी चर्चा है। 2950 करोड़ की यह डील केरल शिपिंग एंड इनलैंड निविगेशन कॉपोरेशन (KSINC) और अमेरिकी कंपनी ईएमसीसी इंटरनेशनल के बीच हुई। इसके लिए बकायदा दो MOU भी साइन किए गए थे। इससे ईएमसीसी इंटरनेशनल को राज्य से सटी समुद्री सीमा के अंदर फिशिंग ट्रेवलर्स, हार्बर्स और पोर्ट डेवलप करने की अनुमति दी गई थी।

भाजपा केरल में अपनी पैठ बनाने में जुटी है। जगह-जगह पार्टी के पोस्टर्स और झंडे लगे हैं।
इस डील को लेकर विधानसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस के नेता रमेश चेन्निथाला अपनी ऐश्वर्य यात्रा में सरकार पर जमकर निशाना साध रहे थे। वो सरकार पर फाउल प्ले का आरोप लगा रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री विजयन ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें इस डील के बारे में मालूम भी नहीं है। तीन दिन पहले उनकी ही कैबिनेट ने इस डील को कैंसिल कर दिया। वहीं, कांग्रेस अब राज्य के मत्स्य पालन मंत्री का इस्तीफा मांग रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन कहते हैं, ‘यह डील कैसे की? इस बारे केंद्र ने राज्य सरकार से सवाल पूछे हैं।
केरल में एक भी इश्यू पॉलिटिकल सरकार बदलने के लिए काफी होता है
कोच्चि में सेंटर्स फॉर पब्लिक रिसर्च (सीपीपीसी) के चेयरमैन डॉक्टर धनुराज कहते हैं, ‘विजयन विपक्ष के दबाव और वोट खोने के डर के चलते ही अपने फैसले बदलने को मजबूर हुए हैं। इसके साथ ही विजयन लोकल बॉडी चुनाव में मिली जीत के अति आत्मविश्वास से भी बचना भी चाहते हैं। उन्हें यह भी पता है कि केरल में एक भी इश्यू सरकार बदलने के लिए काफी होता है। यहां 4% से 5% वोट स्विंग सरकार बदल देता है। इसलिए हर मुद्दे को चुनाव से पहले खत्म करना चाहते हैं।’
डॉक्टर धनुराज के मुताबिक, मछुआरों से जुड़ी फिशिंग डील का मुद्दा कोस्टल एरिया की सीटों के लिए काफी बड़ा है। इन इलाकों में लैटिन कैथोलिक समुदाय के मछुआरे बड़ी संख्या में रहते हैं। इस समुदाय से एलडीएफ में तीन विधायक हैं। त्रिवेंद्रम, अल्लेप्पी, कोल्लम और एर्नाकुलम जिले में इस समुदाय का काफी दबदबा है। राज्य में समुदाय के 8% से 9% वोटर्स हैं। इसलिए सरकार ने डील को कैंसिल किया है।

केरल में वॉल पोस्टर पॉलिटिक्स काफी लोकप्रिय है। राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार के लिए इस माध्यम का भरपूर इस्तेमाल करती हैं।
सबरीमाला के इश्यू पर विजयन सरकार हमेशा से दुविधा में रही है
सबरीमाला के मुद्दे पर विजयन सरकार ने अपना स्टैंड क्यों बदला? इस पर धनुराज कहते हैं कि इसको लेकर सरकार शुरू से दुविधा में रही है। अब ये फैसला नाराज लोगों को खुश करने के लिए लिया है, लेकिन इस मुद्दे पर राज्य में पक्ष दो मत थे, एक पक्ष पुरानी परंपरा के फेवर में था तो दूसरा पक्ष इसे बदलाव का आंदोलन बता रहा था। अब वो पक्ष सरकार से नाराज भी हो सकता है। हालांकि यहां दोनों पक्ष के लोगों को हमेशा से महसूस होता रहा है कि सरकार ने उन्हें धोखे में रखा।
केरल में इन्फ्रास्ट्रक्चर, फूड और जॉब बड़ा मुद्दा है
केरल विधानसभा चुनावों में तीन बड़े फैक्टर क्या हैं? इस पर धुनराज कहते हैं कि मुझे लगता है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर, फूड और जॉब के मुद्दे केरल में चलने वाले हैं। केरल की जनता बहुत अवेयर है, वह सबकुछ जानती है कि राज्य से लेकर देश और दुनिया में क्या चल रहा है।





