नई दिल्ली
आम बजट में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवाओं पर कई बड़े ऐलान किए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का बजट बढ़ा है और इससे वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के लिए रास्ता खुलेगा, लेकिन रोजगार और किसानों की आय जैसे मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ये फिर पीछे रह गए हैं। भास्कर ने बजट का एनालिसिस किया और इस पर विशेषज्ञों से राय ली। इस आधार पर जानिए बजट की 5 अच्छी और 5 खराब बातें…
5 अच्छी बातें…
1. PM आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना: सरकार ने बजट में हेल्थ सेक्टर पर फोकस किया है। इसमें 64,180 करोड़ रुपए की नई PM आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना शामिल है। योजना के तहत 70 हजार गांवों में वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे।
- कोरोना वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ रुपए। मिशन पोषण 2.0 लॉन्च होगा।
- हेल्थ सेक्टर पर अगले साल 2.87 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
असर: गांवों में रहने वाली देश की करीब 60% से ज्यादा आबादी को फायदा होगा।
हेल्थ संबंधी घोषणाओं की जानकारी यहां क्लिक कर ले सकते हैं
2. रेल, सड़क, बस और मेट्रो: सरकार ने रेल, बस, सड़क और मेट्रो को लेकर बड़े ऐलान किए गए हैं। शहरी इलाकों में 20 हजार नई बसें चलाई जाएंगी। टियर-2 शहरों में लाइट मेट्रो और नियो मेट्रो चलाई जाएंगी। इटारसी-विजयवाड़ा में फ्यूचर रेडी कॉरिडोर बनाया जाएगा।
- अगले साल तक 8500 किलोमीटर के रोड प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
- सड़क मंत्रालय को 1.18 लाख करोड़ रुपए, रेलवे को 1.1 लाख करोड़ रुपए मिले।
असर: इससे देशवासियों को बेहतर और विश्वस्तरीय परिवहन सेवाएं मिलेंगी।
3. इनकम टैक्स में बढ़ोतरी नहीं: कोरोना के कारण सरकार की आय में कमी आई थी, जबकि खर्च में बढ़ोतरी हो गई थी। ऐसे में इनकम टैक्स में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन सरकार ने इनकम टैक्स में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
- टैक्स देने वालों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। नए करदाताओं को भी राहत।
- 75 साल और उससे ज्यादा उम्र के सीनियर सिटीजन रिटर्न फाइलिंग से छूट मिली।
असर: देश में करीब 6 करोड़ करदाता हैं। इनमें से करीब 3 करोड़ इंडिवुजुअल टैक्स पेयर्स हैं। इन पर फैसले का पॉजिटिव असर होगा।
4. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस: बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस किया गया है। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के जरिए 7400 प्रोजेक्ट लाए जाएंगे। 13 सेक्टर्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को लाया जाएगा।
- अगले 3 साल में देशभर में 7 टैक्सटाइल पार्क बनाए जाने की योजना।
- इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट की फंडिंग के लिए नया बैंक बनाया जाएगा।
- असर: देश में कारोबारी गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के मौके पैदा होंगे।
5. सस्ती ज्वैलरी खरीद सकेंगी महिलाएं: ज्वैलरी की शौकीन महिलाओं के लिए बजट अच्छा है। सरकार ने सोना-चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी को 12.5% से घटाकर 7.5% कर दिया है। हालांकि, सरकार ने 2.5% का अतिरिक्त कर लगाया है।
- अब सोना-चांदी के आयात पर कुल 10.75% कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी।
- कस्टम ड्यूटी में कटौती से ज्वैलरी की कीमतों में कमी आएगी।
असर: करीब 50 करोड़ महिलाएं सस्ती दरों पर ज्वैलरी खरीद सकेंगी।
एक क्लिक में जानिए कौन सी वस्तुएं सस्ती और कौन सी महंगी हुईं
(कृषि एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा, क्रेडाई के नेशनल चेयरमैन जक्षय शाह, इमामी लिमिटेड के डायरेक्टर हर्ष अग्रवाल से बातचीत के आधार पर बजट की पॉजिटिव बातें सामने आईं।)
5 खराब बातें…
1. नौकरियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं: बजट में रोजगार की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इससे युवाओं के नौकरी और रोजगार के सपने को धक्का लगा है। हालांकि, सरकार ने डेढ़ लाख नौकरियों का ऐलान किया है।
- युवाओं को रोजगार कैसे और किस तरह का मिलेगा, इसकी जानकारी नहीं दी।
- सरकारी नौकरियों को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।
असर: इससे करीब 20 करोड़ लोगों को मायूसी मिली है। इनमें नौकरी की आस लगाए करीब 4 करोड़ छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं।
2. किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस नहीं: खेती-किसानी पर अगले साल 1.72 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान किया गया है। इसमें 1 हजार नई मंडियों, कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) के लिए एग्री फंड, 5 नए फिशिंग हब और ग्रामीण इंफ्रा पर 40 हजार करोड़ खर्च करने का ऐलान किया गया है।
- किसानों की आय बढ़ाने पर कोई फोकस नहीं। पीएम किसान की राशि में बढ़ोतरी नहीं।
- किसानों के लिए फायदेमंद योजनाओं और आय पर विचार के लिए आयोग का गठन नहीं।
असर: करीब 14 करोड़ किसानों को आमदनी के मोर्चे पर मायूसी मिली है।
3. घर का सपना फिर अधूरा: कोरोना महामारी ने अपने घर की अहमियत बता दी है। ऐसे में नए घर खरीदने पर छूट की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अपने घर का सपना देख रहे लोगों को एक बार फिर निराशा मिली है।
- घर खरीदने पर छूट संबंधी कोई नई घोषणा नहीं। नई आवासीय स्कीम भी नदारद रही।
- सस्ते घर खरीदने पर टैक्स में मिलने वाली 1.5 लाख रुपए की छूट को 1 साल के लिए बढ़ाया। नया कुछ नहीं।
असर: अपने घर की राह देख रहे करीब 5 करोड़ परिवारों को और इंतजार करना होगा।
4. कमाई का रोडमैप नहीं, उधारी पर जोर: बजट में खर्च के लिए 34.83 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। लेकिन इस बजट में कमाई का कोई रोडमैप नहीं बताया गया है। इस बार लोन पर ज्यादा फोकस है। हालांकि, पेट्रोल पर 2.5 और डीजल पर 4 रुपए का एग्री सेस लगाया गया है, जिससे रेवेन्यू बढ़ेगा पर बहुत ज्यादा नहीं।
- अगले साल 12 लाख करोड़ रुपए का लोन लेने का टारगेट है।
- टैक्स के जरिए 15.45 लाख करोड़ रुपए की कमाई होने का अनुमान है।
असर: इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा। लोन पर ब्याज चुकाने में ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
5. सरकारी संपत्ति की बिक्री पर जोर: इस बजट में सरकारी संपत्ति की बिक्री पर ज्यादा फोकस है। सरकार इस साल बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैक, बीईएमएल, पवन हंस, नीलांचल इंस्पात निगम लिमिटेड को बेचना चाहती है।
- दो सरकारी बैंक और एक सरकारी बीमा कंपनियों का निजीकरण किया जाएगा।
- असेट्स की बिक्री से मिलने वाली राशि का लक्ष्य घटाकर 1.75 लाख करोड़ रु. किया।
असर: इस कदम से युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के मौके कम होंगे और निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।





