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मंदसौर में 6 जून 2017 को हुए थे 6 किसान शहीद….श्रद्धांजलि देंगे देश के किसान मजदूर और समर्थक भी !

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मंदसौर मध्य प्रदेश में  संघर्षशील निरपराध किसानों की हत्या हुई थी *6 जून 2017* के रोज । इसके लिए अपराधी साबित होने ही थे मध्यप्रदेश के राजनेता और अधिकारी । जाँच आयोग की रिपोर्ट असत्यवादी ठहरी । उस समय की भाजपा सरकार ने  किसानों को ही अपराधी बनाकर उन पर झूठे प्रकरण दर्ज किए थे । आज भी उनमें से कुछ प्रलंबित है ।
मंदसौर की शहादत से ही प्रेरणा लेकर बना था अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय । देश भर के 250 किसान संगठनों ने एक होकर दो माँगे उठाई और संसद में विधेयक पेश किए । एक था संपूर्ण कर्ज मुक्ति का और दूसरा हर उपज के सही दाम का । इसी से उभरे किसान आंदोलन ने 10 हजार किलोमीटर की राष्ट्रीय यात्रा के द्वारा जनजागृति लाई और जनशक्ति जुटाई । दो बार संसद मार्ग घेरकर किसान जनसंसद और महिला जनसंसद भी आयोजित की । हर राजनैतिक पार्टी ने किसानों के मुद्दे पर चुनाव लड़े और आश्वासन दिए लेकिन कृषि में घाटे का सौदा और उसी से आत्महत्या के लिए मजबूर होते रहे किसान ! 
 *आखिर में 26 नवंबर 2020 को 550 संगठनों* का संयुक्त मोर्चा बना और दिल्ली के द्वार पर रोके गए किसानों ने अपना अनिश्चितकालीन डेरा और घेरा डाला । 6 महीने से चल रहे इस आंदोलन ने देश और दुनिया को हिला दिया है, 500 से अधिक किसानों की शहादत से और चुनावी राजनीति में हस्तक्षेप से भी मोदी शासन को चुनौती दी है । किसान विरोधी कानूनों के वापसी पर तथा हर खेती उपज – फल, सब्जी, दूध, मछली, वनोपज – के सही दाम के मुद्दे पर । 
जबरन भूमि अधिग्रहण, फसल बीमा, नदी और समुद्र किनारे पर्यटन, सूखा और बाढ़ के प्रभावित किसानों का विस्थापन और वंचना तथा दलित आदिवासियों की भूमि पर अतिक्रमण से किसानों की लूट और पीड़ा बढ़ती रही ही । भूमि अधिग्रहण पर्यावरण एवं राजस्व कानूनों में भी किसान विरोधी कानूनों में बदलाव या अमल में कमजोरी लायी गयी है । इस परिपेक्ष्य में अन्य क्षेत्रों के बाद कृषि पर  भी थोपे जा रहे कॉरपोरेटीकरण को भी खड़ी चुनौती दे रहे है किसान, पंजाब, हरियाणा और अन्य कई राज्यों में । निजीकरण के विरोध में लड़  रहे श्रमिक संगठनों के साथ भी किसान – मजदूरों का अब व्यापक समन्वय बन चुका है । 
इस साल भी *6 जून 2021* के दिन देशभर के किसान मजदूर और प्रकृति पर जीनेवाले सभी समुदायों के लोग याद करेंगे मंदसौर से दिल्ली और देशभर के शहीद किसानों को और माँग करेंगे झूठे अपराधी प्रकरणों की वापसी की । भाजपा के विधायक – सांसदों के या शासकीय भवन के सामने तीन कानूनों की प्रतियाँ जलाएँगे । संयुक्त किसान मोर्चा का भी यही है ऐलान । 
 **मंदसौर में भी होगा प्रत्यक्ष कार्यक्रम -*  *श्रद्धांजलि और संकल्प सभा :-*  *सुबह 10 बजे ग्राम टकरावद*  *सुबह 10.30 बजे चिल्लोद पिपलिया* *दोपहर 12.30 बजे पंथ-बरखेड़ा पहुँच कर सभी 6 शहीद किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे ।*  आप सबको ऐलान है कि आप सबको संभव हो तो मंदसौर के कार्यक्रम में जरूर शामिल हो,  अगर संभव ना हो तो अपने राज्य, जिले, तहसील, गाँव या बस्ती में यही कार्यक्रम जरूर आयोजित करे । 
याद रखिए 5 जून जय प्रकाश नारायण जी विचारों पर आधारित संपूर्ण क्रांति दिवस है । 5 जून विश्व पर्यावरण दिन के तौर पर मनाया जाता है । *आइए हम सब 5 जून को शहीद किसानों के नाम एक – एक पौधा लगाए ।* *हम संकल्प ले संपूर्ण क्रांति का, हम विश्वास निर्माण करे किसान आंदोलन के जरिए परिवर्तन लाने का ।* हम सबकी एकजुटता जिंदाबाद । शहीद किसान अमर रहे  ।
 *खेत – खेती – किसानी बचाओ । देश बचाओ ।* 
 *आपके साथी,
 *मालवा किसान संगठन* से अमतराम पाटीदार, दिलीप पाटीदार, महेश जी व्यास, राजेंद्र जी पुरोहित, हसराज जी पटेल, वल्लभ पाटीदार, मुरली पाटीदार, भरत सिंह  बोराणा, रामचंद्र  पाटीदार, बाबूलाल  पाटीदार, परमानंद जी पाटीदार, गोविंद पाटीदार, शम्भु पाटीदार और समस्त  किसान बंधुओं की ओर से। 
 *मेधा पाटकर (जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय व सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा )*

Ramswaroop Mantri

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