
मुनेश त्यागी
मोदी सरकार के 8 सालों में भारतीय समाज में जो सबसे बड़ी बात हुई है वह हिंदू मुसलमान के बीच में नफरत पैदा की गई है। इसके लिए पूरे भारत और देश को नुकसान पहुंचाने के लिए हिंदू मुसलमान में नफरत और हिंसा भारी मुहिम चलाई गई है, जिसका खामियाजा आज देश भुगत रहा है। आज देश में सांप्रदायिक तनाव, नफरत और हिंसा का ध्रुवीकरण हो रहा है। लोगों को हिंदू मुसलमान में बांटा जा रहा है और मोदी सरकार और आरएसएस के विभिन्न संगठन सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मुहिम को लगातार विस्तृत और गहरा कर रहे हैं आज समाज में नफरत मुसलमानों के प्रति जितनी नफरत है इतनी नफरत इससे पहले कभी नहीं हुई थी।
भारतीय समाज में मोदी सरकार आने के बाद मनुवादी विचारों की मुहिम के सामने संविधान गौण और बौना होता जा रहा है। आज भारत को फिर से हिंदुत्ववादी राष्ट्र यानी हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश जारी है और पिछले दरवाजे से मनुवादी विचारों को हमारे समाज के अंदर और सरकार की प्रणाली के अंदर प्रवेश कराया जा रहा है जिससे संविधान की प्रक्रिया और व्यवहार वास्तव में गुम हो गया है संविधान के प्रावधानों को जरूरी प्रावधानों को धता बताया जा रहा है। सरकार चुनी हुई तानाशाही में तब्दील हो गई है।
मोदी सरकार के आने के बाद हमारे समाज में धर्मांधता और अंधविश्वास का सैलाब बढ़ता जा रहा है। लोग अपनी रोटी कपड़ा मकान शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए मंदिरों मस्जिदों के चक्कर लगा रहे हैं, नदियों नालों के चक्कर काट रहे हैं, स्नान कर रहे हैं, कुंडों में जा रहे हैं और यहीं पर तर्क और विवेक को जैसे देश निकाला दे दिया गया है। तर्क, विवेक, विश्लेषण और अनुसंधान की बातें करने वाले लोगों को, बुद्धिजीवियों को, लेखकों को देशद्रोही बताया जा रहा है।
भारतीय संविधान, वैज्ञानिक संस्कृति को बढ़ाने और प्रचार-प्रसार करने की बात करता है मगर मोदी सरकार ने वैज्ञानिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने की बात को ताक पर रख दिया है और सरकार के अधिकांश मंत्री और भारतीय समाज का बड़ा हिस्सा अंधविश्वास और धर्मांधता की दलदल में फंस गया है। उन्होंने ज्ञान विज्ञान तर्क विवेक अनुसंधान विश्लेषण और अन्वेषण को तिलांजलि दे दी है, अपने सोचने समझने के तरीके से दूर कर दिया है।
मोदी सरकार के आने के बाद भारत की विदेश नीति में अमेरिका के प्रति झुकाव बढा है। भारतीय जनता और भारतीय राष्ट्र का कल्याण अमेरिका के साथ रहकर नहीं हो सकता, बल्कि भारत राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए, भारतीय जनता के हितों को आगे बढ़ाने के लिए, भारत की विदेश नीति को स्वतंत्र रूप से धारण करना चाहिए, क्योंकि अमेरिका और उसकी राष्ट्रीय कंपनियां केवल अपने बारे में सोचती हैं, अपने मुनाफे बढ़ाने के बारे में सोचती हैं और अपने व्यापार और उद्योग धंधों के साम्राज्य स्थापित करना चाहती हैं। उनको भारत की जनता के कष्टों, परेशानियों, असुविधाओं और सुख-दुख से कोई लेना देना नहीं है।
मोदी सरकार के आने के बाद केवल नारे और वादे किए गए हैं और अब ये सब जुमलों में बदल गए हैं। मोदी सरकार ने जो वादे किए थे, जो नारे जनता को दिए थे, उन सब को भुला दिया गया है और अब जनता महंगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार, भुखमरी, अन्याय, बेरोजगारी, सांप्रदायिकता और जातिवाद के अग्निकुंड और दलदल में फंस गई है। सरकार जैसे अपने वादों को भूल गई है।
हमारे मोदी सरकार आने के बाद में देश में बेरोजगारी चरम पर है। आज आजादी के बाद हमारे देश में आज बेरोजगारी अपने चरम पर है। लगभग 50 करोड़ लोगों ने तो रोजगार ढूंढना ही छोड़ दिया है क्योंकि चारों तरफ बेरोजगारी का साम्राज्य है। रोजगार के कहीं दर्शन नहीं हो रहे हैं। पिछले दिनों देखा गया है कि सरकार की नीतियों के कारण, लोगों को रोजगार मिलने के स्थान पर, उनके रोजगार छीने गए हैं, उनकी तनख्वाह में कटौती की गई है और उनका जीना दूभर कर दिया गया है। उनके परिवार तरह तरह के कष्ट झेल रहे हैं, मगर इनसे निकलने का कोई रास्ता उन्हें नजर नहीं आ रहा है।
मोदी सरकार आने के बाद अन्याय का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है। इस समय देश में चार करोड़ 80 लाख मुकदमें पेंडिंग हैं मगर सरकार का जनता को सस्ता और सुलभ न्याय देने का कोई इरादा नहीं है, न्याय का उसका कोई एजेंडा नहीं है। मुकदमों के अनुपात में जज नहीं है। 80 परसेंट बाबूओं की सीट खाली पड़ी हैं मगर सरकार उनको भरने को तैयार नहीं है। 40 परसेंट हाई कोर्ट जजेस की सीटें खाली पड़ी हैं, सरकार उनको नहीं भर रही है और 25 परसेंट सीटें निचली अदालतों में खाली पड़ी हैं, सरकार उनको भी नहीं भर रही है और जनता न्याय मांगती मांगती थक गई हैं। अचम्भा तो यह है कि आज भी 40 साल पुराने मुकदमें लंबित हैं और जनता को जैसे जानबूझकर सस्ते और सुलभ न्याय से वंचित किया जा रहा है।
मोदी सरकार आने के बाद पिछले 8 साल में 90% परिवारों की आय में लगातार गिरावट होती जा रही है। परिवारों के लड़के लड़कियां बेरोजगारी का शिकार हैं। लगातार कोशिश करने के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं मिल रहे हैं जो रोजगार थे, वे भी छीन रहे हैं। इस प्रकार 90 फ़ीसदी परिवारों की आय घट गई है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से इस वक्त देश में 80 करोड़ गरीब लोग मौजूद हैं। उनके पास कोई रोजगार और जीवन चलाने का जरिया नहीं है।
मोदी सरकार आने के बाद आज मजदूरों को आधुनिक गुलाम बनाए जाने की मुहिम जारी है और मजदूरों से वह सारे कानून छीन लिए गए हैं जिनसे उनका भला होता था, उनका कल्याण होता था, उनकी नौकरी बची रहती थी और सरकार और प्राइवेट मालिकों की निरंकुशता पर और मनमानेपन पर अंकुश लगता था। स्थाई नौकरी का अधिकार छीन लिया गया है, पेंशन का अधिकार छीन लिया गया है और चार श्रम संहिताऐं लाकर सरकार ने मजदूरों को आधुनिक गुलाम बना दिया है। और ये कानून मालिकों को संतुष्ट करने के लिए, उनका मुनाफा बढ़ाने के लिए लाए गए हैं जिनमें मजदूरों के कार्यकाल और कार्य दिवस के बारे में कुछ नहीं सोचा समझा गया है।
मोदी सरकार आने के बाद भारत का चुनाव आयोग भी पक्षपात के दायरे में है उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और आज लगता है कि जैसे चुनाव आयोग की स्वायत्तता खत्म हो गई है और वह सरकार की मशीनरी बन गया है, सरकार का चाटुकार बन गया है उसने अपनी स्वतंत्र भूमिका को तिलांजलि दे दी है।
भारत का मीडिया जिसे भारत का चौथा स्तंभ समझा जाता था, जनता का पैरोकार और जनता का वकील समझा जाता था, आज उसे मोदी सरकार के 8 साल के कार्यकाल ने बिल्कुल पंगु बना दिया है। आज वह जनता का पैरोकार नहीं बल्कि चंद पूंजीपतियों, पैसे वालों का और धन्ना सेठों का पैरोकार बन गया है। आज वह जनता की समस्याओं के बारे में, उनकी रोजी-रोटी के बारे में कोई चर्चा नहीं करता। वह सिर्फ और सिर्फ पूंजी पतियों को सत्ता में बनाए रखने की बात करता है और आज का गोदी मीडिया हिंदू मुस्लिम नफरत फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है और उसने हिंदू मुस्लिम नफरत और हिंसा को देश के कोने कोने में पहुंचा दिया है। सरकार ने अपने गोदी मीडिया को जनता के मुद्दों से उनकी समस्याओं से शोषण जुल्म अन्याय भेदभाव की बात करने से बिल्कुल बेरुख कर दिया है। इसका सबसे बड़ा श्रेय मोदी सरकार को जाता है और मोदी सरकार के 8 साल की कार्यकाल की, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
यह कहना गलत है कि मोदी सरकार ने आठ पहले सत्ता में आकर कुछ नहीं किया है। हां मोदी सरकार ने किसानों, बेरोजगारों और मजदूरों के लिए कुछ नहीं किया है। मगर मोदी सरकार ने देशी विदेशी पूंजिपतियों के लिए, इस देश के धन्नासेठों के लिए, देश और दुनिया के पैसे वालों के लिए बहुत कुछ किया है, देश के दरवाजे उनके लिए खोल दिए हैं और जो कुछ भी किया है मोदी सरकार ने केवल उन्हीं के लिए ही तो किया है। अदानी अंबानी की संपत्ति आ पिछले 8 साल में 20 गुणा बढ़ गई हैं। अदानी दुनिया के सबसे बड़े पांच पूंजीपतियों में शामिल हो गया है।
अगर इस देश में उन्नति हुई है, इस देश में प्रगति और विकास हुआ है, तो वह पैसे वालों का साम्राज्य बढ़ाने का विकास हुआ है। मोदी सरकार देशी विदेशी मालिकान और सेवायोजकों और पैसे वालों के साम्राज्य को बढ़ाने के लिए शीर्ष पर विद्यमान हैं और मोदी सरकार के पिछले 8 वर्ष, भारत के विकास के नहीं, भारत की जनता के सबसे बड़े विनाश के 8 वर्ष रहे हैं।





