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ब्रेकिंग समाचार –  ज्ञानेश और संधू होंगे नए चुनाव आयुक्त,सीजेआई को चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से हटाने के खिलाफ सुनवाई आज,लोकसभा चुनाव से पहले सस्‍ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा 

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भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उनका स्वागत किया। वहीं कांग्रेस से निलंबित सांसद और पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर आज दिल्ली में बीजेपी में शामिल हुईं। उधर केंद्र सरकार ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग में निर्वाच आयुक्त के दो खाली पदों को भर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू को नया निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया है। दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से रिटायर्ड हुए हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले सस्‍ते पेट्रोल और डीजल का तोहफा

लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। नई कीमतें 15 मार्च 2024 यानी शुक्रवार सुबह 6 बजे से प्रभावी होंगी। हाल ही में लि‍क्‍व‍िफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और कम्‍प्रेस्‍ड नैचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में कटौती के साथ अटकलें लगाई जा रही थीं कि आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती हो सकती है।

तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने बताया है कि उन्होंने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव किया है। नई कीमतें शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू होंगी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी से उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा। डीजल से चलने वाले 58 लाख से ज्‍यादा भारी माल वाहनों, 6 करोड़ कारों और 27 करोड़ दोपहिया वाहनों की परिचालन लागत कम हो जाएगी।

कई तरह के होंगे फायदे

पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने से कई तरह के फायदे होंंगे। इससे लोगों की डिस्‍पोजेबल इनकम बढ़ेगी। टूरिज्‍म और ट्रैवल इंडस्‍ट्री को बढ़ावा मिलेगा। महंगाई कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। उपभोक्ता विश्वास और खर्च में बढ़ोतरी होगी। परिवहन पर निर्भर व्यवसायों के लिए खर्च में कमी आएगी। लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और खुदरा क्षेत्रों के लिए प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ेगी। किसानों के लिए ट्रैक्टर संचालन और पंप सेट पर खर्च कम होगा।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले सप्ताह कहा था कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कमी एक ऐसा निर्णय है जिस पर अस्थिरता को देखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (ओएमसी) को बहुत ठंडे दिमाग से विचार करना होगा। इसमें ग्‍लोबल एनर्जी मार्केट, भू-राजनीतिक चुनौतियों और कंपनियों की वित्तीय सेहत देखनी होगी। पुरी ने यह संकेत भी द‍िया था क‍ि ईंधन बिक्री पर प्रॉफ‍िटेब‍िल‍िटी के मामले में ओएमसी अभी भी पूरी तरह से मुश्किल से बाहर नहीं आई हैं। वे अभी भी डीजल बिक्री पर अंडर-रिकवरी कर रही हैं। लेकिन, उन्होंने इसकी मात्रा तय नहीं की है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “पेट्रोल और डीज़ल के दाम ₹2 रुपये कम करके देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि करोड़ों भारतीयों के अपने परिवार का हित और सुविधा सदैव उनका लक्ष्य है।”

भूटा

ढूंढने पर भी पहले नहीं मिलते थे उम्मीदवार, अब हर सीट पर औसत 14 प्रत्याशी, 1957 में 3 थी संख्या

Earlier Shortage for candidates of lok sabha now 14 candidates per seat

लोकसभा चुनावों के शुरुआती दौर में जहां उम्मीदवार ढूंढ़े नहीं मिलते थे, वहीं अब ताल ठोकने वालों की कमी नहीं है। 1952 में हुए पहले आम चुनाव में हर सीट पर औसतन 3 प्रत्याशी थे। 2019 में 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में यह संख्या बढ़कर प्रति सीट 14 हो गई। यानी, 67 साल में हर सीट पर जोर-आजमाइश करने वालों की संख्या में औसतन चार गुना का इजाफा हुआ है।चुनाव आयोग ने 1996 के बाद जमानत राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी। इसका असर 1998 के आम चुनाव में दिखा जब प्रति सीट प्रत्याशियों की औसत संख्या घटकर 8.75 रह गई। इस चुनाव में 4,750 उम्मीदवार लड़े जो 1996 के मुकाबले 9,202 कम थे।

11वीं लोकसभा चुनाव (1996) में हर सीट से औसतन 25 उम्मीदवार मैदान में उतरे, जो अब तक का रिकॉर्ड है। तब कुल 13,952 प्रत्याशी थे। यह अब तक किसी भी लोकसभा चुनाव में उतरे उम्मीदवारों की सबसे अधिक संख्या है। दरअसल, 1996 के आम चुनाव तक उम्मीदवारों की जमानत राशि मात्र 500 रुपये थी। ऐसा माना जाता है कि 1980 से 1996 के बीच लोकसभा चुनावों में प्रत्याशियों की संख्या बढ़ने के पीछे यह एक महत्वपूर्ण कारण था।

चुनावी ताल, जमानत राशि बढ़ी तो घटे उम्मीदवार
चुनाव आयोग ने 1996 के बाद जमानत राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी। इसका असर 1998 के आम चुनाव में दिखा जब प्रति सीट प्रत्याशियों की औसत संख्या घटकर 8.75 रह गई। इस चुनाव में 4,750 उम्मीदवार लड़े जो 1996 के मुकाबले 9,202 कम थे। हालांकि, बाद में प्रत्याशियों की संख्या फिर बढ़ने लगी और 17वीं लोकसभा चुनाव तक प्रति सीट औसत संख्या 14 पहुंच गई। वर्तमान में चुनाव आयोग ने सामान्य प्रत्याशियों के लिए जमानत राशि 25 हजार रुपये कर दी है।

नमो ड्रोन दीदी के जवाब में कांग्रेस की नारी न्याय गारंटी, आधी आबादी के आशीर्वाद के लिए रणनीति

Namo Drone Didi Congress guarantee of women justice blessings of half population

आजादी के बाद अब तक हुए 17 चुनावों में कई नए और अहम वोट बैंक बने हैं। हालांकि, पहली बार देश की आधी आबादी आगामी लोकसभा चुनाव के केंद्र में है। सशक्तीकरण की राह पर मजबूत कदम बढ़ा चुकी महिलाएं अचानक से देश की राजनीति में नए और बेहद अहम वोट बैंक के रूप में सामने आई हैं। ऐसा वोट बैंक, जिसने बीते पांच सालों में हुए 23 राज्यों में से 18 राज्यों के चुनावों में पुरुषों के मुकाबले अधिक मतदान किया है। यही नहीं, वह अब स्वतंत्र सोच यानी स्वविवेक के आधार पर मतदान कर जनादेश को सीधे प्रभावित भी करने लगी है।अरसे बाद सशक्तीकरण की नई बयार देख रही देश की आधी आबादी धीरे-धीरे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही है। यह वर्ग मतदान के प्रति स्वतंत्र सोच के साथ नए वोट बैंक के रूप में उभरा है। सभी राजनीतिक दल महिलाओं को केंद्र में रखकर योजनाएं बना रहे हैं। बीते कुछ विधानसभा चुनावों की तरह इस बार भी यह वोट बैंक लोकसभा चुनाव में व्यापक असर डालने वाला है। 

हाल-फिलहाल में सभी राज्यों ने महिलाओं को आर्थिक मदद देने का दांव खेला और सफलता भी हासिल की। योजनाओं के केंद्र में भी महिलाएं ही हैं। बीते साल के अंत में हुए विधानसभा चुनाव को ही देखिए। आधी आबादी ने यहां नई पटकथा लिखी। नतीजे आने के बाद पता चला कि भाजपा को हिंदी पट्टी के तीन अहम राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में महिला वर्ग के अपार समर्थन का लाभ मिला। मध्यप्रदेश में शुरुआत में भाजपा पिछड़ती नजर आ रही थी, मगर लाडली बहना का ऐसा प्रचार-प्रसार हुआ कि विपक्षी दल कांग्रेस चुनौती ही नहीं पेश कर सकी। भाजपा को एकतरफा जीत हासिल हुई। वहीं, छत्तीसगढ़ में भाजपा ने महतारी वंदन योजना शुरू करने का वादा किया, तो महिलाओं ने भी भरोसा जताया। नतीजा यह निकला कि जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रही कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार को शिकस्त का सामना करना पड़ा।

कर्नाटक को देखिए। विपक्षी कांग्रेस ने सत्ता हासिल करने के लिए परिवार की महिला मुखिया को 2,000 रुपये प्रति माह देने, आधी आबादी के लिए मुफ्त बस यात्रा साहित अन्य वादे किए। जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया और महिलाओं का भरोसा ऐसा जीता कि सत्तारूढ़ भाजपा को उखाड़ फेंका। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक वित्तीय सहायता देने का वादा कर कांग्रेस सत्ता में लौटी और सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बनी। दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीएम महिला सम्मान योजना के तहत 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को प्रति माह 1,000 की सहायता देने की घोषणा की है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने भी आशा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पारिश्रमिक में 750 रुपये की मासिक बढ़ोतरी की घोषणा की है।

भाजपा: ड्रोन दीदी…शक्ति वंदन सशक्तीकरण पर कर रही भरोसा
भाजपा इस बड़े वोट बैंक को साधने के लिए महिला सशक्तीकरण का नारा गढ़ रही है। पार्टी के तरकश में संसद, विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम है। महिलाओं को लखपति बनाने के लिए मोदी सरकार ने ड्रोन दीदी की शुरुआत की। इसे मिले समर्थन को देखते हुए सरकार ने लखपति दीदी योजना का दायरा एक करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ कर दिया है। भाजपा ने इसी वोट बैंक को साधने के लिए उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलिंडर पर मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी को एक साल बढ़ाने और इसके बाद सभी परिवारों को 100 रुपये की अतिरिक्त छूट दी है। 2019 के चुनाव में उज्ज्वला ने भाजपा की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखी थी। 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त अनाज योजना का विस्तार करने की घोषणा भी आधी आबादी को ही साधे रखने की कवायद है।

कांग्रेस: नारी न्याय गारंटी, नौकरी में आधी हिस्सेदारी
महिलाओं को साधने के लिए कांग्रेस ने पांच गारंटियों की घोषणा की। इसमें सर्वाधिक गरीब हर परिवार की एक महिला को एक लाख रुपये वार्षिक नकद देने का वादा किया गया है। यही नहीं, केंद्र सरकार की नौकरियों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने का भी वादा किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नारी न्याय गारंटी का एलान करते हुए कहा कि शक्ति के सम्मान में आशा, आंगनबाड़ी और मध्याह्न भोजन कार्यकर्ताओं के मासिक वेतन में केंद्र सरकार का योगदान दोगुना किया जाएगा। अधिकार मैत्री के तहत हर पंचायत में महिलाओं को उनके हक के लिए जागरूक करने और जरूरी मदद के लिए अधिकार मैत्री के रूप में एक पैरा-लीगल यानी कानूनी सहायक की नियुक्ति की जाएगी। सभी जिला मुख्यालयों में कामकाजी महिलाओं के लिए कम से कम एक हॉस्टल बनाएंगे और पूरे देश में इन हॉस्टल की संख्या दोगुनी की जाएगी।

दुनिया भर में 23 करोड़ महिलाओं-बच्चियों ने झेली खतना की पीड़ा

23 crore women and girls suffered pain of circumcision an increase 15 percent

कुछ सामाजिक कुरीतियां ऐसी हैं जो सदियों बाद आज भी यथावत हैं। इनमें महिलाओं का फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) यानी खतना भी शामिल है। ऐसा करते समय उन्हें बेहोश या प्रभावित इलाके को सुन्न नहीं किया जाता और न ही कोई डॉक्टर निगरानी के लिए मौजूद होता है।संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 23 करोड़ महिलाएं और बच्चियां ऐसी हैं, जिन्होंने खतना का दर्द झेला है। वर्ष 2016 से तुलना करें तो पिछले आठ वर्षों में खतना करने वाली महिलाओं और बच्चियों की संख्या में तीन करोड़ यानी करीब 15 फीसदी का इजाफा हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 23 करोड़ महिलाएं और बच्चियां ऐसी हैं, जिन्होंने खतना का दर्द झेला है। वर्ष 2016 से तुलना करें तो पिछले आठ वर्षों में खतना करने वाली महिलाओं और बच्चियों की संख्या में तीन करोड़ यानी करीब 15 फीसदी का इजाफा हुआ है। दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में इस पर रोक के बावजूद यह प्रथा आज भी बेधड़क चल रही है। इक्वलिटी नाउ ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रथा दुनिया के 92 से ज्यादा देशों में जारी है। भारत भी इस कुरीति से अछूता नहीं है। भारत में दाऊदी बोहरा समुदाय की महिलाएं इस दर्दनाक त्रासदी को लगातार झेल रही हैं।  

सबसे ज्यादा दंश झेल रहा अफ्रीका, एशिया दूसरे नंबर पर
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 14.4 करोड़ से अधिक मामलों के साथ अफ्रीकी देश इसका सबसे अधिक दंश झेल रहे हैं। दूसरे नंबर पर एशिया है, जहां आठ करोड़ से अधिक मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मध्य पूर्व में खतना के 60 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह कुप्रथा छोटे, पृथक समुदायों और दुनिया भर में प्रवासियों के बीच भी व्याप्त है।

गरीब देशों में बदतर हो रही है स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में इस कुप्रथा का प्रसार तो नहीं हो रहा है, लेकिन जिन देशों में इसका चलन है, वहां पैदा होने वाली बच्चियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यूनिसेफ के विश्लेषण के अनुसार, खतना के बाद जीवित बच गई हर 10 में से चार बच्चियां उन देशों में रह रही हैं जो पहले ही गरीबी और संघर्ष की मार झेल रहे हैं। इन देशों में आबादी भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है।

उठाए जा रहे कदम पर्याप्त नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक इस दिशा में प्रगति हो रही है लेकिन रफ्तार बहुत धीमी है। इथोपिया जैसे कुछ देशों ने जरूर तेजी दिखाई है। संतोषजनक तथ्य यह है कि 30 वर्षों में जो प्रगति हुई है उसमें से करीब आधे से ज्यादा पिछले दशक में ही दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि इसके बावजूद प्रगति की यह रफ्तार 2030 तक इसके उन्मूलन लक्ष्य को हासिल करने के लिए नाकाफी रहेगी।

मात्र तीन कंपनियों ने ही 2744 करोड़ का दिया चंदा, ये हैं देश के शीर्ष 10 चुनावी दानकर्ता

Electoral Bond three companies donated Rs 2744 crore to parties Election Commission

राजनीतिक दलों को गोपनीय चंदा देने वाली चुनावी बॉन्ड योजना में शीर्ष तीन खरीदारों ने कुल 2,744 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जारी ब्योरे में स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल के अलावा सुनील मित्तल की भारती एयरटेल, अनिल अग्रवाल की वेदांता लि., आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों के नाम हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को एसबीआई से जानकारी मिलने के बाद आयोग ने शीर्ष कोर्ट की 15 मार्च की समयसीमा से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को ही पूरा ब्योरा अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया। पूरी जानकारी दो भाग में है। पहले भाग में तिथिवार बॉन्ड खरीदने वालों के नाम और बॉन्ड की राशि दर्ज है। दूसरे में तिथिवार बॉन्ड भुनाने वाली पार्टियों के नाम दिए गए हैं। चुनावी बांड के माध्यम से दान देने वाले व्यक्तियों में किरण मजूमदार शॉ, वरुण गुप्ता, बीके गोयनका, जैनेंद्र शाह और मोनिका के भी नाम शामिल हैं। 

एडीआर की रिपोर्ट में है यह दावा

  1. 16,518 करोड़ रुपये के कुल 28,030 चुनावी बांड बेचे गए
  2. भाजपा को 6,566 करोड़ रुपये चंदा मिला
  3. कांग्रेस को 1,123 करोड़ (मार्च 2018 से जनवरी 2024 तक के आंकड़े)

अन्जान कंपनी फ्यूचर गेमिंग ने सबसे अधिक 1,368 करोड़ के बॉन्ड खरीदे
दिलचस्प तथ्य है कि शीर्ष तीन में दो कंपनियां ऐसी हैं, जिनका नाम आम लोगों ने शायद ही सुना हो। लुधियाना की लॉटरी कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विस ने सबसे अधिक 1,368 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हंै। यह कंपनी 2022 में तब चर्चा में आई, जब प्रवर्तन निदेशालय ने इसकी विभिन्न इकाइयों के 409 करोड़ की परिसंपत्तियां जब्त कर ली थी। हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग व इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 966 करोड़ का चंदा दिया है। तीसरे नंबर पर मुंबई की कंपनी क्विक सप्लाई चेन है, जिसने 410 करोड़ के बॉन्ड खरीदे। शीर्ष दस कंपनियों में वेदांता, हल्दिया एनर्जी, भारती एयरटेल, एस्सेल माइनिंग, वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन, केवेंटर फुडपार्क इंफ्रा और मदनलाल लि. के नाम हैं।

ये हैं देश के शीर्ष 10 चुनावी दानकर्ता

  1. फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विस- 1,368
  2. मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर- 966
  3. क्विक सप्लाई चेन- 410
  4. वेदांता लि.- 398
  5. हल्दिया एनर्जी लि.- 377
  6. भारती ग्रुप- 247
  7. एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज- 224
  8. वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन- 220
  9. केवेंटर फुडपार्क इंफ्रा लि.- 195
  10. मदनलाल लि.- 185

(राशि करोड़ रुपये में)

ये हैं प्रमुख खरीददार कंपनियां
प्रमुख बॉन्ड खरीदारों में स्पाइसजेट, इंडिगो, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, मेघा इंजीनियरिंग, पीरामल एंटरप्राइजेज, टोरेंट पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ कमर्शियल डेवलपर्स, वेदांता लिमिटेड, अपोलो टायर्स, एडलवाइस, पीवीआर शामिल हैं। इनके अलावा केवेंटर, सुला वाइन, वेलस्पन, सन फार्मा, वर्धमान टेक्सटाइल्स, जिंदल ग्रुप, फिलिप्स कार्बन ब्लैक लिमिटेड, सीएट टायर्स, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, आईटीसी, केपी एंटरप्राइजेज, सिप्ला और अल्ट्राटेक सीमेंट ने भी बड़ी मात्रा में बॉन्ड खरीदे।

इन पार्टियों ने बॉन्ड भुनाए
बॉन्ड भुनाने वाली पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, एआईएडीएमके, बीआरएस, शिवसेना, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, डीएमके, जेडी-एस, एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, जेडीयू, आरजेडी, आप, समाजवादी पार्टी प्रमुख हैं। इनके अलावा जम्मू-कश्मीर नेशनल कान्फ्रेंस, बीजद, गोवा फॉरवर्ड पार्टी, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, जेएमएम, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट और जन सेना पार्टी भी शामिल हैं।

किस बॉन्ड को कौन सी पार्टी ने भुनाया इसकी जानकारी नहीं
पूरे ब्योरे में इस बात की जानकारी नहीं है कि किस बॉन्ड को कौनसी पार्टी ने भुनाया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि किसने किस पार्टी को चंदा दिया। 5 जनवरी से 10 जनवरी 2022 के बीच कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, तृणमूल तकरीबन सभी पार्टियों ने चुनावी बॉन्ड भुनाए हैं। ये जरूर है कि सबसे बड़ी राशि भाजपा ने भुनाई है। लेकिन ये कोई छिपा तथ्य नहीं है कि चुनावी बॉन्ड योजना में सबसे अधिक करीब 80 फीसदी चंदा भाजपा को मिला है।

गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल ने खरीदे 162 बॉन्ड, ज्यादातर 1 करोड़ के
गाजियाबाद स्थित यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने 162 बॉन्ड खरीदे, जिनमें से ज्यादातर 1 करोड़ रुपये के थे। वहीं बजाज ऑटो ने 18 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस ने 20 करोड़ रुपये, इंडिगो की तीन कंपनियों ने 36 करोड़ रुपये, स्पाइसजेट ने 65 लाख रुपये और इंडिगो के राहुल भाटिया ने 20 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। मुंबई स्थित क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने 410 करोड़ रुपये और हल्दिया एनर्जी ने 377 करोड़ रुपये के बांड खरीदे।

कांग्रेस, सपा ने अध्यक्ष के नाम पर भुनाए
अधिकांश बॉन्ड जहां राजनीतिक दलों के नाम पर जारी किए गए हैं, कांग्रेस व समाजवादी पार्टी को दिया गया चंदा क्रमश: ‘अध्यक्ष, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी’ और ‘अध्यक्ष समाजवादी पार्टी’ के नाम पर दिया गया।

सीजेआई को चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से हटाने के खिलाफ सुनवाई आज, कानून के अमल पर रोक लगाने की मांग

Supreme Court hearing on plea against law dropping CJI from committee to select CEC-EC news updates

सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति संबंधी चयन समिति में मुख्य न्यायाधीशों (सीजेआई) को शामिल नहीं करने के खिलाफ दायर याचिका पर आज (15 मार्च) को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की याचिका पर सुनवाई करेगी।एडीआर ने अपनी याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा सात की वैधता को चुनौती दी है और इसके अमल पर रोक लगाने की मांग की है। इस धारा के तहत मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखा गया है।

इसलिए महत्वपूर्ण
यह सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू को बृहस्पतिवार को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति ने चुना। 14 फरवरी को अनूप चंद्र पांडे की सेवानिवृत्ति और अरुण गोयल के अचानक इस्तीफे के बाद दो रिक्तियां उत्पन्न हुई थीं। नए कानून के तहत चयन समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और विपक्ष के नेता एवं प्रधानमंत्री की ओर से नामित एक केंद्रीय मंत्री इसके सदस्य होते हैं।  

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को चोट लगी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सिर में चोट लगी है। सिर में चोट लगने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। टीएमसी ने मुख्यमंत्री को चोट लगने की तस्वीर भी साझा की है। अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को बड़ी चोट लगी है। कुछ दिन पहले भी ममता बनर्जी को सिर में चोट आई थी।

ज्ञानेश और संधू होंगे नए चुनाव आयुक्त

ज्ञानेश कुमार और अधीर सुखबीर संधू देश के दो नए चुनाव आयुक्त होंगे। आज पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन दोनों नामों पर सहमति बन गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी इन नामों की जानकारी दी है।

न के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उनका स्वागत किया। वहीं कांग्रेस से निलंबित सांसद और पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर आज दिल्ली में बीजेपी में शामिल हुईं। उधर केंद्र सरकार ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग में निर्वाच आयुक्त के दो खाली पदों को भर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू को नया निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया है। दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से रिटायर्ड हुए हैं।के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उनका स्वागत किया। वहीं कांग्रेस से निलंबित सांसद और पंजाब के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर आज दिल्ली में बीजेपी में शामिल हुईं। उधर केंद्र सरकार ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग में निर्वाच आयुक्त के दो खाली पदों को भर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू को नया निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया है। दोनों भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से रिटायर्ड हुए हैं।

Ramswaroop Mantri

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