भोपाल। उद्यानिकी विभाग मध्यप्रदेश का ऐसा सरकारी महकमा बन चुका है, जहां अधिकारी हर योजना में खुलकर गड़बड़झाला करने से पीछे नहीं रहते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में हुए 100 करोड़ के घोटाले की जांच अभी ईओडब्ल्यू में चल ही रही है कि अफसरों ने दूसरा नया पचास करोड़ घोटाला कर दिया। यानी पिछले छह माह में ही डेढ़ सौ करोड़ का गड़बड़झाला किया गया। दरअसल विभाग को आगामी बजट के लिए महज 17 करोड़ रुपए प्रावधान हुआ है जिस पर अफसरों ने मिलीभगत करके पचास करोड़ के वर्क आर्डर जारी कर दिए। इस मामले की जब मुख्यमंत्री से लेकर अन्य आला अफसरों से शिकायत की गई, तब कहीं जाकर विभाग के आला अफसरों की नींद खुली। इसके बाद अब इसकी जांच एक पखवाड़े में कराने की बात कही जा रही है। दरअसल उद्यानिकी अफसरों ने केंद्रीय अनुदान वाली एमआईडीएच योजना में 17 करोड़ की वित्तीय मंजूरी वाले बजट की जगह 50 करोड़ रुपए के वर्क आॅर्डर चहेते लोगों को उपकृत करने के लिए जारी कर दिए। यही नहीं विभाग के अफसर इस योजना में भुगतान के लिए इतने उतावले बने हुए हैं कि उनके द्वारा इसके लिए तय नियमों व प्रावधानों को भी ताक पर रखकर केवल 15 दिन में किसानों के रजिस्ट्रेशन से लेकर, बीज-उपकरण वितरण और भुगतान की प्रक्रिया तक को शुरू कर दिया। नियमानुसार किसानों को किए जाने वाले भुगतान से पहले खेत में फसल के साथ फोटो लिए जाते हैं और उसके बाद उनका सत्यापन किया जाना आवश्यक होता है। यही नहीं अभी विभाग को इस योजना का बजट मिला भी नहीं है, क्योंकि अभी नया वित्त वर्ष शुरू ही नहीं हुआ है। इस वजह से विभाग के आला अफसरों ने मिलकर बजट की प्रत्याशा में यह सब काम शुरू कर दिए। पीएम और सीएम से इस मामले की शिकायत होने के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव केके सिंह और प्रमुख सचिव कल्पना श्रीवास्तव ने बजट की फाइल के साथ ही वर्मी बेड, बीज, किट से संबधित भी पूरी जानकारी का रिकॉर्ड बुलाया है। इस मामले में विभाग के आला अफसरों की मिली भगत होने की वजह से इस गड़बड़झाले की शिकायत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय को की गई। इसके बाद अब अनुदान वाली इस सब्जी-मसाला विस्तार योजना के बजट और आवंटन की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
100 करोड़ के यंत्रीकरण घोटाले में ईओडब्ल्यू ने फिर दिया नोटिस
पिछले वित्तीय वर्ष में इसी विभाग में हुए 100 करोड़ के यंत्रीकरण घोटाले की ईओडब्ल्यू में जांच छह महीने से अटकी हुई है। ईओडब्ल्यू को विभाग से कई बार रिकॉर्ड मांगने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराया गया। जिसके चलते अब दोबारा नोटिस थमाया गया है। इस मामले में केंद्र की योजना में गलत अनुदान मंजूर करने और भौतिक सत्यापन के बिना नकली टिलर का भुगतान करने की जांच होना है।
सीएम के निर्देश पर ईओडब्ल्यू को दी गई जांच
यंत्रीकरण योजना में एमपी एग्रो के एमडी आईएएस अफसर श्रीकांत बनोठ ने जांच में साफ लिखा था कि घोटाला बहुत बड़ा है। इसकी जांच ईओडब्ल्यू या लोकायुक्त से कराना होगी। इस पर मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने रिपोर्ट को अमान्य करने के साथ ही किसी भी बाहरी एजेंसी से जांच कराने से इंकार कर दिया था। उसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी थी। लेकिन विभाग ने रिकॉर्ड ही नहीं दिया।




