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जीत गए इंदौरी:निगम चुनाव में नुकसान के डर से घबराई सरकार झुकी; तीन गुना टैक्स वसूलने का फैसला टला

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इंदौर

नगर निगम की टैक्स बढ़ोतरी को लेकर इंदौरियों के विरोध के बाद सरकार को झुकना ही पड़ा। आने वाले नगर निगम टैक्स बढ़ाने से आने वाले निकाय चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है इसलिए सरकार को आगे आना पड़ा। चौतरफा विरोध के बाद मंत्री तुलसी सिलावट ने रेसीडेंसी कोठी पर कहा कि अभी नगरीय निकाय टैक्स में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं हाेगी। इंदाैर की जनभावना काे देखते हुए आदेश काे स्थगित कर दिया है। काेराेना काल में ऐसा आदेश लाने काे लेकर कहा कि इंदाैर के जनप्रतिनिधियाें ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर लगातार बात की और इसी का नतीजा है कि आदेश स्थगित किया गया है। सांसद शंकर लालवानी विधायक महेंद्र हार्डिया और नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे भी माैजूद थे।

गौरतलब है मई या उसके बाद कभी मध्यप्रदेश के इंदौर सहित 16 नगर निगमों में चुनाव होने हैं। कांग्रेस तो ठीक, भाजपा भी इस फैसले से दंग थी। इंदौर सबसे बड़ा नगर निगम है और भाजपा हाईकमान इसे किसी भी निकाय चुनाव में गंवाना नहीं चाहता। यही कारण रहा कि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर टैक्स बढ़ाने के फैसले को रुकवा दिया।

तीन गुना बढ़ जाता भार
नगर निगम ने 1 अप्रैल से जलकर और कचरा प्रबंधन शुल्क दोगुना कर दिया था, जबकि पहली बार सीवरेज चार्ज भी लगा दिया था। मतलब जो व्यक्ति 350 रुपए इन सभी सेवाओं के लिए देता था, उस पर लगभग तीन गुना होकर 940 रुपए प्रति महीने का भार आ जाता। नगर निगम अपनी नाकामी छिपाने के लिए टैक्स बढ़ा रहा था। इंदौर में सबसे ज्यादा भरा जाने वाला प्रॉपर्टी टैक्स कुल मिलाकर 37 प्रतिशत लोग ही भरते हैं। इसके अलावा 31 प्रतिशत लोगों ने जलकर भरा है। इन्हीं, जिम्मेदार नागरिकों पर यदि टैक्स लगता ताे आज से तीन गुना लगान का भार आ जाता। दूसरी तरफ निगम जलकर दोगुना कर रहा था और ग्राउंड रिपोर्ट कहती है कि 85 प्रतिशत आबादी को एक दिन छोड़कर पानी मिलता है।

ऐसा था लोगों का बजट बिगाड़ने का पूरा गणित

प्रॉपर्टी टैक्स के ही 1100 करोड़ : इंदौर में प्रॉपर्टी टैक्स के 5.85 लाख खातेदार हैं। इनमें इस बार नगर निगम ने सिर्फ 2.20 लाख लोगों से ही 290 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स वसूला है। 5.85 लाख खातेदारों से सालाना 300 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स बनता है। 550 करोड़ रुपए पिछला बकाया है। कुल मिलाकर अधिभार सहित प्रॉपर्टी टैक्स की राशि के नाम पर निगम को 1100 करोड़ रुपए बकाया है।

82 हजार ने भरा जलकर : 30 मार्च तक की स्थिति में नगर निगम में 2.61 लाख जलकर के खातेधारक हैं। इनमें सिर्फ 82 हजार लोगों ने ही जलकर की राशि भरी है। इनमें आवासीय के 29.5 करोड़ और बाकी व्यवसायिक मिलाकर कुल 47 करोड़ की वसूली निगम कर सका है। सालाना 90 करोड़ का जलकर बनता है। जबकि बकाया मिलाकर 340 करोड़ रुपए अभी भी निगम को लोगों से वसूल करने हैं।

स्वच्छता के चलते 80 प्रतिशत कचरा प्रबंधन शुल्क : नगर निगम का पूरा ध्यान स्वच्छता पर ही है। यही कारण है कि कचरा प्रबंधन शुल्क के 5 लाख से ज्यादा खाताधारक होने के बावजूद निगम की टीम ने 4 लाख से ज्यादा लोगों से स्वच्छता प्रबंधन शुल्क वसूल कर लिया। हर साल 61 करोड़ की मांग निगम द्वारा कचरा प्रबंधन शुल्क की रहती है जबकि इस बार सर्वाधिक 37 करोड़ की वसूली हुई है। पुराना बकाया मिलाकर 170 करोड़ रुपए वसूले जाना बाकी है।

5.85 लाख लोगों से वसूलना था सीवरेज चार्ज : निगम द्वारा पहली बार वसूले जाने वाला सीवरेज चार्ज प्रॉपर्टी टैक्स के 5.85 लाख खाताधारकों पर ही लागू होना था। जिनके यहां सीवर लाइन नहीं है उन्हें सेप्टेज मैनेजमेंट प्रभार चुकाना पड़ता।

Ramswaroop Mantri

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