अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

अगर लम्हे ने खता की थी तो सदियों को सजा मिलनी चाहिए

Share

अरविंद श्रीवास्तव 

अगर लम्हे ने खता की थी तो सदियों को सजा मिलनी चाहिए । यही संघ परिवार और नफ़रती हिंदुत्व वादियों का एजेंडा है। मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सभा में बतलाया कि उनके परिवार जनों की हत्या हुई थी पर वे यह नहीं बतायेंगे कि हत्या किसने की। अपनी जहरीले नफ़रती सोच और लाशों पर राजनीति करने वाले भाजपाई और संघी आरोप लगा रहे हैं कि उनकी हत्या मुस्लिमो ने की थी पर वोटों की राजनीति और तुष्टिकरण की नीति के कारण खरगे सच छिपा रहे हैं। खरगे जैसे हजारों हिंदू और मुसलमान ऐसे होंगे जिन्होंने देश विभाजन की विभीषिका को झेला और धन संपत्ति के अलावा अपने परिवार जनों को खोया पर ऐसे अधिकांश लोगों ने आजादी के बाद कड़वी यादों को भूलकर और मिलजुल कर अपने और देश के भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए खून पसीना एक कर दिया।

विभाजन के दंश को देखने और झेलनेवाले सैंकड़ों साहित्यकारों यशपाल राजेंद्र सिंह बेदी भीष्म साहनी कृष्ण चंदर मंटो फिल्म कार बी आर चोपड़ा जैसे फिल्म कारों ने अपनी रचनाओं में विभाजन की त्रासदी का सजीव चित्रण किया पर अपने अंदर साम्प्रदायिक नफ़रत के जहर को नहीं पनपने दिया बल्कि चोपड़ा की फिल्म में तो न हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा इंसान की औलाद है इंसान बनेगा जैसे कालजयी गीत शामिल किए गए।

मल्लिकार्जुन खरगे भी उन जैसे उदार प्रगतिशील सोच रखने वाले व्यक्तियों में है जो यह जानते और मानते हैं कि 75साल पहले घटित हुये  एक काले अध्याय को जिसके सूत्र धार  पटकथाकार और कलाकार बहुत पहले दुनिया के रंग मंच से बिदा ले चुके हैं और उनके कर्मों या कुकर्मों के लिए उनकी अगली पीढ़ियों को हर वक्त अपराधी ठहराकर सजा देने का अभियान चलाना केवल देश की एकता और अखंडता की जड़ों को खोखला ही करेगा और देश को एक नयी त्रासदी में डुबो देगा खास तौर पर सन1947में जो कुछ घटित हुआ उसमें दोनों ही पक्षों की भागीदारी और जिम्मेदारी थी।इसी समझदारी के कारण साम्प्रदायिक नफ़रत के कीचड में अपनी विचारधारा के लिए भोजन पाने वाले आजादी के 40/45साल बाद तक भारत के सभ्य समाज में अपने लिए सम्मान जनक स्थान हासिल नहीं कर पाए और अंततः बाबरी मस्जिद विवाद के गड़े मुर्दे को उखाड़ कर अपनी जड़ जमाने में कामयाब हो ही गये ।

दुखद रुप से इस विषवृक्ष की जड़ों में पानी सींचने का काम कांग्रेस और दूसरे धर्म निरपेक्ष दलों ने भी जाने अंजाने किया। साम्प्रदायिक ज़हर और विभाजन की जो आग आज लगी हुई है संघ परिवार उसे बुझने नहीं देना चाहता इसलिए कब्र बिजजुऔ के समान कोई न कोई सड़ा गला मुर्दा रोज़ उखाड़ दिया जाता है ताकि उसके भक्षण से पेट भरता रहे। इसलिए कभी लव जिहाद कभी गौकशी, कभी वोट जिहाद तो कभी मुजरा तो कभी कपड़े से पहचानो और अब बंटेंगे तो कटेंगे जैसे धूर्तता पूर्ण नारे और जुमले रोज़ उछाले जाते हैं।

इसी नकारात्मक सोच के चलते आजादी के65साल बाद 14अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस मनाने की शुरुआत की गई। विडंबना है कि आजादी की लड़ाई में  अंगुली न कटाने वाले एक बार फिर देश की आत्मा की हत्या करने को उतारू है।लेकिन आज भी बड़ी आबादी इनकी घिनौनी चाल में नहीं फंसतीं है जैसे दिल्ली में एक हिंदू युवक की मुस्लिम युवकों द्वारा की गई हत्या को साम्प्रदायिक रंग देकर दंगे करवाने की साज़िश को मृतक के मां बाप ने विफल कर दिया था। ऐसे उदाहरण ही यह विश्वास जगाते हैं कि भले ही आज गंदगी का रेला देश को सरोबार किये हुए है  एक न एक दिन उसे धर्म निरपेक्षता भाइचारे और एकता की अमृत वर्षा बहाकर ले जायेगी। मल्लिकार्जुन खड़गे को साधुवाद।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें