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रेमडेसिविर के लिए सुबह 4 बजे से लाइन में लगे, डाेज नहीं आने पर सड़क जाम किया,

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इंदौर

इंदौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारामारी कम नहीं हो रही है। शुक्रवार को इंजेक्शन के लिए लोगाें ने सड़क जाम लगा दिया। मरीजों के परिजन दवा बाजार के बाहर शुक्रवार सुबह 4 बजे से ही लाइन लगाकर खड़े थे। दुकानें बंद थीं और लोगों की लाइन बढ़ती जा रही थी। उन्हें 5 घंटे बाद सुबह 9 बजे बताया गया है कि इंजेक्शन आए ही नहीं है। इस पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मरीजों के परिजन सड़क के एक हिस्से को घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने भी बैरिकेडिंग कर स्थिति को संभालने की कोशिश की।

करीब आधे घंटे तक यही स्थिति बनी रही। बाद में दुखी कुछ परिजन वापस लौट गए तो कुछ इस उम्मीद में दुकान के बाहर बैठे रहे कि हो सकता है डोज आ जाए। लाइन में खड़े लोगों का कहना था कि पहले बेड खोजों फिर इंजेक्शन के लिए भटको। सुबह से भूखे-प्यासे खड़े हैं, लेकिन कुछ पता नहीं की कब इंजेक्शन मिलेगा। सरकार कह रही है कि सुरक्षित रहें… कैसे सुरक्षित रहें। काेरोना तो साइड में रखा रह जाएगा, बिना दवाई के इंसान पहले मर जाएगा।

पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे एक ही सवाल पूछते रहे इंजेक्शन कब मिलेगा।

पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे एक ही सवाल पूछते रहे इंजेक्शन कब मिलेगा।

सुबह 8 बजे से लाइन में लगे जितेंद्र ने बताया कि मैं दो दिन से लगातार सुबह से शाम तक इंजेक्शन के लिए लाइन में लग रहा हूं। कल पूरा दिन लाइन में लगने के बाद भी इंजेक्शन नहीं मिला। आज फिर सुबह घर से इंजेक्शन की तलाश में निकल गया। चार घंटे खड़े रहने के बाद पता चला की आज डोज नहीं आए हैं। इस आस में यहां बैठा हूं कि हो सकता है डोज आए और मुझे इंजेक्शन मिल जाए। पिछले दोन दिनों से दवा बाजार में ही मेरा रात दिन गुजर रहा है। उधर मरीज अस्पताल में बेड पर इंजेक्शन का इंतजार कर रहा है। क्या करें बस लाइन में लग ही सकते हैं। अपना दर्द अब किससे कहें, कोई सुनने वाला ही नहीं है।

लोगों ने बैरिकेडिंग कर रास्ते को कुछ देर के लिए रोक दिया था।

लोगों ने बैरिकेडिंग कर रास्ते को कुछ देर के लिए रोक दिया था।

पवन पाल ने कहा कि सुबह 5 बजे से लाइन में लगा हूं। इसके पहले दो दिन पूरा दिन यहीं पर लाइन में लगे-लगे बीत गया। ना टोकन मिला ना ही वैक्सीन। 55 वर्षीय हमारे को 31 मार्च को पता चला था कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इस पर डॉक्टरों ने उन्हें होम आइसोलेशन में रहने को कहा। तीन दिन पहले तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो हम उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। वे तीन दिन से भर्ती हैं, लेकिन वैक्सीन अब तक नहीं लगी है। मरीज को अभी 20 फीसदी संक्रमण है। डॉक्टरों का कहना है कि आप खुद ही इंजेक्शन की व्यवस्था करें। उनका कहना था कि यहां पर जो भी आया है, वह कोरोना मरीजा का अटेंडर है। ऐसे में क्या संक्रमित नहीं होंगे। यहां खड़े होकर संक्रमण तो फैल ही रहा है ना। पहले बेड खोजों फिर इंजेक्शन के लिए भटको। जहां मिलना चाहिए, वहां सुबह से खड़े हैं भूखे-प्यासे, लेकिन कुछ पता नहीं है। सरकार कह रही है कि सुरक्षित रहें… कैसे सुरक्षित रहें। काेरोना तो साइड में रखा रह जाएगा, बिना दवाई के इंसान पहले ही मर जाएगा।

इंजेक्शन नहीं मिलने की जानकारी लगने के बाद भी लोग आस लगाए दुकान के सामने खड़े रहे।

इंजेक्शन नहीं मिलने की जानकारी लगने के बाद भी लोग आस लगाए दुकान के सामने खड़े रहे।

30 से 65 फीसदी तक इंफेक्शन, लेकिन नहीं मिल रहा रेमडेसिविर
दवा बाजार के बाहर कतार में खड़े सैकड़ों लोगों में से ज्यादातर का कहना है कि उनके परिवार, रिश्तेदारों को 30 से 65 फीसदी तक इंफेक्शन है, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिल रहा। यहां पर सुबह से शाम तक वहीं लोग लाइन में लग रहे हैं, जिन्हें डॉक्टरों ने इस इंजेक्शन को लाने के लिए कहा है। लोगों का कहना है कि इस संक्रमण में हम भीड़ के बीच खुद को जोखिम में डालकर अपनों की जिंदगी बचाने की कोशिश में लगे हैं। एक इंजेक्शन के लिए हमें दर-दर भटकना पड़ रहा है। धूप में दिनभर लाइन में लगना पड़ रहा है।

Ramswaroop Mantri

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