ब्रजेश जोशी
शहर ने भी देखा कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती ।जो 12 दिसंबर को जन्मदिवस पर फिल्म पुष्पा राज के पुष्पा स्टाइल में अखबारों में प्रकट हुए थे , जिन्होंने शहर को होर्डिंग्स से बदरंग किया था अब वे अर्श से फर्श पर है । राजनीति के चलते दद्दू, भाईजी, काका; भाऊ सबने किनारा कर लिया ।

हमारे यहां कहा जाता है कि विनाश काले विपरीत बुद्धि,जब खराब समय आता है तो व्यक्ति की बुद्धि खराब हो जाती है और वो खुद ही अपने विनाश की पटकथा लिख देता हैं । एक कहावत ये भी कहती है कि जब टाइम खराब होता है तो ऊंट पर बैठे हुए व्यक्ति को भी कुत्ता काट लेता है । 12 दिसंबर 2024 को अपने जन्मदिवस पर 1 करोड़ से अधिक के विज्ञापन ,होर्डिंग लगाने वाले भाजपाई जीतू यादव उर्फ जीतू जाटव के साथ भी कुछ यही हुआ । जिस अंदाज में अपना जन्मदिन मनाया ,नेता नगरी को दिखाया कि देखो जन्मदिवस कैसे मनाया जाता है । यह भी दिखाया कि देखो शहर के तमाम दादा ,भाई ,लिस्टेड गुंडे, पुलिस सभी मुझसे जुड़े है ।निःसंदेह जिस तरह मजमा जीतू जाटव ने जन्मदिवस जमाया था उससे साफ नजर आ रहा था कि भाईजी आने वाले समय में जमीन ,संपति , जुआ, सट्टा निपटान सभी के किंग हो जाएंगे । सबसे खास बात भाईजी के जन्मदिवस में शामिल होकर शहर के मीडिया से जुड़े कई बंधु भी खुश थे,ये सोचकर कि वो आने वाले समय के छोटे दादा के जन्मदिन में शामिल हुए । अखबारों ने भी हजारों लाखों के विज्ञापन के एवज में भाईजी को शहर का हीरों बताने में कोई कंजूसी नहीं की थीं ।उनके जन्मदिन की खबरों को कुछ ऐसा स्पेस दिया था कि शहर के बड़े नेता शर्मा जाए ।
लेकिन कहते है ना मानव जीवन की पटकथा का हर पेज विधाता ही लिखता है । वो नाम ,शोहरत ,दौलत खूब देता है तो कभी ले भी लेता है । जीतू जाटव के 25 दिसंबर के बाद की पटकथा में विधाता में कुछ ऐसा ट्विस्ट लिख रखा था जिसकी कल्पना खुद जीतू जाटव ने नहीं की थी ना ही उनके आकाओं ने । पहले वाणी खराब कराई जिसका प्रमाण उनके ऑडियो है ,फिर उनका दिमाग खराब किया और अहंकार में जीतू जाटव ने नाबालिक के कपड़े उतरवा दिए ।बच्चा निर्वस्त्र जरूर हुआ ,आज भी परेशान है । लेकिन उसके निर्वस्त्र होने से शहर में कई निर्वस्त्र हो गए । कईयों की नंगई भी सामने आ गई । ये सामने आ गया कि शहर में गुंडाराज पनपा है तो किस किस के आशीर्वाद से । हमारे शहर में जो हुआ, जो हमने देखा वो आने वाले समय के लिए किसी नजीर से कम नहीं है । जीतू जाटव का जो हश्र हुआ है वो शहर के नेता ,पार्षद , एम आई सी मेंबर ,विधायक ,पार्षद सभी के लिए एक संदेश छोड़कर गया है कि अति सर्वत्र वर्जते। अति का अंत होता है ।अति दुर्योधन ने की काल को प्राप्त हुआ ,अति कंस ने की वध हुआ । अति रावण ने की नाभि में अमृत होने के बाद भी मारा ही गया । शहर में बैठे हर जिम्मेदार को अब यह समझना होगा कि जनता राम ,सनातन , धर्म संस्कृति के नाम पर वोट करती है तो समय आने पर चोट भी करती है,जब चोट करती है तो करारी ।
संदेश साफ है कि शहर अब गुंडाराज को राम राम करने की तैयारी में है । यदि शहर के सत्ताधारी अब भी जनता के संदेश को नहीं समझे तो मानकर चलिए। तारें ,सितारें वक्त आने पर किसी को भी अर्श से फर्श पर ला सकते है । अहंकार , सत्ता,पद ,प्रतिष्ठा सभी समय के निहित है ।,नाम उन्हीं का होता है जो जिम्मेदार होते हुए कुछ कर दिखाते है । अब ये देखने लायक होगा कि धार्मिक स्थानों पर शराब बंद करने की घोषणा करने वाले सूबे में मुखिया इंदौर में हुए जघन्य कृत्य की पटकथा को कैसे समाप्त करते है उनकी एस आई टी क्या कमाल दिखाती है । वो शहर में वर्चस्व की लड़ाई में किसके साथ खड़े होते है ,शहर की जनता ये देखने के लिए बेकरार है । सुन रहे है मुख्यमंत्रीजी ,जय रामजी की ,जय रणजीत,





