सुसंस्कृति परिहार
यह मानते हुए कि कोरोना ने तमाम दुनिया में अपना कहर बरपाया हुआ है ,वह गंभीर बीमारी है उसके लिए जो व्यवस्थाएं अभी की जा रही हैं वह पर्याप्त नहीं हैं और देशवासी परेशान हैं लेकिन इसके अलावा और बीमारियों से जूझ रहे बीमार जिन्हें फौरी जरूरत बचा सकती है वे काल कवलित हो रहे हैं । इनमें हृदय सम्बंधी बीमारियों के साथ उल्टी-दस्त, मलेरिया, टाईफाइड जैसी सामान्य बीमारियां भी शामिल है, सामान्य सर्दी ज़ुकाम और वायरल बुखार के बीमार भी वहां पहुंच रहे हैं जहां कोरोना वायरस से पीड़ित बीमार बड़ी तादाद में या तो अस्पताल में हैं या बाहर इलाज के लिए प्रतीक्षातुर हैं । वहां ऐसे मरीजों को भगाने का काम किया जा रहा है वे अपने भगवान से इस मंदिर में मिलने बेताब हैं पर उनके दीदार भी नहीं हो पाते इस बीच वे कोरोना की चपेट में भी बातरह आ रहे हैं ।वे वहां से हटने तैयार नहीं क्योंकि वे जाएं तो कहां जाएं ? ना कहीं डाक्टर है ना किसी अस्पताल में जगह।
अभी तक मिली ख़बरें यही बता रही हैं कि कोरोना मरीज के साथ ही लगभग एक चौथाई अन्य लोग चिकित्सा अभाव में अपना दम तोड़ रहे हैं जिनका इलाज मंहगा नहीं बस थोड़ी सहानुभूति , सामान्य दवाऔर परामर्श की ही ज़रूरत है ।इस तरफ ध्यान देना ज़रूरी है क्योंकि गर्म मौसम में अनेक लोग हमेशा अस्वस्थ होते रहे हैं और ठीक भी हुए हैं । उन्हें दुत्कार कर भगाना किसी भी तरह न्यायोचित नहीं।ज़रा से पानी गिरने पर ऐसे बीमारों की संख्या दुगुनी हो जाती है ।याद करिए जब कोरोना मरीज नहीं होते थे तब तमाम अस्पतालें इस मौसम में भरी रहती थीं। आखिरकार उनकी सुध तो लेनी ही होगी।नीम हकीम भी उनकी जान लेने उतारु हैं । कहीं इस कमीकी आड़ में झाड़-फूंक वाले भी सक्रिय ना हो जाएं !अब सवाल ये है कोराना की बड़ी जंग के बीच इस समस्या का समाधान कैसे हो? तो हुजूर होना ये चाहिए कि जिला, तहसील और ब्लाक स्तर पर ऐसे मरीजों के प्रबंधन हेतु कुछ चिकित्सक नियुक्त किए जाएं क्योंकि कोरोना के भय से बहुत से चिकित्सक अपनी दूकान बंद रखे हैं उन्हें अन्य बीमार इलाज केंद्र के नाम से खोलने कहा जाए तो संभव है कि दीगर बीमार अपनी चिकित्सा पाकर मौत की ओर नहीं बढ़ेंगे। समाजसेवी चिकित्सकों और सेवानिवृत्त चिकित्सकों का भी सहारा लिया जा सकता है। सरकार उन्हें पर्याप्त मेहनताना देकर भी उनका सहयोग ले सकती है । जिलास्तरीय क्लीनिक इस बावत तमाम सुविधाओं से लैस हो और कोविड गाईड लाईन के अनुरूप ही हो।इस समय साथ ही एक और बहुमूल्य सेवा की भी ज़रूरत है इनमें सबसे ज्यादा बच्चे उल्टी-दस्त के शिकार हो रहे हैं । गांव गांव आंगनबाड़ियों को भी सतर्क करना होगा ताकि वे प्राथमिक उपचार दे सकें।प्राथमिक चिकित्सा सबको मिलना चाहिए यह हम सबका मौलिक अधिकार भी है । बच्चों और बचाए जा सकने वाले लोगों को मौत के मुंह में ढकेलना भी जघन्य अपराध है इस बावत हमें विदेशों में चल रही व्यवस्थाओं से सीखना होगा। जिन्होंने ऐसी मरीजों की पर्याप्त व्यवस्थाएं की हैं।
इस दौरान सबसे बड़ी ज़रुरत कोरोना से बचाव हेतु सावधानियों के अमल के साथ ही सेवा परर्मोधर्म के विस्तार की है । निर्भय होकर सेवा करने वाली टीम का हिस्सा बनें और मौत के शिकंजे से जितनों को बचा सकें बचाएं यही आज का पुनीत कर्तव्य है। कुछ योगदान करे सरकार और कुछ हम करें बीमारों की तीमारदारी ज़रूरी है तभी मानवता की सिसकियां बंद हो सकती हैं तथा आधी अधूरी व्यवस्थाओं के बीच भी कामयाबी पाई जा सकती है ।





