श्रीमद्भगवत गीता में जीवन की हर एक परेशानी का हल मिलता है.श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण द्वार दिये गए उपदेशों का वर्णन है, जो कि उन्होंने अर्जुन को महाभारत के युद्ध के दौरान दिये थे. लेकिन गीता में दिए उपदेश जितने प्रासंगिक उस समय थे उतने ही आज के समय में भी हैं, जिनका अनुसरण करने वाले व्यक्ति को जीवन में कभी कठिनाईयां नहीं आती और कठिन से कठिन मार्ग भी सहजता से पूर्ण हो जाता है. इसके साथ ही उसे जीवन में हमेशा एक उचित मार्गदर्शन ही मिलता है. गीता में श्री कृष्ण ने जिन बातों का उल्लेख किया है वे आज के जीवन में भी व्यक्ति को आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती हैं. साथ ही हर परेशानी का हल पाने और जीवन में सफलता पाने के लिए मददगार साबित होती है.
गीता में व्यक्ति को जीवन की सभी दुविधाओं और समस्याओं का हल मिल जाता है. वहीं कुछ ऐसे आचरण व आदतें भी हैं जो कि मानव जीवन में होना लाजमी है, लेकिन कुछ आदतें हमें गलत मार्ग पर ले जाती हैं और हमारा पतन होने लगता है. ऐसी ही कुछ तीन आदतों के बारे में गीता के 16वें अध्याय के श्लोक 21 में मिलता है जिसमें श्रीकृष्ण ने पाप के तीन प्रमुख द्वारों के बारे में बताया है. इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने मनुष्य को पतन की ओर ले जाने वाले तीन मुख्य आदतें बताई हैं. तो आइए जानते हैं कौन-कौन से हैं वो द्वार, जो कि व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं.
श्लोक-
त्रिविधं नकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्।।
इस श्लोक के अर्थ के अनुसार तीन चीजें काम (वासना), क्रोध और लोभ व्यक्ति को नरक के द्वार तक ले जाती हैं. कैसे आइए जानते हैं-
काम (वासना)
व्यक्ति के मन में काम (वासना) का प्रभाव होने पर उसकी आसक्तियां और वासनाएं बढ़ने लगती है जो कि उसके ज्ञान को ढ़क देती है और इसी के कारण व्यक्ति पाप आचरण करने को मजबूर हो जाता है.
क्रोध (गुस्सा)
क्रोध से मनुष्य के मन में भ्रम पैदा करता है, जो कि सबसे पहसे बुद्धि को नष्ट करता है. क्रोध के समय व्यक्ति का विवेक काम नहीं करता और वो हिंसा, अपशब्द और बुरे कर्मों की तरफ बढ़ने लगता है. यही मनुष्य के विनाश का कारण बनता है. इसलिए क्रोध करने के बजाय शांत मन रखना चाहिए.
लोभ (लालच)
श्रीकृ्ष्ण कहते हैं कि जितना आपके पास है उसी में संतुष्ट रहें, क्योंकि व्यक्ति का लालच कभी समाप्त नहीं होता और फिर वह और पाने की लालसा में अधर्म का मार्ग चुन लेता है. व्यक्ति झूठ, छल-कपट, चोरी और अन्य अधार्मिक कर्म करने लगता है. फिर यही कारण उसके पतन का बनता है और उसे विनाश की तरफ ले जाता है.
समस्याओं का समाधान देने वाले श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बना कर श्रीमद्भागवत गीता जी का निर्मल ज्ञान समस्त संसार को दिया था। जिसके बारे में आज की पीढ़ी को पता होना अति आवश्यक है, क्योंकि गीता उपदेश ऐसे प्रकाश की भांति हैं, जिनका उद्देश्य अज्ञानता का तमस मिटाना है।
जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है तब तब मैं अपने स्वरूप की रचना करता हूँ।

आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है, जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।
जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है, इसीलिए जो अटल है, अपरिहार्य है, उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिए।
नरक के तीन द्वार होते है, वासना, क्रोध और लालच।
एक ज्ञानवान व्यक्ति कभी भी कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।
गंभीर तपस्या और ज्ञान मार्ग से ध्यान श्रेष्ठ है।
सर्वोच्च वास्तविकता उन लोगों की चेतना में प्रकट होती है, जिन्होंने खुद को जीत लिया है।
जो अपने कर्म के फल के प्रति आसक्ति को नहीं छोड़ सकते, वे मार्ग से कोसों दूर हैं।
कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।

श्री कृष्ण के प्रेरणादाई विचार
श्री कृष्ण के प्रेरणादाई विचारों पर आधारित इंट्रस्टिंग कोट्स पढ़ पाएंगे, जो कुछ इस प्रकार है-
अपना काम हमेशा दूसरों के कल्याण को ध्यान में रखकर करें।

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है।
जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।
मेरा तेरा, छोटा बड़ा, अपना पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है और तुम सबके हो।
मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है।
धरती पर जिस प्रकार मौसम में बदलाव आता है, उसी प्रकार जीवन में भी सुख-दुख आता जाता रहता है।
लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे। सम्मानित व्यक्ति के लिए, अपमान मृत्यु से भी बदतर है।
मैं भूतकाल, वर्तमान और भविष्य काल के सभी जीवों को जानता हूं, लेकिन वास्तविकता में मुझे कोई नही जानता है।
मेरे लिए ना कोई घृणित है ना प्रिय, किन्तु जो व्यक्ति भक्ति के साथ मेरी पूजा करते हैं, वो मेरे साथ हैं और मैं भी उनके साथ हूँ।
सफलता जिस ताले में बंद रहती है वह दो चाबियों से खुलती है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ संकल्प।

श्री कृष्ण वाणी सुविचार
Geeta Updesh Quotes in Hindi के माध्यम से आप श्री कृष्ण वाणी सुविचार पढ़ पाएंगे, जो कुछ इस प्रकार है-
अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है।

बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।
हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है।
जो दान बिना सत्कार के कुपात्र को दिया जाता है वह तमस दान कहलाता है।
इस जीवन में मनुष्य न तो कुछ खोता है, और न ही कुछ व्यर्थ होता है।
केवल मन ही किसी का मित्र और शत्रु होता है।
जब मानव अपने कार्य में आनंद खोज लेता हैं तब वह पूर्णता प्राप्त कर लेता है।
जो कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता में कार्य देखता है वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है।
बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए बिना आसक्ति के काम करना चाहिए।
व्यक्ति या जीव का कर्म ही उसके भाग्य का निर्माण करता है।

विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाले श्री कृष्ण के विचार
Geeta Updesh Quotes in Hindi के माध्यम से आप विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाले श्री कृष्ण के विचार पढ़ पाएंगे, जो कुछ इस प्रकार है-
कर्म योग वास्तव में एक परम रहस्य है।

कर्म उसे नहीं बांधता, जिसने काम का त्याग कर दिया है।
कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।
जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है, उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को।
समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नही मिलता है।
कर्म के बिना फल की अभिलाषा करना, व्यक्ति की सबसे बड़ी मूर्खता है।
यह सृष्टि कर्म क्षेत्र है, बिना कर्म किये यहाँ कुछ भी हासिल नहीं हो सकता।
जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।
अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है।
सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन
Geeta Updesh Quotes in Hindi के माध्यम से आप श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन पढ़ पाएंगे, जो कुछ इस प्रकार है-
क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।
मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है, और लगातार तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है।
ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में देखता है।

प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी एक समान हैं।
निर्माण केवल पहले से मौजूद चीजों का प्रक्षेपण है।
उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा.जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना कि मृत होने वाले के लिए जन्म लेना, इसीलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो।
जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।





