*रामबाबू अग्रवाल*
उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद सोशलिस्टों का सबसे ज्यादा प्रभाव मध्य प्रदेश में रहा है । मध्य प्रदेश से कई राष्ट्रीय नेता निकले । इनमें मामा बालेश्वर दयाल, लाडली मोहन निगम, जमुना प्रसाद शास्त्री, जगदीश जोशी, हरि विष्णु कामथ, लक्ष्मी नारायण नायक रघुवीर सिंह कुशवाहा, ओमप्रकाश रावल,डा.सुनीलम के नाम उल्लेखनीय है विंध्य, चंबल और मालवा का इंदौर एवं झाबुआ सोशलिस्टों के लिए उर्वरा भूमि रहा है ।

देश के समाजवादी आंदोलन में इंदौर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । यहां पर डॉक्टर लोहिया ,जयप्रकाश नारायण, राज नारायण ,मधु लिमये, जार्ज फर्नांडीज सहित कई राष्ट्रीय नेताओं का समय-समय पर आगमन हुआ । डॉक्टर लोहिया की 1967 के आम चुनाव में आखिरी सभा शायद इंदौर में ही हुई थी जिसमें उन्होंने कई भविष्यवाणी की थी ,जिसमें पाकिस्तान का विभाजन,दोनों जर्मनी एक होंगे, नेपाल में लोकतंत्र आएगा आदि घोषणाएं बाद में असलियत में बदली।

इंदौर में ही समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन,बेटमा में किसान सम्मेलन , अंग्रेजी हटाओ सम्मेलन उज्जैन में हुआ, वही हिंद किसान पंचायत का स्थापना सम्मेलन रीवा में हुआ । इंदौर में किशन पटनायक समाजवादी यु्वजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए ।

समाजवादियों का टूटने और जुड़ने का सिलसिला लगातार बरसों बरस चलता रहा है ।पार्टी कई बार टूटी है और कई बार एकता की कोशिश हूई । डॉक्टर लोहिया जीवित थे तभी पटना में समाजवादी एकता सम्मेलन हुआ। पटना सम्मेलन में मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में समाजवादी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने हिस्सेदारी की इस सम्मेलन में कल्याण जैन, गणपत सकतपुरिया, राधेश्याम अग्रवाल, रामबाबू अग्रवाल, सुभाष जैन, जीवन मंडलेचा, कमलकांत जैन, सागर जैन ने भाग लिया।
इसके बाद इंदौर में राष्ट्रीय नेताओं की समाजवादी एकता के लिए बड़ी बैठक हुई, जिसमें समाजवादी नेता राजनारायण, कर्पूरी ठाकुर, सूरज नारायणसिंह, रामइकबाल, सदाशिव बगाईतकर, मामा बालेश्वर दयाल, कन्हैयालाल डूंगरवाल, ओमप्रकाश रावल, कल्याण जैन, रतन पाटोदी,भागीरथ भंवर,मानमल सोनी आदि ने समाजवादी एकता पर मंथन किया ।
डॉक्टर लोहिया का मध्य प्रदेश के समाजवादियों पर ज्यादा असर रहा है और उनके संघर्ष के कार्यक्रम से कई नेता और कार्यकर्ता निकले जिनमें से बाद में कई सांसद और विधायक भी बने। इसी के साथ जमुना प्रसाद शास्त्री ने विंध्य में, तो मामा बालेश्वर दयाल ने मालवा अंचल में तथा रघुवीर सिंह कुशवाह ने चंबल अंचल में समाजवादी आंदोलन की पेठ बनाई और हजारों समाजवादी कार्यकर्ताओं को तैयार किया। मध्य प्रदेश में समाजवादी आंदोलन का आधार मजबूत करने में जिन नेताओं की भूमिका रही है उनमें प्रमुख हैं मामा बालेश्वर दयाल, यमुना प्रसाद शास्त्री, रघुवीर सिंह कुशवाह, पुरुषोत्तम कौशिक, कन्हैया लाल डूंगरबाल, मदन तिवारी, कल्याण जैन, विद्याभूषण ठाकुर, चंद्रमणि त्रिपाठी, आरिफ बेग, भागीरथ भंवर, डाक्टर सुनीलम,शिव शंकर पटेल, बापू सिंह मंडलोई, राधेश्याम शर्मा, रामानंद सिंह, शिव प्रसाद चिनपुरिया, जगदंबा प्रसाद निगम, शरद यादव, रघु ठाकुर, लक्ष्मी नारायण नायक, सरदार शेर सिंह ,गंगा प्रसाद तिवारी दद्दू, गोवर्धन लाल ओझा, लक्ष्मी शंकर शुक्ला आदि पमुख है।

इंदौर में सोशलिस्ट आंदोलन को मजबूत करने में सीताराम सराफ, गोवर्धन दास गर्ग, दयाराम परिहार, दिनयार तांतरा, अर्जुन सिंह धारू, त्रिलोक सिंह भाटिया, राधेश्याम अग्रवाल गणपत सकतपुरिया रामबाबू अग्रवाल ,देवास में उमराव सिंह बागी शंकर जी कानूनगो उज्जैन में भटनागर, राम प्रकाश मल्होत्रा, रतलाम में पाराशर जी झाबुआ में जमुना देवी प्रमुख हैं।
*कथनी- करनी और व्यक्तिगत जीवन*
आमतौर पर राजनीतिक लोग दो मुंहे जीव होते हैं, किन्तु इसे जीवन में उतारकर कथनी-करनी एक सी हो तो ही जनता का अपनत्व मिलता है। अन्यथा हवाई नारों और आदोलनों से कुछ नहीं होता।
सोशलिस्ट पार्टी की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मध्य प्रदेश से एकमात्र सदस्य ओमप्रकाश रावल ने व्यक्तिगत जीवन में वही कर दिखाया। ओमप्रकाश रावल के लिए पार्टी के सिद्धांत केवल नारे न होकर आदर्श भी थे। रावल साहब की बड़नगर के पास साठ ब्रीघा पैतृक जमीन थी, जो एक किसान को जोतने के लिए दी गई थी। उस वक्त पार्टी का नारा था कि *जो जोते ज़मीन उसी की*। इस नारे पर अमल करते हुए रावल साहब ने अपनी कीमती जमीन किसान को दे दी वह उसकी कीमत देने लगा, तो रावल साहब ने लेने से इंकार कर दिया।
1952 के आम चुनाव से ही सोशलिस्ट पार्टी के पक्ष में वातावरण बनता गया। गोर्वधनलाल ओझा, घन्नालाल शाह, मदनलाल जिंदल, मोहनसिंह शाह विधानसभा चुनाव लड़े. और जनता पर समाजवादी विचारधारा की छाप छोड़ी।
*मामाजी का लोकसभा चुनाव*
मामाजी ने 1962 में इन्दौर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा। मामाजी स्वयं चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे। संसोपा के संसदीय बोर्ड के विशेष अनुरोध पर मामाजी चुनाव लड़ने के लिए राजी हुए। मामाजी को इसलिए चुनाव लड़वाया कि इससे क्षेत्र में पार्टी ताकतवर होगी। मामाजी के चुनाव अभियान में प्रचार के लिए मधु लिमये, अध्यात्म त्रिपाठी, लाड़ली मोहन निगम, जार्ज फर्नांडीस सहित अनेक नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में आमसभाएं लीं। जार्ज फर्नांडीस की मीटिंग के लिए लाड़ली मोहन निगम और ओमप्रकाश रावल ने पर्दे लगे तांगे से मीटिंग का ऐलान करते हुए सभा में श्रोताओं को देश के मजदूर नेता को सुनने के लिए आमंत्रित किया।
1962 में मामा बालेश्वर दयाल के लोकसभा चुनाव लड़ने से सोशलिस्ट पार्टी की विचारधारा को मजबूती मिली। लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ-साथ होते थे। कल्याण जैन ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानसभा का चुनाव लड़ा। इन युवा नेताओं को उल्लेखनीय वोट मिले। मामाजी, दद्द, लाड़लीजी के प्रयासों से ये सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य बने। 1962 में मामाजी को 36 हजार वोट मिले, तब धार भी इन्दौर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था। बापूसिंह मंडलोई ने विधानसभा चुनाव संसोपा के टिकट पर जीता। सोशलिस्ट पार्टी का जनाधार 1964 में हुए नगर निगम के चुनाव में बढ़ा। 36 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा जिनमें से कल्याण जैन, बशीर मंसूरी को विजय मिली। रतन पाटोदी, डॉ. दशरथ ऋषि, महेश चतुर्वेदी एवं अन्य कई उम्मीदवार निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे।
शीलकुमार निगम, खंडेराव गायकवाड़, नगेन्द्र आजाद, ताराचन्द रांवका, प्रकाश तपकीरे, जानकीदेवी साबू ,कमलाबाई सहित अनेक उम्मीदवारों को जनसहयोग मिला। इस चुनाव के बाद सोशलिस्ट पार्टी के प्रति सहानुभूति बढ़ती गई। समाजवादी नेताओं की मीटिंगों में जनता की उपस्थिति से यह लगने लगा कि इस दल के साथ गरीब, मध्यमवर्गीय तबके का जुड़ाव है।
1967 के चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी सोशलिस्ट पार्टी का गठबंधन हुआ। सोशलिस्ट पार्टी की तरफ से कल्याण जैन, आरिफ बेग बापू सिंह मंडलोई ने विधानसभा चुनाव लड़ा। जैन, बेग विजय हुए, जबकि बापूसिंह मंडलोई की पराजय हुई।
1972 के संसदीय उपचुनाव में कल्याण जैन संयुक्त मोर्चे से लड़े, इस उपचुनाव में राजनारायण मधु दण्डवते जॉर्ज फर्नांडीस ने कल्याण जैन के समर्थन में सभाएं लीं, जिसमें केवल 15 हजार बोट से हारे। इमरजेंसी के बाद बनी जनता पार्टी उम्मीदवार बनाकर कल्याण जैन ने इंदौर से लोकसभा का चुनाव जीता।
*उज्जैन व इंदौर में अंग्रेजी हटाओ सम्मेलन*
उज्जैन व इंदौर में अंग्रेजी हटाओ सम्मेलन को सफल बनाने में गंगाप्रसाद तिवारी दद्दू, ओमप्रकाश रावल की अहम भूमिका रही है। इसी सम्मेलन के बाद डा वेदप्रताप वैदिक भी सक्रिय हूं।
*बेटमा में किसान सम्मेलन*
हिन्द किसान पंचायत किसानों की लड़ाई लड़ने वाला संगठन था। देपालपुर क्षेत्र में शुरू से ही समाजवादी आन्दोलन का प्रभाव रहा है। मदनसिंह मास्टर कल्याणसिंह, बजरंगदास शास्त्री, धन्नालाल पटेल, शिवशंकर पटेल, राधेश्याम शर्मा सहित अनेक मजबूत किसान नेताओं का यहां व्यापक असर था। गंगाप्रसादजी तिवारी दद्दू के प्रभाव वाले इन नेताओं ने बेटमा में किसान सम्मेलन किया। जिसमें पूरे मध्य प्रदेश से किसानो की भारी उपस्थिति रही।जयप्रकाशजी ने इस सम्मेलन को सम्बधित किया। लेखक स्वयं भी इसी सम्मेलन से प्रभावित होकर समाजवादी आंदोलन में सक्रिय हुआ।
*जनवाणी प्रदर्शन*
दिल्ली में सरकारी अव्यवस्था पर आक्रोश प्रकट करने के लिए सोशलिस्ट पार्टी ने जंतर-मंतर से संसद भवन तक मार्च निकाला। इस जनवाणी प्रदर्शन में भाग लेने के लिए इन्दौर से युवा कार्यकर्ताओं की बस दिल्ली गई। इसमें दिलीप राजपाल, ललित जैन, रामबाबू अग्रवाल,राधेश्याम अग्रवाल , सुरेन्द्र वर्मा,सुभाष जैन, सुरेश मिंडा,जीवन मंडलेचा सहित कई युवाओं ने भागीदारी की। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का दिल्ली में यह ऐतिहासिक प्रदर्शन था और पूरे देश भर से हजारों लोगों ने इसमें भागीदारी की। इंदिरा गांधी की घबराई सरकार ने प्रदर्शन में भाग ले रहे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया।
*समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन*
समाजवादी युवजन सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन इन्दौर में हुआ। इस सम्मेलन की तैयारियां जोर-शोर से हुईं।
मानमल सोनी, किशन पंत के साथ सैकड़ों युवकों ने देश भर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत सत्कार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इस सम्मेलन में कई राष्ट्रीय नेता किशन पटनायक, जनेश्वर मिश्र, कल्पनाथ राय, मोहनसिंह, सत्यदेव त्रिपाठी, लाडली मोहन निगम सत्यपाल मलिक, प्रो. राजकुमार जैन ने भाग लिया।इसी सम्मेलन में किशन पटनायक समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए । सम्मेलन में देअश भर से आए हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को इंदौर के साथियों में स्वागत सत्कार के साथ शहर के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण भी कराया। लेखक रामबाबू अग्रवाल उसे समय समाजवादी युवजन सभा इंदौर के अध्यक्ष थे।
*मुलताई पुलिस गोली चालान*
उपज का लाभकारी मूल्य और फसल नुकसानी का मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर 1998 में मुलताई में बड़ा किसान आंदोलन हुआ जिसका नेतृत्व तक की युवा समाजवादी नेता डॉक्टर सुमिलम कर रहे थे 50000 से ज्यादा किसान तहसील कार्यालय को शांतिपूर्ण तरीके से घर कर बैठे हुए थे तभी शांतिपूर्ण आंदोलनकारी पर पुलिस ने गोलियां चलाई जिसमें 24 से ज्यादा किसान शहीद हो गए।शायद यह देश की सबसे बड़ी शांतिपूर्ण आंदोलन के दमन की कहानी है।
*डॉ. लोहिया का आखिरी भाषण*
1967 के आमचुनाव में समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया को अंतिम बार सुनने का मौका इन्दौर की जनता को मिला। डॉ. लोहिया ने कांग्रेस के खात्मे की भविष्यवाणी की। डॉ. लोहिया कांग्रेस को हर कीमत पर सत्ता से हटाना चाहते थे। कभी इन्दिरा गांधी को गूंगी गुड़िया कहने वाले डॉ. लोहिया कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ किसी भी हद तक जाकर उसे परास्त करना चाहते थे। जीवन भर जिनका घोर विरोध करते रहे उन कम्युनिस्टों और जनसंधियों को एकजुट करके एकाधिकारवादी-निरंकुश कांग्रेस का खात्मा करना लोहिया की तात्कालिक रणनीति थी। डॉ. साहब ने सभा में जनता से कहा कि जिस तरह रोटी को उलटा-पुलटा करते हो, उसी तरह अच्छी सरकार चाहते हो तो सरकारों को बदलना सीखो। हो सकता है एकाध बार धोखा भी खा जाओ, पर उससे घबराना नहीं, परिवर्तन करना सीखो, कभी न कभी अच्छी सरकार आएगी।
इस चुनाव में नारा चला-
*डॉक्टर लोहिया की ललकार बदलो बदलो यह सरकार*
*डा.लोहिया की कई भविष्यवाणी साकार हुई*
डा लोहिया स्वप्न दृष्टा थे। देश की नब्ज जानते थे। देश की स्वतंत्रता के बाद भी अनेक बार जेल यात्रा की। जिस गैर कांग्रेसवाद की कल्पना डॉ. लोहिया ने की वह उनकी मृत्यु के बाद साकार हुई। लोकनायक जयप्रकाशजी से पटना से उनकी आखिरी मुलाकात के बाद लोहिया के मन में जेपी के प्रति राय बदली। उन्होंने तब कहा कि यह जब खड़ा होगा, तब पूरा देश इसके साथ होगा पाकिस्तान के दो टुकड़े. होंगे, दोनों जर्मनी एक होंगे, नेपाल में लोकतंत्र आएगा। ऐसी तमाम बाते लोहिया ने कहीं। वास्तव में वे हकीकत में बदली ।
*पटना एकता सम्मेलन*
पटना में आयोजित समाजवादी एकता सम्मेलन में इन्दौर से कल्याण जैन, गणपत सकतपुरिया, राधेश्याम अग्रवाल, रामबाबू अग्रवाल, सुभाष जैन, जीवन मंडलेचा, कमलकांत जैन, सागर जैन सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
*समाजवादियों की एकता के प्रयास*
पटना सम्मेलन के बाद समाजवादियों में अलगाव होने पर इन्दौर में एकता की दिशा में ठोस प्रयत्न करने के लिए राष्ट्रीय नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें समाजवादी नेता राजनारायण, कर्पूरी ठाकुर, सूरज नारायणसिंह, रामइकबाल, सदाशिव बगाईतकर, मामा बालेश्वर दयाल, लाड़ली मोहन निगम,कन्हैयालाल डूंगरवाल, ओमप्रकाश रावल, कल्याण जैन, भागीरथ भंवर सहित अनेक साथियों ने विचार मंथन किया।
*जयप्रकाश जी का नागरिक अभिनंदन*
1974 का आंदोलन चरम पर था जयप्रकाश नारायण इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे इंदौर के तमाम लोकतांत्रिक लोगों और समाजवादियों ने तय किया की इंदौर में जयप्रकाश नारायण का नागरिक अभिनंदन किया जाना चाहिए इसे लेकर एक समिति बनाई गई जिसमें पूर्व सांसद कल्याण जैन ,आनंद मोहन माथुर, ओमप्रकाश रावल, रामबाबू अग्रवाल सर्वोदय के किशोर भाई गुप्ता सहित शहर के कई राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता समिति में शामिल थे । इंदौर के इतिहास की सबसे बड़ी आम सभा जयप्रकाश जी के नागरिक अभिनंदन की सभा ही रही है ।जीसका रिकॉर्ड आज तक नहीं टूटा है। इंदौर की जनता ने जेपी का नागरिक अभिनंदन तो किया ही साथ ही उन्हें इंदौर की जनता की ओर से एक लाख रूपए की थैली भी भेंट की गई।
(लेखक मध्य प्रदेश के वरिष्ठ समाजवादी नेता और लोहिया विचार मंच मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हैं)





