पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में गंभीर संकट से जूझ रही है. देश आईएमएफ और चीन से वित्तीय सहायता की गुहार लगा रहा है. लगभग 11,000 करोड़ रुपये की यह सहायता पाकिस्तान के आर्थिक संकट की गंभीरता को दर्शाती है. पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा अपनाए गए कड़े रुख ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को और भी बिगाड़ दिया है.
सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार और पाकिस्तानियों के वीज़ा रद्द होने से भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. आईएमएफ से 1.3 अरब डॉलर के नए ऋण के लिए आवेदन किया गया है, जिस पर 9 मई को निर्णय लिया जाएगा. इसके अलावा, चीन से 1.4 अरब डॉलर के ऋण की भी मांग की गई हैपाकिस्तान ने चीन से 10 अरब युआन का अतिरिक्त कर्ज मांगा है, जबकि पहले से 30 अरब युआन की सुविधा का इस्तेमाल कर चुका है. यह अनुरोध वित्तीय संकट के बीच चीन से मिली सहायता बढ़ाने की कोशिश है.

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कंगाली के कगार पर पाकिस्तान, चीन के सामने फिर फैलाया हाथ; अब मांगी यह मदद
पाकिस्तान ने चीन से 10 अरब युआन का अतिरिक्त कर्ज मांगा है, जबकि पहले से 30 अरब युआन की सुविधा का इस्तेमाल कर चुका है. यह अनुरोध वित्तीय संकट के बीच चीन से मिली सहायता बढ़ाने की कोशिश है.
Updated: October 28, 2024 11:36 AM IST
By Manoj Yadav

पाकिस्तान वर्तमान में गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसी संकट के चलते पाकिस्तान ने चीन से अतिरिक्त 10 अरब युआन (लगभग 1.4 अरब डॉलर) का कर्ज मांगने का निर्णय लिया है.
मौजूदा कर्ज सुविधा का इस्तेमाल
पाकिस्तान ने पहले ही चीन से 30 अरब युआन (लगभग 4.3 अरब डॉलर) की एक व्यापार सुविधा का उपयोग कर लिया है. यह राशि पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन अब वह और अधिक मदद की तलाश में है. वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने हाल ही में वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान चीन के वित्त उप मंत्री लियाओ मिन से मुलाकात की.
लोन लिमिट बढ़ाने की कोशिश
इस मुलाकात के दौरान, पाकिस्तान ने मुद्रा अदला-बदली समझौते के तहत लोन लिमिट बढ़ाकर 40 अरब युआन करने का अनुरोध किया. यदि चीन इस अनुरोध को स्वीकार करता है, तो पाकिस्तान के पास कुल मिलाकर लगभग 5.7 अरब डॉलर की सुविधा हो जाएगी.
चीन का पूर्ववर्ती निर्णय
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने चीन से कर्ज सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है. पिछले प्रयासों में चीन ने ऐसे सभी अनुरोधों को अस्वीकार किया है. इस बार का अनुरोध उस समय आया है जब चीन ने पहले ही पाकिस्तान की मौजूदा 4.3 अरब डॉलर की सुविधा को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का आश्वासन दिया था.
भविष्य की उम्मीदें
हाल ही में, पाकिस्तान और चीन के बीच एक मुद्रा अदला-बदली समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे पाकिस्तान की लोन भुगतान अवधि 2027 तक बढ़ गई है. यह समझौता पाकिस्तान के लिए राहत का संकेत हो सकता है, लेकिन वित्तीय चुनौतियों के बीच यह देखना होगा कि क्या चीन इस नए कर्ज अनुरोध पर विचार करेगा.
गौरतलब है कि पाकिस्तान के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है. बढ़ते कर्ज के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है. अब सबकी नज़र इस बात पर है कि क्या चीन पाकिस्तान की मदद करने के लिए सहमत होगा, या फिर उसे फिर से निराशा का सामना करना पड़ेगा.





