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आय.ए.एस. जामोद द्वारा अपने बेटे की शादी गांव में करने के राजनीतिक कयास?

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बकलमः मदन काबरा

बाग। आदिवासी कुक्षी तहसील बाग से लगभग 10 कि. मी. दूर आदिवासी ग्राम डोई में प्राथमिक शिक्षा के बाद शहरों में पढ़ाई-लिखाई कर राज्य प्रशासनिक सेवा में आये बाबुसिंह जामोद को आय.ए.एस. अवार्ड मिलने के बाद वे कई जिलों के कलेक्टर रहकर उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली मधुर व्यवहार के चलते उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से तथा अपनी समाज सेवा संगठन के माध्यम से वे मैदान-ए-जंग रहें हैं। इसी के चलते जब उन्हें प्रमोशन मिला तो हाल ही में वे कमीश्नर पद पर रीवा में पदस्थ हैं

। जामोद ने अपने समाज ऊंकार भिलाला समाज के बैनर तले प्रदेश का एक वृहद स्तरीय परिचय सम्मेलन इन्दौर में आयोजित कर उसमें म.प्र. के तत्कालीन मुख्यमंत्री व मंत्रीयों सभी राजनीतिक दलों के सासंद विधायकों एवं अपने समाज के प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों व समाजसेवीयों का जबरदस्त जमावड़ा कर अपनी धमाकेदारउपस्थिति दर्ज करवाकर उन्होंने राजनीति में आने के संकेत तो दे ही दिए थे। पिछले बरसों में वनवासी कल्याण आश्रम का एक प्रदेश स्तरीय लोकोत्सव कार्यक्रम बाग से 10 कि.मी.दुर क्षेत्र का प्रसिद्ध बड़केश्वर महादेव स्थल पर रखा था जिसमें राज्यपाल आमंत्रित थे।इस कार्यक्रम में भी बी.एस. जामोद ने अपनी सक्रिय भागीदारिता निभाकर अप्रत्यक्ष रुप से क्षेत्र में अपनी राजनीतिक क्षेत्र में इस सामाजिक मंच से पहचान बनाने काशानदार प्रयास कर, इस सम्मेलन में प्रदेश स्तर से आये पदाधिकारियों को अपने गांव में स्थित घर पर ले जाकर जो आतिथ्य सत्कार किया उसमें भी उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया था कि वे इस ग्रामीण क्षेत्र के ही है तथा इस क्षेत्र में उनका अपना वजूद भी है। वर्ष 2021-22 में हुएं विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए वनवासी कल्याण आश्रम की और से एवं अपने समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों के माध्यम से अपनीसंभावित उम्मीदवारी की दस्तक तो हुई थी?

क्योंकि जबसे वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से झाबुआ विधानसभा एंव रतलाम झाबुआ आलीराजपुर लोकसभा सीट से प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी जी.एस. डामोर को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया व भाजपा से उनकी जीत हुई तभी से आदिवासी क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों के राजनीतिक ख्वाबों को पंख लग गये। शायद इसी कड़ी में रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद अपनी कमिश्नरी क्षेत्र को छोड़कर अपनी पूर्वजों की कमिश्नरी इन्दौर में अपने वनवासी गृहग्राम डोई में आकर अपने डॉक्टर बेटे का शुभ विवाह कर इसमें जिले के नेताओं जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर जो जमावड़ा अपने पुश्तैनी गृहग्राम डोई में कर अपनी गरिमामय उपस्थिति से अपने मधुर व्यवहार से जो आवभगत कर आमंत्रितों का मनमोह कर जन सम्पर्क किया गया वह राजनीतिक गलियारों में यह जनचर्चाका विषय जरुर बन गया है कि भविष्य में आने वाले विधानसभा व लोकसभा चुनाव में में आय. ए. एस. बाबुसिंह जामोद की उम्मीदवारी इस धार जिले की भाजपा में अपनी सशक्त दावेदारी होगी?

यूं तो बाबुसिंह जामोद एक सहज सरल मिलनसार व्यक्तित्व के धनी है जो उनसे एक बार मिलता है तो लगता नहीं कि वे आय ए एस कमिश्नर होंगे, एवं पहली बार मिल रहें हैं। मृदुभाषी जामोद से पहली मुलाकात में ही व्यक्ति उनका मुरीद हो जाता है। आय ए एस में और वनवासी क्षेत्रों का व्यक्तित्व ऐसे बहुत कम होते हैं, जो सहज सरल बहुआयामी हो, उन्होंने आय ए एस पद से अपनी कुशल प्रशासक की छबि के रूप में अनेकों मंत्रालय में अपनी भूमिका निभाई है इसलिए गांवों के विकास की नब्ज पर उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे व्यक्तित्व अगर राजनीति में आते हैं तो जरूर आदिवासी क्षेत्रों में विकास की इबारत के दम पर इस क्षेत्र का विकास सुव्यवस्थित होगा, यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं?

Ramswaroop Mantri

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