भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो महाभारत के युग के हैं। दिलचस्प बात है कि इनमें से ज्यादातर मंदिरों का निर्माण पांडव भाइयों ने करवाया है।
पांडव इतिहास के मशहूर भाइयों के अलावा राजा पांडु और उनकी दो पत्नियों कुंती और माद्री के पांच पुत्र थे। नई पीढ़ी को हमेशा महाभारत के इन भाइयों के जीवन से एक मजबूत संदेश मिलता है। कलयुग के शुरू होने के इस युग के कई प्रमाण और सबूत आज भी हैं। भारत में कुछ मंदिर महाकाव्य महाभारत के समय के हैं। इन्हें हिन्दुओं के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अनंतकाल के इस मंदिरों से पांडवों का गहरा नाता है। इस युग में या तो भाइयों ने इन मंदिरों का निर्माण कराया था या फिर खुद यहां आकर रहे थे। तो आइए जानते हैं भारत के उन मशहूर मंदिरों के बारे में, जो पांडवों द्वारा बनवाए गए थे।
महाविष्णु मंदिर, चेंगन्नूर –

पांचों में सबसे सच्चा और ईमानदार युधिष्ठिर युद्ध के मैदान में किए गए पापों के लिए उसे क्षमा करने के लिए इस मंदिर में भगवान विष्णु की थी।https://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.htmlमहाविष्णु मंदिर, तिरूप्पुलियुर –

महाविष्णु मंदिर, तिरूप्पुलियुर –
पांचों में सबसे बलवान भीम ने इस मंदिर में विष्णु की पूजा की थी। यह मंदिर सप्तऋषियों की कथा से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि भीम की भूख को देखते हुए यहां बनाया जाने वाला प्रसाद बहुत बड़ा होता है।
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देश के इन मंदिरों से है पांडवों का खास नाता, जानिए महाभारत युग के इन मंदिरों के बारे में
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो महाभारत के युग के हैं। दिलचस्प बात है कि इनमें से ज्यादातर मंदिरों का निर्माण पांडव भाइयों ने करवाया है।
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Updated: |नवभारतटाइम्स.कॉम
पांडव इतिहास के मशहूर भाइयों के अलावा राजा पांडु और उनकी दो पत्नियों कुंती और माद्री के पांच पुत्र थे। नई पीढ़ी को हमेशा महाभारत के इन भाइयों के जीवन से एक मजबूत संदेश मिलता है। कलयुग के शुरू होने के इस युग के कई प्रमाण और सबूत आज भी हैं। भारत में कुछ मंदिर महाकाव्य महाभारत के समय के हैं। इन्हें हिन्दुओं के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अनंतकाल के इस मंदिरों से पांडवों का गहरा नाता है। इस युग में या तो भाइयों ने इन मंदिरों का निर्माण कराया था या फिर खुद यहां आकर रहे थे। तो आइए जानते हैं भारत के उन मशहूर मंदिरों के बारे में, जो पांडवों द्वारा बनवाए गए थे।
(फोटो साभार : TOI.com)https://b6005d3e755b1d685254c0a033c0c4e8.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-45/html/container.html?n=0
महाविष्णु मंदिर, चेंगन्नूर –

पांचों में सबसे सच्चा और ईमानदार युधिष्ठिर युद्ध के मैदान में किए गए पापों के लिए उसे क्षमा करने के लिए इस मंदिर में भगवान विष्णु की थी।https://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.htmlhttps://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.html
महाविष्णु मंदिर, तिरूप्पुलियुर –

पांचों में सबसे बलवान भीम ने इस मंदिर में विष्णु की पूजा की थी। यह मंदिर सप्तऋषियों की कथा से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि भीम की भूख को देखते हुए यहां बनाया जाने वाला प्रसाद बहुत बड़ा होता है।
(फोटो साभार : wikipedia.com)
कृष्णाबाई मंदिर, महाबलेश्वर –

महाबलेश्वर में कृष्णा घाटी के सामने एक पहाड़ी पर बने इस मंदिर में एक शिव लिंगम और कृष्ण की सुंदर मूर्ति है। गाय के मुख से बहने वाली नदी की एक छोटी सी पानी की टंकी पर गिरती है। पत्थर के स्तंभों और छतों पर बारीक नक्काशी की गई है। यह मंदिर खंडहर में है , इसलिए ज्यादा लोग यहां नहीं जाते। कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों ने कराया था।
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देश के इन मंदिरों से है पांडवों का खास नाता, जानिए महाभारत युग के इन मंदिरों के बारे में
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो महाभारत के युग के हैं। दिलचस्प बात है कि इनमें से ज्यादातर मंदिरों का निर्माण पांडव भाइयों ने करवाया है।
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Updated: |नवभारतटाइम्स.कॉम
पांडव इतिहास के मशहूर भाइयों के अलावा राजा पांडु और उनकी दो पत्नियों कुंती और माद्री के पांच पुत्र थे। नई पीढ़ी को हमेशा महाभारत के इन भाइयों के जीवन से एक मजबूत संदेश मिलता है। कलयुग के शुरू होने के इस युग के कई प्रमाण और सबूत आज भी हैं। भारत में कुछ मंदिर महाकाव्य महाभारत के समय के हैं। इन्हें हिन्दुओं के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अनंतकाल के इस मंदिरों से पांडवों का गहरा नाता है। इस युग में या तो भाइयों ने इन मंदिरों का निर्माण कराया था या फिर खुद यहां आकर रहे थे। तो आइए जानते हैं भारत के उन मशहूर मंदिरों के बारे में, जो पांडवों द्वारा बनवाए गए थे।
महाविष्णु मंदिर, चेंगन्नूर –

पांचों में सबसे सच्चा और ईमानदार युधिष्ठिर युद्ध के मैदान में किए गए पापों के लिए उसे क्षमा करने के लिए इस मंदिर में भगवान विष्णु की थी
महाविष्णु मंदिर, तिरूप्पुलियुर –

पांचों में सबसे बलवान भीम ने इस मंदिर में विष्णु की पूजा की थी। यह मंदिर सप्तऋषियों की कथा से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि भीम की भूख को देखते हुए यहां बनाया जाने वाला प्रसाद बहुत बड़ा होता है
कृष्णाबाई मंदिर, महाबलेश्वर –

महाबलेश्वर में कृष्णा घाटी के सामने एक पहाड़ी पर बने इस मंदिर में एक शिव लिंगम और कृष्ण की सुंदर मूर्ति है। गाय के मुख से बहने वाली नदी की एक छोटी सी पानी की टंकी पर गिरती है। पत्थर के स्तंभों और छतों पर बारीक नक्काशी की गई है। यह मंदिर खंडहर में है , इसलिए ज्यादा लोग यहां नहीं जाते। कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों ने कराया था।https://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.html
किलकारी भैरो मंदिर, दिल्ली –

हम नहीं जानते कि यह कितना सच है कितना नहीं, लेकिन दिल्ली में स्थित यह मंदिर महाभारत काल का होने का दवा करता है। कहा जाता है कि इसे पांडवों ने भगवान शिव की पूजा करने के लिए बनवाया था। इस मंदिर में प्रसाद के रूप में शराब परोसी जाती है। यह मंदिर पुराना किला के पीछे स्थित है, जहां पांडव कभी रहा करते थे।
केदारनाथ ज्योर्तिलिंग –

यह बहुत प्रसिद्ध मंदिर है। मौसम की स्थिति के कारएा मंदिर केवल अप्रैल के अंत से कार्तिक पूर्णिमा के बीच ख्ुाला रहता है। कहा जाता है कि मंदिर पांडवों द्वारा बनवाया गया था और आदि शंकराचार्य ने इसे पुर्नजीवित किया था। यह मंदिर 10वीं शताब्दी से भीषण प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए बिना चमत्कारिक रूप से खड़ा हुआ है।
महाविष्णु मंदिर, तिरूवंदूर –

बताया जाता है कि यह मङ्क्षदर पांडव राजकुमार नकुल ने बनवाया था। कहते हैं कि भगवान विष्णु की इस जगह पर अपने मंदिर की पूजा करने के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों का वर्णन करते हुए एक ग्रंथ बनाया है। नारद मुनि का भी इस मंदिर से गहरा नाता ह
पांडव इतिहास के मशहूर भाइयों के अलावा राजा पांडु और उनकी दो पत्नियों कुंती और माद्री के पांच पुत्र थे। नई पीढ़ी को हमेशा महाभारत के इन भाइयों के जीवन से एक मजबूत संदेश मिलता है। कलयुग के शुरू होने के इस युग के कई प्रमाण और सबूत आज भी हैं। भारत में कुछ मंदिर महाकाव्य महाभारत के समय के हैं। इन्हें हिन्दुओं के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अनंतकाल के इस मंदिरों से पांडवों का गहरा नाता है। इस युग में या तो भाइयों ने इन मंदिरों का निर्माण कराया था या फिर खुद यहां आकर रहे थे। तो आइए जानते हैं भारत के उन मशहूर मंदिरों के बारे में, जो पांडवों द्वारा बनवाए गए थे।
महाविष्णु मंदिर, चेंगन्नूर –

पांचों में सबसे सच्चा और ईमानदार युधिष्ठिर युद्ध के मैदान में किए गए पापों के लिए उसे क्षमा करने के लिए इस मंदिर में भगवान विष्णु की थी।https://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.htmlhttps://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.html
महाविष्णु मंदिर, तिरूप्पुलियुर –

पांचों में सबसे बलवान भीम ने इस मंदिर में विष्णु की पूजा की थी। यह मंदिर सप्तऋषियों की कथा से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि भीम की भूख को देखते हुए यहां बनाया जाने वाला प्रसाद बहुत बड़ा होता है।
(फोटो साभार : wikipedia.com)
कृष्णाबाई मंदिर, महाबलेश्वर –

महाबलेश्वर में कृष्णा घाटी के सामने एक पहाड़ी पर बने इस मंदिर में एक शिव लिंगम और कृष्ण की सुंदर मूर्ति है। गाय के मुख से बहने वाली नदी की एक छोटी सी पानी की टंकी पर गिरती है। पत्थर के स्तंभों और छतों पर बारीक नक्काशी की गई है। यह मंदिर खंडहर में है , इसलिए ज्यादा लोग यहां नहीं जाते। कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों ने कराया था।https://d-38926068192995435351.ampproject.net/2504091801000/frame.html
किलकारी भैरो मंदिर, दिल्ली –

हम नहीं जानते कि यह कितना सच है कितना नहीं, लेकिन दिल्ली में स्थित यह मंदिर महाभारत काल का होने का दवा करता है। कहा जाता है कि इसे पांडवों ने भगवान शिव की पूजा करने के लिए बनवाया था। इस मंदिर में प्रसाद के रूप में शराब परोसी जाती है। यह मंदिर पुराना किला के पीछे स्थित है, जहां पांडव कभी रहा करते थे।
(फोटो साभार : TOI.com)https://b6005d3e755b1d685254c0a033c0c4e8.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-45/html/container.html?n=0
केदारनाथ ज्योर्तिलिंग –

यह बहुत प्रसिद्ध मंदिर है। मौसम की स्थिति के कारएा मंदिर केवल अप्रैल के अंत से कार्तिक पूर्णिमा के बीच ख्ुाला रहता है। कहा जाता है कि मंदिर पांडवों द्वारा बनवाया गया था और आदि शंकराचार्य ने इसे पुर्नजीवित किया था। यह मंदिर 10वीं शताब्दी से भीषण प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए बिना चमत्कारिक रूप से खड़ा हुआ है।
(फोटो साभार : TOI.com)https://b6005d3e755b1d685254c0a033c0c4e8.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-45/html/container.html?n=0
महाविष्णु मंदिर, तिरूवंदूर –

बताया जाता है कि यह मङ्क्षदर पांडव राजकुमार नकुल ने बनवाया था। कहते हैं कि भगवान विष्णु की इस जगह पर अपने मंदिर की पूजा करने के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों का वर्णन करते हुए एक ग्रंथ बनाया है। नारद मुनि का भी इस मंदिर से गहरा नाता है।
(फोटो साभार : Toi.com)

पंच केदार मंदिर –

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार जब पांडव पहाड़ी की यात्रा कर रहे थे, तो उन्हें एक बैल मिला, जो वास्तव में भगवान शिव का अवतार था। शिव ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वह महाभारत में निर्दोष लोगों की हत्या के संबंध में उनके नाराज थे। जब पांडवों को उस पर शिव होने का संदेह हुआ तो उन्होंने बैल का पीछा किया। बैल के शरीर को तब पांच टुकड़ों के रूप में पाया गया था, जिसे बाद में पांडवों ने उसे मंदिर में बदल दिया।





