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*समाजवादी आंदोलन के 90 सालों के इतिहास योगदान और चुनौतियों को रेखांकित करती डॉक्टर सुनीलम की पुस्तक*

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*”समाजवादी आंदोलन के 90 वर्ष इतिहास समाजवादी चिंतकों का योगदान चुनौतियां और संभावनाएं”*

 *रामस्वरूप मंत्री* 

गत 17 मई को समाजवादी आंदोलन के 90 साल हो चुके हैं और इस अवसर पर पुणे में देश भर के समाजवादियों का एकजूटता सम्मेलन होने वाला था, लेकिन देश की परिस्थितियों को देखते हुए इस सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया ।

 सम्मेलन के मौके पर ही डॉक्टर सुनीलम के आलेखों का एक संग्रह पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ था, जिसका विमोचन भी होना था, लेकिन सम्मेलन नहीं हुआ तो पुस्तक का विमोचन भी नहीं हुआ। लेकिन वह पुस्तक “समाजवादी आंदोलन के 90 वर्ष इतिहास समाजवादी चिंतकों का योगदान चुनौतियां और संभावनाएं” शीर्षक से प्रकाशित हो चुकी थी जो अब लोगों के हाथों में भी आ चुकी है । 

समाजवादी आंदोलन यूं तो व्यापक रहा है और उसे किसी एक किताब में समेटा जाना मुश्किल है ।फिर भी डॉक्टर सुनीलम ने विभिन्न अवसरों पर जो 22 लेख लिखे हैं । वो समाजवादी आंदोलन की एक बानगी तो पस्तुत करते ही हैं । इन लेखों को इस पुस्तक में संग्रहित किया गया है।जिसमें समाजवादी आंदोलन के जूने और नए नेताओं के जीवन , आंदोलन में उनका योगदान, उनसे डॉक्टर सुनीलम के जीवन पर पड़ा प्रभाव इन सबका उल्लेख हुआ है ।

यह आलेख संग्रह  राजनीति और जनांदोलनों के ताने-बाने से रची गयी पठनीय कृति है। प्रामाणिक तथ्यों और आत्मीय स्मृतियों का आकर्षक समन्वय इसे महत्वपूर्ण बनाता है। समाजवादी आन्दोलन की नौ दशकों की रोमांचक यात्रा के बारे में  समीक्षात्मक लेख और आचार्य नरेन्द्र देव, स्वामी सहजानन्द, जयप्रकाश नारायण, डॉ. लोहिया, कमला देवी चट्टोपाध्याय, कर्पूरी ठाकुर ,किशन पटनायक, जॉर्ज फर्नांडिस, मधु लिमये, सुरेंद्र मोहन, डॉक्टर जीजी पारीख प्रोफेसर विनोद प्रसाद सिंह ,रविराय, चंद्रशेखर

मामा बालेश्वर दयाल ,मुलायम सिंह यादव, पुरुषोत्तम कौशिक, जगदम्बा प्रसाद निगम और शरद यादव सहित बीस समाजवादी शिखर-पुरुषों के योगदान सम्बन्धित स्मृति-आलेखों को डा सुनीलम ने संग्रहित कर भारतीय समाजवादी परम्परा और विरासत से परिचित कराने की एक अनूठी कोशिश की है। 

डॉ सुनीलम ने पुस्तक के पहले आलेख में आत्मकथा के रूप में समाजवादी आंदोलन का विश्लेषण करते हुए उसके इतिहास योगदान चुनौती और संभावनाओं को अच्छे से प्रस्तुत किया है इस लेख में जहां इमरजेंसी 1974 की प्रभावशाली रेल हड़ताल 1959 में नौ राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार है डॉक्टर लोहिया का अल्पायु में निधन जेपी कi समाजवाद से बिछड़ कर सर्वोदय में सक्रिय होना साथ ही आजादी के आंदोलन में सक्रिय समाजवादी नेताओं का उल्लेख भी किया है वहीं आजादी के बाद के तमाम उन नेताओं का उल्लेख किया है जिन्होंने समाजवादी विचार को आगे बढ़ते हुए राजनीतिक धरातल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई 

पुस्तक की भूमिका लिखते हुए प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक प्रोफेसर आनंद कुमार ने पुस्तक का पुरा निचोड़ प्रस्तुत किया है साथ ही डॉक्टर सुनीलम की संघर्ष की राजनीति का भी विश्लेषण किया है । वही भूमिका के एक और लेख में प्रसिद्ध समाजवादी लेखक पत्रकार अरुण कुमार त्रिपाठी ने भी आजादी के आंदोलन और वर्तमान कि विपक्ष की राजनीति को रेखांकित करते हुए डॉक्टर सुनीलम को भारत के समाजवादी आंदोलन की तीसरी पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर निरूपित किया है। उनका भी मानना है कि यह संकलन न सिर्फ युवाओं और कार्यकर्ताओं को बल्कि पत्रकारों के लिए भी एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में काम करेगा।

जहां डॉ. सुनीलम ने अपने लेखों में समाजवाद की 11 उपलब्धियों को रेखांकित  करते हुए समाजवादियों की नौ चुनौतियों को भी पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है। देश में बढती नफरत, साम्प्रदायिकता, गहराती गैरबराबरी और  बेतहाशा गरीबी को लेकर चौतरफा  संकट की स्थिति है।  ऐसे दौर में यह सकारात्मक पुस्तक निश्चित संघर्षशील कार्यकर्ताओं और समाजवादी विचार को मानने वाले लोगों को एक दिशा देने का भी काम करेगी।

समाजवादी आंदोलन की चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि हिंद मजदूर सभा राष्ट्र सेवा दल पीयूसीएल एन ए पीएम के नेतृत्व में समाजवादी एकजुट की दिशा में ठोस पहल होगी और अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे युवा नेतृत्व और देश के समाजवादियों को एक करने में प्रयास करेंगे 12 लाख से अधिक सदस्यता वाले हिंद मजदूर सभा के साथ ही आपने जनता वीकली के लगातार प्रशासन राष्ट्र सेवा दल में साने गुरुजी एसएम जोशी और एन जी गोरे जैसे समजवादियों की बड़ी भूमिका का उल्लेख करते हुए इन तमाम संगठनों में सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं से उम्मीद जताई है कि 90 साल के समाजवादी आंदोलन में यह सब प्रयास करेंगे कि समाजवादियों के 90 विचार केंद्र देश में स्थापित हो जिसमें समाजवादियों का अगला लक्ष्य गांधीवादियों, वामपंथियों ,अंबेडकर वादियों में जन संगठनों के साथ जमीनी और वैचारिक एकजूटता निर्माण करना समाजवादी आंदोलन के उतार-चढ़ाव को जानना- समझना, उसकी गहराई से अध्ययन करना, संगठन की कमियों को दूर करना, राष्ट्रीय स्तर पर समाजवादी विचार की सोशलिस्ट पार्टी खड़ी करना, आदि  का इन केदो में प्रशिक्षण भी दिया जाए । आपने समाजवादी आंदोलन की आज की जरूरत को रेखांकित करते हए उम्मीद जताई की जेल, वोट और हावड़ा तीनों दिशाओं में समग्रता से समाजवादी कार्यकर्ता कार्य करेंगे ।

*लेखक इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार और समाजवादी पार्टी मध्यपदेश के महासचिव है*

Ramswaroop Mantri

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