ट्रंप की ट्रैवल बैन लिस्ट में कौन-कौन से देश’, 2 भारत के पड़ोसी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का आदेश सोमवार को 12:01 बजे ET (0401 GMT) से प्रभावी हो जाएगा। ट्रंप का दावा है कि यह कदम देश को “विदेशी आतंकवादियों” से बचाने के लिए उठाया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। उनका यह आदेश सोमवार को 12:01 बजे ET (0401 GMT) से प्रभावी हो जाएगा। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने यह कदम अमेरिका को “विदेशी आतंकवादियों” से बचाने के लिए उठाया है। इस लिस्ट में एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के देश शामिल है। ट्रंप के ट्रैवल बैन की जद में भारत के दो पड़ोसी देश भी हैं।
ट्रंप ने किन देशों पर लगाया यात्रा प्रतिबंध
ट्रंप के नवीनतम यात्रा प्रतिबंध से प्रभावित होने वाले देश हैं अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन। सात अन्य देशों – बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला – के लोगों के प्रवेश पर आंशिक रूप से प्रतिबंध रहेगा।
ट्रंप ने कहा कि सबसे कठोर प्रतिबंधों के अधीन देश “आतंकवादियों की बड़े पैमाने पर मौजूदगी” को पनाह देने के लिए कुख्यात हैं, वीजा सुरक्षा पर सहयोग करने में विफल हैं, यात्रियों की पहचान सत्यापित करने में असमर्थ हैं, साथ ही आपराधिक इतिहास का अपर्याप्त रिकॉर्ड-कीपिंग और संयुक्त राज्य अमेरिका में वीजा ओवरस्टे की उच्च दर है।
ट्रंप ने बोल्डर, कोलोराडो में पिछले रविवार की घटना का हवाला दिया, जिसमें एक मिस्र के नागरिक ने इजरायल समर्थक प्रदर्शनकारियों की भीड़ में एक गैसोलीन बम फेंका था, जो नए प्रतिबंधों की आवश्यकता का एक उदाहरण है। लेकिन मिस्र यात्रा प्रतिबंध का हिस्सा नहीं है।
भारत समेत दुनिया के कई महानगर धंसने-डूबने की कगार पर; समुद्री जलस्तर बढ़ा, 7.6 करोड़ आबादी खतरे में
भारत समेत दुनिया के कई महानगरों पर तेजी से धंसने और डूबने का खतरा मंडराने लगा है। समुद्र के बढ़ते जलस्तर से जूझ रहे ये शहर तेजी से अपनी जमीन खो रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय शोध में सामने आया है कि एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के दर्जनों महानगर हर साल औसतन एक सेंटीमीटर या उससे अधिक धंस रहे हैं, जिससे करोड़ों की आबादी बाढ़, जलभराव और संरचनात्मक अस्थिरता जैसे जोखिमों की चपेट में आ गई है।
भारत के मुंबई, सूरत, चेन्नई, कोलकाता और अहमदाबाद भी इस संकट में शामिल हैं, जहां लाखों लोग ऐसी जमीन पर रह रहे हैं जो हर साल नीचे जा रही है। सिंगापुर स्थित नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) के शोध में खुलासा हुआ है कि दुनिया के कई समुद्रतटीय शहर तेजी से धंस रहे हैं और यह प्रक्रिया बेहद चिंताजनक है। अध्ययन में एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के 48 महानगरों को शामिल किया गया। इन सभी में एक बात समान है, समुद्र का बढ़ता जलस्तर और जमीन का तेजी से नीचे जाना। बीबीसी के अनुमान के अनुसार वर्ष 2014 से 2020 के बीच इन शहरों के ऐसे क्षेत्रों में लगभग 7.6 करोड़ लोग रह रहे हैं, जहां जमीन हर साल औसतन कम से कम 1 सेंटीमीटर धंसी है।
मुंबई में हर साल करीब 2.8 सेंटीमीटर तक धंस रही जमीन
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के किंग्स सर्कल स्टेशन जैसे इलाकों में हर साल जमीन करीब 2.8 सेंटीमीटर तक धंस रही है। यहां करीब 62 लाख लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां जमीन 1 सेंटीमीटर से अधिक की दर से हर साल नीचे जा रही है। इसकी प्रमुख वजह अनियंत्रित भूजल दोहन, भारी निर्माण कार्य, मेट्रो परियोजनाएं, ऊंची इमारतें और नम भूमि पर अवैज्ञानिक विकास माना जा रहा है।
सूरत भी इस खतरे का सामना कर रहा
गुजरात का तेजी से उभरता हुआ औद्योगिक शहर सूरत भी इसी खतरे का सामना कर रहा है। करंज जैसे क्षेत्र में जमीन 6.7 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से धंस रही है। यहां करीब 41 लाख लोग प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं।
चेन्नई में भी हर साल 0.01 से 3.7 सेंटीमीटर तक धंस रही जमीन
यहां की जमीन कई हिस्सों में औसतन हर साल 0.01 से 3.7 सेंटीमीटर तक धंसी है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार चेन्नई के लगभग 12 लाख लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां जमीन औसतन सालाना 1 सेंटीमीटर की दर से धंस रही है।
अहमदाबाद के 34 लाख लोग गंभीर खतरे की जद में
अहमदाबाद के पीपलाज इलाके में जमीन हर साल 4.2 सेंटीमीटर तक धंस रही है। लगभग 34 लाख लोग इस गंभीर खतरे की परिधि में हैं।
कोलकाता के भाटपाड़ा क्षेत्र में सबसे ज्यादा भू-धंसाव
कोलकाता के कई हिस्सों में हर साल जमीन औसतन 0.01 से 2.8 सेंटीमीटर तक धंसी। सबसे ज्यादा भू-धंसाव भाटपाड़ा क्षेत्र में दर्ज हुआ, जहां जमीन सालाना 2.6 सेंटीमीटर नीचे गई। ऐसे खतरनाक क्षेत्रों में करीब 17 लाख लोग रहते हैं।
सबसे लंबे फ्रेंच ओपन फाइनल में कार्लोस अल्कारेज ने सिनर को हराया
स्पेन के कार्लोस अल्कारेज ने फ्रेंच ओपन 2025 के फाइनल में इटली के यानिक सिनर को हराकर खिताब जीता। सिनर ने शुरुआती दो सेट जीते, लेकिन अल्कारेज ने शानदार वापसी करते हुए अगले तीन सेट अपने नाम किए।

स्पेन के कार्लोस अल्कारेज ने फ्रेंच ओपन 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया है। खिताबी मुकाबले में उनकी टक्कर इटली के यानिक सिनर से थे। पहले दो सेट को सिनर ने अपने नाम किया। इसके बाद अल्कारेज ने दमदार वापसी करते हुए अगले तीनों सेट जीते और खिताब अपने नाम कर लिया। यह उनका लगातार दूसरा फ्रेंच ओपन खिताब है। वहीं 22 साल के अल्कारेज का यह कुल पांचवां ग्रैंड स्लैम है।
तीन सेट का फैसला टाई ब्रेकर में
कार्लोस अल्कारेज ने इस खिताबी मुकाबले को 4–6, 6–7, 6–4, 7–6, 7–6 से अपने नाम किया। दूसरे, चौथे और आखिरी सेट का फैसला टाई ब्रेकर में आया। चौथे सेट में एक समय यानिक सिनर जीत के करीब पहुंच गए थे। उन्हें तीन मैच पॉइंट मिले लेकिन हर बार अल्कारेज ने वापसी की और मैच पॉइंट बचा लिए। 5वें सेट का नतीजा सुपर टाई ब्रेकर में आया। इसमें सबसे पहले 10 पॉइंट हासिल करने वाले खिलाड़ी को जीत मिलती है। अल्कारेज ने इसमें 10-2 से जीत हासिल की।
5 घंटे 29 मिनट तक चला फाइनल
यह खिताबी मुकाबला 5 घंटे और 29 मिनट तक चला। यह फ्रेंच ओपन इतिहास का सबसे लंबा फाइनल है। ओपन एरा में अभी तक कोई भी फ्रेंच ओपन फाइनल 5 घंटे तक नहीं पहुंचा था। इससे पहले 1982 का फाइनल मुकाबला 4 घंटे और 20 मिनट तक चला था। मैट्स विलेंडर ने उस मुकाबले को गिलर्मो विलास को हराया था। ग्रैंड स्लैम का सबसे लंबा फाइनल 2012 में नोवाक जोकोविच और राफेल नडाल के बीच हुआ था। यह मुकाबला ऑस्ट्रेलियन ओपन का था।
रिहा होंगे इमरान खान? पाकिस्तान में आएगा ‘भूचाल’
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द ही गुड न्यूज मिल सकती है। इमरान खान की पार्टी पीटीआई के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि उन्हें 11 जून को अल कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में जमानत मिल सकती है। वह कई मामलों में अगस्त 2023 से जेल में हैं। पीटीआई नेताओं का यह भी कहना है कि इमरान खान जेल से जल्द ही बाहर आ सकते हैं।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द ही गुड न्यूज मिल सकती है। इमरान खान की पार्टी पीटीआई के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि उन्हें 11 जून को अल कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में जमानत मिल सकती है। वह कई मामलों में अगस्त 2023 से जेल में हैं। पीटीआई नेताओं का यह भी कहना है कि इमरान खान जेल से जल्द ही बाहर आ सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान के राजनीतिक हालात और सेना की दखलअंदाजी को देखते हुए इसकी कम ही संभावना जताई जा रही है।
अल-कादिर ट्रस्ट मामले में मिलेगी जमानत!
रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) 11 जून को उन याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है, जिनमें 190 मिलियन पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट मामले में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की सजा को निलंबित करने का अनुरोध किया गया है। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख गौहर अली खान ने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी के संस्थापक को उस दिन जमानत मिल जाएगी। गौहर अली खान ने कहा कि 11 जून खान और उनकी पत्नी दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन होने जा रहा है।
इससे पहले, इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने अल-कादिर ट्रस्ट मामले में याचिकाओं की सुनवाई 11 जून तक के लिए स्थगित कर दी थी। एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) द्वारा अपनी दलीलें तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद सुनवाई स्थगित की गई। गोहर ने शनिवार को एआरवाई न्यूज को बताया कि पीटीआई विपक्षी दलों के साथ मिलकर एक आंदोलन शुरू करेगी, जिसका नेतृत्व पार्टी के संरक्षक जेल से करेंगे।
पाकिस्तान में बड़ा आंदोलन करेगी पीटीआई
गोहर ने विपक्षी दलों से देश के अस्तित्व और सुरक्षा की खातिर पीटीआई में शामिल होने का अनुरोध किया और खुलासा किया कि आगामी बजट के लिए एक रणनीति को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा, “पार्टी इस बारे में 9 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेगी।” पिछले महीने की शुरुआत में, इमरान खान ने कहा था कि वह केंद्र में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के खिलाफ अपनी पार्टी के आगामी विरोध आंदोलन का नेतृत्व जेल से करेंगे।
यूक्रेन सैनिकों के अवशेषों की अदला-बदली से पीछे हटा?
रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों के बीच इस महीने की शुरुआत में 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करने पर सहमति बनी थी। तुर्की के इस्तांबुल में हुई वार्ता में ये समझौता हुआ था लेकिन अब ये डील खतरे में पड़ गई है। रूस का दावा है कि यूक्रेन 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करने से पीछे हट रहा है।

: रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों के बीच इस महीने की शुरुआत में 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करने पर सहमति बनी थी। तुर्की के इस्तांबुल में हुई वार्ता में ये समझौता हुआ था लेकिन अब ये डील खतरे में पड़ गई है। रूस का दावा है कि यूक्रेन 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली करने से पीछे हट रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन का कहना है कि रूस ‘गंदी चाल’ चलते हुए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है। दोनों पक्षों के अपने दावे हैं, जिससे सैनिकों के अवशेषों की अदला-बदली अटक गई है।
रूसी अधिकारियों ने रविवार को दोहराया है कि यूक्रेन से इस बात की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है कि युद्ध में मारे गए 6,000 सैनिकों के शवों की अदला-बदली की योजना शुरू हो पाएगी या नहीं। मॉस्को के अधिकारियों का कहना है कि कीव ने बिना किसी वजह के सैनिकों के अवशेषों की इस अदला-बदली को स्थगित कर दिया है। वहीं उनकी ओर से शनिवार को ही शवों के अवशेषों वाले रेफ्रिजेरेटर भेज दिए गए।
लेंस्की क्यों नहीं चाहते समझाता: रूस
रूस के सरकारी मीडिया ने रूसी वार्ता समूह के प्रतिनिधि लेफ्टिनेंट जनरल अलेक्जेंडर जोरिन के हवाले से कहा कि उनकी ओर से यूक्रेनी सैनिकों के 1,212 शवों के रेफ्रिजेरेटर को सीमा पर उस जगह भेज दिया गया है, जहां अवशेषों की अदला-बदली होनी है। इस जगह पर रूसी टीम लगातार यूक्रेन से पुष्टि का इंतजार कर रहा है। ऐसे संकेत मिले हैं कि शवों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अगले सप्ताह तक स्थगित की जाएगी।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से पूछा है कि अपने देश के सैनिकों के शवों को नहीं लेने का निर्णय उनका खुद का है या फिर नाटो ने इसे रोका है। दूसरी ओर यूक्रेन ने कहा है कि रूस के साथ समझौते में शवों को वापस लेने के लिए तारीख तय नहीं की गई थी। यूक्रेन ने रूस पर ऐसी लिस्ट देने का भी आरोप लगाया, जो सोमवार को हुए समझौतों के अनुरूप नहीं है।
जाति जनगणना, एक चुनाव… चंद्रबाबू के रुख से एनडीए को कितना फायदा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “ग्लोबल लीडर” बताया और उनकी प्रशंसा की। उनकी पार्टी TDP, केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन कर रही है। नायडू ने कहा कि PM मोदी ने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “ग्लोबल लीडर” बताया और उनकी प्रशंसा की। उनकी पार्टी TDP, केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन कर रही है। नायडू ने कहा कि PM मोदी ने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई।
नायडू ने कहा, “100 प्रतिशत। यह (ऑपरेशन सिंदूर) मोदी सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। कोई और नेता इतनी सटीकता से यह काम नहीं कर सकता था। पहलगाम में हुआ आतंकी हमला दुर्भाग्यपूर्ण था। पतियों को उनकी पत्नियों के सामने मार दिया गया।” उन्होंने कहा कि PM मोदी ने भारत के सैन्य अभियान का नाम ‘सिंदूर’ रखा। ऐसा उन्होंने भारतीय महिलाओं की भावनाओं का सम्मान करने और पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों से बदला लेने के लिए किया। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय व्यक्ति मारे गए थे।
नायडू ने आगे कहा, “20 मिनट के अंदर, हमने आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। हमने नागरिकों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं किया। संघर्ष सही समय पर खत्म हो गया। PM मोदी ने लड़ाई खत्म कर दी। क्या यह हमारी उपलब्धि नहीं है? उनकी समझदारी काम आई। अगर युद्ध लंबा चलता, तो हमें नुकसान होता।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ 7 मई को शुरू हुआ था। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में नौ जगहों पर आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया। इसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। उन्होंने भारत के सीमावर्ती शहरों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। हालांकि, भारत ने जवाबी कार्रवाई की और कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद दोनों देश लड़ाई रोकने के लिए राजी हो गए।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के इस दावे पर कि क्या भारत अमेरिका के दबाव में आ गया, नायडू ने कहा कि “किसी के सामने सरेंडर करने की कोई जरूरत नहीं थी।” उन्होंने कहा, “हमारी अपनी रणनीतियाँ हैं। ट्रंप को कौन कंट्रोल करेगा? वह अपनी मर्जी से बात करेंगे। लेकिन साथ ही, PM मोदी की समझदारी काम आई। हम बहुत स्पष्ट हैं। हम बेवजह झगड़ा नहीं करेंगे। अगर कोई हम पर हमला करता है, तो हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं। हम अपने देश की रक्षा करने में सक्षम हैं।”
इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को दिए एक इंटरव्यू में नायडू ने कहा कि भारत सभी देशों के साथ दोस्ताना संबंध चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि “कहीं से भी किसी सिफारिश या समर्थन की कोई जरूरत नहीं है।” नायडू ने कहा, “PM मोदी विश्व स्तर पर एक बड़े नेता के रूप में उभर रहे हैं। यह हमारे देश के लिए गर्व की बात है।”
वक्फ (संशोधन) अधिनियम का समर्थन
नायडू, जिनकी TDP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने आंध्र प्रदेश में एक साल पूरा कर लिया है, ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम का समर्थन किया। यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में प्रशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करना चाहता है। नायडू ने कहा कि यह कानून मुस्लिम समर्थक है। TDP, जो केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन करती है, ने संसद में वक्फ अधिनियम के पक्ष में मतदान किया था।
अडानी को इस साल मिली 10 करोड़ रुपये से ज्यादा सैलरी, बेटा, भाई और भतीजों की कितनी हुई कमाई?
भारत के दूसरे सबसे अमीर और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 10.41 करोड़ रुपये की सैलरी मिली है। यह रकम उनके उद्योग के कई साथियों और उनकी कंपनी के बड़े अधिकारियों से भी कम है।
अडानी ग्रुप की 9 कंपनियां शेयर मार्केट में लिस्ट हैं। इनमें से मात्र दो कंपनियों से ही उन्होंने सैलरी ली है। यह जानकारी ग्रुप की कंपनियों की सालाना रिपोर्ट से मिली है। उनकी कुल सैलरी पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के 9.26 करोड़ रुपये से 12% ज्यादा है। वहीं सबसे अमीर भारतीय मुकेश अंबानी ने कोविड-19 के बाद से अपनी पूरी सैलरी छोड़ दी है। इससे पहले उन्होंने अपनी सैलरी को 15 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया था।
इन दो कंपनियों से लिया वेतन
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) से उन्हें 2024-25 में 2.26 करोड़ रुपये सैलरी और 28 लाख रुपये भत्ते के तौर पर मिले। AEL से उनकी कुल कमाई 2.54 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्तीय वर्ष में 2.46 करोड़ रुपये थी।
इसके अलावा, उन्हें अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) से 7.87 करोड़ रुपये मिले। इसमें 1.8 करोड़ रुपये सैलरी और 6.07 करोड़ रुपये कमीशन शामिल है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में उन्हें APSEZ से 6.8 करोड़ रुपये मिले थे।
अडानी से ज्यादा इनकी सैलरी
अडानी की सैलरी टेलीकॉम के बड़े कारोबारी सुनील भारती मित्तल (32.27 करोड़ रुपये 2023-24 में), राजीव बजाज (53.75 करोड़ रुपये FY24 में), पवन मुंजाल (109 करोड़ रुपये FY24 में), एलएंडटी के चेयरमैन एस एन सुब्रमण्यन (76.25 करोड़ रुपये FY25 में) और इंफोसिस के सीईओ सलिल एस पारेख (80.62 करोड़ रुपये FY25 में) से बहुत कम है।दूसरे प्रमोटरों की तरह अडानी भी ग्रुप की कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड से कमाई करते हैं। डिविडेंड यानी कंपनी के मुनाफे का वह हिस्सा जो शेयरधारकों को दिया जाता है।
ग्रुप कंपनियों के सीईओ से भी कम वेतन
अडानी की सैलरी उनकी ग्रुप कंपनियों के कुछ सीईओ से भी कम है। एईएल के सीईओ विनय प्रकाश को 69.34 करोड़ रुपये मिले। प्रकाश की सैलरी में 4 करोड़ रुपये सैलरी और 65.34 करोड़ रुपये भत्ते और वेरिएबल इंसेंटिव शामिल थे। यह इंसेंटिव उन्हें कंपनी के माइनिंग सर्विसेज और इंटीग्रेटेड रिसोर्सेज मैनेजमेंट बिजनेस में शानदार प्रदर्शन के लिए मिला था।
रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत एस जैन को 11.23 करोड़ रुपये मिले, जबकि ग्रुप के सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने FY25 में 10.4 करोड़ रुपये कमाए।
चीन से समझौते को बेकरार क्यों हैं ट्रंप, जानें पर्दे के पीछे का खेल
अमेरिका और चीन में व्यापार को लेकर रस्साकस्सी जारी है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ की बौछार कर दी और बाद में उसे पुचकारने लगे। अब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल चीन से नए व्यापार समझौते को लेकर बात कर रहा है। हालांकि, चीन अब अमेरिका को वैसी तवज्जो नहीं दे रहा है, जैसी पहले देता था। इसका प्रमुख कारण है चीन पर अमेरिका की निर्भरता। चीन जानता है कि अमेरिका बिना उसकी मदद के नहीं रह सकता। यह कई कारणों में से एक है, जिसने डोनाल्ड ट्रंप जैसे जिद्दी नेता को चीन से समझौता करने के लिए घुटनों पर ला दिया है। ट्रंप पर अमेरिकी बाजार का भी दबाव है कि वह चीन के साथ जल्द से जल्द एक समझौता करें, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में आए गैप को भरा जा सके।
अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री को चीन की जरूरत
दरअसल, अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री अपने उन्नत हथियारों के लिए कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों का इस्तेमाल करती है। अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनियां इन खनिजों की आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर हैं। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच जारी टैरिफ युद्ध ने इस आपूर्ति को लगभग ठप कर दिया है। चीन ने अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले दुर्लभ खनिजों पर रोक लगा दी है, जिसका सीधा असर पेंटागन की सैन्य तैयारियों और हथियारों के निर्माण पर पड़ा है। इससे अमेरिका के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का बादशाह है चीन
साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है, जिसमें दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक प्रसंस्करण और शोधन शामिल हैं। परिष्कृत गैलियम जैसे अधिकांश अन्य महत्वपूर्ण खनिजों में भी इसकी बढ़त है, जिसके उत्पादन का 98.8 प्रतिशत हिस्सा इसके नियंत्रण में है। हाल के वर्षों में, बीजिंग ने व्यापार युद्धों में एक महत्वपूर्ण बातचीत बिंदु के रूप में महत्वपूर्ण खनिज उत्पादन और शोधन में अपने प्रभुत्व का लाभ उठाया है, साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगियों के रक्षा उद्योगों को लक्षित किया है।

जुलाई 2023 में, बीजिंग ने निर्यातकों को आठ गैलियम-संबंधित और छह जर्मेनियम-संबंधित उत्पादों को विदेश भेजने के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता वाले नियंत्रण लगाए। अगस्त 2024 में एंटीमनी को शामिल करने के लिए सूची का विस्तार किया गया। दिसंबर में, चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने संयुक्त राज्य अमेरिका को गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी पर निर्यात प्रतिबंध लगा दिया, जो अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री को प्रभावित करता है।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का निर्यात रोका
अप्रैल में, बीजिंग ने मध्यम और भारी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई) की सात श्रेणियों – समैरियम, गैडोलीनियम, टेरबियम, डिस्प्रोसियम, ल्यूटेटियम, स्कैंडियम और यिट्रियम – के साथ-साथ मैग्नेट और अन्य तैयार उत्पादों के लिए विशेष निर्यात लाइसेंस की आवश्यकता वाले व्यापार प्रतिबंध लगाए, जिनमें उन्हें चीन से बाहर भेजा जाना था। ऐसे में अमेरिका समेत उसके सहयोगी देशों के रक्षा उद्योगों की कमर टूट गई और उन्हें हथियारों के निर्माण में जरूरी दुर्लभ खनिजों की कमी का सामना करना पड़ा।
अमेरिका के लिए क्यों जरूरी दुर्लभ पृथ्वी तत्व
ये तत्व विभिन्न अमेरिकी उन्नत हथियार प्रणालियों के लिए आवश्यक हैं, जिनमें सटीक हमला करने वाली गाइडेड मिसाइल, लड़ाकू विमान, नौसैनिक युद्धपोत, पनडुब्बियां और उन्नत रडार सिस्टम शामिल हैं।
लड़ाकू विमान: F-35 लड़ाकू विमानों में जेट इंजन, एवियोनिक्स, युद्ध सामग्री और रडार के लिए प्रति यूनिट 400 किलोग्राम (900 पाउंड) से अधिक दुर्भल पृथ्वी तत्व होते हैं। वाशिंगटन के नवीनतम नेक्स्ट-जेनरेशन एयर डोमिनेंस (NGAD) लड़ाकू विमान, F-47 में भी मानव रहित विमान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल करने पर विचार करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों की पर्याप्त मात्रा शामिल होने की संभावना है।
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में भीषण गर्मी-लू से हलकान जनमानस
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर पूरा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में तो पारा 47.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है, राज्य के कई स्थानों पर भी तापमान 45 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। अभी चार दिनों तक ऐसे ही हालात बने रहने की संभावना है। उसके बाद दक्षिण पश्चिम मानसून के प्रभाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले 3 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के कई स्थानों पर 11 जून तक लू चलने की संभावना है और 09 जून को इसका असर बहुत गंभीर हो सकता है। रविवार को भी बीकानेर, बाड़मेर, चुरू, फलौदी, जैसलमेर और कोटा में 45-46 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान दर्ज किया गया। अगले हफ्ते भी पारा के 45-47 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। बीकानेर मंडल और आसपास के क्षेत्रों में 8 और 10 जून को 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से गर्म हवा चल सकती है।
आईएमडी ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्रों में सोमवार को धूल भरी हवाएं चलने की संभावना है। रविवार को भीषण गर्मी महसूस की गई और दिल्ली में अधिकतम तापमान औसत से 2.1 डिग्री ऊपर 42.1 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सोमवार को तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है और अधिकतम तापमान 43 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 सेल्सियस के आसपास रह सकता है। शाम 5:30 बजे सापेक्ष आर्द्रता 31 प्रतिशत दर्ज की गई और हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही। हरियाणा के रोहतक व सिरसा में पारा 45 डिग्री को पार कर गया है और लू के थपेड़ों से लोग परेशान हैं। 9 जून को भीषण गर्मी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
जम्म में पारा 43 डिग्री पर
जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों में भी भीषम गर्मी पड़ रही है और लू चल रही है। जम्मू में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन का पारा सामान्य से 3 से 6 डिग्री ऊपर चल रहा है। सड़कें सूनी पड़ने के साथ ही बाजारों से रौनक गायब है। गर्म हवाओं से जनजीवन प्रभावित है। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार आगामी दिनों में गर्मी से राहत नहीं मिलेगी और लू के साथ दिक्कतें और बढ़ेंगी। मैदानी इलाकों में लू चलने की चेतावनी भी जारी की है। कश्मीर में भी तपिश बढ़ी है। राजधानी श्रीनगर मेंअधिकतम तापमान सामान्य से 3.9 डिग्री चढ़कर 31.9 और न्यूनतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विश्व विख्यात पर्यटन स्थल पहलगाम में अधिकतम तापमान 27.8 और गुलमर्ग में 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
उत्तरी सिक्किम से और 48 लोग निकाले गए
भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित उत्तरी सिक्किम के चातेन से और 48 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें तीन बच्चे और 20 सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। राज्य में सड़के बंद होने से लाचेन, लाचुंग और चुंगथांग में जगह-जगह फंसे लगभग 2,000 लोगों को अब तक निकाला जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि रास्ते बंद होने से चातेन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, टैक्सी ड्राइवर और सैन्यकर्मी फंस गए थे। इन लोगों ने राज्य सरकार से वहां से निकालने की अपील की। इसके बाद राज्य सरकार ने एमआई-17 हेलिकॉप्टर किराए पर लिया और रविवार को 48 लोगों को सुरक्षित पाकयोंग के ग्रीनफील्ड हवाईअड्डे पर लाया गया। अधिकारियों ने बताया कि 1 जून को भूस्खलन की चपेट में सेना के शिविर के आने के बाद से लापता चह सैन्यकर्मियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। उनकी तलाश चल रही है। इस हादसे में तीन सैनिकों की मौत हो गई थी।
असम में बाढ़ के हालात में सुधार
असम में बाढ़ की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। हालांकि, तीन लोगों की और मौत होने से मृतकों की संख्या 26 हो गई है। राज्य में अब बाढ़ से अभी भी 11 जिलों के 741 गांव और 2.59 लाख लोग प्रभावित हैं। ब्रह्मपुत्र समेत सभी प्रमुख नदियों का जल स्तर कम हो रहा है। हालांकि, अभी भी ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियों कुछ जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जल स्तर बढ़ने से ब्रह्मपुत्र में पिछले सप्ताह से ही फेरी सेवा बंद कर दी गई है। 100 राहत शिविरों में 24,000 से अधिक लोगों ने शरण ली है। 6,311 हेक्टेयर क्षेत्र में अभी भी खड़ी फसलें पानी में डूबी हुई हैं।
मई अब तक का सबसे वर्षा वाला माह
आईएमडी ने बताया कि देश में 1901 के बाद इस साल मई का महीना सबसे अधिक वर्षा वाला महीना के रूप में दर्ज किया गया और इस महीने औसत 126.7 मिमी वर्षा हुई है। आईएमडी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, मई 2025 में देश स्तर में 126.7 मिमी और मध्य भारत में 100.9 मिमी औसत मासिक वर्षा दर्ज की गई है जो 1901 के बाद से सबसे अधिक है। 126.7 मिमी बारिश दीर्घावधि औसत (एलपीए) 61.4 मिमी से 106 प्रतिशत अधिक है।
लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले पर सीटों का बंटवारा कर सकता है एनडीए; भाजपा-जदयू के हिस्से में आएंगी 200 सीटें
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे के मामले में लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले के आधार पर ही सहमति बनाई जाएगी। इसके तहत राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में 200 सीटें भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खाते में आ सकती हैं। तीन अन्य सहयोगी दलों को 43 सीटों पर लड़ने का मौका मिल सकता है।
भाजपा-जदयू जल्द ही इस फॉर्मूले पर अपने सहयोगियों लोजपा (रामबिलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) से बातचीत करेंगे। राज्य में इसी साल अक्तूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक विमर्श में भाजपा-जदयू के बीच सीट बंटवारे पर लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले को ही आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
लोकसभा चुनाव में जदयू ने 17, भाजपा ने 16, लोजपा ने पांच और हम-आरएलएम ने 1-1 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस आधार पर लोकसभा की एक सीट के बदले विधानसभा की छह सीटों का हिसाब बैठता है। ऐसे में भाजपा और जदयू के हिस्से में कुल िमलाकर 200 सीटें आएंगी। वहीं, लोजपा के हिस्से में 30 और अन्य दो सहयोगियों के हिस्से 12 सीटें आएंगी। सूत्रों के अनुसार, बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही एनडीए का चेहरा रहेंगे। चुनाव पीएम मोदी और नीतीश के नाम व काम पर लड़ा जाएगा। नीतीश के स्वास्थ्य को लेकर चल रही खबरों पर भाजपा सूत्रों का कहना है कि इसे मुद्दा बनाना राजद को भारी पड़ेगा।
विधानसभा चुनाव : सबसे बड़ी चुनौती मांझी-चिराग को मनाना
भाजपा और जदयू के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस फॉर्मूले पर हम मुखिया जीतनराम मांझी और लोजपा प्रमुख चिराग पासवान को मनाने की होगी। मांझी 30 सीटें मांग रहे हैं, जबकि लोजपा लोकसभा में जीती सीटों के आधार पर सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करना चाहती है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा-जदयू ने 12-12, लोजपा ने पांच और हम ने अपने हिस्से की इकलौती सीट पर जीत हासिल की थी। इस फॉर्मूले से प्रति लोकसभा सीट के बदले विधानसभा की 8 सीट का हिसाब बनता है। ऐसे में इसका लाभ लोजपा को होगा, जिसने अपने हिस्से की सभी पांच 5 सीटें जीती थीं।
कुशवाहा को नुकसान
उधर, राजद को ओवैसी ने उलझायाएनडीए में सीट बंटवारे पर अगर पेच फंसा तो इसका नुकसान आरएलएम के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा को उठाना पड़ सकता है। लोकसभा में कुशवाहा ने अपने हिस्से की इकलौती सीट गंवा दी थी। भाजपा सूत्रों का कहना है कि ऐसी स्थिति में कुशवाहा को अधिकतम 4 सीटें मिल सकती हैं। तब भाजपा-जदयू से इतर बची करीब 40 सीटों का लोजपा और हम के बीच बंटवारा हो सकता है। हालांकि यह तय है कि भाजपा और जदयू सौ-सौ सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ेंगी।
पिछले विस में एआईएमआईएम ने दिया था झटका
विपक्षी महागठबंधन को एआईएमआईएम ने अपने प्रस्ताव से उलझा दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने अपनी ओर से राजद के समक्ष गठबंधन की पेशकश की है। दरअसल, बीते विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने मुस्लिम बहुल सीमांचल की चार सीटों पर जीत दर्ज कर राजद को बड़ा झटका दिया था। हालांकि, बाद में इनके सभी विधायक राजद में शामिल हो गए। मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एआईएमआईएम के बढ़ते उभार से सतर्क राजद और कांग्रेस इसे भाजपा की बी टीम बताती है। ऐसे में एआईएमआईएम के गठबंधन के प्रस्ताव से राजद के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
सगाई के बाद जमकर थिरके रिंकू सिंह और प्रिया सरोज, समारोह में लगा दिग्गजों का जमावड़ा
भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह नए बंधन में बंध गए हैं। रविवार को स्टार खिलाड़ी की समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद प्रिया सरोज के साथ सगाई हो गई। रिंकू और प्रिया की रिंग सेरेमनी लखनऊ के एक पांच सितारा होटल में हुई जिसमें राजीनित जगत और क्रिकेट की चर्चित हस्तियां शामिल हुईं। प्रिया उत्तर प्रदेश के मछलीशहर से लोकसभा की सदस्य हैं। इन दोनों की शादी 18 नवंबर 2025 को वाराणसी में होगी। ना
मचीन हस्तियों का लगा जमावड़ा
रिंकू और प्रिया की रिंग सेरेमनी में राजनीति की चर्चित हस्तियों का जमावड़ा लगा। इनमें सपा मुखिया अखिलेश यादव, सांसद डिंपल यादव और जया बच्चन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सभी ने इस नई जोड़ी को आशीर्वाद दिया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

बीसीसीआई के उपाध्यक्ष भी पहुंचे
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस दौरान भुवनेश्वर कुमार और पीयूष चावला भी नजर आए। सोशल मीडिया पर रिंकू और प्रिया की रिंग सेरेमनी की तस्वीरें वायरल हो रही है। रिंकू ने इस दौरान आईवरी रंग का जोधपुरी कुर्ता पायजामा पहना, जबकि प्रिया ने व्हाइट और पिंक रंग का फ्लोरल लहंगा पहना।

सगाई के बाद जमकर थिरके रिंकू और प्रिया
सगाई के बाद रिंकू सिंह और प्रिया सरोज को जमकर डांस करते देखा गया। इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। रिंकू और प्रिया एक साल से अधिक समय से एक दूसरे को जानते हैं। दोनों की मुलाकात एक कॉमन दोस्त के पिता के जरिये हुई थी। हालांकि, धीरे-धीरे रिंकू और प्रिया की दोस्ती हुई जो प्यार में बदल गई। प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज ने बताया था कि प्रिया की रिंकू से मुलाकात एक कॉमन दोस्त के जरिये हुई थी जिसके पिता भी एक क्रिकेटर हैं। अब दोनों एक दूसरे के जीवनसाथी बनने जा रहे हैं। प्रिया सरोज उत्तर प्रदेश के मछलीशहर से सपा की सांसद हैं। उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार को हराया था।



18 नवंबर को वाराणसी में होगी रिंकू और प्रिया की शादी
जौनपुर की मछलीशहर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी सांसद प्रिया सरोज की रिंग सेरेमनी 8 जून को लखनऊ में हुई। उनकी शादी 18 नवंबर 2025 को वाराणसी के होटल ताज से होगी। इसमें क्रिकेट के सितारे, फिल्म जगत की हस्तियों और उद्योगपतियों का जमवाड़ा रहेगा।
रविवार को ‘हाउसफुल 5’ की रही चांदी, तीन दिनों में 100 करोड़ के करीब पहुंची फिल्म
अक्षय कुमार, अभिषेक बच्चन, रितेश देशमुख सहित करीब 19 सितारों से सजी फिल्म ‘हाउसफुल 5’ सिनेमाघरों में लगी है। आज रविवार को फिल्म की रिलीज का तीसरा दिन है। 6 जून को सिनेमाघरों में सजी इस फिल्म ने पहले दो दिन अच्छी कमाई की है। जानते हैं आज रविवार की छु्ट्टी का फिल्म ने कितना लाभ लिया?


बॉक्स ऑफिस पर की अच्छी शुरुआत
लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की यह पांचवी कड़ी है। साजिद नाडियाडवाला ने इसे प्रोड्यूस किया है। वहीं, फिल्म के निर्देशन की कमान संभाली तरुण मनसुखानी ने। मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म ने पहले दिन 24.35 करोड़ रुपये की कमाई करके अच्छी शुरुआत की। दूसरे दिन शनिवार को ईद के मौके पर भी इसने अच्छा कारोबार किया।

रविवार की छुट्टी का मिला फायदा
कल शनिवार को दूसरे दिन ‘हाउसफुल 5’ ने ओपनिंग डे से भी बढ़कर कारोबार किया। दूसरे दिन का कलेक्शन करीब 32.38 करोड़ रुपये रहा। वहीं, आज फिल्म रविवार की छु्ट्टी का भी भरपूर फायदा उठाती नजर आ रही है। आंकड़ों के मुताबिक तीसरे दिन फिल्म ने 32 करोड़ रुपये कमाए हैं।

100 करोड़ के करीब पहुंची ‘हाउसफुल 5’
फिल्म ने तीन दिनों में करीब 88.73 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है। यानी फिल्म 100 करोड़ी क्लब के करीब पहुंच चुकी है। इस फिल्म का बजट करीब 250 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। उस हिसाब से देखा जाए तो फिल्म का यह कलेक्शन ठीकठाक है।

सोमवार से रिलीज होगी असली परीक्षा
‘हाउसफुल 5’ की असली परीक्षा कल सोमवार से शुरू होगी। बता दें कि इस फिल्म को क्रिटिक्स से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली है। साजित नाडियाडवाला की ‘हाउसफुल’ फ्रेंचाइजी की शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। पहली फिल्म 2010 में रिलीज हुई थी। ‘हाउसफुल 5’ की ओटीटी रिलीज पर भी अपडेट आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म जुलाई तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो सकती है।
‘मैं दुनिया के सबसे अमीर आदमी को खुश करने के लिए कानून नहीं बनाऊंगा’, मस्क-ट्रंप विवाद पर स्पीकर जॉनसन
स्पीकर माइक जॉनसन ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को साफ कर दिया कि वह एलन मस्क के खिलाफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हैं। मस्क ने रिपब्लिकन पार्टी के टैक्स और बजट विधेयक की आलोचना की थी, लेकिन जॉनसन ने कहा कि मस्क की आलोचना से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने जीओपी-नियंत्रित कांग्रेस पर मस्क के प्रभाव को कम करके आंका।
एक टीवी शो में जॉनसन ने कहा कि मैं दुनिया के सबसे अमीर आदमी को खुश करने के लिए कानून नहीं बनाऊंगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा मकसद मेहनत करने वाले आम अमेरिकियों की मदद करना है।, जो अपने परिवारों के लिए प्रावधान करने और गुजारा करने की कोशिश कर रहे हैं।
मस्क से कुछ टेक्स्ट संदेशों का आदान-प्रदान किया: जॉनसन
जॉनसन ने कहा कि उन्होंने ट्रंप के सरकारी दक्षता विभाग के पूर्व प्रमुख मस्क से कुछ टेक्स्ट संदेशों का आदान-प्रदान किया, जब मस्क ने जीओपी बिल को ‘घटिया’ कहा और कहा कि इससे अमिरेका का कर्ज और भी बढ़ेगा। मस्क ने कैपिटल हिल में मतदाताओं से इस बिल के खिलाफ वोट करने की अपील की, जो सदन से पारित होने के बाद सीनेट में लंबित है। मस्क की इस आलोचन से राष्ट्रपति ट्रंप भी नाराज हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मस्क के साथ अपने संबंधों को सुधारने की कोई इच्छा नहीं है।
मस्क की धमकियों को किया खारिज
स्पीकर जॉनसन ने रिपब्लिकन नेताओं के खिलाफ डेमोक्रेट्स को फंड देने की मस्क की धमकियों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमें कांग्रेस के किसी भी रिपब्लिकन सदस्य की ओर से कोई चिंता नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि लोग प्रतीक्षा करने और देखने का रवैया अपना रहे हैं। कुछ लोग उनके कुछ तर्कों से सहमत हो सकते हैं, लेकिन बाकी लोग समझते हैं कि यह एक बहुत ही रोमांचक कानून है।’
मस्क की आलोचना को गलत बताया
स्पीकर जॉनसन ने कहा कि मस्क को सही जानकारी नहीं है, और जो रिपोर्ट कहती है कि इस बिल से अमेरिका का कर्ज 2.4 ट्रिलियन डॉलर और बढ़ेगा, वह रिपोर्ट गलत आधार पर बनाई गई है। उन्होंने तर्क दिया कि कम टैक्स और खर्च की कटौती से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और इससे आगे चलकर घाटा भी कम हो सकता है। इसलिए इस बिल कर लेकर मस्क की आलोचना गलत है।
विधेयक को लेकर रिपोर्ट में ये कहा गया
रिपोर्ट के अनुसार, यह विधेयक 2017 के ट्रंप कर कटौती को आगे बढ़ाएगा। खर्च में कटौती करेगा और कुछ अन्य शुल्कों को कम करेगा, लेकिन साथ ही लगभग 10.9 मिलियन और लोगों को स्वास्थ्य बीमा के बिना छोड़ देगा। इसके साथ ही दशक में घाटे में 2.4 ट्रिलियन अमरीकी डालर की वृद्धि करेगा।




