आज के बड़े इवेंट
- एनटीए नीट यूजी का रिजल्ट आज जारी करेगा।
- इजरायल-ईरान संघर्ष में आज कोई बड़ा अपडेट सामने आ सकता है।
ट्रंप की धमकी बेअसर: अमेरिका में बिकने वाले 97% आईफोन भारत से भेजे गए, दो महीनों में 27,000 करोड़ का निर्यात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बावजूद एपल के 97% आईफोन अब भारत में बन रहे हैं। मार्च से मई 2025 के बीच भारत से अमेरिका को 27,000 करोड़ रुपये के आईफोन निर्यात किए गए। सिर्फ मई में ही 8,600 करोड़ के आईफोन भेजे गए। 2024 में जहां 50% आईफोन भारत में बनते थे, अब यह आंकड़ा 97% हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से सिर्फ मई में ही करीब 8,600 करोड़ का आईफोन अमेरिका को निर्यात किया गया है। यह मार्च के करीब 11,195 करोड़ रुपये के आईफोन निर्यात के बाद दूसरा सबसे ज्यादा है। इस साल जनवरी से मई तक भारत से अमेरिका को 37,000 करोड़ रुपये के आईफोन भेजे गए हैं। यह 2024 के करीब 32,000 करोड़ रुपये के निर्यात से ज्यादा है। 2024 तक अमेरिका में बेचे जाने वाले 50 फीसदी आईफोन ही भारत में बनते थे।
97 फीसदी तक पहुंचा आकड़ा
अब यह आंकड़ा 97 फीसदी पहुंच गया है, जो चीन पर लगाए गए उच्च अमेरिकी टैरिफ को दरकिनार करने के एपल के प्रयासों का स्पष्ट संकेत है। एपल ने भारत से अपने निर्यात को इस प्रकार पुनर्गठित किया है कि वह अब सिर्फ अमेरिकी बाजार में ही अपने उत्पाद निर्यात करेगा। पहले नीदरलैंड, चेक गणराज्य और ब्रिटेन जैसे देशों में ज्यादा निर्यात होते थे। भारत में फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और विस्ट्रॉन ही आईफोन की प्रमुख विनिर्माता कंपनियां हैं।
बढ़ सकती है आईफोन की कीमत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आईफोन की कीमतों में नाटकीय रूप से बढ़ोतरी हो सकती है। इसके चलते एपल की बिक्री और मुनाफे को नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं एपल भी अब अमेजन वालमार्ट और अन्य प्रमुख कंपनियों के साथ व्हाइट हाउस के निशाने पर आ गई है। दरअसल, ये कंपनियां ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ से पैदा हुई अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के दबाव का जवाब देने की कोशिश कर रही हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने एपल को दी थी धमकी
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार एपल को धमकी देते आ रहें हैं कि अमेरिका में बिकने वाले आईफोन अमेरिका में ही बनने चाहिए। अगर वह अमेरिका से बाहर भारत या अन्य किसी देश में ऐसा करेंगे तो यह एपल पर भारी पड़ेगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि अगर प्रौद्योगिकी कंपनी ने ऐसा नहीं किया तो एपल के उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि वह एक जून से यूरोपीय संघ पर ‘सीधे 50% टैरिफ’ लगाएंगे। वहीं, ट्रंप की इन धमकियों के बाद अमेरिकी वायदा और वैश्विक बाजारों में गिरावट दर्ज की गई।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पहला जत्था रवाना
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए शुक्रवार को 50 यात्रियों का पहला जत्था जवाहरलाल नेहरू भवन से रवाना किया गया। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने जत्था रवाना करने के बाद कहा, यह पवित्र यात्रा है जो सीमाओं के पार भारत के जीवंत सभ्यतागत संबंधों का प्रमाण है। उन्होंने यात्रा को फिर से शुरू करने में सहयोग के लिए चीन सरकार की भी सराहना की।
सरकार हर साल जून से सितंबर के बीच उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा (1981 से) और सिक्किम में नाथू ला दर्रा (2015 से) के दो आधिकारिक मार्गों के जरिये कैलाश मानसरोवर यात्रा संपन्न कराती है। कोविड और उसके बाद चीनी पक्ष द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं का नवीनीकरण न करने के कारण 2020 से यह यात्रा बंद थी। पिछले साल शीर्ष स्तर पर बातचीत के बाद यात्रा को फिर से बहाल करने पर सहमति बनी थी। इस साल यात्रा के 750 यात्रियों का चयन किया गया। यह यात्रा हिंदुओं, जैनियों और बौद्धों के लिए अत्यंत धार्मिक महत्व रखती है।
बंगलूरू में 10 करोड़ के ड्रग्स के साथ महिला गिरफ्तार
बंगलूरू में पुलिस ने शुक्रवार को एक विदेशी महिला को 10 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया। उसके पास से 5.3 किलोग्राम से अधिक प्रतिबंधित एमडीएमए क्रिस्टल जब्त किए गए। गिरफ्तार महिला नाइजीरिया की है। उसे केंद्रीय अपराध शाखा की मादक पदार्थ निरोधक शाखा ने गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ा है। वह राजनुकुंटे के पास ताराहुनासे गांव में मादक पदार्थ बेचने की कोशिश कर रही थी।
पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने कहा, पूछताछ में उसने बताया कि वह 4 अक्तूबर 2021 को तेलंगाना के एक कॉलेज में पढ़ने के लिए स्टूडेंट वीजा पर नई दिल्ली आई थी। पुलिस की जांच में पता चला कि वह उस कॉलेज में नामांकित नहीं थी। अधिकारी ने बताया कि वह शानदार जीवन जीने के लिए अपने दोस्त के साथ ड्रग तस्करी में शामिल हो गई। इन एमडीएमए क्रिस्टल को नए ड्रेस पीस मटीरियल में छिपाकर बस से दिल्ली से बंगलूरू ले जाती थी और नशीली दवा विक्रेताओं को बेच देती थी। पुलिस ने कहा कि मामले में चिक्काजाला पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। आरोपी के फरार दोस्त की तलाश जारी है। पुलिस कमिश्नर ने घोषणा की कि 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के मौके पर सिटी पुलिस नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ विशाल रैली का आयोजन करेगी। नशीली दवाओं के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सेमिनार और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।
नीलांबुर उपचुनाव से पहले प्रियंका गांधी केरल पहुंचीं
नीलांबुर उपचुनाव से पहले कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा केरल पहुंच गई हैं। यहां पहुंचने पर केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख सनी जोसेफ और पार्टी के अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया। वह वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी शनिवार को कलपेट्टा, मनंतावडी, सुल्तान बाथरी और थिरुवंबाडी विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। सूत्रों ने बताया कि रविवार को वह वंडूर और नीलांबुर विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी।
फॉर्मूला ई-रेस मामले में रामा राव को 16 को पेश होने के लिए नोटिस
तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने फॉर्मूला ई-रेस मामले में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव को 16 जून की सुबह 10 बजे पेश होने का नोटिस दिया है। एसीबी ने इससे पहले उनको 28 मई को पेश होने के लिए कहा था। रामा राव ने अमेरिका और ब्रिटेन की निर्धारित यात्रा के मद्देनजर समय मांगा था। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर निशाना साधा था। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष से जनवरी में भी पूछताछ हुई थी। रामा राव पिछली बीआरएस सरकार में नगर प्रशासन मंत्री थे। एसीबी ने बीआरएस सरकार के दौरान फरवरी 2023 में हैदराबाद में फॉर्मूला ई-रेस आयोजित करने के लिए कथित भुगतान को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें से ज्यादातर भुगतान बिना मंजूरी के विदेशी मुद्रा में किए गए थे।
तमिलनाडु : सड़क दुर्घटना में जज घायल, सुरक्षाकर्मी समेत चार की मौत
राजमार्ग पर शुक्रवार को एक जिला न्यायाधीश की कार मालवाहक ट्रक से टकरा गई। हादसे में न्यायाधीश घायल हो गए, जबकि दो कार्यालय सहायकों और एक निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) समेत 4 लोगों की मौत हो गई। एक वरिष्ठ जिला पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिला न्यायाधीश थूथुकुडी के मूल निवासी हैं। घर लौटते समय उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसके बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने बताया कि न्यायाधीश तंजावुर जिले के हैं, उन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
‘ईरान को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया था, अब भी समय है…’; परमाणु समझौते को लेकर ट्रंप ने दी धमकी
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शुरू में इस्राइली हमले को टालने की कोशिश की थी। जिससे कि ईरान को कूटनीति और वार्ता के लिए पर्याप्त समय मिल सके। हालांकि उन्होंने धमकी भरे अंदाज में यह भी कहा कि उन्होंने तेहरान को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया था और आज 61वां दिन था।

परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने की अभी भी उम्मीद
आगे ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने की अभी भी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन रविवार को ओमान में होने वाली वार्ता के लिए योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा, लेकिन इस्राइल के बड़े हमले के बाद उन्हें संदेह है कि ईरान इसमें भाग लेगा। गौरतलब है कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ 15 जून को ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मिलने वाले हैं।
अभी और भी बहुत कुछ आना बाकी- ट्रंप
ईरान पर इस्राइल के हमले के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा, मुझे लगता है कि यह बहुत बढ़िया रहा। हमने उन्हें एक मौका दिया और उन्होंने इसका फायदा नहीं उठाया। उन्हें भी उतनी ही मार पड़ी जितनी आपको पड़ने वाली है। और अभी और भी बहुत कुछ आना बाकी है। और भी बहुत कुछ। अभी भी उनके पास शायद दूसरा मौका है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले ही बहुत मौतें और विनाश हो चुका है, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, साथ ही पहले से ही योजनाबद्ध अगले हमले और भी अधिक क्रूर होंगे। ईरान को एक समझौता करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे।
इस्राइल के अवैध और कायराना कार्रवाई का जवाब देंगे : ईरान
वहीं, इस्राइली हमले के बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से बैठक बुलाने का आग्रह किया है। सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में ईरान ने कहा कि वह इस्राइल के गैरकानूनी और कायरतापूर्ण कार्य का निर्णायक और उसी अनुपात में जवाब देगा। वहीं, ईरानी समाचार एजेंसी फार्स ने सुरक्षा सूत्रों का हवाला देते हुए उन इस्राइली रिपोर्टों का खंडन किया, जिसमें कहा गया है कि तेहरान ने इस्राइल पर ड्रोन से हमला किया। एजेंसी ने कहा कि ईरान निकट भविष्य में जवाबी कार्रवाई करेगा। वहीं, ईरान के नूरन्यूज ने कहा कि तेहरान के रिहायशी इलाकों में इस्राइली हमले में 78 लोगों की मौत हुई है और 329 घायल हुए हैं।
यहां 11 बार जीता तस्लीमुद्दीन परिवार, 2020 में भाइयों की लड़ाई वाली सीट का ऐसा है इतिहास
बिहार में साल के अंत में चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की 11वीं कड़ी में आज जोकीहाट विधानसभा सीट की बात। 2020 में यहां से एआईएमआईएम के शाहनवाज आलम जीते थे। बाद में शाहनवाज आलम समेत एआईएमआईएम के चार विधायक राजद में शामिल हो गए।
अररिया जिले की सीट है जोकीहाट
बिहार के 38 जिलों में से एक अररिया जिला भी है। यह जिला 2 अनुमंडल और 09 ब्लाक में बंटा हुआ है। अररिया जिले में कुल 06 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें नरपतगंज, रानीगंज (एससी), फारबिसगंज, अररिया, जोकीहाट, सिकटी विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात जोकीहाट विधानसभा सीट की करेंगे। जोकीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र अररिया लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट पर सबसे पहले चुनाव 1967 में हुआ था। जोकीहाट सीमांचल की एक मुस्लिम बहुल सीट है।
ईरान-इजरायल संघर्ष से बढ़ सकती है भारत की मुश्किल, क्यों खास हैं दोनों देश
इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया है। साथ ही दुनिया को यह चेतावनी भी दी है कि यह लड़ाई लंबी चल सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर निर्यात में काफी अड़चन आ सकती है।

ईरान पर इजरायली हमले से बने हालात में क्रूड ऑयल के करीब 10% उछलने के साथ रुपये पर दबाव बढ़ने और महंगाई को हवा मिलने का रिस्क बन गया है। वहीं, निर्यात पर भी आंच आ सकती है, जिस पर पहले ही अमेरिकी टैरिफ्स की तलवार लटकी हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के डीजी डॉ अजय सहाय ने कहा, ‘इस टकराव से स्वेज नहर और रेड सी सहित महत्वपूर्ण शिपिंग लाइंस के लिए रिस्क बन गया है। ये यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिए अहम हैं। इस रूट में बाधा पड़ने से शिपमेंट्स में देर होगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगी।’
भारत इजरायल को मुख्य रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और केमिकल्स के अलावा इंजीनियरिंग गुड्स और मशीनरी, जेम्स एंड जूलरी और टेक्सटाइल्स का निर्यात करता है। ईरान सहित पश्चिम एशिया को दवाओं, कपड़ों और मीट का निर्यात भी होता है। डॉ सहाय ने कहा, ‘इजरायल को भारत के पॉलिश्ड डायमंड एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। रिटेल नेटवर्क्स में बाधा पड़ने से टेक्सटाइल्स ऑर्डर में देर होने या कैंसलेशन बढ़ने का खतरा है। वहीं, चावल और मीट का ईरान को होने वाला एक्सपोर्ट शिपमेंट में देरी के लिहाज से बहुत संवेदनशील है।‘ डॉ सहाय ने कहा, ‘वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने और क्रूड ऑयल के दाम चढ़ने से एक्सपोर्ट के लिए डिमांड घट सकती है। पश्चिम एशिया को माल भेजने वाले निर्यातकों को पेमेंट में देर और कॉन्ट्रैक्ट टलने का सामना करना पड़ सकता है।’
क्रूड का हाल
ईरान पर इजरायली हमले के बाद ब्रेंट क्रूड 9% से ज्यादा उछल गया। खबर लिखे जाने तक यह 7.6% बढ़त के साथ 74.6 डॉलर प्रति बैरल पर था। भारत ईरान से क्रूड इंपोर्ट नहीं करता है। लेकिन होरमुज की खाड़ी से करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन क्रूड की आवाजाही होती है।
एमके ग्लोबल फाइनैंशल सर्विसेज की चीफ इकनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘ईरान होरमुज स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी पहले भी दे चुका है। अगर ऐसा हुआ तो सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई की तेल सप्लाई पर असर पड़ेगा और कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।‘ उन्होंने कहा, ‘हालांकि OPEC+ देशों ने जुलाई में ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने की घोषणा की है। ऐसा होता है तो अच्छी सप्लाई बनी रहेगी, जिससे ईरानी सप्लाई कट का खास असर नहीं होगा।’
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशल सर्विसेज के कमोडिटी रिसर्च हेड नवनीत दमानी ने कहा, ‘इजरायली हमले के बाद सप्लाई में बाधा पड़ने का डर बढ़ा है। इससे क्रूड ऑयल प्राइसेज में उछाल आया। अगर लड़ाई बढ़ी तो कीमतें और चढ़ सकती हैं। दाम पहले ही 10% उछल चुके हैं। लड़ाई बढ़ने पर और 8-9% का इजाफा हो सकता है।’
महंगाई और रुपये पर असर
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% क्रूड आयात करता है। क्रूड प्राइस में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़त होने पर रिटेल इंफ्लेशन पर 0.5% तक असर पड़ता है। ताजा आंकड़ों में मई में रिटेल इंफ्लेशन 2.82% के साथ 75 महीनों के निचले स्तर पर चली गई थी। खाने-पीने की चीजों, खासतौर से दालों और सब्जियों के दाम में बड़ी गिरावट से खुदरा महंगाई दर पर असर पड़ा। वहीं, 17% से ज्यादा दाम बढ़ने के साथ खाद्य तेलों का मामला चिंताजनक बना हुआ है क्योंकि सरकार ने पिछले साल इनके इंपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ा दी थी और उसके बाद वैश्विक स्तर पर कीमतें भी चढ़ने लगीं। भारत खाद्य तेलों के आयात पर बहुत हद तक निर्भर है।
अब क्रूड ऑयल में उछाल इसका इंपोर्ट बिल बढ़ा देगा। इसका असर ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट पर पड़ेगा। इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। लड़ाई बढ़ी तो सेफ हेवन असेट के रूप में डॉलर की डिमांड भी बढ़ेगी। इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा। डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को 55 पैसे गिरकर 86.07 पर बंद हुआ। LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा, ‘इजरायल के अटैक के बाद रिस्क सेंटिमेंट खराब हुआ है। क्रूड उछलने से रुपये पर काफी दबाव आया। निकट भविष्य में रुपया 85.60 से 86.50 की रेंज में रह सकता है।’
शेयर बाजार में क्या?
ईरान पर इजरायल के हमले के बाद क्रूड ऑयल में उछाल और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट रही। निफ्टी बाद में संभाला और 0.7% की गिरावट के साथ 24719 पॉइंट्स पर बंद हुआ। क्रूड प्राइस उछलने से ऑयल मार्केट कंपनियों, पेंट्स, टायर और ल्यूब्रिकेंट स्टॉक्स पर बिकवाली का दबाव आया, वहीं तेल उत्पादक कंपनियों में मामूली बढ़त रही। साथ ही, डिफेंस स्टॉक्स में अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.5% चढ़ गया।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘क्रूड प्राइसेज में बढ़त के चलते ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों पर मार्केट का फोकस बने रहने की उम्मीद है। संघर्ष बढ़ने पर देश की रक्षा कंपनियों पर सकारात्मक असर होगा क्योंकि उन्हें ज्यादा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिल सकते हैं।’
1000° सेल्सियस तापमान, कुत्तों और पक्षियों को भी नहीं मिला भागने का मौका
अहमदाबाद में गुरुवार को एयर इंडिया के विमान एआई171 के क्रैश होने के बाद दुर्घटना स्थल पर इतनी भीषण आग थी कि आसपास का तापमान 1,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इस वजह से राहत और बचाव कार्य में भी बहुत मुश्किल हुई। यहां तक कि आसपास के कुत्तों और पक्षियों को भी भागने का मौका नहीं मिला और वह भी अपनी जान नहीं बचा पाए।
अहमदाबाद में गुरुवार को एयर इंडिया के विमान एआई171 के क्रैश होने के बाद दुर्घटना स्थल पर इतनी भीषण आग थी कि आसपास का तापमान 1,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इस वजह से राहत और बचाव कार्य में भी बहुत मुश्किल हुई। यहां तक कि आसपास के कुत्तों और पक्षियों को भी भागने का मौका नहीं मिला और वह भी अपनी जान नहीं बचा पाए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि विमान में 1.25 लाख लीटर ईंधन (ATF) था, जिसके कारण आग लगने से किसी का भी बचाना नामुमकिन हो गया। अहमदाबाद एयर पोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने वाले एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान में क्रू मेंबर्स समेत 242 लोग सवार थे, जिनमें से सिर्फ एक यात्री की जान बची है।
1,000 डिग्री सेल्सियस तापमान में सबकुछ हो गया राख
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) के एक अधिकारी के हवाले से जो रिपोर्ट दी है उसके अनुसार उनकी टीम दोपहर 2 बजे से 2.30 बजे के बीच बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल और डॉक्टरों के रिहायशी क्वार्टरों में पहुंची, जहां विमान क्रैश हुआ था। इससे पहले, स्थानीय लोगों ने कुछ लोगों को जिंदा निकाला, लेकिन एसडीआरएफ की टीमों को कोई भी जीवित नहीं मिला। एक फायर ऑफिसर ने बताया, ‘जैसे ही विमान के ईंधन टैंक में धमाका हुआ, एक भयंकर आग लग गई। तापमान बहुत जल्दी 1,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे किसी को भी बचने का मौका नहीं मिला।’
इजरायल पर ईरान के पलटवार की शुरुआत, हेब्रोन पर मिसाइल हमला
इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान ने अब जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान का प्रॉक्सी कहे जाने वाले यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी हैं। इनमें से एक मिसाइल हेब्रोन में गिरी है। अभी तक इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मिसाइल के कारण दक्षिणी यरुशलम और आसपास के इलाकों में सायरन बजाया गया।

इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान ने अब जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान का प्रॉक्सी कहे जाने वाले यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी हैं। इनमें से एक मिसाइल हेब्रोन में गिरी है। अभी तक इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इजरायली सेना ने बताया है कि हूतियों का यह हमला स्थानीय समयानुसार शुक्रवार शाम को हुआ। इस मिसाइल के कारण दक्षिणी यरुशलम और आसपास के इलाकों में सायरन बजाया गया।
इजरायली सेना ने क्या कहा
आईडीएफ ने घोषणा की कि हूतियों की मिसाइल हेब्रोन के बाहरी इलाके में एक खुले मैदान में गिरी। मिसाइल पर कोई इंटरसेप्टर नहीं छोड़ा गया था। सेना ने यह भी कहा कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। यमन में हूती नवंबर 2023 से इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दाग रहे हैं। हालांकि, उन्होंे जनवरी और फरवरी 2025 में दूसरे युद्धविराम के दौरान केवल थोड़े समय के लिए अपने हमले रोके थे।
विदेश मंत्री गिदोन सा’र ने ईरान के खिलाफ इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ शुरू करने के बाद दुनियाभर के अपने समकक्षों के साथ ‘मैराथन कॉल’ करना जारी रखा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इसका मकसद ‘ईरानी विनाश के खतरे’ को दूर करना है। शुक्रवार सुबह गिदोन सा’र ने जर्मनी, इटली समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों से बात की। सा’र के निर्देशन में इजरायली विदेश मंत्रालय ने इमरजेंसी फॉर्मेट में काम करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही दुनिया भर में इजरायल के सभी मिशनों को संचालित करने के लिए एक इमरजेंसी सिचुएशन रूम खोला है।
इजरायल में गौतम अडानी का अरबों डॉलर का निवेश खतरे में!
अडानी ग्रुप ने इजरायल में अरबों डॉलर का निवेश किया है। ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर इजरायल के हमले से यह निवेश खतरे में है। इसका असर आज अडानी ग्रुप के शेयरों पर भी दिखा। जानिए अडानी ग्रुप ने कहां-कहां निवेश किया है।
भारत और एशिया के दूसरे बड़े रईस गौतम अडानी की अगुवाई वाले अडानी ग्रुप ने इजराइल में बहुत पैसा लगाया है। देश के तीसरे बड़े औद्योगिक घराने ने हाइफा पोर्ट जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह और रक्षा क्षेत्र में भी निवेश किया है। इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से अडानी के इन निवेशों पर खतरा मंडरा रहा है। निवेशकों में भी डर का माहौल है। इजराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इसे दोनों देशों के बीच लंबे संघर्ष की शुरुआत माना जा रहा है। इससे मध्य पूर्व में अडानी के अरबों डॉलर के निवेश को खतरा पैदा हो गया है।
शुक्रवार को अडानी ग्रुप के शेयरों पर भी इसका असर देखने को मिला। अडानी पोर्ट्स के शेयर 3% से अधिक गिरकर 1396 रुपये पर आ गए थे। अंत में कंपनी का शेयर 2.71 फीसदी गिरावट के साथ 1405.25 रुपये पर बंद हुआ। ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर भी कारोबार के दौरान 2.8% गिरकर 2469.55 रुपये पर आ गए और अंत में 1.36 फीसदी गिरावट के साथ 2505.65 रुपये पर बंद हुए।
अडानी ग्रुप का हाइफा पोर्ट इजराइल में सबसे महत्वपूर्ण निवेश है। अडानी पोर्ट्स ने 2023 में इजराइल के Gadot Group के साथ मिलकर 1.2 अरब डॉलर में इसकी 70% हिस्सेदारी खरीदी थी। यह बंदरगाह उत्तरी इजराइल में है और अडानी पोर्ट्स के सालाना कार्गो वॉल्यूम में लगभग 3% का योगदान करता है। यह इजराइल के आयात और निर्यात के लिए बहुत जरूरी है।
अभी के हालात को देखते हुए अडानी के हाइफा पोर्ट पर कई तरह के खतरे हैं। जैसे कि कार्गो में देरी हो सकती है और जहाजों के रास्तों को बदला जा सकता है। इजराइल के दक्षिणी हिस्से में ज्यादा लड़ाई हो रही है। हाइफा पोर्ट उत्तरी हिस्से में होने के कारण थोड़ा सुरक्षित है। लेकिन अगर लड़ाई लंबी चली, तो पूरे भूमध्य सागर के व्यापार मार्ग पर असर पड़ सकता है। इससे कामकाज और सामान की ढुलाई में दिक्कतें आ सकती हैं।
ईरान-इजरायल तनाव से रॉकेट बना सोना, 2,200 रुपये उछली कीमत
ईरान पर इजरायल के हमले के बाद सोने की कीमत में आज भारी तेजी देखने को मिली। एक झटके में सोना 2,200 रुपये महंगा हो गया। सोने की कीमत में लगातार तीसरे दिन तेजी आई। चांदी की कीमत में भी प्रति किलो 1,100 रुपये बढ़ गई।
सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी जारी रही। ईरान पर इजराइल के सैन्य हमले के बाद बढ़े तनाव के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत 2,200 रुपये उछलकर 1,01,540 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई जो रेकॉर्ड स्तर के करीब है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ने से सोने के दाम में तेजी रही।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,900 रुपये बढ़कर 1,00,700 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। इससे पहले, 22 अप्रैल को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,800 रुपये चढ़कर 1,01,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। चांदी की कीमतों में 1,100 रुपये की तेजी आई और यह 1,08,100 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। सोमवार को भी चांदी 1,08,100 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रही थी।
मेहता इक्विटीज के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री ने कहा, ‘सोने की कीमतों ने एक नई ऊंचाई को छुआ और एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, सर्राफा 3,440 डॉलर प्रति औंस से ऊपर चला गया। इसका कारण निवेशकों ने बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच सुरक्षित-संपत्तियों की ओर रुख किया।’
वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोना 28.30 डॉलर प्रति औंस या 0.84 प्रतिशत बढ़कर 3,415.13 डॉलर प्रति औंस हो गया। कलंत्री ने कहा कि ईरान पर इजराइल के सैन्य हमले के बाद सोने में तेज उछाल आया, जिससे पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई। साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप के एकतरफा शुल्क की चेतावनियों सहित अमेरिकी व्यापार नीति पर अनिश्चितता फिर से बढ़ गई।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों की लिस्ट, ईरान के नजदीक कहां-कहां तैनात हैं अमेरिकी सैनिक

इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद अमेरिका अलर्ट पर है। उसने पहले ही मध्य पूर्व में अपने दूतावासों को आंशिक रूप से खाली कर दिया है। इसके अलावा बहरीन, कुवैत, और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई दूसरे देशों से अमेरिकी कर्मियों के परिवारों को वापस अपने देश बुलाया है। बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह क्षेत्र एक खतरनाक स्थान हो सकता है। वहीं, ईरान से तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सैनिकों और हथियारों की तैनाती को बढ़ाया भी है। ऐसे में सवाल उठता है कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डे कहां-कहां हैं और वहां कितने सैनिक तैनात हैं।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डे कहां हैं?
अमेरिका ने दशकों से मध्य पूर्व में सैन्य अड्डे संचालित किए हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, अमेरिका इस क्षेत्र में कम से कम 19 स्थानों पर स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के सैन्य स्थलों का एक व्यापक नेटवर्क संचालित करता है। इनमें से आठ स्थायी बेस हैं, जो बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हैं।
मध्य पूर्व में सैनिकों की अमेरिका की पहली तैनाती जुलाई 1958 में हुई थी, जब लेबनान संकट के दौरान लड़ाकू सैनिकों को बेरूत भेजा गया था। अपने चरम पर लेबनान में लगभग 15,000 मरीन और सेना के सैनिक थे। 2025 के मध्य तक, मध्य पूर्व में लगभग 40,000 से 50,000 अमेरिकी सैनिक हैं, जिनमें पूरे क्षेत्र में बड़े, स्थायी ठिकानों और छोटे अग्रिम स्थलों दोनों में तैनात कर्मी शामिल हैं।
इन देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे
सबसे अधिक अमेरिकी सैनिकों वाले देशों में कतर, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं। ये प्रतिष्ठान वायु और नौसैनिक संचालन, क्षेत्रीय रसद, खुफिया जानकारी जुटाने और बल प्रक्षेपण के लिए महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में काम करते हैं।
अल उदीद एयर बेस (कतर) – मध्य पूर्व में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा, जिसकी स्थापना 1996 में हुई थी। 24 हेक्टेयर (60 एकड़) के क्षेत्र में फैले इस बेस में लगभग 100 विमान और ड्रोन मौजूद हैं। यह बेस, जिसमें लगभग 10,000 सैनिक रहते हैं, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लिए अग्रिम मुख्यालय के रूप में कार्य करता है और इराक, सीरिया और अफगानिस्तान में ऑपरेशन के लिए केंद्रीय रहा है।
नौसेना सपोर्ट एक्टिविटी, NSA (बहरीन) – वर्तमान अमेरिकी नौसैनिक अड्डा पूर्व ब्रिटिश नौसेना प्रतिष्ठान, HMS जुफ़ेयर की साइट पर स्थित है। इस बेस में सैन्य और नागरिक कर्मचारियों सहित रक्षा विभाग के लगभग 9,000 कर्मचारी रहते हैं। अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का घर, यह बेस क्षेत्र में जहाजों, विमानों, टुकड़ियों और दूरस्थ स्थलों को सुरक्षा प्रदान करता है।
कैंप आरिफजान (कुवैत) – कैंप आरिफजान कुवैत शहर से लगभग 55 किमी (34 मील) दक्षिण-पूर्व में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सेना बेस है। 1999 में निर्मित, यह मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए प्राथमिक रसद, आपूर्ति और कमांड हब के रूप में कार्य करता है, विशेष रूप से यूएस सेंटकॉम जिम्मेदारी के क्षेत्र में।
अल-धफरा एयरबेस (यूएई) – टोही, खुफिया जानकारी जुटाने और लड़ाकू हवाई अभियानों का समर्थन करने पर केंद्रित एक रणनीतिक सैन्य अड्डा। बेस में F-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर्स और ड्रोन और AWACS सहित विभिन्न निगरानी विमान जैसे उन्नत विमान हैं।
एरबिल एयर बेस (इराक) – अमेरिकी सेना द्वारा हवाई अभियानों के लिए उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से उत्तरी इराक और सीरिया में, जहाँ सैनिक कुर्द और इराकी बलों को सलाह देते हैं।
इजरायल से सीखे भारत, भारतीय एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी की मोदी सरकार को सलाह, बताया- पाकिस्तान पर हमले में कहां हुई थी चूक
इजरायल के ईरान पर हमले की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। इस हमले में ईरान को व्यापक नुकसान हुआ है। उसका सबसे बड़ा परमाणु प्रतिष्ठान नतांज लगभग नष्ट हो चुका है। वहीं, ईरान के कई शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इजरायल ने इस हमले में हमलावर ड्रोन के अलावा लड़ाकू विमानों और सटीक हमला करने वाली मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया, लेकिन इस दौरान ईरान किसी भी मोर्चे पर दुश्मन को जवाब नहीं दे सका। ऐसे में प्रसिद्ध भारतीय कूटनीति विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने मोदी सरकार को इजरायली हमले से सीखने की सलाह दी है।
ब्रह्मा चेलानी ने क्या लिखा?
उन्होंने एक्स पर लिखा, “हवाई युद्ध के पहले सिद्धांत के अनुसार, इजरायल के शुरुआती हमलों ने ईरान की हवाई सुरक्षा और बैलिस्टिक मिसाइल लांचर को नष्ट कर दिया, जिससे ईरान की जवाब देने की क्षमता कम हो गई और गहरे पैठ वाले हमलों का मार्ग प्रशस्त हुआ। हालांकि, इस मूल सिद्धांत को भारत के राजनीतिक नेतृत्व ने नजरअंदाज कर दिया, जिसने शुरू में सशस्त्र बलों को पाकिस्तान के अंदर केवल आतंकवादी शिविरों पर हमला करने का निर्देश दिया – एक ऐसा दृष्टिकोण जिसके कारण कुछ भारतीय युद्धक विमान खो गए।”
दरअसल, भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कम से कम 9 आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन हमलों में भारत को भी नुकसान उठाना पड़ा। पाकिस्तान ने तो बिना सबूत दिए कई भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया था, जिसमें राफेल भी शामिल था। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान के दावों को खारिज कर दिया था,लेकिन कबूल किया था कि उसे कुछ नुकसान हुआ है।
भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकाने किए तबाह
भारत के 7 अक्तूबर के हमले के जवाब में पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन दागे और भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश की। भारतीय एयर डिफेंस ने हर पाकिस्तानी हमले को नाकाम करते हुए उनके लगभग सभी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों पर हमले किए और उन्हें तबाह कर दिया। इनमें नूर खान एयरबेस भी शामिल था, जिसे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का कमांड सेंटर भी कहा जाता है। इसके अलावा भारत ने केराना हिल्स पर भी बमबारी की, जहां पाकिस्तान की गुप्त परमाणु फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा।




