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*मध्य प्रदेश:फरार कांग्रेस पार्षद पर प्रशासन ने कसा शिकंजा,इंदौर से कभी किसी नेता को नहीं मिला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका,प्रदेश का सबसे ऊंचा बहुती जलप्रपात बना पर्यटन की नई पहचान, ग्वालियर की महल रोड़ 10 दिन में 10 बार धसकी*

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अनवर कादरी  पर प्रशासन ने कसा शिकंजा,’लव जिहाद’ के लिए की थी 3 लाख की फंडिंग,

इंदौर जिला प्रशासन ने लव जिहाद के लिए फंडिंग करने वाले मामले में फरार चल रहे कांग्रेस के पार्षद को एनएसए के तहत गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है। जिलाधिकारी आशीष सिंह ने मंगलवार को सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत को एनएसए के तहत गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया है।

पुलिस ने बताया कि कादरी के खिलाफ शहर के अलग-अलग पुलिस थानों में 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से एक मामला पिछले महीने दर्ज किया गया था जिसमें कांग्रेस पार्षद पर पैसों के बल पर धर्मांतरण की साजिश में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में कादरी की गिरफ्तारी पर डीसीपी ने 10,000 रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।

पुलिस ने बताया कि शहर के दो युवकों-साहिल शेख और अल्ताफ शाह ने पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया था कि युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरित कराने के लिए उन्हें कादरी ने कुल तीन लाख रुपये दिए थे और यह रकम उन्होंने युवतियों पर खर्च की थी। दोनों युवकों को अलग-अलग मामलों में दो युवतियों से दुष्कर्म और अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने बताया कि दोनों युवकों के बयान के आधार पर कादरी के खिलाफ धन के बल पर धर्मांतरण की साजिश में शामिल होने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। यह मामला दर्ज होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पार्षद पर ‘लव जिहाद’ का गिरोह संचालित करने का आरोप लगाते हुए एनएसए के तहत उसकी गिरफ्तारी की मांग की थी।

100 से अधिक लोगों ने रेलवे पटरी पर दौड़ा दी बाइक, पुलिया पार करते देख उड़े लोगों के होश

मध्य प्रदेश में आए दिन अजीब घटनाएं सामने आती रहती हैं। हाल ही में श्योपुर इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शुक्रवार को सलापुरा पुलिया पर लंबा जाम लग गया था। जाम से परेशान होकर लोग रेलवे ट्रैक पर बाइक चलाने लगे। एक के बाद एक कई बाइक रेलवे ट्रैक से गुजरती हुई दिखाई दीं। ऐसा लग रहा था मानो यह कोई हाइवे हो। यह ट्रैक सात साल पहले ही बंद हो चुका है। लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना रेलवे ट्रैक पार किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

आदिवासी समुदाय के लोग कर रहे थे प्रदर्शन

श्योपुर में बिजली की समस्या से परेशान आदिवासी समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस वजह से सलापुरा पुलिया पर लंबा जाम लग गया। जाम के कारण लोगों को बहुत परेशानी हो रही थी। परेशान होकर एक युवक ने अपनी बाइक नैरो गेज पटरी से निकाल दी। उसे देखकर और भी लोग रेलवे ट्रैक पर बाइक चलाने लगे। देखते ही देखते 200 से ज्यादा लोग अपनी बाइक लेकर रेलवे ट्रैक पर उतर गए।

वायरल वीडियो में लोग अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करते दिख रहे हैं। यह ट्रैक सात साल पहले ही बंद हो गया था। जिस नैरो गेज ब्रिज से लोग बाइक निकाल रहे थे, उसके ठीक नीचे चंबल नहर है। जरा सी चूक होने पर बाइक समेत सभी लोग नहर में गिर सकते थे। इससे उनकी जान भी जा सकती थी। लेकिन लोगों को अपनी जान की कोई परवाह नहीं थी।

वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना हो गई और पुलिस या प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं था। किसी ने भी लोगों को रोकने की कोशिश नहीं की।

इंदौर से कभी किसी नेता को नहीं मिला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने का मौका

इंदौर से नहीं बना भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष।

मध्य प्रदेश मेें भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के रुप में हेंमत खंडेलवाल की ताजपोशी हो गई। क्षेेत्रीय समीकरणों के हिसाब से छिदवाड़ा बेल्ड का पलड़ा भारी रहा। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा आठ बार मालवा निमाड़ से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चुने जा चुके है,लेकिन मालवा निमाड़ के सबसे बड़े शहर इंदौर से कभी भी भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष नहीं चुना गया,जबकि इंदौर ने भाजपा को कई बड़े नेता दिए है जो केंद्र की राजनीति में भी चमके, लेकिन कभी प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन सके।

विधानसभा चुनाव के समय प्रदेश भाजपा में बदलाव की खूब चर्चा थी। तब इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में आगे था,लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने वीडी शर्मा पर ही भरोसा जताया,लेकिन शर्मा का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब प्रदेश भाजपा को हेंमत खंडेलवाल के रुप में नया कप्तान मिला है। पंद्रह साल पहले पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का नाम भी प्रदेशाध्यक्ष के लिए चला था, लेकिन वे भी नहीं बन पाई।

इंदौर से राजेंद्र धारकर, कृष्णमुरारी मोघे जैसे नेता संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे,लेकिन वे भी कभी प्रदेशाध्यक्ष नहीं बन पाए। इंदौर के पड़ोसी जिले धार से विक्रम वर्मा और उज्जैन से सत्यनारायण जटिया प्रदेशाध्यक्ष रह चुके है। इसके अलावा खंडवा के नंदकुमार चौहान को भी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनने का मौका मिला। इस बार वैसे भी क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से इंदौर या मालवा निमाड़ को वैैसे भी मौका नहीं मिलता,क्योकि प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव मालवा के उज्जैन से नाता रखते है।

मथुरा में जन्मे हेमंत होंगे मप्र भाजपा के नए अध्यक्ष, पिता सांसद रहे, सियासी सफर कैसा?

बैतूल से विधायक हैं हेमंत खंडेलवाल।

मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ हेमंत खंडेलवाल ने ही नामांकन किया है, उनके अलावा किसी अन्य सदस्य ने दावेदारी पेश नहीं की है। ऐसे में हेमंत खंडेलवाल का निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बुधवार को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में उनके नाम का औपचारिक एलान किया जाएगा। 

नामांकन के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव, वीडी शर्मा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री प्रह्लाद पटेल, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और मंत्री राकेश सिंह समेत कई नेता प्रस्तावक के रूप में उनके साथ मौजूद रहे।  

खंडेलवाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा के रहने वाले हैं। उनका जन्म 3 सितंबर 1964 को मथुरा में हुआ था। खंडेलवाल को राजनीति और समाजसेवा के संस्कार अपने पिता स्वर्गीय विजय कुमार खंडेलवाल से विरासत में मिले हैं। विजय कुमार खंडेलवाल भाजपा से सांसद रह चुके हैं। पिता के निधन के बाद हेमंत खंडेलवाल ने उनकी राजनीतिक और समाजिक विरासत संभाली। हेमंत अपने पिता के समय से ही जनसेवा के लिए समर्पित रहे हैं।  

 प्रदेश का सबसे ऊंचा बहुती जलप्रपात बना पर्यटन की नई पहचान, 650 फीट ऊपर से गिरता है पानी

मध्य प्रदेश के मऊगंज का बहुती जलप्रपात प्राकृतिक धरोहरों में जिले की एक पहचान बनकर उभरा है। सेलर नदी पर स्थित यह जलप्रपात प्रदेश का सबसे ऊंचा झरना माना जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 198 मीटर (650 फीट) है। यह झरना मऊगंज की घाटी से गिरता हुआ बिहड़ नदी में मिलता है, जो तमसा (टोंस) नदी की सहायक धारा है। पास में मौजूद चचाई जलप्रपात के कारण यह इलाका एक प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल बन गया है।

घने जंगलों, चट्टानी सतहों और हरियाली से घिरा बहुती जलप्रपात मानसून के दौरान अपने पूर्ण सौंदर्य और शक्ति के साथ दिखाई दे रहा है। गिरते हुए पानी की तेज गर्जना और उसके चारों ओर उठती ठंडी धुंध का दृश्य पर्यटकों को एक अलौकिक अनुभव प्रदान करता है। यहां मौजूद प्राचीन शैलाश्रय और शैलचित्र, 11वीं-12वीं शताब्दी की सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाते हैं, जिससे यह स्थल ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

फोटोग्राफी, ट्रैकिंग और प्रकृति से प्रेम करने वाले लोगों के लिए यह स्थल स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आना अब सुविधाजनक भी हो गया है, रीवा रेलवे स्टेशन और प्रयागराज हवाई अड्डे के जरिए इसकी अच्छी कनेक्टिविटी है। साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग 135 इस क्षेत्र को अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ता है।

पर्यटन से बढ़ेगा स्थानीय विकास
मऊगंज के पर्यटन मानचित्र पर बहुती जलप्रपात का यह उभार निश्चित ही स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास के नए द्वार खोल सकता है। अगर, सरकार और पर्यटन विभाग उचित रूप से ध्यान दें, तो यह स्थल पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो सकता है।

सिंधिया महल की ओर जाने वाली सड़क पर बारिश में हो रहे बड़े-बड़े गड्ढे।

ग्वालियर की सबसे महंगी महल रोड़ 10 दिन में 10 बार धसकी, थोड़ी ही बारिश में हो जाते हैं बड़े-बड़े गड्ढे

मध्यप्रदेश का स्मार्ट सिटी शहर ग्वालियर इन दिनों चर्चाओं में है। लेकिन, शहर की चर्चा किसी उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि अपनी बदहाल सड़कों को लेकर। यहां की सड़कें देखकर ऐसा लगता है मानो यह शहर अब गांव से भी बदतर हो गया है। खासकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल तक जाने वाली महल रोड। यह सड़क शहर की सबसे महंगी सड़कों में से एक है,  लेकिन हालत यह है कि ये सड़क पिछले 10 दिनों में 10 बार धंस चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये सड़क महज एक महीने पहले ही बनाई गई थी, लेकिन शुरुआती बारिश तक भी नहीं झेल सकी। बारिश होते ही सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं।  

दरअसल, माधव नगर से चेतकपुरी तक 4.30 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई यह सड़क 19 करोड़ रुपये के वाटर ड्रेन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह सड़क सिंधिया महल के ठीक बगल से गुजरती है, इसलिए इसे महल रोड भी कहा जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस सड़क को बनाने में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। हालत यह है कि यह सड़क मामूली बारिश में ही कई बार धंस चुकी है। सड़क धंसने की सूचना मिलते ही निगम का अमला मौके पर पहुंचता है और हिटेची व रोलर से गिट्टी डालकर गड्ढे भर दिए जाते हैं। इससे असली कारणों और भ्रष्टाचार के सबूतों को मिटा दिया जाता है।

लोगों में नाराजगी, कांग्रेस ने भी साधा निशाना
शहरवासियों का कहना है हमें उम्मीद थी कि वॉटर ड्रेन प्रोजेक्ट के बाद एक अच्छी सड़क मिलेगी, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह सड़क भ्रष्टाचार की बुनियाद पर तैयार की गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़क पर पाइपलाइन डालने का काम लगभग 6 महीने तक चला, जिसके कारण नागरिकों को पहले ही काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। अब जब सड़क बनी है, तो वह बार-बार धंस रही है, जिससे लोगों में काफी नाराजगी है। बता दें कि यह अकेली सड़क नहीं है, बल्कि शहर की सैकड़ों सड़कें जर्जर हालत में हैं या फिर बारिश में पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। ऐसे में सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।

कलेक्टर ने गठित की जांच कमेटी
महल रोड के बार-बार धंसने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ग्वालियर कलेक्टर रूचिका सिंह चौहान ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समित पांच दिन में जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

जबलपुर हाईकोर्ट

बागेश्वर धाम की सुरक्षा सख्त, गुरू पूर्णिमा को लेकर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट नियुक्त

छतरपुर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दो से 12 जुलाई तक गुरू पूर्णिमा पर्व, पडित धीरेंद्र शस्त्री के जन्मोत्सव कार्यक्रम और कथा आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से विशिष्ट अतिथियों व श्रद्धालुओं का आना संभावित है। जिसे देखते हुए ग्राम गढ़ा बागेश्वर धाम में भीड़ प्रबंधन और कानून व्यवस्था के मद्देनजर कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों को नियुक्त किया गया है। साथ ही आवश्यक भीड़ नियंत्रण व कानून व्यवस्था के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है

एसडीएम राजनगर को संपूर्ण कानून व्यवस्था और आयोजकों से आवश्यक समन्वय करने व प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही एसडीओपी खजुराहो को कानून, सुरक्षा व्यवस्था सहित यातायात और पार्किंग व्यवस्था का दायित्व सौंपा गया है।

कार्यक्रम स्थल पर साफ-सफाई की व्यवस्था, दुकानों-होम स्टे से ज्वलनशील पदार्थों को हटवाने, पार्किंग स्थल की समुचित व्यवस्था करने, आवारा पशुओं से बचाव की व्यवस्था, मंच निर्माण एवं पंडाल की सुरक्षा व्यवस्था, कार्यक्रम स्थल पर अबाध विद्युत आपूर्ति रखने, मंच पर विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करने, लूज वायरिंग न हो, मरम्मत दल मौजूद हो, पेयजल के लिए टैंकर उपलब्ध कराना, केटल वाहन, फायर ब्रिगेड एवं चलित शौचालय उपलब्ध कराने, चिकित्सकों की राउंड द क्लॉक ड्यूटी लगाना, दो एंबुलेंस मय चिकित्सकीय दल के मौजूद रहने, भंडारे में तैयार भोजन की जांच और सैंपलिंग कराने आदि व्यवस्था के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को 2 से 12 जुलाई तक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल पर जिला कमांडेंट होमगार्ड को आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारी करने, आरटीओ को स्थल पर आवागमन में वाहनों की चेकिंग और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर छह साल जूनियर प्रोफेसर को प्रभारी प्राचार्य पद से हटाया गया

मप्र हाईकोर्ट के आदेश के बाद जबलपुर के शासकीय मोहनलाल हरगोविंददास गृह विज्ञान महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य को पद से हटा दिया गया है। इस संबंध में आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। कोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. आभा तिवारी को प्रभारी प्राचार्या नियुक्त किया गया है।

जबलपुर निवासी याचिकाकर्ता डॉ. गिरीश वर्मा द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि कॉलेज में उनसे 6 वर्ष जूनियर समीर कुमार शुक्ला को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है, जो वरिष्ठता के मानकों के खिलाफ है। याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया में वरिष्ठता की अनदेखी किए जाने को चुनौती दी गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने जूनियर प्रोफेसर को प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने के आदेश पर रोक लगाई थी और सरकार से जवाब मांगा था।

हालांकि, आदेश के बावजूद समीर शुक्ला को पद से नहीं हटाया गया, जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बाद आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग ने समीर शुक्ला को प्रभारी प्राचार्य पद से हटाते हुए उन्हें शासकीय चंद्रविजय महाविद्यालय, डिंडोरी में स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया। यह भी निर्देश दिया गया कि आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकित अग्रवाल ने पैरवी की।

Ramswaroop Mantri

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