अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महत्वाकांक्षी विधेयक को देश की संसद से अंतिम मंजूरी मिल गई है। देश की संसद के निचले सदन- कांग्रेस में इस विधेयक पर मतदान कराया गया। इस दौरान 218 सांसदों ने बिग ब्यूटिफुल बिल का समर्थन किया। 214 सांसदों ने इस विधेयक के खिलाफ वोट डाले। सदन ने जैसे ही इस टैक्स विधेयक को अंतिम मंजूरी दी, बिल को हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेज दिया गया। इसके अलावा, रूस ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने की घोषणा की है। बृहस्पतिवार को इस फैसले के बारे में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, उसे अफगानिस्तान के नवनियुक्त राजदूत गुल हसन हसन से परिचय पत्र प्राप्त हो गए हैं। इसके अलावा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आज तेलंगाना में गांव स्तर के 40,000 से ज्यादा पार्टी नेताओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। ऐसी ही देश-दुनिया की अहम खबरें

रूस ने फिर भारत को ऑफर किया सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान, बोला- भारत में बनाइए, सोर्स कोड भी देंगे
रूस ने भारत को सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान का ऑफर दिया है। उसने कहा है कि वह ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत भारत में इसके निर्माण के लिए भी तैयार है। रूस ने सुखोई Su-57 के सोर्स कोड को भी देने की बात कही है। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा हो सकता है।
रूस ने भारत को एक बार फिर अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 का ऑफर दिया है। रूस ने कहा है कि अगर भारत इस लड़ाकू विमान को खरीदता है, तो वह तकनीक के ट्रांसफर के लिए भी तैयार है। इसके अलावा रूस ने भारतीय वायुसेना के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) टेंडर के तहत Su-35M जेट की सीधी आपूर्ति का भी प्रस्ताव पेश किया है। भारत एमआरएफए टेंडर के तहत 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की तलाश कर रहा है, जो वायुसेना में गिरते स्क्वाड्रन की कमी को पूरा कर सकते हैं। हालांकि, भारत की तरफ से रूसी प्रस्ताव पर अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
HAL की नासिक फैसिलिटी में होगा Su-57E का निर्माण!
एयरो इंडिया 2025 में रूस की सरकारी कंपनी रोस्टेक और सुखोई ने इन दोनों प्रस्तावों को पेश किया था। इसके तहत रूसी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक फैसिलिटी में Su-57E के निर्माण के लिए तैयार है। यह वही फैसिलिटी है, जहां भारतीय वायुसेना के लिए 200 से अधिक सुखोई Su 30MKI लड़ाकू विमानों का निर्माण किया गया है। यह लड़ाकू विमान भी रूसी मूल का है, जिसे भारत ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत निर्माण करता है।
रूस ने भारत को अपने स्टील्थ लड़ाकू विमान के एक्सपोर्ट वेरिएंट Su-57E का ऑफर दिया है। इसके अलावा उसने इस विमान का सोर्स कोड देने का भी वादा किया है। इसके तहत भारत को Su-57E विमान में मोडिफिकेशन के लिए रूस की मदद का इंतजार नहीं करना होगा। सोर्स कोड की मदद से भारत इसमें स्वदेशी हथियारों जैसे- अस्त्र बीवीआर मिसाइल, रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल और विरुपाक्ष एईएसए रडार जैसी स्वदेशी सिस्टम को इंटीग्रेट कर सकेगा।
रूस ने यह भी कहा है कि अगर भारत Su-57E को खरीदता है तो वह इस विमान के 40-60% स्वदेशीकरण करने में भी मदद करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, रोस्टेक ने भारतीय वायुसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए 20 से 30 Su-57E लड़ाकू विमानों को देने का प्रस्ताव दिया है। इसके बाद इस विमान का भारत में स्थानीय उत्पादन 3-4 वर्षों के भीतर शुरू हो जाएगा। अगर यह डील 2026 तक फाइनल हो जाती है तो भारत के प्लांट से 2030-32 तक 60 से 70 Su-57E लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की जा सकती है।
केरल से दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट F-35B को एयरलिफ्ट कर ले जाएगा ब्रिटेन? यूं निकालने की हो रही तैयारी
केरल में F-35B की ग्राउंडिंग ने ब्रिटेन की संसद में हलचल मचा दी है। सांसदों ने सरकार से पूछा है कि क्या विमान की संवेदनशील तकनीक, जैसे कि इसकी स्टील्थ कोटिंग, सेंसर सूट और डेटा सिस्टम सुरक्षित हैं। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि विमान पूरी तरह से रॉयल एयर फोर्स की निगरानी में है और 24 घंटे सुरक्षा में रखा गया है।
दुनिया के सबसे एडवांस लड़ाकू विमानों में शामिल ब्रिटिश रॉयल नेवी F-35B लाइटनिंग II लड़ाकू विमान पिछले 20 दिनों से भारत के केरल में तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फंसा हुआ है। इंडो-पैसिफिक में एक नियमित मिशन के दौरान इस लड़ाकू विमान की आपातकालीन लैंडिंग हुई थी। ये लड़ाकू विमान HMS प्रिंस ऑफ वेल्स एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है और बताया जा रहा है टेक्निकल दिक्कतों की वजह से इसकी आपातकालीन लैंडिंग हुई। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने के बाद ये एयरक्राफ्ट भारतीय नागरिक हवाई अड्डे पर उतरने के लिए मजबूर हो गया था। भारतीय वायुसेना की तरफ से एक ट्वीट में कहा गया था कि ‘भारतीय वायुसेना के IACCS सिस्टम ने इसे इंटरसेप्ट कर लिया और फिर इसकी लैंडिंग की मंजूरी दी गई।’ लेकिन ब्रिटेन की संसद तक में सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या भारत इस लड़ाकू विमान की टेक्नोलॉजी तो नहीं चुरा लेगा?
दूसरी तरफ सूत्रों ने बताया है कि ब्रिटिश रॉयल नेवी F-35 फाइटर जेट को ले जाने के लिए स्पेशल व्यवस्थाएं की जाएंगी और इसके कुछ पार्ट्स को हटाने की जरूरत हो सकती है। मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से इंडिया टूडे की रिपोर्ट ने कहा है कि इंजीनियरिंग संबंधी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। खराबी को ठीक करने की कई कोशिशों के बावजूद लड़ाकू विमान उड़ने की स्थिति में नहीं पहुंच पाया है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि साइट पर तैनात तकनीकी टीमें पूरी कार्यक्षमता बहाल करने में असमर्थ हैं, जिसकी वजह से यूनाइटेड किंगडम को विमान की वापसी के लिए वैकल्पिक योजनाओं पर विचार करना पड़ रहा है। अब संभावना है कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को सैन्य कार्गो विमान से एयरलिफ्ट कर यूनाइटेड किंगडम वापस ले जाने पर विचार चल रहा है।
F-35B की केरल में ग्राउंडिंग ने ब्रिटेन की संसद में हलचल मचा दी है। सांसदों ने सरकार से पूछा है कि क्या विमान की संवेदनशील तकनीक, जैसे कि इसकी स्टील्थ कोटिंग, सेंसर सूट और डेटा सिस्टम सुरक्षित हैं। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि विमान पूरी तरह से रॉयल एयर फोर्स की निगरानी में है और 24 घंटे सुरक्षा में रखा गया है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत ने काफी आसानी से एफ-35 को इंटरसेप्ट कर लिया, जिससे ब्रिटेन और अमेरिका भी डर गये हैं। एफ-35 को लेकर अमेरिका दावा करता है कि दुनिया का कोई रडार इसे इंटरसेप्ट नहीं कर सकता है और अगर भारत ने ऐसा कर लिया है तो उसे डर टेक्नोलॉजी चोरी का है। शुरुआत में विमान को खुले में पार्क किया गया था, जो केरल की मानसूनी बारिश में जोखिमभरा था। एयर इंडिया ने इसे हैंगर में शिफ्ट करने की पेशकश की, लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों ने टेक्नोलॉजी की सुरक्षा का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया। लेकिन दो हफ्ते बाद, ब्रिटिश हाई कमीशन ने स्वीकार किया कि स्पेशलिस्ट टीम और उपकरणों के आने पर विमान को एक प्राइवेट हैंगर में शिफ्ट किया जाएगा।
F-35B लाइटनिंग II, जिसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने डेवलप किया है, उसे दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है। यह विमान शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग की क्षमता रखता है, जिससे यह एयरक्राफ्ट कैरियर और अम्फीबियस वॉरशिप पर भी ऑपरेट कर सकता है। इसका रडार क्रॉस सेक्शन इतना कम है कि यह दुश्मन के रडार पर लगभग दिखाई नहीं देता। इसके सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और डेटा-शेयरिंग क्षमता इसे आधुनिक युद्ध के लिए आदर्श बनाती है। लेकिन भारत ने इसे डिटेक्ट तक ब्रिटेन को हक्का बक्का कर दिया है। इस विमान की कीमत 110 मिलियन डॉलर यानि करीब 913 करोड़ भारतीय रुपये है।
इसके अलावा ब्रिटेन में कहा जा रहा है कि सरकार के प्रेशर की वजह से मीडिया चैनलों पर इसकी कवरेज नहीं हो पा रही है। एविएशन एक्सपर्ट गाय ग्रैटन ने एक भारतीय न्यूज चैनल पर ब्रिटिश सरकार की चुप्पी को “शर्मनाक” बताया है। दूसरी तरफ भारत ने तिरुवनंतपुरम को ‘इमरजेंसी रिकवरी एयरफील्ड’ घोषित किया हुआ है, और इस घटनाक्रम में उसने ब्रिटिश पक्ष को भरपूर सहायता दी। हालांकि भारत NATO का हिस्सा नहीं है, फिर भी दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। पहले भी 2016 में अमेरिका का F-22 कनाडा में फंसा था, लेकिन वह एक NATO देश था। भारत जैसे गैर-NATO देश में F-35B का फंसने की घटना को ब्रिटेन के और नाटो देशों के एक्सपर्ट काफी ज्यादा संवेदनशील बता रहे हैं।
F-35B पर US के घमंड को भारत ने तोड़ा!
यदि F-35B की मरम्मत नहीं हो पाती है तो संभावना है कि इस F-35B को भारी-भरकम सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान, जैसे कि C-17 ग्लोबमास्टर से एयरलिफ्ट करके वापस उसके एयरक्राफ्ट कैरियर पर या ब्रिटेन ले जाया जाए। यह प्रक्रिया न सिर्फ महंगी है, बल्कि टेक्नोलॉजी के हिसाब से काफी ज्यादा मुश्किल है। 2020 में एक अमेरिकी C-17 बांग्लादेश में फंस गया था और उसे एयरलिफ्ट करना पड़ा था। इस मामले में भी ऐसा कदम अंतिम विकल्प हो सकता है। साथ ही इस घटना ने F-35 प्रोग्राम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक F-35B की ‘मीन टाइम बिटवीन फेल्योर’ दर उम्मीद से कम है और इसके रखरखाव में काफी समय और पैसे लगते हैं। भारत ने इसे डिटेक्ट कर अमेरिका के उस घमंड को तोड़ दिया है, जिसमें इस विमान को ‘विश्वविजेता’ बताया जाता है।
पीएम मोदी त्रिनिदाद एंड टोबैगो में स्वागत से अभिभूत.. तस्वीरें साझा कर बयां किए भाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद एंड टोबैगो दौरे पर हैं। इस देश की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। 38 मंत्रियों और चार सांसदों के साथ हवाईअड्डे पर खुद पीएम कमला प्रसाद बिसेसर ने उनका स्वागत किया।

भारत को जानो क्विज के विजेताओं से की मुलाकात
पीएम मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो में भारत को जानो क्विज के विजेता शंकर रामजतन, निकोलस मैराज और विंस महतो से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि इस क्विज ने दुनिया भर में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा दिया है। साथ ही भारत के साथ हमारे प्रवासी समुदाय के जुड़ाव को और गहरा किया है।

पोर्ट ऑफ स्पेन में पीएम मोदी का स्वागत करते भारतीय प्रवासी
पीएम मोदी ने स्वागत के लिए भारतीय समुदाय का आभार जताया
पीएम मोदी ने पोर्ट ऑफ स्पेन में अविस्मरणीय स्वागत के लिए स्थानीय भारतीय समुदाय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि कई साल पहले भारत से कई लोग त्रिनिदाद और टोबैगो आए थे। इन वर्षों में, उन्होंने यहां कई क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई और देश के विकास में मदद की। वे आज भी भारत से जुड़ाव महसूस करते हैं और भारतीय संस्कृति में गहरी रुचि रखते हैं।

पीएम मोदी का ढोल-नगाड़े बजाकर स्वागत करते लोग
भविष्य में नई ऊंचाइयों को छुएगी भारत-त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच मित्रता
पीएम मोदी ने पोर्ट ऑफ स्पेन में स्वागत समारोह की कुछ झलकियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि आशा करता हूं कि भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच मित्रता आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छुएगी!

पीएम का पोर्ट ऑफ स्पेन में गर्मजोशी से स्वागत; युवाओं में संबोधन को लेकर उत्साह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घाना की सफल यात्रा के बाद कैरेबियन देश त्रिनिदाद एंड टोबैगो पहुंचे। देश की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर उत्साहित दिखे युवा
पीएम मोदी के आगमन पर त्रिनिदाद और टोबैगो की नागरिक कमला बद्री ने खुशी का इजहार किया। भारतीय मूल की इस नागरिक ने कहा, आज प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत और सांस्कृतिक कार्यक्रम में आकर बहुत खुश हूं। त्रिनिदाद और टोबैगो में ईस्ट इंडियन डायस्पोरा के एक सदस्य एड्रियन ने कहा, हम अपने द्वीप पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए बहुत उत्साहित हैं… हम इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनकर बहुत खुश हैं। खबरों के मुताबिक पीएम मोदी इसी सामुदायिक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित भी करेंगे।
26 साल बाद कोई भारतीय पीएम त्रिनिदाद एंड टोबैगो की यात्रा पर
त्रिनिदाद एंड टोबैगो पहुंचे पीएम मोदी के दौरे की अहमियत को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत के प्रधानमंत्री अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर और उनके अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने किया। भारत की तरफ से यह यात्रा ऐतिहासिक है क्योंकि 26 साल बाद कोई प्रधानमंत्री यहां आया है।
इस कैरेबियन देश का यूपी-बिहार से खास नाता
विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस देश में कुल 13 लाख लोग रहते हैं। इनमें से 45 फीसदी लोग भारतीय मूल के हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच संबंध बहुत मजबूत और खास हैं। यहां रहने वाले 45% लोगों में से ज़्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोग हैं। इनमें से अधिकांश लोग भोजपुरी भाषी जिलों जैसे छपरा, आरा, बलिया, सीवान, गोपालगंज, बनारस, आज़मगढ़ से आए हैं।
क्विज के विजेताओं से मिले प्रधानमंत्री
त्रिनिदाद एंड टोबैगो में पीएम मोदी ने ‘भारत को जानो’ क्विज़ के विजेता शंकर रामजतन, निकोलस मराज और विंस महतो से भी मुलाकात की। पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि इस क्विज़ ने दुनिया भर में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा दिया है और भारत के साथ हमारे प्रवासी समुदाय के जुड़ाव को और गहरा किया है।
अमेरिकी कांग्रेस में 218-214 के अंतर से पारित हुआ विधेयक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महत्वाकांक्षी विधेयक को देश की संसद से अंतिम मंजूरी मिल गई है। देश की संसद के निचले सदन- कांग्रेस में इस विधेयक पर मतदान कराया गया। इस दौरान 218 सांसदों ने बिग ब्यूटिफुल बिल का समर्थन किया। 214 सांसदों ने इस विधेयक के खिलाफ वोट डाले। सदन ने जैसे ही इस टैक्स विधेयक को अंतिम मंजूरी दी, बिल को हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेज दिया गया।अमेरिकी राजनीति में बड़ा फैसला हुआ है। रिपब्लिकन नेतृत्व वाले देश की संसद के निचले सदन से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिग ब्यूटीफुल टैक्स विधेयक को अंतिम मंजूरी मिल गई है। इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का निर्णायक क्षण माना जा रहा है। बिल पर मतविभाजन के दौरान पक्ष में 218 सांसदों ने वोट किया। 214 सांसद इस विधेयक के खिलाफ हैं।
अमेरिकी संसद में चर्चा के दौरान 940 पेज के इस भारी-भरकम बिल पर कितनी विस्तृत चर्चा हुई, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि न्यूयॉर्क के डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीस ने विधेयक के विरोध में रिकार्ड तोड़ भाषण दिया। उन्होंने आठ घंटे से अधिक समय तक भाषण दिया। चर्चा के दौरान सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने कहा, हमें एक बड़ा काम पूरा करना है। इस बिल के साथ हम इस देश को पहले से कहीं अधिक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध बनाने जा रहे हैं।
विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर बहस में भाग लेने वाले जेफ्रीज ने 8 घंटे 44 मिनट के रिकॉर्ड भाषण में कहा, स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रमों पर अमेरिकी लोग बड़ी संख्या में निर्भर हैं। आक्रोश से भरे डेमोक्रेटिक सांसद ने कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें सदन में यह कहना पड़ेगा कि यह एक अपराध स्थल है। अमेरिकी लोगों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को खतरे में डाला जा रहा है।’
विधेयक में क्या है खास
- इस पैकेज की प्राथमिकता ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान लागू 4.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के टैक्स छूट को लागू करना है।
- कर्मचारियों को टिप और ओवरटाइम वेतन में कटौती की अनुमति मिलेगी।
- प्रति वर्ष 75,000 अमेरिकी डॉलर से कम कमाने वाले अधिकांश वृद्धों के लिए 6,000 अमेरिकी डॉलर की कटौती।
- अमेरिका में “गोल्डन डोम” रक्षात्मक प्रणाली विकसित करने के लिए लगभग 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का भी जिक्र।
विधेयक का विरोध कर रहे डेमोक्रेट्स का कहना है कि यह अमीरों को कर में छूट देने का एक तरीका है। मजदूर वर्ग और समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर बोझ बढ़ेगा।
- आलोचकों का मानना है कि इस पैकेज से दशक भर में घाटा 3.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़ जाएगा।
- 11.8 मिलियन से अधिक लोगों को मिला स्वास्थ्य कवरेज छिनने का खतरा।
सीनेट में जेडी वेंस के समर्थन से पारित हुआ विधेयक
बता दें कि कांग्रेस में पारित होने से पहले इस विधेयक को सीनेट में भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तरफ से समर्थन का वोट डालने के बाद सीनेट से इस विधेयक को मंजूरी मिल गई। बीते 30 जून को (अमेरिकी समयानुसार) सीनेट में मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष और विरोध में 50-50 मत पड़े। जिसके बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना निर्णायक मत देकर बिग ब्यूटिफुल विधेयक को मंजूरी दिलाई। विधेयक का विरोध करने वाले लोगों में तीन रिपब्लिकन सांसद- थॉम थिलिस, सुजैन कॉलिन्स और केंटकी रैंड पॉल भी शामिल रहे।
क्या है बिग ब्यूटिफुल बिल
राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ (ओबीबीबी) में अपने नीतिगत एजेंडे और अभियान के वादों को एक साथ समाहित किया है। हालांकि, इससे संघीय घाटे में और वृद्धि होने और पहले से ही बढ़ते अमेरिकी ऋण के ढेर में और इजाफा होने की आशंका है। ओबीबीबी के प्रतिकूल राजकोषीय (सरकारी बजट से संबंधित) प्रभाव और इसके व्यापक आर्थिक प्रभावों को लेकर कई चिंताएं भी उपजी हैं। इस विधेयक के लागू होने से एक ओर कर कटौती होगी और दूसरी ओर खर्च में बढ़ोतरी की जाएगी। इससे अमेरिकी सरकार की वित्त स्थिति खराब हो सकती है।
गौरतलब है कि अमेरिकी सरकार की कमाई और खर्च का अंतर यानी फेडरल घाटा पहले से ही काफी अधिक है। 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के फेडरल घाटा करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर है। यह राशि अमेरिका की जीडीपी का लगभग 6.4% है। यह राशि कितनी अधिक है इसका अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं यह 2024 भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 50% है।

रूस ने तालिबान को मान्यता दी; अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्ताकी और रूसी समकक्ष लावारोव
अफगानिस्तान में तालिबान शासन को रूस की औपचारिक मान्यता
रूस ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने की घोषणा की है। बृहस्पतिवार को इस फैसले के बारे में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, उसे अफगानिस्तान के नवनियुक्त राजदूत गुल हसन हसन से परिचय पत्र प्राप्त हो गए हैं।रूस एशियाई देश अफगानिस्तान में तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश बन गया है। विदेश मंत्रालय ने यह बयान दिया है। जानिए क्यों खास है यह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम
आधिकारिक मान्यता मिलने से दोनों देशों का सहयोग बढ़ेगा
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश बनने के संबंध में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, अफगान सरकार को आधिकारिक मान्यता मिलने से दोनों देशों के बीच ‘उत्पादक द्विपक्षीय सहयोग’ को बढ़ावा मिलेगा।
2021 में आया तालिबानी शासन, रूस ने कहा- अब गैरकानूनी संगठन नहीं
बता दें कि अफगानिस्तान में वर्ष 2021 में तालिबान शासन लागू हुआ था। अमेरिकी सेना के देश छोड़ने के बाद तालिबानी नेताओं ने देश का नेतृत्व अपने हाथों में ले लिया। फिलहाल देश का विदेश मंत्रालय आमिर खान मुत्ताकी संभाल रहे हैं। रूस ने तालिबान को अब गैरकानूनी संगठनों की सूची से हटा दिया है।
तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने फैसले का स्वागत किया
रूसी विदेश मंत्रालय की घोषणा के बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस फैसले को ऐतिहासिक कदम बताया। तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘अन्य देशों के लिए एक अच्छा उदाहरण’ बताया।

मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस
तेलंगाना में कांग्रेस सम्मेलन आज, पार्टी नेताओं को संबोधित करेंगे खरगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आज तेलंगाना में गांव स्तर के 40,000 से ज्यादा पार्टी नेताओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। खरगे बृहस्पतिवार शाम को हैदराबाद पहुंचे, जहां आरजीआई हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी, तेलंगाना में पार्टी मामलों की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ और अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया।
खरगे बृहस्पतिवार शाम को हैदराबाद पहुंचे, जहां आरजीआई हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी, तेलंगाना में पार्टी मामलों की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ और अन्य नेताओं ने उनका स्वागत किया।
सामाजिक न्याय समयभरी सम्मेलन को संबोधित करेंगे खरगे
गौड़ ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि खरगे राज्य कांग्रेस इकाई की राजनीतिक मामलों की समिति और उपाध्यक्षों व महासचिवों समेत इसके पदाधिकारियों की बैठकों में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ‘सामाजिक न्याय समयभरी’ नामक सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में गांव, ब्लॉक और जिले की कांग्रेस समितियों के अध्यक्ष, विधायक, सांसद, एमएलसी और राज्य मंत्री मौजूद रहेंगे।
पार्टी ने सफलतापूर्वक चलाया जय बापू, जय भीम, जय संविधान नामक अभियान
गौड़ ने बताया कि कांग्रेस ने राज्य में पिछले छह महीनों से ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ नाम का अभियान सफलतापूर्वक चलाया है। इसका मकसद महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा की रक्षा करना और संविधान पर कथित भाजपा हमलों के खिलाफ आवाज उठाना है।
गांव स्तर के कांग्रेस अध्यक्षों और नेताओं को संदेश देंगे खरगे
गौड़ ने बताया कि खरगे सम्मेलन के दौरान गांव स्तर के कांग्रेस अध्यक्षों और अन्य नेताओं को अपना संदेश देंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कुछ ग्राम समिति अध्यक्ष भी बोलेंगे। राज्य की कांग्रेस सरकार ने पार्टी के ‘सामाजिक न्याय’ के एजेंडे के तहत पिछले साल जाति सर्वेक्षण कराया था।

उत्तराखंड में बारिश –
भारी बारिश से उत्तराखंड में कई सड़कें धंसीं, हिमाचल में 55 लोग अब भी लापता
उत्तराखंड में बुधवार रात से जारी मूसलाधार बारिश के कारण यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ धाम के रास्ते में कई जगह भूस्खलन हुआ और सड़कें धंस गईं। यमुनोत्री हाईवे और केदारनाथ-गौरीकुंड हाईवे धंसने से बृहस्पतिवार को चार धाम यात्रा बाधित रही। इस बीच, हिमाचल के मंडी में दो दिन पहले हुई बादल फटने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई, जबकि 55 लोग अब भी लापता हैं।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच दो जगह भूस्खलन हुआ, जिससे बृहस्पतिवार तड़के केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू नहीं हो पाई। सुबह 7:30 बजे एसडीआरएफ के जवानों ने रास्ता साफ कर गौरीकुंड से 40 यात्रियों को सुरक्षित सोनप्रयाग रवाना किया। सुबह 9 बजे से सोनप्रयाग से यात्रियों को केदारनाथ भेजा गया। हाईवे बंद होने के कारण यात्री सोनप्रयाग से पैदल रास्ते से गौरीकुंड तक गए। वहीं, गंगोत्री हाईवे करीब पांच घंटे बाद बहाल किया जा सका।
उत्तराखंड में बारिश के कारण चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिले के कई गांवों में नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। वहीं, गुजरात के बनासकांठा जिले में जगह-जगह सड़कें पानी में डूब गई हैं।
38 पंचायतें तबाही की चपेट में
हिमाचल के मंडी जिले के अलग-अलग भागों में सोमवार रात बादल फटने और भारी बारिश से आई बाढ़, भूस्खलन से मची तबाही के मंजर की रोजाना नई तस्वीरें सामने आ रही हैं। अकेले सराज क्षेत्र की ही 38 पंचायतें तबाही की चपेट में हैं। यहां सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। न बिजली है और न पानी।
फोन भी ठप पड़े हैं। लोगों को खाने का संकट है। वीरवार को थुनाग में एक और शव मिला है। 30 जून की रात को आए आसमान से बरसी आफत से जिले के विभिन्न भागों में अब तक कुल 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लापता 55 की तलाश जारी है। लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं।
जिले की आपदा प्रभावित 38 पंचायतों की करीब 80 हजार की आबादी तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही। सराज क्षेत्र के पखरैर, बहल, लंबाथाच, चिऊणी, शिल्हीबागी, जरोल, पांडव शिला, बागचनोगी, केल्टी, जैंशला, कलहणी खबलेच गांव अभी भी प्रशासन की पहुंच से बाहर हैं।
यहां के लोग अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। थुनाग के हॉर्टीकल्चर कॉलेज के फंसे 92 प्रशिक्षुओं को रेस्क्यू किया गया है, जबकि जंजैहली में क्लब महिंद्रा में फंसे सभी 60 पर्यटक सुरक्षित हैं।
दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर बैन हटा: मनजिंदर सिंह सिरसा ने ईओएल नियमों की गिनाईं कमियां
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुरानी गाड़ियों पर लगा बैन हटा लिया गया है। इसे लेकर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को पत्र लिखा और राजधानी में एक जुलाई से लागू हुए एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों के नियमों की कमियां गिनाईं। साथ ही उन्होंने पुरानी गाड़ियों को फ्यूल न देने के निर्देश पर रोक लगाने को कहा। दरअसल, दिल्ली में ‘एंड ऑफ व्हीकल’ वाहनों के नियमों के तहत की जा रही पुरानी गाड़ियों की जब्ती पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अभी इस नियम को इंप्लीमेंट नहीं कर रहे हैं। गाड़ियों को उम्र के हिसाब से नहीं, बल्कि पॉल्यूशन स्तर के हिसाब से बंद किया जाएगा। इस पर सरकार काम कर रही है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को पत्र लिखकर डायरेक्शन नंबर 89 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने को कहा है, जिसके तहत दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों को फ्यूल देने से मना किया गया है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि हम सीएक्यूएम से आग्रह करते हैं कि डायरेक्शन नंबर 89 के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, जब तक कि ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली पूरे एनसीआर में एकीकृत नहीं हो जाती। हमें विश्वास है कि दिल्ली सरकार के चल रहे बहुआयामी प्रयासों से वायु गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार आएगा।

ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त
बिहार में मतदाता सूची संशोधन पर चुनाव आयोग कायम, CEC बोले- हर योग्य मतदाता को जोड़ा जाएगा
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष संशोधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया तय समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी। दिल्ली में बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) तय कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। इसमें चुनाव कर्मियों और राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी है। कुछ लोगों की आशंकाओं के बावजूद यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि सभी योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाए।
विपक्षी दलों की आपत्ति
कांग्रेस, राजद (आरजेडी), सीपीआई (सीपाई) और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की नियत नहीं, बल्कि समय-सीमा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव में अब केवल तीन से चार महीने बचे हैं, और इतनी कम अवधि में मतदाता सूची में सुधार करना चुनौतीपूर्ण होगा। इससे अंतिम सूची की सटीकता और समावेशिता प्रभावित हो सकती है।
विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया सिर्फ सूची सुधार या नए मतदाताओं के नाम जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए घर-घर जाकर जांच, गलतियों को सुधारना और नए नाम जोड़ना जरूरी है। इतने कम समय में यह काम ठीक से नहीं हो पाएगा, जिससे या तो कई योग्य मतदाता छूट सकते हैं या फिर गलतियां हो सकती हैं।
चुनाव आयोग का जवाब
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और संरचित है, और बीएलओ को मतदाता सत्यापन और नाम जोड़ने की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक योग्य मतदाताओं का नाम सूची में शामिल किया जाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान से वंचित न हो। चुनाव आयोग का मानना है कि यह विशेष संशोधन प्रक्रिया बिहार विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाएगी।
फिर भी विपक्ष संतुष्ट नहीं
विपक्षी दलों का कहना है कि जब अक्तूबर-नवंबर में ही चुनाव संभावित हैं, तो इस समय इतने बड़े स्तर पर संशोधन कराना व्यवस्था पर बहुत बोझ डाल सकता है। इससे न तो पारदर्शिता सुनिश्चित हो पाएगी और न ही सभी योग्य मतदाता सूची में शामिल हो पाएंगे।
भारत का दोस्त अपने सबसे बड़े दुश्मन से करेगा दोस्ती? बदल जाएगा काकेशस का समीकरण, तुर्की की बल्ले-बल्ले
आर्मेनिया और अजरबैजान जल्द ही एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए तुर्की ने दोनों देशों को राजी किया है। इन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस महीने के अंत में दुबई में मुलाकात भी करने वाले हैं।
भारत के करीबी दोस्त आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान अपने सबसे बड़े दुश्मन अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से इस महीने के अंत में दुबई में मिलने वाले हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस दौरान आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति समझौता हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो इससे दोनों देशों की करीब ढाई दशक पुरानी दुश्मनी खत्म हो सकती है। इतना ही नहीं, इससे काकेकश क्षेत्र का समीकरण भी बदल सकता है। काकेशस (Caucasus) एक भौगोलिक क्षेत्र है जो पूर्वी यूरोप और पश्चिमी एशिया के बीच स्थित है। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश शांति समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखे हुए हैं। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात मई में अल्बानिया के तिराना में यूरोपीय राजनीतिक समुदाय शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां उन्होंने संचार चैनल खुले रखने का संकल्प लिया था।

आर्मेनिया पर अतिरिक्त शर्ते लाद रहा अजरबैजान
हालांकि आर्मेनिया और अजरबैजान मार्च में एक मसौदा शांति समझौते पर आम सहमति पर पहुंच गए थे, लेकिन बाकू अभी भी औपचारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कई अतिरिक्त शर्तों पर जोर दे रहा है। अजरबैजान की मांग है कि येरेवन अपने संविधान में संशोधन करके अजरबैजानी क्षेत्र के संदर्भों को हटा दे। इसके अलावा अजरबैजान की मांग यह भी है कि आर्मेनिया में यूरोपीय संघ निगरानी मिशन (ईयूएमए) को समाप्त कर दिया जाए और आर्मेनिया ओएससीई मिन्स्क समूह को भंग कर दे, जिस पर बाकू ने पिछले तीन दशकों से पक्षपात का आरोप लगाया है।
आर्मेनिया और अजरबैजान 1993 के नागोर्नो-कारबाख युद्ध के बाद से संघर्ष में हैं, जब अर्मेनियाई सेना ने सोवियत संघ के पतन के बाद विवादित एन्क्लेव पर कब्जा कर लिया था। 2020 के अंत में छह हफ्ते तक चले खूनी युद्ध के बाद, अजरबैजान ने नागोर्नो-कराबाख को वापस लेने के लिए सितंबर 2023 में एक सैन्य अभियान शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप युद्धविराम समझौता हुआ। अधिकांश जातीय अर्मेनियाई भाग गए, और अलग हुए क्षेत्र आर्ट्सख को आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी 2024 को भंग कर दिया गया।
आर्मेनिया और अजरबैजान मजबूरी में कर रहे शांति समझौता
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुबई में प्रस्तावित बैठक एक सकारात्मक संकेत है, जो दर्शाता है कि दोनों पक्ष चल रही असहमतियों के बावजूद बातचीत करने के लिए तैयार हैं। पशिनयान को अगले साल चुनाव का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संभावना नहीं है कि वह मतदान से पहले संवैधानिक जनमत संग्रह को आगे बढ़ा सकेंगे। इस बीच, तुर्की चुपचाप अजरबैजान से शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह कर रहा है। तुर्की ईरान की घटती शक्ति और क्षेत्र में तेजी से बदलते समीकरण की याद दिला रहा है।
तुर्की की शह पर समझौते को राजी हुए आर्मेनिया और अजरबैजान
आर्मेनिया के साथ अंकारा की अपनी सामान्यीकरण प्रक्रिया अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच संभावित शांति समझौते से जुड़ी हुई है। तुर्की के अधिकारी आर्मेनिया को तथाकथित मध्य गलियारे के लिए एक महत्वपूर्ण देश के रूप में देखते हैं, जो तुर्की को सीधे मध्य एशिया से जोड़ेगा। तुर्की की कंपनियां आर्मेनिया में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भाग लेने के लिए भी उत्सुक हैं। सूत्रों ने कहा कि अजरबैजान की आपत्तियों के बावजूद, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने पिछले महीने अर्मेनियाई प्रधानमंत्री की तुर्की की पहली आधिकारिक यात्रा में पशिनयान की मेजबानी की थी।
पुतिन ने ट्रंप को फोन पर ‘हड़काया’, बोले- यूक्रेन में बिना लक्ष्य पाए नहीं रुकेगा युद्ध, जेलेंस्की टेंशन में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फोन पर बातचीत की, जिसमें ईरान और यूक्रेन के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। पुतिन ने ईरान के मामले में राजनीतिक समाधान पर जोर दिया और यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रंप के प्रयासों का समर्थन किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को फोन पर बातचीत के दौरान ईरान, यूक्रेन और अन्य मुद्दों पर चर्चा की। क्रेमलिन ने यह जानकारी दी। ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद से यह फोन पर उनकी छठी बातचीत थी। पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि ईरान के हालात पर चर्चा करते हुए पुतिन ने सभी मुद्दों को राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया।
रूस ने क्या कहा
अमेरिका ने 22 जून को ईरान के तीन स्थलों पर हमला किया, जिससे वह तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के उद्देश्य से इजराइल के युद्ध में शामिल हुआ। यूक्रेन में संघर्ष के बारे में उशाकोव ने कहा कि ट्रंप ने लड़ाई को शीघ्र रोकने के लिए अपने प्रयास पर बल दिया तथा पुतिन ने कीव के साथ वार्ता जारी रखने के लिए मॉस्को की इच्छा व्यक्त की।
पुतिन ने तर्क दिया है कि उन्होंने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने के प्रयास से रूस के लिए उत्पन्न खतरे को दूर करने और यूक्रेन में रूसी भाषियों की रक्षा के लिए फरवरी 2022 में यूक्रेन में सेना भेजी थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी संभावित शांति समझौते में यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अपनी कोशिश छोड़नी होगी तथा रूस के क्षेत्रीय आधिपत्य को मान्यता देनी होगी। इससे यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की चिंता बढ़ सकती है।
अमेरिका ने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति रोकी
दोनों नेताओं के बीच बृहस्पतिवार को बातचीत पेंटागन की इस पुष्टि के बाद हुई है कि अमेरिका यूक्रेन को कुछ हथियारों की आपूर्ति रोक रहा है। उशाकोव ने कहा कि ट्रंप-पुतिन वार्ता में यूक्रेन को कुछ अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति को निलंबित करने पर चर्चा नहीं हुई।
मीरा रोड थप्पड़ कांड: कब निकलेगी गुंडागर्दी करने वालों की हेकड़ी? मराठी नहीं बोलने पहले दुकानदार को पीटा अब माफी से इनकार

मुंबई की मीरा रोड पर रविवार रात एक दुकानदार को मराठी नहीं आने वाले मनसे कार्यकर्ताओं ने थप्पड़ों से पीटा था। गुरुवार को इस घटना के विरोध में मीरा भाईंदर के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी, तो वहीं 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी आरोपी को अरेस्ट नहीं किया है, हालांकि सीसीटीवी फुटेज से तीन आरोपियों की पहचान हो गई है।
मुंबई की मीरा रोड पर मराठी नहीं बोलने पर दुकानदार की पिटाई के मामले में गुरुवार को मीरा भाईंदर में दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए बंद रखकर मनसे के कार्यकार्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मनसे के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी का शिकार बने बाबूभाई खिमाजी चौधरी ने मीरा भाईंदर वसई विरार के पुलिस को एक ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। तो वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र समेत देशभर में छाए इस मुद्दे की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है, हालांकि आरोपियों ने माफी मांगने से इनकार कर दिया है।
सात कार्यकर्ता थे शामिल
मीरा भाईंदर पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकानदार को थप्पड़ मारने के मामले में 7 मनसे कार्यकर्ता शामिल थे। पुलिस ने माफी से इंकार करने के बाद अब आरोपियों को अरेस्ट करने के बाद पूछताछ की तैयारी की है। यह कार्रवाई डीसीपी के ऑफिस में की जाएगी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस इन्हें अरेस्ट करेगी या फिर नहीं। मनसे के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के मीरा रोड उपनगर में ‘जोधपुर स्वीट शॉप’ के मालिक 48 साल बाबूलाल खिमजी चौधरी को थप्पड़ों से पीटा था, क्योंकि वह मराठी नहीं बोल रहे थे। चौधरी पर थप्पड़ बरसाने वाले तीन आरोपियों की पहचान हुई है। आरोपियों में प्रमोद निलेकर, करन कंदानगिरे, अक्षय सालवी के नाम शामिल हैं।
FIR में घटना का पूरा जिक्र
‘जोधपुर स्वीट शॉप’ के मालिक 48 साल बाबूलाल खिमजी चौधरी ने पुलिस में दर्ज कराई एफआईआर में बताया है कि मनसे के गुंडे पानी की बोतलें खरीदना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने उनसे हिंदी में बात की, तो उन्होंने मराठी में बात करने की मांग की। मैंने कहा कि हम सभी भाषाएं बोलते हैं, इसलिए उन्होंने मुझे पीटने की धमकी दी। इसके वह आगे खड़े चौधरी के पास पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में कौन सी भाषा बोली जाती है तो चौधरी ने कहा दिया सभी भाषाएं बोली जाती हैं। इसके बाद चौधरी को मनसे कार्यकर्ताओं ने थप्पड़ों से मारा था। यह घटना रविवार को रात 10.30 बजे के बाद हुई था। हमले का वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ है।




