इन दिनों मध्य प्रदेश की अफसरशाही एक बार फिर अपनी ईमानदारी और कर्मठता को लेकर सवालों के घेरे में है। हाल ही में आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों में सामने आए अखिल भारतीय स्तर के कुछ अफसरों के नामों ने मध्य प्रदेश की अफरशाही पर कलंक लगाया है। दरअसल लोकसभा चुनाव के ठीक पहले आयकर विभाग ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां छापेमार कार्यवाही की थी। उस कार्यवाही में शुरू से ही कई बड़े रसूखदारों के नाम सामने आने का अंदाजा लगाया जा रहा था। लेकिन पिछले दिनों आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए दस्तावेजों ने उन सभी रसूखदारों के नामों पर से पर्दा उठा दिया। इनमें एक नाम आईपीएस अफसर वी मधुकुमार का भी है। जारी की गई सूची में 1991 बैच के आईपीएस वी मधुकुमार के नाम के आगे 25 लाख रुपए की देनदारी लिखी हुई है। इस तरह से राजनेताओं की झोली में बैठकर जनता से लूटा हुआ पैसा राजनेताओं तक पहुंचाना समझ से परे है। जानकारी में आया कि वी मधुकुमार इस तरह का खेल वर्षों से खेलते आ रहे है। साहब की ईमानदारी से पर्दा तो तभी उठ गया था जब जुलाई 2020 में एक कमरे में बैठ साहब अपने अधीनस्थों से नोटों की वसूली करते कैमरे में कैद हुए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वीडियो पुराना होने के दावे किए गए थे। हालांकि हाल ही में शिवराज सरकार ने आयकर विभाग की कार्यवाही में सामने आए मधुकुमार के नाम के बाद इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया और एडीजी उज्जैन, डीजी ईओडब्ल्यू और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जैसे प्रमुख पदों पर बैठे मधुकुमार को तत्काल प्रभाव से इन सभी जिम्मेदार पदों से पद मुक्त करते हुए पद पर पदस्थ मधुकुमार को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया। ऐसा नहीं है कि मधुकुमार ने यह सब पहली बार किया है। इससे पहले भी मधुकुमार ने अपने अधीनस्थों पर दबाव डालते हुए उनसे बड़ी-बड़ी वसूली करवाई जिसका एक बड़ा हिस्सा वो खुद अपने जेब में रखते है। इतना ही नहीं मधुकुमार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खासे करीबी भी रहे है। इसी वजह से कांग्रेस शासन आते ही कमलनाथ ने मधुकुमार को ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जैसे प्रमुख पद पर बैठाया ताकि वो अफसर की आड़ में भले खेल खेलते रहे। कमलनाथ और मधुकुमार दोनों ही अपने इरादों में काफी हद तक सफल भी हुए, लेकिन मधुकुमार की एक गलती ने उनकी करतूतों से पर्दाफाश कर दिया। शिवराज सरकार को चाहिए कि इस तरह के भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही कर इन्हें कार्यमुक्त कर दिया जाए और इनसे वो सभी राशि की रिकवरी की जाए जो इन्होंने अपने पद के प्रभाव से वसूल कर अपने चहेते राजनेताओं तक पहुंचाया है।
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