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*नागदावासियों को कम दर पर सुविधा देने के लिए बना रहे थे डोम, विघ्नसंतोषियों ने कब्ज़ा कर अटकाया रोड़ा*

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नागदा ।65 वर्षों से शहर के गणमान्य वरिष्ठों के आदेश पर में इस गौशाला का बेहद अपनेपन से संचालन संघषों के बीच करता आ रहा हूंद्य इस दौरान मैंने कभी गौ माता की सेवा के अलावा किसी प्रकार के हित लाभ या भ्रष्टाचार का कभी प्रयास नहीं किया यह शहर की जनता भली-भांति जानती है, जनता के हित के लिए ही जब गौशाला में 25000 का डोम बनने की तैयारी कर रहे थे तभी कुछ लोगों ने माता का मंदिर यहां बनाकर उक्त जमीन पर कब्जा कर लिया यहां पर हम सस्ते दरों में जनता को सुविधा देकर मैरिज गार्डन का बड़ा खर्च बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे।

यह बात गोपाल गौशाला के मुख्य ट्रस्टी व पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बालेश्वर दयाल जयसवाल ने गुरुवार को गीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहीं उन्होंने बताया कि 45 बीघा से अधिक गीपाल गौशाला की जमीन पर शुरू से ही धूमाफियाओं की लार टपक रही है आज भी कुछ लोग इस पर कब्जा करने को लेकर बुरी तरह आतुर है उन्होंने बताया कि तीन हिस्सों में हम गोपाल गौशाला का संचालन कर बिना किसी अनुदान के डेढ़ सौ से अधिक गौ नाता का पालन कर रहे हैं डा गौशाला संचालक के लिए आय संबंधित साधन को लेकर ही सामने खाली पड़ी जमीन पर हम जनता की सुविधा के लिए सुसज्जित गार्डन और बड़ा डोम बनने की तैयारी कर रहे थे मुख्य उद्देश्य यह था कि मैरिज गार्डन को लेकर मंगलिक कार्य करने में लोगों को आर्थिक रूप से बड़ा नुक्सान होता है यहां पर डोम बनाने के बाद सस्ती दरों

पर जनता को उपलब्ध करवाते ताकि जनता को सुविधा मिल पाए लेकिन शहर के कुछ विघ्न संतोषियों ने यहां कुछ सनय पूर्व माता को मूर्ति स्थापित कर 20 बाय 30 की जमीन पर कब्जा कर लिया है हमने उन लोगों से भी यह कहा था कि इतनी बड़ी जमीन है कहीं भी माता की मूर्ति स्थापित कर मंदिर बनवा दिया जाएगा द्य जायसवाल ने कहा कि शासन प्रशासन से बड़ी विनम्रता के साथ अनुरोध करता हूं कि गौ नाता के अधिकार की जमीन को जल्दी से जल्दी मुक्त करवा कर जनहित के इस कार्य में सहयोग प्रदान करें। दरअसल पाल्या रोड स्थित गोपाल गौशाला की जमीन पर माता की मूर्तिस्थापित कर मंदिर बनाया गया है करीब 5 दिन पूर्व गोपाल गौशाला ट्रस्ट के सदस्यों ने मंदिर के टीन शेड हटाए थे जिस्के बाद मंदिर की स्थापना करने वाले कुछ

लोग और हिंदू संगठन के लोगों ने यहां पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया था ! 

दिलीप को बेटे जैसा माना उसने ही कर लिया कब्ज़ा

मीडिया से चर्चा के दौरान अचानक नुख्य दृष्टि जायसवाल की आंखों में आंसू भर आए भरे गले से उन्होंने बताया कि गोपाल गौशाला की जमीन क्रमांक 380/2 राजस्व के रिकॉर्ड में दर्ज है पिछले 70 सालों से 2021 22 तक यह जमोन गोपाल गौशाला के नाम ही रही लेकिन इसके कुछ हिस्से पर आज जो शहर का प्रतिष्ठित व्यापारी बन गया उस दिलीप को भाई और बेटे जैसा माना लेकिन वर्ष 2022-23 में कागजों में हेर फेर कर दिलीप ने गौशाला की बहुत सी जमीन हथियाली है। उन्होंने बताया कि गोपाल गौशाला रजिस्टर्ड संस्था है इसके बावजूद पूरे प्रदेश भर की गौशाला को मिलने वाला अनुदान हमारी गौशाला को नहीं मिल रहा है बिना अनुदान के ही अब तक हमने इसका संचालन किया है।

Ramswaroop Mantri

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