इस्तीफे के बाद अब उनके लिए फेयरवेल पार्टी आयोजित करेगा विपक्ष
आप सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में सरकारी विद्यालयों के मर्जर किए जाने पर कहा कि यह सरकार लोगों को अशिक्षित और बेरोजगार बनाना चाहती है.
यूपी के बहराइच में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उपराष्ट्रपति द्वारा दिए गए आकस्मिक इस्तीफे को लेकर बड़ा सवाल किया है.AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि जिस तरह आजादी के बाद पहली बार उपराष्ट्रपति के द्वारा अचानक इस्तीफा दिया जाता है और देश के लोगों को इसकी पूरी जानकारी भी नहीं दी जाती है.आप नेता ने कहा कि यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी पूरी जानकारी देश को देना चाहिए कि आखिर में एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति अचानक क्यों इस्तीफा दे दिया.
बिहार राजनीति पर बरसे संजय सिंह
आप सांसद संजय सिंह ने बिहार की राजनीति और बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा वक्तव्य दिया उन्होंने कहा कि जिस तरह एसआईआर के नाम पर वोटरों को प्रताड़ित करने का काम किया जा रहा है ये समझ से परे है ये एक बहुत बड़ा चुनावी घोटाला है अगर SIR पर सुप्रीम कोर्ट रोक नही लगाता है तो बिहार में हर हाल में एनडीए की सरकार बनेगी.
सरकारी स्कूलों के मर्जर पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश में सरकारी विद्यालयों के मर्जर किए जाने पर संजय सिंह ने कहा कि यह डपोर संख सरकार है जो लोगों को अशिक्षित और बेरोजगार बनाना चाहती है जिसकी वजह से स्कूलों का मर्जर किया जा रहा है उन्होंने कहा कि आगामी 27 जुलाई को आम आदमी पार्टी के द्वारा बड़े पैमाने पर स्कूल मर्जर के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा जिसमें ताली ताली बजाकर सरकार को जगाने का काम किया जाएगा.
इस्तीफे के बाद अब उनके लिए फेयरवेल पार्टी आयोजित करेगा विपक्ष
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक अपने पद से इस्तीफे देने के बाद से ही इस मामले पर सियासत की जा रही है। सत्ता में रहते हुए अक्सर धनखड़ का मजाक उड़ाने और उन पर आरएसएस का पक्ष लेने का आरोप लगाने वाले विपक्ष का रुख इस्तीफे के बाद पूरी तरह बदल गया है। जहां पहले विपक्षी नेता धनखड़ पर भेदभाव के आरोप लगाते थे वहां अब वही लोग उन्हीं के अधिकारों के लिए सरकार से सवाल कर रहे है। विपक्ष लगातार केंद्र से धनखड़ के इस्तीफे पर सफाई देने की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि इसके पीछे स्वास्थ्य कारण नहीं बल्कि कुछ और वजह है।
धनखड़ को फेयरवेल डिनर देगा विपक्ष
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हाल ही मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था हमें तो लगता है दाल में कुछ काला है, सरकार को इस मामले पर जवाब देना चाहिए। खड़गे के अलावा अन्य कई विपक्षी नेताओं ने भी इस इस्तीफे के पीछे राजनीतिक कारण होने की बात कही है। धनखड़ के इस्तीफे के बाद से ही यह बयानबाजी लगातार जारी है। इसी बीच अब खबर आ रही है कि विपक्षी पार्टियों ने धनखड़ को फेयरवेल डिनर के लिए आयोजित किया है।
अचानक इस्तीफे के बाद शुरु हुई सियासत
74 वर्षीय पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने स्वास्थ्य कारण बताते हुए सोमवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था कि धनखड़ को फेयरवेल स्पीच देने का मौका नहीं मिला। उन्होंने मांग कि थी कि धनखड़ को राज्यसभा की कार्य सलाहकार समिति की बैठक में भाषण देने का मौका दिया जाना चाहिए। अब इसे मुद्दे को और हवा देने के लिए विपक्षी पार्टियों ने पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए एक फेयरवेल डिनर का आयोजन किया है। हालांकि, ऐसा कहा जा रहा है कि धनखड़ का इस प्रस्ताव को स्वीकार करना मुश्किल है।
विवादित फैसले के बाद अचानक इस्तीफा
धनखड़ के राज्यसभा के सभापति रहते हुए लिए गए एक विवादित फैसले के बाद ही इस इस्तीफे की खबर सामने आई थी। सोमवार को धनखड़ ने विपक्षी सांसदों द्वारा पेश किया गया एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकार किया था। यह प्रस्ताव कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके पद से हटाने के लिए पेश किया गया था। इस मामले में कार्रवाई शुरु करने को लेकर केंद्र ने लोकसभा में एक अलग प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव पर विपक्ष के हस्ताक्षर पहले ही ले लिए गए थे और सरकार चाहती थी कि वह इस मामले की अगुवाई करे ताकि मामला उनके नियंत्रण में रहे। लेकिन धनखड़ के विपक्षी नेताओं के प्रस्ताव को स्वीकार करने से सरकार की योजनाओं पर पानी फिर गया।
विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार करने पर हुई उच्च-स्तरीय बैठक
सूत्रों के अनुसार, धनखड़ के इस कदम की सूचना तुरंत प्रधानमंत्री को दी गई थी और उसी शाम सरकार ने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की थी। इस बैठक के बाद सांसदों को एक जवाबी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने और अगले चार दिनों तक दिल्ली में ही रहने के लिए कहा गया था। सरकार की यह प्रतिक्रिया योजना सामने आने के तुरंत बाद ही धनखड़ ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी।
नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरु
इस्तीफे के कुछ ही दिन बाद ही नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया था। रिटर्निंग ऑफिसर, उपराष्ट्रपति चुनाव की पूरी प्रक्रिया का संचालन करने वाला मुख्य अधिकारी होता है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 68(2) के अनुसार उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की स्थिति में चुनाव कराने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती है। लेकिन इसमें प्रावधान है कि यह चुनाव जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी आयोजित किया जाना चाहिए।





