केन्द्रीय चुनाव आयोग द्वारा बिहार में चुनाव के ऐन पहले मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के निर्णय की लगभग हरेक विपक्षी दल ने आलोचना की है। विधान सभा एवं संसद में प्रत्येक दिन विरोध हो रहा है। जनता के मन में भी शंका है कि आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता फोटो पहचान पत्र को पहचान का आधार न मानने के पीछे क्या साजिश है? क्यों जनता के लिए अपनी नागरिकता साबित करना मुश्किल प्रक्रिया बना दी गई है? बहुत सारे लोग तो पर्याप्त सबूत या समय के अभाव में अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाएंगे और मतदान से वंचित कर दिए जाएंगे उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?
जेडीयू ने सांसद गिरधारी यादव को पार्टी लाइन से अलग बयान देने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे, जिससे पार्टी नाराज है।


इस बीच सत्ता पक्ष जनता दल (यूनाइटेड) के बांका से सांसद गिरीधारी यादव ने यह तथ्य बता कर कि उनको खुद अपने कागज जुटाने में दस दिन लगे इस पेचीदी प्रक्रिया की हकीकत सामने रख दी है। उनके साहसिक कदम के लिए सोशलिस्ट पार्टी (इण्यिा) उन्हें बधाई देती है। उन्होंने सही रूप में जनप्रतिनिधि की भूमिेका निभाई है। अपने दल के प्रति वफादारी को प्राथमिकता न देते हुए जनता की समस्या को सामने रखा है। गिरीधारी यादव ने हमेशा जन पक्षीय राजनीति की है। हम उम्मीद करेंगे कि वे मजबूती के साथ जनता का साथ दें और मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को रद्द कराएं। सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) इस संघर्ष में उनका पूरा साथ देगी।
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया), बिहार
विजेन्द्र कुमार, अध्यक्ष, 993458838, नशूर अजमल, उपाध्यक्ष, 8521234560, धनंजय सिन्हा, महासचिव, 8825172718, 9942318860, महेन्द्र यादव, पर्यवेक्षक, 9973936658, 6207480567, सैयद तहसीन अहमद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 9654079528, संदीप पाण्डेय, राष्ट्रीय महामंत्री, 0522 2355978, 3564437
क्या था सांसद गिरधारी यादव ने?
दरअसल, जदयू सांसद गिरधारी यादव ने SIR की प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग की मंशा और तैयारी पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि आयोग को न तो बिहार का इतिहास पता है और न ही भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान गिरधारी यादव ने कहा था कि चुनाव आयोग को कोई व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। यह लोग बिहार का इतिहास और भूगोल नहीं जानते। मुझे खुद जरूरी दस्तावेज जुटाने में 10 दिन लग गए। मेरा बेटा अमेरिका में रहता है, वह दस्तखत कैसे भेजेगा? एक महीने में सब कैसे होगा?
‘अगर मैं सच नहीं बोल सकता तो फिर सांसद क्यों बना?’
सांसद गिरधारी यादव ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया आम लोगों की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर थोप दी गई है। उनका कहना है कि ऐसे गंभीर कार्य के लिए कम से कम छह महीने का समय दिया जाना चाहिए था। गिरधारी यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, चाहे उनकी पार्टी कुछ भी कहे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मैं सच नहीं बोल सकता, तो फिर मैं सांसद क्यों बना? यह सच्चाई है और इसे छिपाया नहीं जा सकता। चुनाव आयोग की यह जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए घातक है।




