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*ऑपरेशन सिंदूर पर 35 घंटे की चर्चा…. लेकिन बचे रह गए कई सवाल*

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पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में कुल 35 घंटे की चर्चा हुई। इस चर्चा का सबको इंतजार था ताकि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं पर स्थिति साफ हो सके, जिन्हें लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। लोकसभा में करीब 19 घंटे की चर्चा हुई और राज्यसभा में 16 घंटे से ज्यादा। भारतीय सेनाओं के शौर्य और क्षमता को हर किसी ने सराहा। कुछ सवाल जो उठाए जा रहे थे उनके जवाब भी मिले। लेकिन अब भी कुछ अहम पहलू ऐसे हैं, जिन पर सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।

खुद रोका ऑपरेशन: चर्चा के दौरान सरकार की तरफ से जो बातें रखी गईं, उनमें साफ किया गया कि दुनिया के किसी भी देश ने भारत को ऑपरेशन सिंदूर रोकने को नहीं कहा। यह दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में किया। यह भी कहा गया कि भारत के हमले से पाकिस्तान घबरा गया था और वह डर कर खुद शरण में आया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने भारत से सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की। केंद्र की तरफ से इस सवाल का जवाब भी मिल गया जो विदेश मंत्री के एक बयान के बाद उठ रहा था कि हमले से पहले पाकिस्तान को बता दिया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि 9 आतंकवादी ठिकानों पर सफल हमले के बाद भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) की तरफ से पाकिस्तान के DGMO को इसकी जानकारी दी गई।

कितने फाइटर जेट का नुकसान: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही अब तक लगातार कहा जा रहा है कि कितने जेट का नुकसान हुआ, यह पूछना ही गलत है। लेकिन सवाल यह भी है कि इसका जवाब देने में नुकसान क्या है। 11 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयरफोर्स के एयर मार्शल ए के भारती ने कहा था कि हम युद्ध की स्थिति में हैं और नुकसान युद्ध का एक हिस्सा है। साथ ही कहा गया कि हमारे सभी पायलट सुरक्षित घर लौट आए हैं। अगर सिर्फ मशीन का ही कोई नुकसान हुआ है तो इसे बताने से फौज का मनोबल कैसे कम होगा, ये सवाल पूछा जा सकता है। अगर सैन्य कार्रवाई रोकने के बाद यानी 10 मई के बाद इसका जवाब मिलता तो इसका असर किस पर पड़ता। बहरहाल, तथ्य यह है कि संसद में 35 घंटे की चर्चा के बाद भी यह सवाल अपनी जगह बना हुआ है।

चीन की भूमिका: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन का क्या रोल रहा, इस सवाल का जवाब भी नहीं मिल पाया। हालांकि भारतीय सेना की तरफ से यह पहले ही कह दिया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने भारत की सैन्य तैनाती पर नजर रखने के लिए अपने सैटलाइट का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान को इसकी रियल टाइम जानकारी दी। साथ ही, भारत-पाकिस्तान संघर्ष को चीन ने अपने लाइव लैब की तरह इस्तेमाल किया, जिसमें उसने अपने अलग-अलग वेपन सिस्टम का टेस्ट किया।

पाक से मिला संकेत: फिक्की के एक कार्यक्रम में 4 जुलाई को सेना के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा था कि ‘जब भारत-पाकिस्तान के बीच DGMO स्तर की बातचीत चल रही थी तब पाकिस्तान यह तक कह रहा था कि हमें पता है आपकी ये-ये यूनिटें कार्रवाई के लिए तैनात हैं और हम आपसे अनुरोध करते हैं कि उसे पीछे हटाया जाए। इसका मतलब है कि उसे चीन से रियल टाइम जानकारी मिल रही थी’।

रियल टाइम टारगेटिंग: इससे पहले 31 मई को सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग में CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि ‘ऐसा माना जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन की कमर्शल सैटलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया हो। लेकिन अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि उसे रियल-टाइम टारगेटिंग में मदद मिली’। संसद में 35 घंटे की चर्चा के बाद भी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका कि चीन का इसमें क्या, कैसी और कितनी भूमिका रही।

ट्रंप का ऐलान: संसद में चर्चा के दौरान भी और इससे पहले भी कई बार सरकार की तरफ से कहा गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में किसी और देश ने कोई भूमिका नहीं निभाई। संसद में चर्चा के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह बात कही। हालांकि इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप करीब 30 बार अपनी भूमिका की बात दोहरा चुके हैं। ऐसे में संसद की चर्चा के बाद भी यह साफ नहीं हो पाया कि जब अमेरिका का कोई रोल था ही नहीं, तो भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम के लिए राजी हो गए हैं, ये ऐलान भारत या पाकिस्तान से पहले ट्रंप ने कैसे कर दिया?

Ramswaroop Mantri

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