बड़वानी: बड़वानी की जिला कलेक्टर ने एक बड़ी कार्रवाई की है। आदिवासी बच्चों के साथ भेदभाव करने के मामले में दो लाख रुपए का दंड लगाया है। यह क्षेत्र में अपनी तरीके की पहली कार्रवाई है। राशि जमा नहीं करने पर विद्यालय के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बड़वानी कलेक्टर काजल जावला ने अशासकीय शाला माउण्ट लिटेरा स्कूल मेरखेड़ी, विकासखण्ड निवाली पर 2 लाख का दंड देने के आदेश पारित किया है। स्कूल पर आरटीई के तहत प्रवेशित आदिवासी बच्चों से भेदभाव करने एवं उन्हें अन्य विद्यार्थियों के साथ अध्यापन नहीं कराने, स्कूल में अलग समय पर कक्षा संचालित कर अलग बैठाकर अध्यापन कराये जाने के आरोप सही पाये गये हैं।
पांच सदस्यीय दल ने की थी जांच
इस संबंध में नायब तहसीलदार निवाली एवं विकासखण्ड स्रोत समन्वयक, जनपद शिक्षा केन्द्र निवाली एवं डीईओ एवं डीपीसी द्वारा गठित पांच सदस्यीय दल द्वारा जांच की गयी। साथ ही अनुविभागीय दंडाधिकारी, (राजस्व) सेंधवा द्वारा 03 सदस्यीय दल जिसमें मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत सेंधवा एवं 02 पटवारियों के द्वारा सेंधवा बाजार में पाठ्यपुस्तक एवं यूनिफार्म की दुकानों की जांच भी की गयी।
जांच में सही पाया गया आरोप
जांच में प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर शिकायत सही पायी गयी। जिसके आधार पर काजल जावला मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत व प्रभारी कलेक्टर बड़वानी द्वारा अशासकीय शाला माउण्ट लिटेरा स्कूल मेरखेड़ी, विकासखण्ड निवाली के संचालक को कारण बताओं सूचना पत्र जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा गया था।
15 दिन के भीतर चालान जमा करने का आदेश
स्कूल संचालक द्वारा 31 जुलाई 2025 को अपना जवाब प्रस्तुत किया गया। उनका जवाब समाधान कारक नहीं होने से प्रभारी कलेक्टर काजल जावला ने मध्य प्रदेश निजी विद्यालय विधेयक 2017 के नियम 10 (2) के तहत 2 लाख रुपये की अधिशास्ति विद्यालय पर अधिरोपित की है। यह राशि स्कूल संचालक को 15 दिवस के भीतर चालान के माध्यम से जमा कर रसीद जिला शिक्षा अधिकारी बड़वानी को प्रस्तुत करना होगी।
भविष्य में ऐसी गलती न होने का शपथ पत्र जमा करने का आदेश
यदि निर्धारित समयावधि में राशि जमा नहीं की जाती है तो विद्यालय के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी। जिसकी समस्त जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होगी। साथ ही यह शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं की जावेगी। अन्यथा प्रशासन उनके विरूद्ध अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम 1989 के अंतर्गत कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा।




