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*उत्तरकाशी में आपदा बादल फटने के कारण नहीं, बल्कि ग्लेशियर फटने के कारण आई*

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भयावह प्राकृतिक आपदा आई है। धरौली गांव में मंगलवार को अचानक बादल फटने के कारण पूरा का पूरा गांव चपेट में गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई सारे वीडियो में इस भयावह मंजर को देखा जा सकता है कि कैसे कीचड़ के साथ पानी के तेज बहाव ने पूरे के पूरे गांव को कुछ ही सेकेंड में अपनी चपेट में ले लिया।

उत्तराखंड सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा के लिए अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बादल फटने का कारण बताया है। लेकिन मौसम विभाग और सैटेलाइट से मिले डेटा कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। बादल फटने की घटना को लेकर मौसम विभाग भी हैरान है। क्योंकि IMD ने अपने आसपास के किसी भी स्टेशन से धरौली गांव में बादल फटने के लिए कोई भी गतिविधि रिकॉर्ड नहीं की थी। अब वैज्ञानिक मान रहे हैं कि ये घटना ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी ग्लेशियर के टूटने से आई बाढ़ के कारण हुई।

ग्लेशियर झील फटने के कारण आई बाढ़

सैटेलाइट और मौसम संबंधी आंकड़ों पर रिसर्च करने वाले विशेषज्ञों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि यह आपदा बादल फटने के कारण नहीं, बल्कि ग्लेशियर टूटने या ग्लेशियल झील के फटने के कारण आई बाढ़ से हुई है। वहीं मौसम विभाग के विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि बादल फटने या इसी तरह की तेज बारिश 3,000 मीटर से भी अधिक की ऊंचाई पर हुई होगी, जो मौसम विभाग के केंद्रों की पहुंच से बाहर होती है। जबकि धरौली गांव समुद्र तल से 2,745 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। धरौली गांव की घटना 2021 में चमोली में हुई आपदा की याद दिलाता है, जिसें बर्फ के ग्लेशियर ने इसी तरह नीचे की ओर एक भयावह बाढ़ ला दी थी।

क्या बादल फटने के कारण आई आपदा?

उत्तरकाशी में आई इस आपदा को लेकर मौसम विभाग और सैटेलाइट डेटा विश्लेषक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि यह आपदा ग्लेशियर झील के फटने के कारण या बादल फटने के कारण हुई है। शुरुआती रिसर्च के अनुसार, चार और पांच अगस्त को धरौली गांव में 8 से 10 मिलीमीटर के बीच बारिश दर्ज की गई है। जबकि विशेषज्ञ बताते हैं कि बादल फटने के लिए यह मानदंड पूरे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि बादल फटने के लिए एक घंटे में 100 मिमी से अधिक बारिश होनी चाहिए। इसलिए यह आपदा बादल भटने के कारण नहीं बल्कि ग्लेशियर झील के फटने के कारण आई है।

वहीं उत्तरकाशी के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि जिले में बादल फटने की तीन धराली, हरसिल, और सुखी टॉप पर दर्ज की गईं। उन्होंने कहा, ‘शुरुआती संकेत बादल फटने की घटना की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि हम इस समय किसी संभावना से इनकार नहीं कर सकते हैं।

कब होता है ग्लेशियल आउटबर्स्ट?

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड तब आती है, जब ग्लेशियर की बर्फ या मोरेन से बनी झील टूट जाती है। इससे कुछ ही घंटों या दिनों में लाखों क्यूबिक मीटर पानी बह जाता है। ऐसी बाढ़ बहुत तेज और विनाशकारी होती है। ये गांव, सड़कें, पुल और बिजली संयंत्रों को तबाह कर सकती है. उत्तराखंड में 1,260 से ज्यादा ग्लेशियर झीलें हैं। इनमें से 13 झीलों को NDMA ने सबसे ज्यादा खतरे वाली झीलों की लिस्ट में रखा है।

उत्तराकाशी में हुई त्रासदी हिमालय में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है। अब ऊंचे इलाकों में मौजूद ग्लेशियर झीलों की निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाना बहुत जरूरी है।

Ramswaroop Mantri

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