*इंदौर के संभाग आयुक्त को लिखित शिकायत*
इंदौर। इंदौर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और समाजवादी पार्टी की अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अकबर अहमद ने इंदौर की इस्लामिया करीमिया सोसायटी द्वारा लीज शर्तों का उल्लंघन करने और लीज पर ली गई जमीन से करोड़ों की आमदनी करने का आरोप लगाते हुए इंदौर के संभाग आयुक्त को लिखित शिकायत भेजी है अकबर अहमद ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस्लामिया करीमिया सोसायटी लीज पर प्राप्त भूमि का नियम विरूद्ध लेंड यूज कर उससे करोड़ों रूपए की आमदानी कर रही है। आपने इस्लामिया करीमिया सोसायटी को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने एवं लीज भूमि से की गई आमदानी के राजस्व की वसूली करने की मांग की है।
इस्लामिया करीमिया सोसायटी को म. प्र. शासन द्वारा 2/2, ओल्ड पलासिया, इंदौर पर 6 एकड़ भूमि कॉलेज के लिए लीज पर आवंटित की गई थी। सोसायटी द्वारा लीज नियमों का उल्लंघन कर नर्सरी से 12वीं तक स्कूल का निर्माण कर दिया गया तथा दुकानों का अवैध निर्माण कर लाखो रूपया महिना किराये की आमदानी की जा रही है। लीज अवधि 2003 में समाप्त हो जाने के बाद भी इस भूमि से सोसायटी द्वारा स्कूल और दुकानों से करोड़ों रूपए की आमदानी की जा रही है। पिछले 21-22 सालों से लीज नहीं भरी गई एवं स्कूल एवं दुकानों की आय से लगभग 3.5 करोड़ की आमदानी प्रतिवर्ष की जा रही है तथा शासन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
इस्लामिया करीमिया सोसायटी ग्राम पलासिया हाना इन्दौर के सर्वे नं. 269/2 रकबा 3.17 पैकि 2.36, सर्वे नं. 270/2, रकबा 4.10 पैकि 2.44, सर्वे नं. 271/3 रकबा 0.10, सर्वे नं. 271/4 रकबा 0.64, सर्वे नं. 274/1 रकबा 0.53 पैकि 0.03 एकड़, सर्वे नं. 274/2 रकबा 1.14 पैकि 0.03 सर्वे नं. 276/2 रकबा 1.48 पैकि 0.64 अर्थात 6.24 एकड़ जो कि लगभग 271850 वर्गफिट भूमि म. प्र. शासन की अनुमति से संस्था को 30 वर्ष की लीज पर दिनांक 30.03.1974 से 30.03.2003 तक के लिए सालाना लीज पर दी गई थी। उक्त लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है। अवधि समाप्त पश्चात उक्त भूमि का आज दिनांक तक लीज नवीनीकरण नहीं करवाया गया है। इस प्रकार सन 2003 में लीज की अवधि समाप्त होने उपरांत उक्त सोसायटी को उक्त भूमि पर काबिज रहने का तथा किसी प्रकार के निर्माण का कोई अधिकार नहीं हैं। इस्लामिया करीमिया सोसायटी को दी गई लीज की भूमि का लीज अवधि समाप्त होने के पश्चात उसका दुरूपयोग किया जा रहा है जो लीज शर्तों का उल्लंघन है। तथा 2003 में स्वयं ही लीज की अवधि समाप्त होने से एवं शर्तों का भी उल्लंघन होने से सोसायटी अथवा उसकी और से अन्य किसा पदाधिकारी को उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार से काबिज रहने तथा निर्माण किए जाने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
लीज की शर्त क्रं. 2 में उल्लेख है कि “प्रश्नाधीन भूमि का उपयोग संस्था कॉलेज के लिए ही किया जावेगा, ऐसा ना करने पर भूमि नगर निगम को बिना किसी मुआवजे के प्रत्यावर्तित हो जाएगी।”
मेरे द्वारा पूर्व में भी इस संबंध में शिकायत की गई थी जिसमें जांच कर कलेक्टर कार्यालय द्वारा लिखा गया कि -” कार्यालय नगर पालिक निगम लीज शाखा इंदौर के पत्र क्रं. 49/लीज/2022 दिनांक 19/05/2022 एवं अपर कलेक्टर के जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट उल्लेखित है कि इस्लामिया करीमिया सौसायटी द्वारा शर्तों का लगातार उलंघन किया जा रहा है।
(2) इस सोसायटी में रासुका अपराधी, भूमाफिया, विल्डर और अनेक कट्टर धार्मिक गतिविधयां संचालित करने वाले शामिल हैं जो कट्टर धार्मिक गतिविधियां संचालित करते है।
संस्था को भूमि शासन ने दी है और इसमें शिक्षकों के वेतन का अनुदान भी शासन के द्वारा दिया जाता है जो एक प्रकार से पूर्णत शासकीय सहायता पर संचालित है।
उक्त संस्था द्वारा फर्म्स एवं सोसायटी के नियमों का पालन न करते हुए सदस्यों द्वारा सिर्फ अध्यक्ष का चुनाव किया जाता है तथा अध्यक्ष ही बाकि पदाधिकारियों की नियुक्ति करता है जो कि फर्म्स एवं सोसायटी एक्ट के नियमों का खुला उल्लंघन है। फर्म्स सोसायटी एक्ट के अनुसार किसी भी संस्था के सभी पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाना चाहिए न कि सिर्फ अध्यक्ष का, जबकि इस्लामिया करीमिया सोसायटी में इसका पालन नही हो रहा।
निवेदन है कि शासन वर्तमान समिति के सदस्यों की आपराधिक गतिविधियों और कृत्यों की जांच कर लीज पर प्राप्त भूमि का नियम विरूद्ध लेंड यूज करने पर समिति को भंग कर प्रशासक नियुक्त करे एवं जिस तरह गुजराती समाज, सिख समाज, जैन समाज में समाज के लोगों द्वारा संस्थाओं के पदाधिकारियों का चुनाव किया जाता है उसी तरह मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा इस्लामिया करीमिया सोसायटी के पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाए या म. प्र. शासन द्वारा स्वयं प्रशासनिक अधिकरियों व कर्मचारियों की संचालन समिति बनाकर संस्था की कमान अपने हाथ में ली जाए। तथा संस्था द्वारा लीज की भूमि से करोड़ो रूपए की आमदानी की गई है उसकी वसूली की जाए तथा उस आमदानी से जो भी नई संपत्तियां अर्जित की गई है उन्हे राजसात कर वसूली की कार्यवाही की जावें तथा दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्यवाही की जावे।
यदि शासन द्वारा संस्था को भंग कर वसूली की कार्यवाही नहीं की जाती है तो मजबूरन न्यायलय की शरण में जाना पड़ेगा जिसमें शासन को पार्टी बनाया जाएगा।
यह शिकायत आवेदक अकबर एहमद द्वारा जनहित में की जा रही है। इस कारण शिकायत के बाद मेरे साथ मारपीट या मेरी हत्या का प्रयास या मुझे अन्य प्रकार से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। जिसकी जवाबदारी इस्लामिया करीमिया सोसायटी के पदाधिकारियों व इनके समर्थक गुंडो की होगी।





