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*आज़ाद भारत की बुलंद तस्वीर बनाएं!*

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 -सुसंस्कृति परिहार 

11 अगस्त 2025  भारत के इतिहास में दर्ज हो गया जब चुनाव आयोग से मिलने जा रहे 300 सांसदों को दिल्ली पुलिस ने गृहमंत्री के इशारे पर वहां पहुंचने से पूर्व गिरफ्तार कर लिया।ये कोई अराजक समूह या आतंकी नहीं थे।जनता के वोट से चुने हुए सांसद थे।हां,ये बात और है कि ये चुनाव आयोग की खामियों पर बातचीत करने इसलिए जा रहे थे कि चुनाव में भारी संख्या में मतों की चोरी या कहिए डाका डालकर वर्तमान सरकार को सत्ता के नज़दीक पहुंचा दिया गया जबकि जनता ने उन्हें इतना वोट भी नहीं दिया था कि वह 240सीट भी जीत पाए। किंतु सरकार बनी भले बैशाखियों पर टिकी सरकार हो। इसलिए इस बार  बिहार राज्य में जीत के लिए जो नया प्रयोग एसआईआर का सहारा लिया उसकी भी समय रहते पोल खुल गई है।

मतलब यह है कि प्रतिपक्ष चुनाव आयोग की गलतियां बता रहा है और बुरा सरकार को लग रहा है। आखिरकार क्यों ? इससे यह तो पक्का है कि दाल में काला तो है 

तभी चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च के साथ यह असंवैधानिक कदम उठाया गया।

पिछले 11सालों से हिंदुस्तान की शांति प्रिय जनता और जन प्रतिनिधियों ने कभी इस तरह की आवाज नहीं उठाई जबकि लोगों को चुनावी धांधली नज़र आने लगी थी लेकिन चूंकि उनका विश्वास चुनाव आयोग पर सदैव रहा है। हमारे जनप्रतिनिधि भी यही समझ पाए कि शायद उनकी लोकप्रियता घट रही है।लेकिन बात तो दूसरी ही थी यह खेल ईवीएम की हैकिंग से शुरू होकर यहां तक पहुंच गया कि फर्जी वोटर लाखों की तादाद में इधर उधर मतदान करते रहे अब  प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने सबूतों सहित वे पकड़ लिए हैं।ये कहानी महाराष्ट्र,राजस्थान,

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी दोहराई गई।लोग सोचते थे कि शिवराज सिंह, वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री आदि क्यों नहीं बने। उत्तर सीधा यह है कि इनके कारण जीत हासिल नहीं हुई वह जीत तो आयातित वोटरों से मिली जिसका श्रेय चुनाव आयोग या केन्द्र सरकार का था। इसलिए पर्ची ऊपर से आई और अनजाने लोग मुख्यमंत्री बन गए।

पिछले चुनावों में एक बात यह देखी गई कि कभी मतदान समाप्ति अवधि के एक दो घंटे बाद वोट प्रतिशत सही नहीं बताया गया देर रात जो भारी प्रतिशत आया उसमें कारगुजारी हुई।

खुद प्रधानमंत्री मंत्री के संसदीय क्षेत्र में 11लाख वोट पड़ने की घोषणा की गई और जब मतगणना हुई तो मतों की संख्या 12लाख से अधिक सामने आई।ये सब क्या सूचित करते हैं।

क्या देशवासियों के वोट की चोरी से बनी सरकार हमारे अधिकारों का उल्लंघन नहीं। उसे तो कायदे से प्रमाण मिलने के बाद बर्खास्त कर देना चाहिए।लेकिन कौन करेगा? स्वतंत्र इकाई चुनाव आयोग सरकार की बंधुआ है। सुप्रीम कोर्ट की अपनी सीमा रेखाएं हैं।हर हाल में चुनी हुई व्यवस्थापिका ही पावरफुल है।यानि जनता की वोट की चोरी से बनी सरकार ही सर्वेसर्वा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने कभी ये सोचा भी ना होगा कि कभी ऐसी सरकार भी इस तरह की वोट चोरी से शासन करेगी।

लेकिन जैसा कि कहा जाता है मुद्दई सुस्त गवाह चुस्त होने से कुछ हासिल नहीं होता। इसके लिए आपके प्रतिपक्ष  के प्रतिनिधि सड़क पर संघर्षरत हैं। उन्हें भरपूर समर्थन दीजिए क्योंकि वे मतदाताओं के वोट चोरी के लिए लड़ रहे हैं।

मरता क्या नहीं करता की तरह सरकार इन दिनों अपनी रक्षा में तानाशाही कदम उठा सकती है।आपने किसान आंदोलन और महिला पहलवानों के आंदोलन के समय सब देखा और जाना है। इस समय अपने चुने सांसद जो भाजपा से भी हैं उनसे भी इस आंदोलन में शामिल होने कहिए।ताकि यह सरकार फासिस्ट कदम उठाने के पूर्व ही गिर जाए। वोट चोरी से बनी सरकार गिराना आज हमारा पहला लक्ष्य होना चाहिए। क्योंकि यही चलता रहा तो किसी भाजपा नेता की भी गारंटी नहीं।उसे कब शिवराज और वसुंधरा की तरह छिटक दिया जाए।

अपितु समस्त जागरूक जन प्रतिनिधि इस मुद्दे की अहमियत समझते हुए इस जुझारू अभियान में जुट जाएं।

देश तभी खुशहाल होगा जब वह अपने सही प्रतिनिधि और नेता को देश की बागडोर सौंपेगा। नेता ऐसा हो जो चोरी करने वाला, झूठ बोलने वाला और अहम् वादी  और अमीरों का दोस्त, जालसाज ना हो।

कुछ दिन बाद हम अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं। हमें अपनी आज़ादी बचाने की कसम लेनी होगी।ताकि अपने देश में हम गुलामों से फिर अपने मूलभूत सरकार पाने से वंचित ना हो पाएं।11अगस्त का दिन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने हमें सोते से जगाया है।यह जाग कायम रहने से ही हम देश को संविधान की मंशानुरूप जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन यानि प्रजातंत्र कायम रख पाएंगे।यह कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता की लड़ाई नहीं है। संविधान बचाने की लड़ाई है।जिसने देश की अवाम को सबसे बड़ा दर्जा वोट का दिया है वह आगे भी चोरी हो ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे। आइए ,आज़ाद भारत की बुलंद तस्वीर बनाएं।

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Ramswaroop Mantri

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