अमेरिका ने भले ही भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया हो या फिर चीन ने भारतीय उत्पादन को नुकसान पहुंचाने के लिए जरूरी उपकरणों और केमिकल्स का निर्यात रोक दिया हो, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था ने इन सभी को पुरजोर जवाब दिया है. जुलाई में निर्यात के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि ग्लोबल इकनॉमिक उठापटक के बीच देश का निर्यात जुलाई में 7.29 प्रतिशत बढ़कर 37.24 अरब डॉलर हो गया. हालांकि, इस दौरान आयात बढ़ने से व्यापार घाटा आठ महीने के उच्चतम स्तर यानी 27.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया.

वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में देश का वस्तु निर्यात दो महीने की लगातार गिरावट के बाद रफ्तार पकड़ते हुए 37.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पिछले महीने देश का आयात भी 8.6 प्रतिशत बढ़कर 64.59 अरब डॉलर हो गया था. इस वजह से व्यापार घाटा यानी निर्यात एवं आयात के बीच का फासला 27.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो नवंबर, 2024 के बाद सबसे अधिक है.
चालू वित्तवर्ष में कितना रहा व्यापार घाटा
वित्तवर्ष 2025-26 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में निर्यात 3.07 प्रतिशत बढ़कर 149.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि आयात 5.36 प्रतिशत बढ़कर 244.01 अरब डॉलर पर पहुंचा. इस तरह चार महीने की अवधि में कुल व्यापार घाटा 94.81 अरब डॉलर दर्ज किया गया. वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने इन आंकड़ों पर कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश का वस्तु एवं सेवा निर्यात काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. बर्थवाल ने कहा की वैश्विक निर्यात वृद्धि की तुलना में भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा है.
4 सेक्टर्स का सबसे ज्यादा योगदान
भारत के निर्यात में 4 सेक्टर्स ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. इन सेक्टर्स के बेहतर प्रदर्शन की बदौलत ही टैरिफ और चीन के अवरोध के बावजूद भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने निर्यात का आंकड़ा बढ़ाया. आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि अच्छे निर्यात के पीछे इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न एवं आभूषण, दवा और रसायन क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा है. इन सेक्टर्स का भारत के कुल निर्यात में करीब 60 फीसदी की हिस्सेदारी होती है.




