ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने लाल किला से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तारीफ करने पर पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना की। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आरएसएस का महिमामंडन करना स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है।
अंग्रेजों का पिट्ठू रहा है संघः असदुद्दीन ओवैसी
ओवैसी ने X पोस्ट में लिखा, ‘स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आरएसएस का महिमामंडन करना स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है। आरएसएस और उसके वैचारिक सहयोगी अंग्रेजों के पिट्ठू रहे। वे कभी आज़ादी की लड़ाई में शामिल नहीं हुए और अंग्रेजों का विरोध करने से कहीं ज़्यादा गांधी से नफ़रत करते थे।’
कायरता को बहादुरी बताकर बेचा जाएगा
हैदराबाद से पांचवीं बार के सांसद ओवैसी ने कहा, ‘सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर हमें याद दिलाया है कि असली इतिहास को जानना और असली नायकों का सम्मान करना क्यों जरूरी है। अगर हम ऐसा नहीं करते, तो वह दिन दूर नहीं जब कायरता को सबसे बड़ी बहादुरी बताकर बेचा जाएगा। आरएसएस समावेशी राष्ट्रवाद के उन मूल्यों को नकारता है जिनसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा मिली थी।’
हिंदुत्व की विचारधारा को संविधान के खिलाफ बताया
AIMIM प्रमुख ने कहा, ‘हिंदुत्व की विचारधारा बहिष्कार में विश्वास करती है और हमारे संविधान के मूल्यों के विपरीत है। मोदी एक स्वयंसेवक के तौर पर नागपुर जाकर आरएसएस की प्रशंसा कर सकते थे, तो उन्हें प्रधानमंत्री के तौर पर लाल किले से ऐसा क्यों करना पड़ा? चीन हमारा सबसे बड़ा बाहरी ख़तरा बना हुआ है। लेकिन उससे भी बड़ा ख़तरा हमारे भीतर है – संघ परिवार द्वारा फैलाई जा रही नफ़रत और विभाजन। हमें अपनी आज़ादी की सच्ची रक्षा के लिए ऐसी सभी ताकतों को हराना होगा।’
RSS पर मोदी के बयान से नाराज हुए ओवैसी
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 साल पूरा होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस संगठन की राष्ट्रसेवा की यात्रा पर देश गर्व करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है और यह प्रेरणा देता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज से 100 साल पहले एक संगठन का जन्म हुआ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ… । 100 साल की राष्ट्र की सेवा एक बहुत ही गौरवपूर्ण कार्य है। व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य लेकर मां भारती के कल्याण के लिए लाखों स्वयंसेवकों ने अपना जीवन समर्पित किया। यह एक प्रकार से दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है। 100 साल का समर्पण का इतिहास है। आज लाल किले की प्राचीर से 100 साल की इस राष्ट्रसेवा की यात्रा में योगदान करने वाले सभी स्वयंसेवकों को आदरपूर्वक स्मरण करता हूं। आरएसएस की 100 साल की भव्य, समर्पित यात्रा पर देश गर्व करता है।’





