चीन की बढ़ती सामरिक ताकत ने अमेरिका को भी बेचैन नजर आ रहा है. वजह है ड्रैगन का PL-15 मिसाइल. इसके बाद अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने अपनी सुरक्षा खामियों को भांप लिया और अब वे ट्रंप सरकार से लॉकहीड मार्टिन AIM-260 ज्वाइंट एडवांस्ड टैक्टिकल मिसाइल की मांग कर रहे हैं. इसके लिए ट्रंप प्रशासन से करीब 1 बिलियन डॉलर यानी लगभग 8,300 करोड़ रुपये की फंडिंग की डिमांड की गई है.
चीन की मिसाइल से अमेरिका परेशान
दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट मानती है कि चीन ने न सिर्फ PL-15 बल्कि उसका अगला वर्जन PL-17 भी ऑपरेशनल कर लिया है. यह घातक मिसाइल 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन को मार गिराने में सक्षम बताई जा रही है. दावा किया जाता है कि पाकिस्तान ने जब इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया तो अमेरिका की आंखें खुल गईं. अमेरिकी एयरफोर्स ने साफ कहा, “हमारे विरोधियों ने हमारी एयर सुपीरियरिटी को चुनौती दी है, अब हमें उससे आगे का हथियार चाहिए.”
8 साल बाद प्रोडक्शन स्टेज
लॉकहीड मार्टिन ने साल 2017 से इस मिसाइल पर काम शुरू किया था. अब जाकर अमेरिकी एयरफोर्स और नेवी ने पहली बार इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन का बजट पास करने की मांग की है. अकेली एयरफोर्स ने $368 मिलियन प्रोडक्शन के लिए और $300 मिलियन अलग से मांगे हैं. नेवी ने भी $301 मिलियन का बजट रखा है.
AIM-260 की खासियत
यह मिसाइल मौजूदा AIM-120 AMRAAM का एडवांस वर्जन होगी. इसे खास तौर पर F-22 रैप्टर और F-35 स्टील्थ फाइटर्स के इंटरनल बे में फिट किया जाएगा, ताकि दुश्मन को पता ही न चले कि हमला किस ओर से हुआ. रिपोर्ट्स कहती हैं कि इसकी रेंज PL-15 और यूरोप की मशहूर Meteor Missile से भी ज्यादा होगी. साथ ही इसे F-16, F-15 और भविष्य के अनमैन्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर भी लगाया जा सकेगा.
लॉकहीड मार्टिन को बूस्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मिसाइल सफल रही तो यह अकेले $30 बिलियन का प्रोग्राम बन सकती है. लॉकहीड मार्टिन, जो फिलहाल F-35 प्रोजेक्ट पर निर्भर है, के लिए यह जीवनदान साबित होगा. अमेरिका का AIM-260 सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि चीन और पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल ताकत के खिलाफ जवाबी दांव है. अब दुनिया की नजर इस पर है कि यह मिसाइल कब ऑपरेशनल होगी और क्या यह सच में अमेरिकी आसमान को फिर से सुरक्षित बना पाएगी.





