••• जितना खतरा चौपाटी दुकानदारों से उतना खतरा बंगाली कारीगरों से भी तो है
🔺कीर्ति राणा।
जिन सराफा व्यापारियों ने दशकों पहले अपने ओटले किराए पर देकर सराफा चौपाटी के दुकानदारों को कंधे पर बैठाया आखिर वही क्यों अब उन्हें यहां से भगाने पर आमादा हो गए। कुछ सालों में बने इस हालात की एक बड़ी वजह है सिगड़ी के सम्मान को भूल कर चौपाटी की दुकानों में गैस भट्टी का मोह बढ़ता जाना ।
संकरी गलियों वाले सराफा क्षेत्र में चाट-व्यंजन की इन दुकानों का इतिहास करीब नौ दशक पुराना है। तब चौपाटी के दुकानदार खानपान की सामग्री घर से ही बना कर लाते थे और इस खाद्य सामग्री को गर्म रखने के लिए कोयले वाली सिगड़ियों का इस्तेमाल करते थे। फिर चाहे गुलाब जामुन हो, भुट्टे का किस हो या अन्य सामग्री। सिगड़ी की आंच से टेस्ट तो बरकरार रहता ही था, साथ ही लपटें उठने, आगजनी की घटना की भी आशंका नहीं रहती थी।
तब दुकानों की संख्या भी इतनी नहीं थी लेकिन इन दो-तीन दशकों में सराफा क्षेत्र में कमर्शियल काम्प्लेक्स बनते जाने के साथ ही ज्वेलर्स दुकानें तलघर में भी शुरु हो गई हैं साथ ही चौपाटी की दुकानों में भी इजाफा हुआ है। ‘टेस्ट में बेस्ट’ पसंद करने वाले इंदौर के लोग चाहे पोहे हों, जलेबी, गुलाब जामुन सेव, कचोरी हो या दूध का कड़ाव हो या गराडू, घान से उतरी गरमागरम सामग्री खाना ही पसंद करते हैं इसलिये सिगड़ी को छोड़ कर लगभग सभी दुकानदार गैस टंकी और भट्टी का उपयोग कर रहे हैं।
बड़ा-छोटा सराफा वाली यह चौपाटी भी धीरे धीरे बोहरा बाजार, शक्कर बाजार पीपली बाजार आदि संकरी गलियों वाले क्षेत्र में फैलती जा रही हैं। इन क्षेत्रों के रहवासी भी देर रात तक चलने वाली चौपाटी और हो हल्ले से त्रस्त हैं। गैस भट्टी से संचालित हो रही चौपाटी की इन दुकानों से अब तक आगजनी की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है लेकिन किसी भी दिन गैस टंकी में ब्लास्ट हो गया या खौलते तेल की कढ़ाई रात में उमड़ने वाली भीड़ के टल्ले या भगदड़ से पलट गई तो…? कल्पना कर के ही सिहरन हो जाती है। सराफा में सांवरिया चाट हाउस के मालिक पर आग फैलने के मामले में पिछले दिनों केस दर्ज हो चुका है।
▪️चौपाटी से नाराज, बंगाली कारीगरों को पनाह
सराफा चौपाटी दुकानदारों को अब जनहानि के लिए खतरा बताने वाले ज्वेलर्स उन हजारों बंगाली कारीगरों के आश्रयदाता बने हुए हैं जो इन दुकानदारों के ग्राहकों के सोने-चांदी के आभूषण में टांका लगाने से लेकर डिजाइनदार जेवर बनाने के लिए सोना गलाने के लिए गैस भट्टी का वर्षों से इस्तेमाल कर रहे हैं। जिन आभूषण की दुकान संचालित करने वाले लगभन सभी दुकानदारों ने अपने सिर पर बंगाली कारीगरों को आश्रय इसलिए भी दे रखा है कि कई ग्राहक जो हाथोंहाथ जेवर सुधरवाना चाहते हैं उन्हें खाली हाथ ना लौटाना पड़े। इन संकरी गलियों में यदि चौपाटी की दुकानों पर गैस भट्टी का इस्तेमाल खतरनाक माना जाए तो छोटी छोटी कोठरी में बंगाली कारीगरों द्वारा सोना-चांदी गलाने में तेजाब सहित गैस भट्टी का इस्तेमाल कैसे सुरक्षित माना जा सकता है। सराफा क्षेत्र की संकरी गलियों में फायरब्रिगेड वाहन का नहीं घुस पाना दोनों ही मामलों में चुनौतीपूर्ण है।
पहले तो राजबाड़ा पर अन्ना भैया की पान दुकान से लेकर सराफा चौपाटी पर रतजगा ही चलता था। बाद में प्रशासन ने इन दुकानों को बारह बजे तक चालू रखने के निर्देश दिए लेकिन इसके पालन में स्थानीय थाने द्वारा ढिलाई दी जाती रही है। सराफा चौपाटी में उमड़ने वाली भीड़ के वाहनों की पार्किंग के लिये स्थान निर्धारित नहीं होने से चाहे जहां वाहन पार्क करने से ये संकरी गलियां और संकरी हो जाती हैं।इस कारण भी बोहरा बाखल व शक्कर बाजार में रहने वाले परिवार आए दिन परेशान होते रहते हैं।
▪️किराए का लालच, नौकरों को शह
सराफा चौपाटी को स्थानांतरित करने को लेकर लामबंद हुए व्यापारियों में कई ऐसे भी है जिन्होंने 25से 40 हजार तक के किराए पर अपने ओटले किराए पर दे रखे हैं। यही नहीं कई दुकानों के नौकर और चौकीदार रात में चौपाटी वाले दुकानदार भी हो गए हैं। सराफा व्यापारी के यहां शाम तक लगभग मुफ्त में काम करने वाले ये लोग अपनी मजदूरी उसी ओटले पर व्यंजन की दुकान लगा कर निकाल लेते हैं।
▪️प्रशासन ले सब के हित में निर्णय
सराफा दुकानदार परेशान न हों, चौपाटी दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित न हो इस दिशा में नगर निगम, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बैठा कर सर्व सम्मत हल निकालना चाहिए। नगर निगम की समिति ने रिपोर्ट देकर अपना काम जरूर पूरा कर लिया लेकिन यही नगर निगम वार्डों में दुकानदारों के लिए मार्केट बनाने की घोषणा पर काम नहीं कर पाया है। चौपाटी दुकानदारों को लालबाग, गाधी हाल, रीवर साइड रोड या अन्य कहीं भी जगह दे, इन दुकानदारों की सुरक्षा के साथ ही उन क्षेत्रों में असामाजिक तत्व सक्रिय ना हो इस पर भी पहल करना होगी।
▪️बंगाली कारीगरों को भी शिफ्ट करें
सराफा दुकानदारों ने जिन हजारों बंगाली कारीगरों को अपनी इमारतों में किराए पर कमरे दे रखे हैं उन सब को भी कहीं शिफ्ट करना चाहिए। नगर निगम-सराफा व्यापारी मिल कर पीपीपी मॉडल पर कॉम्प्लेक्स की दिशा में काम कर सकते हैं।





