इंदौर। राजबाड़ा के गणेश हाल में होलकरकाल में स्थापित मंगलमूर्ति की प्रतिमा आज भी उस समय के वैभव को दर्शाती है। होलकरकालीन साफेवाले राजगणेश को राजबाड़ा में स्थापित करने से शुरू हुई। राजबाडे में पांच दिवसीय उत्सव का प्रारंभ हुआ था। आज भी यही परंपरा जारी है। महिला समूहों के भजन, गीत और कवि सम्मेलन और शास्त्रीय संगीत के आयोजन होते थे। धीरे-धीरे गणेशोत्सव की परंपरा मराठी भाषी मोहल्लों में अपना रंग जमाते हुए गली-गली तक चली गई।
लोकमान्य तिलक के महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत करने के कुछ समय बाद ही मध्य प्रदेश में इंदौर में सबसे पहले गणेशोत्सव शुरू हुआ। रामबाग, इमली बाजार, सुभाष चौक, मार्तण्ड चौक, जूना तोपखाना, नॉवेल्टी मार्केट के श्रीराम मंदिर, सिख मोहल्ला क्षेत्र में गणेशोत्सव मनाया जाता था और उसमें बड़ी संख्या में मराठी समाजजनों के साथ अन्य समाजजन भी भागीदारी करते थे। समय के साथ शहर में मिलों की स्थापना हुई और गणेशोत्सव ने विशाल रूप लेकर देशभर में अपनी धाक जमाई।
मुस्लिमों द्वारा पूजन सामग्री भिजवाने की परम्परा
शहर के जूनी इन्दौर स्थित 12 सौ साल पुराने परमारकालीन गणेश मंदिर में मुस्लिम समाज द्वारा पूजन सामग्री भिजवाने की परम्परा रही है। होलकरकाल में इन्दौर परगने की मुस्लिम बस्तियों को निर्देश जारी किए गए थे कि वे चिंतामण गणेश मंदिर पर निर्धारित पूजन सामग्री अपनी ओर से भिजवाए। शहर पटेल पिंजारा, पटेल तंबोली, सिकलीगर मुस्लिम पूजन सामग्री भिजवाते थे। देवी अहिल्याबाई होलकर और सूबेदार मल्हारराव होलकर द्वारा भी मंदिर के पूजन-अर्चन व रखरखाव के लिए पुजारी परिवार को जमीन प्रदान की गई थी।





