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*’स्लीपिंग प्रिंसेज’ बनीं थाईलैंड की राजकुमारी देब्यावती,बीते तीन साल से कोमा में*

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बैंकॉक: बीते तीन साल से कोमा में  पड़ी थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकीतीआभा नरेंद्र देब्यावती के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। थाईलैंड के रॉयल हाउसहोल्ड ब्यूरो ने बताया कि थाई राजकुमारी एक गंभीर संक्रमण की समस्या से जूझ रही हैं, जिसका इलाज किया जा रहा है। वे थाई राजा महा वज्रलोंगकॉर्न की 7 संतानों में सबसे बड़ी हैं। 46 वर्षीय राजकुमारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों को 9 अगस्त को उनके खून में संक्रमण का पता चला। बयान में कहा गया है कि उनके ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने के लिए उन्हें विभिन्न प्रकार की एंटीबायोटिक्स और दूसरी दवाएं दी गई हैं।राजकुमारी बज्रकीतिआभा नरेंद्र देव्यावती को राजा की सबसे बड़ी बेटी होने के चलते सिंहासन की उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। साल 2022 में दिल में समस्या के चलते वे कोमा में चली गई थी।

राजकुमारी बज्रकीतिआभा नरेंद्र देव्यावती साल 2022 में दिल में समस्या के चलते कोमा में चली गई थी। हालांकि, कोमा में जाने से पहले सबसे बड़ी संतान होने के नाते उन्हें सिंहासन के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। यहां ये बात गौर करने वाली है कि थाईलैंड के 73 वर्षीय राजा बज्रलोंगकॉर्न ने 2016 में गद्दी संभाली थी, लेकिन उन्होंने अब तक उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं की है।

राजा की सबसे बड़ी संतान

राजकुमारी बज्रकीतीआभा राजा महा वज्रलोंगकॉर्न की चार पत्नियों में से पहली पत्नी सोमसावाली की संतान हैं। वह दंपति की इकलौती संतान हैं। हालांकि, राजा के अन्य तीन पत्नियों से 6 बच्चे हैं। 7 दिसम्बर 1978 को बैंकॉक में जन्मी राजकुमारी ने अपनी स्कूली शिक्षा इंग्लैंड के प्रतिष्ठित गर्ल्स स्कूल हीथफील्ड स्कूल से हासिल की है।

कई देशों में रहीं राजनयिक

राजकुमारी ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। वे ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया में राजनयिक के रूप में कार्य कर चुकी हैं। प्रिंसेज बज्रकीतिआभा ने संयुक्त राष्ट्र के महिला और दूसरे कार्यालयों में भूमिका निभाई है। इसके अलावा वह अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में भी काम कर चुकी हैं।

मशीनों के सहारे हैं जिंदा

रॉयल हाउसहोल्ड ब्यूरो के अनुसार, दिसम्बर 2022 में उनके कोमा में जाने के बाद से राजकुमारी को उनके फेफड़ों और किडनी को संचालित करने के लिए मेडिकल उपकरण दिए गए हैं। डॉक्टरों ने अब उनके ब्लड में संक्रमण का पता लगाया है, जिसके लिए समय-समय पर एंटीबायोटिक्स दी गई है।

Ramswaroop Mantri

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