बिहार में विधानसभा चुनाव इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाला है। बिहार में कुल 243 असेंबली सीट हैं। बहुमत के लिए 122 सीट की दरकार होती है। प्रमुख राजनीतिक दलों में राजद, जदयू, कांग्रेस, बीजेपी, लोजपा-आर, लोजपा, सीपीआई-एम, एआईएमआईएम, सीपीआई, बसपा और रालोसपा शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक 12.8 करोड़ की आबादी वाले बिहार में 7.8 करोड़ वोटर हैं। इनमें पुरुष मतदाता 4 करोड़ और महिला वोटर 3.6 करोड़ हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में NDA ने कुल 125 सीटें जीती थीं और सरकार बनाई थी। चुनाव में BJP को 74, जदयू को 43 सीटें मिली थीं। जबकि RJD महागठबंधन के खाते में 110 सीटें आई थीं। इनमें RJD को 75, कांग्रेस को 19, CPI(ML) को 12 सीटें मिली थीं। बिहार में सर्वाधिक 9 बार नीतीश कुमार सीएम रहे हैं। इससे पहले राजद से लालू यादव 1990 से 1997 तक सीएम रहे थे। बिहार की चुनावी बिसात में पिछड़े समुदाय का 63% दखल रहता है। 2022 के सर्वे में OBC लगभग 27%, SC लगभग 19.7%, जनरल 15.5% और ST 1.7% वोटर निकले थे।
चुनाव से पहले पप्पू यादव की सुरक्षा घटी, दिलीप जायसवाल को वाई प्लस सिक्योरिटी मिली
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने दो नेताओं की सुरक्षा में बड़ा बदलाव किया है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा घटा दी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सांसद पप्पू यादव को अभी वाई प्लस सिक्योरिटी मिली हुई थी, जिसे घटाकर वाई श्रेणी में तब्दील कर दिया गया है। जबकि दिलीप जायसवाल की सुरक्षा बढ़ाकर वाई प्लस श्रेणी की कर दी गई है।
पप्पू यादव की सुरक्षा घटी
राज्य सुरक्षा समिति की अनुशंसा के बाद गृह विभाग की ओर से इन दोनों नेताओं की सिक्योरिटी में बदलाव किया गया है। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की सुरक्षा आगामी बिहार चुनाव में खतरे को देखते हुए बढ़ाई गई है। बताते चलें कुछ दिन पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने दिलीप जायसवाल पर कई गंभीर आरोप भी लगाया है।
किसे कौन सी सुरक्षा मिली है
सांसद पप्पू यादव को पिछले अगस्त महीने में ही वाई प्लस सिक्योरिटी दी गई थी। बिहार में पप्पू यादव के साथ चार अन्य नेताओं की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, आरजेडी नेता और प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, अररिया से सांसद प्रदीप कुमार, बाढ़ के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू और एमएलसी नीरज कुमार सिंह शामिल थे। गृह विभाग ने सम्राट को जेड प्लस, तेजस्वी को जेड, पप्पू, प्रदीप और ज्ञानेंद्र को वाई प्लस और नीरज को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी थी।
वाई प्लस और वाई सिक्योरिटी में अंतर ?
वाई प्लस सिक्योरिटी में सुरक्षाकर्मियों की संख्या ज्यादा होती है। जिसे यह सुरक्षा मिलता है उनके साथ दो निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के साथ 2-4 कमांडो और पुलिसकर्मियों समेत कुल 11 सुरक्षा कर्मी होते हैं। जबकि वाई श्रेणी की सुरक्षा में 8 सुरक्षाकर्मी होते हैं।
बिहार में कितनी हैं अति पिछड़ी जातियां? राहुल गांधी क्यों इसे साधना चाहते हैं
बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा में अब कुछ ही दिन बचे हैं। इससे पहले राजनीतिक दल अपने अपने स्तर से वोटरों को गोलबंद करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार में राजनीतिक दलें अति पिछड़ी जातियों को साधने में जुट गई हैं। जदयू की ओर से अति पिछड़ी जातियों किए गए काम के आधार पर उनको गोलबंद करने का प्रयास कर रही है वहीं महागठबंधन अपना EBC एजेंडा जारी कर रहा है।
नीतीश के वोट बैंक पर राहुल की नजर
बिहार में 36% की आबादी अति पिछड़ों की है। जो कि बिहार में सबसे बड़ा समूह है। अभी तक ये पारंपरिक रूप से नीतीश कुमार के वोटर माने जाते हैं। महागठबंधन SC/ST एक्ट की तरह EBC एक्ट का वादा किया है। इसके साथ ही पंचायती राज नगरीय निकाय चुनाव में EBC आरक्षण की सीमा को 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी करने का ऐलान किया। मुंगेरीलाल कमीशन ने पिछड़ों में दो वर्ग की पहचान की थी। 35 जातियों को पिछड़ा और 93 जातियों को अति पिछड़ा माना गया था। इस कमीशन की रिपोर्ट को तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने लागू किया।
पंचायती राज में 20% आरक्षण दिया
इसके आधार पर अति पिछड़ों को 12 फीसदी और पिछड़ों को 8 फीसदी आरक्षण मिलने लगा। इससे पिछड़ी जातियों के उस हिस्से को फायदा मिला जो भूमिहीन थे या मजदूर वर्ग से आते थे। नीतीश कुमार जब वर्ष 2005 में सीएम बने तो उन्होंने इस वर्ग के लोगों को पंचायती राज में 20% आरक्षण दिया। नगरीय निकाय चुनाव में भी इसे लागू किया। ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना। नीतीश कुमार के इस फैसले से इस वर्ग को काफी लाभ हुआ।
राजनीतिक भागीदारी बढ़ी
नीतीश कुमार ने इसके साथ ही प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप की शुरुआत किया। पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जिलों में हॉस्टल भी खुलवाए। राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले नेताओं को विधान परिषद और राज्यसभा में जगह दी। नीतीश कुमार JDU कोटे से रामनाथ ठाकुर, दामोदर रावत, हरि प्रसाद साह और विश्वमोहन कुमार को मंत्री बनाया। नीतीश के इस पहल से पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग जिसकी आबादी बिहार में सबसे ज्यादा है वह नीतीश कुमार का वोटर बन गया।





