ये दो तस्वीरें है,दोनों ही रिश्तों की पवित्रता , हृदय के भाव,आपसी स्नेह को दर्शा रही है। मुझे तो दोनों में ही भारतीयता नजर आ रही है। अपने विवादित बोल वचनों के बाद मंत्रीजी भी कह रहे हैं राहुल ,प्रियंका के रिश्ते की पवित्रता पर सवाल नहीं था तो फिर क्यों बोले कि आज के विपक्ष के नेता चौराहे पर चुंबन करते हैं।
ये पूछते हैं वो लोग जो आपके द्वारा राहुल,प्रियंका पर कही गई बात से नाराज हैं । क्योंकि आप इंदौर के जिम्मेदार,प्रमुख नेता हैं।
गुरुवार 25 सितंबर को हमारे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी ने शाजापुर के एक कार्यक्रम में कहा था कि आज के विपक्ष के नेता अपनी जवान बहन को बीच चौराहे पर चुंबन करते हैं। बताइए ऐसा कौन करता है? ये संस्कारों का अभाव है या विदेशी संस्कृति है । उनके शाजापुर में दिए इस संबोधन पर जब देशभर से तीखी प्रतिक्रिया आनी शुरू हुई, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनका खूब विरोध हुआ पुतला दहन तक हो गया मंत्रीजी का कई जगहों पर तब जाकर मंत्रीजी ने पलटी मारते हुए सफाई दी कि मेरा उनके रिश्ते की पवित्रता पर सवाल नहीं था मैंने भारतीय विदेशी संस्कृति की बात कही थी।
अब सवाल यह है कि जब राहुल, प्रियंका रिश्ते की पवित्रता पर सवाल ही नहीं था तो 23 अक्टूबर 2024 के फोटो को आधार बनाकर मंत्रीजी ने अपनी बात क्यों कहीं ।भारतीय संस्कृति , विदेशी संस्कृति पर बोलना था तो सैकड़ों उदाहरण दे सकते थे।लेकिन मंत्रीजी वहीं बोले थे जो दिल दिमाग में था । बोलते ही क्रिया की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी हुई कि किरकिरी भी खूब हुई और जग हंसाई भी। कांग्रेसियों ने ये तक कह दिया है कि दिमाग में विकृति है मंत्रीजी के ! मुख्यमंत्री नहीं बने तो पगला गए हैं।
इस मामले पर मेरा भी सोचना है कि जिस बात को मंत्रीजी ने उठाया और निशाना राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा के रिश्ते को बनाया वह ना स्लीप ऑफ टंग था ना स्लीप ऑफ माइंड था ना ही उनके संबोधन को मीडिया ने तोड़मरोड़कर पेश किया था।मंत्रीजी वहीं बोले थे जो उनके दिलों दिमाग में था ।जब बवाल हुआ सवाल उठे,पुतले जले तब मंत्रीजी को ये अहसास हुआ कि बोल वचन ने उनकी लोकप्रियता का तमाशा बना दिया है तब वो यूं टर्न लिए ।हकीकत में नेता हो या अभिनेता किसी को भी किसी पवित्र रिश्ते को लेकर बोलना ही नहीं चाहिए ।ये सोशल मीडिया का युग है,यहां मोदीजी को जीएसटी रिफॉर्म पर जनता जनार्दन ने नाप तौल दिया है तो फिर मंत्रीजी का कद तो उनकी तुलना बहुत छोटा है।
अंत में यहीं कहूंगा कि जिन कैलाश विजयवर्गीय जी की पहचान मिलनसारिया ,लोगों को जोड़ने वाली कार्यशैली से है , भजनों से है ,हनुमान भक्ति से है ।उनका इस तरह से संबोधन देना बताता है कि आजकल वो बिना सोचे विचारे बोलते हैं।भले ही उन्हें लगे कि किसी को नीचा दिखाने से लोकप्रियता बढ़ती है,खबरें बनती है तो उनका सोचना गलत है।राजनीति हो या खेल का मैदान या सभा का मंच कभी कभी बोल बदनाम कर दिया करते हैं। यहीं कारण है कि दी गई सफाई के बाद भी मंत्रीजी लोगों के निशाने पर है। लोग उनसे नाराज हैं।उम्मीद है आगे से मंत्रीजी नाप तोलकर बोलेंगे , शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखेंगे,खासकर बात जब पवित्र रिश्तों की हो ।
जय सीताराम
जय रणजीत ![]()
ब्रजेश जोशी , इंदौर





