अग्नि आलोक
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*इंतजार*

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अंधेरों को जैसे
रोशनी का इंतजार है।
नफरत को जैसे
मोहब्बत का इंतजार है।
बादलों को जैसे
बरसने का इंतजार है।
राहों को जैसे
हमराही का इंतजार है।
वृक्षों को जैसे
खिलते हुए पत्तों का इंतजार है।
सूखी भूमि को जैसे
वर्षा का इंतजार है।
सावन को जैसे
बहारों का इंतजार है।
वैसे मुझे तुम्हारा
मेरे जीवन में इंतजार है।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

Ramswaroop Mantri

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