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*विनोद खन्ना:बॉलीवुड का वो एक्टर, जिसने विलेन बनकर किया राज*

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हैदराबाद: विनोद खन्ना उन स्टार्स की लिस्ट में शामिल थे, जो नेगेटिव रोल करके भी सिनेमा पर छाए हुए थे. एक्टर ने अपने एक्टिंग स्टाइल से अलग ही पहचान बना ली थी. उनकी बचपन से ही एक्टिंग में दिलचस्पी थी. एक्टर ने पहले पढ़ाई पूरी की और फिर एक्टिंग में अपना करियर बनाना शुरू किया. विनोद के पिता उनके फिल्मी करियर के खिलाफ थे, लेकिन उनकी मेहनत और लगन के आगे एक्टर के पिता झुक गए. साल 1968 में एक्टर को पहली और बड़ी सफलता मिली. फिल्म मन का मीत में उन्हें खलनायक का रोल मिला और यह वो समय था, जो किसी भी हैंडसम दिखने वाले एक्टर के लिए नेगेटिव रोल करना खतरे से खाली नहीं था. लेकिन विनोद ने ऐसे रोल को ही अपनी ताकत बना लिया, लेकिन विलेन के साथ-साथ उनकी किस्मत में हीरो बनना भी लिखा था.

साल 1971 में फिल्म मेरे अपने में उन्होंने बतौर लीड एक्टर रोल मिला. इसके बाद मेरा गांव मेरा देश, अमर अकबर एंथनी, दयावान और कुर्बानी जैसी फिल्मों में बतौर एक्टर सिनेमा पर छा गए थे. फिल्मी करियर के दौरान उन्होंने सुनील दत्त, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन जैसे सुपरस्टार संग काम किया, लेकिन उनकी अपनी अलग पहचान थी. अमिताभ के साथ उनकी दो फिल्में मुकद्दर का सिकंदर और अमर अकबर एंथनी ने खूब धमाका किया था, जो आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्म बनी हुई है. 1980 तक आते-आते वह सबसे ज्यादा फीस चार्ज करने वाले एक्टर की लिस्ट में आ गये थे, लेकिन तभी उन्होंने फिल्मों से किनारा कर लिया.

विनोद खन्ना ने साल 1982 में आध्यात्मिक गुरु ओशो की शरण में चले गए और फिल्मों से किनारा कर लिया. यहां पांच साल तक शांति का पाठ पढ़ा और साल 1987 में फिल्म इंसाफ से बॉलीवुड में लौटे है. विनोद खन्ना ने वापसी करने के बाद भी दर्शकों को इंप्रेस किया. उनके अभिनय के चलते उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया. 27 अप्रैल 2017 में एक्टर का कैंसर से जंग लड़ते हुए निधन हो गया था. विनोद खन्ना को आखिरी बार फिल्म ‘गन्स ऑफ बनारस’ (2020) देखा गया था. बता दें, विनोद खन्ना के दो बेटे राहुल और अक्षय खन्ना आज तक कुंवारे हैं.

कड़े स्ट्रगल के बाद इस फिल्म से चला था विनोद खन्ना का जादू

दिवंगत एक्टर विनोद खन्ना केवल फिल्मी जगत में ही नहीं बल्कि राजनीतिक जगत में भी अपना सिक्का चमका चुके थे. शानदार एक्टर भले ही अब इस दूनिया में नहीं हैं मगर उनकी शानदार एक्टिंग के रुप में उनकी फिल्में आज भी उनके चाहने वालों के बीच जिंदा है. ऐसे में आज उनके बर्थ एनिवर्सरी पर हम लेकर आए हैं उनके विषय में रोचक बातें.

पेशावर में 6 अक्टूबर 1946 को जन्में एक्टर का इनका लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित रहने की वजह से 27 अप्रैल 2017 को मुम्बई के एचएन रिलायंस अस्पताल में निधन हो गया था. उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1968 में आई फिल्म ‘मन का मीत’ से की थी, जिसमें उन्होंने एक खलनायक का किरदार निभाया था. शानदार और डैशिंग एक्टर ने कई फ़िल्मों में उल्लेखनीय सहायक और खलनायक का किरदार निभाने के बाद 1971 में पहली लीड हीरो वाली फ़िल्म ‘हम तुम और वो’ में नजर आए थे. ‘मेरे अपने’, ‘हेरा-फेरी’, ‘खून-पसीना’, ‘मुक़द्दर का सिकंदर’, ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ समेत कई फिल्मों में शानदार एक्टिंग की है.

विनोद खन्ना का फिल्मी सफर शानदार रहा और वह जिस भी एक्ट्रेस के साथ फिल्मी पर्दे पर उतरते थे, उस जोड़ी को हिट बना देते थे. अपने जमाने की शबाना आजमी हों या उनसे आगे के जमाने की एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित सभी के साथ वह पर्दे पर हिट रहे. उन्होंने कुछ वर्ष के लिए फ़िल्म जगत से संन्यास ले लिया और आचार्य रजनीश के अनुयायी बन गए थे. इसके बाद उन्होंने अपनी दूसरी फ़िल्मी पारी भी सफलतापूर्वक खेली और 2017 तक फ़िल्मों में सक्रिय रहे.

यही नहीं, वह राजनीतिक जगत में भी एक्टिव थे. वर्ष 1997 और 1999 में वह दो बार पंजाब के गुरदासपुर से भाजपा की ओर से सांसद चुने गए थे, 2002 में वह संस्कृति और पर्यटन के केन्द्रिय मंत्री भी रहे, इसके बाद सिर्फ 6 माह के बाद ही उनको अति महत्वपूर्ण विदेश मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बना दिया गया था. 1999 में उनको फिल्मफेयर के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था. 2018 में उन्हें मरणोपरांत भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

Ramswaroop Mantri

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