अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*पेंट बाजार में अब एशियन पेंट्स की मोनोपाली खत्म*

Share

नई दिल्ली । भारत के रंग-बिरंगे पेंट बाजार में अब एशियन पेंट्स का नीला रंग फीका पड़ने लगा है। कभी 90% हिस्सेदारी के साथ ‘पेंट की बादशाह’ कही जाने वाली यह कंपनी अब 52% पर सिमट गई है। तीन सालों में 17% शेयर वैल्यू गिरने के बाद कंपनी की दीवारों पर अब “दरारें” साफ दिखने लगी हैं।

जहाँ पहले एशियन पेंट्स का मतलब ही पेंट होता था, वहीं अब बाजार में कई नए रंग चढ़ चुके हैं और हर रंग के पीछे एक नया खिलाड़ी खड़ा है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, एशियन पेंट्स के ताज को चुनौती देने में सबसे आगे है बर्जर पेंट्स, जिसने 18% हिस्सेदारी के साथ खुद को दूसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित कर लिया है। कंसाई नेरोलैक पेंट्स 15% बाजार पर कब्जा जमाकर जापानी गुणवत्ता के साथ मजबूती से खड़ी है। वहीं, ग्रासिम इंडस्ट्रीज के तहत लॉन्च हुआ बिरला ओपस पेंट्स ने तो कुछ ही महीनों में धमाल मचा दिया है।

7% बाजार हिस्सेदारी हासिल कर उसने साबित कर दिया कि “ओपस” अब सिर्फ नाम नहीं, बल्कि एशियन पेंट्स के लिए एक “ओपसिट खतरा” है। बाजार में प्रतिस्पर्धा अब इतनी बढ़ गई है कि उपभोक्ताओं के पास पहले से कहीं अधिक विकल्प हैं।

अक्ज़ो नोबेल (डुलक्स) जैसे वैश्विक खिलाड़ी 7% हिस्सेदारी के साथ प्रीमियम सेगमेंट में मजबूती से डटे हैं। वहीं इंडिगो, शालीमार, निप्पॉन, ब्रिटिश पेंट्स जैसे ब्रांड्स किफायती विकल्पों के साथ तेजी से पैर पसार रहे हैं। अब यह साफ है कि भारत का पेंट बाजार “मोनोपोली” से निकलकर “मल्टीकलर कॉम्पिटिशन” में बदल चुका है। एशियन पेंट्स को न केवल बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि कंपनी की छवि पर कानूनी विवादों और खराब तिमाही प्रदर्शन ने भी असर डाला है।

वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ तिमाहियों में मुनाफा घटने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। बिरला ओपस ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया है। बिड़ला समूह ने इस ब्रांड में करीब 10,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। बताया जा रहा है कि ओपस की कीमत एशियन पेंट्स से 7% सस्ती है, जबकि सामग्री की मात्रा 10% अधिक है। यानी उपभोक्ताओं को “कम दाम में ज़्यादा रंग” मिल रहा है, और यही बात बाजार में उसके लिए सबसे बड़ी पूंजी साबित हो रही है। बाजार विशेषज्ञ के मुताबिक आने वाले वर्षों में यह प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र होगी।

एशियन पेंट्स को अपनी रणनीति, उत्पाद गुणवत्ता और मूल्य निर्धारण पर फिर से काम करना होगा, नहीं तो “90% का युग” अब बीती कहानी बन जाएगा। संक्षेप में कहें तो “अब दीवारों पर सिर्फ एशियन का नहीं, बिरला और बर्जर का भी रंग चढ़ने लगा है।” मोनोपोली की दीवार दरक चुकी है, और अब हर कंपनी अपनी “ब्रश स्ट्रोक” से भारतीय बाजार को रंगने की होड़ में है।

भारतीय पेंट बाजार का परिदृश्य- एशियन पेंट्स: 52% (पहले 90%), चुनौती: बिरला ओपस और बर्जर पेंट्स बर्जर पेंट्स: 18%, चुनौती: शीर्ष स्थान की दौड़ कंसाई नेरोलैक: 15%, जापानी तकनीक से मजबूती बिरला ओपस (ग्रासिम): 7%, तेजी से उभरता ब्रांड अक्ज़ो नोबेल (डुलक्स): 7%, प्रीमियम सेगमेंट की पहचान अन्य ब्रांड्स: 1%, लेकिन तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें